नेपाल चुनाव: बालेन शाह झापा-5 सीट पर क्या ओली को हरा पाएंगे?- ग्राउंड रिपोर्ट

नेपाल चुनाव
इमेज कैप्शन, बालेन शाह के समर्थकों ने झापा-5 में चुनावी कैंपेन की कमान संभाल रखी है
    • Author, रजनीश कुमार
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, झापा नेपाल से
  • पढ़ने का समय: 8 मिनट

नेपाल के झापा-5 संसदीय क्षेत्र का दमक शहर.

इस शहर में दस्तक देते ही तनिक भी अहसास नहीं होता है कि नेपाल में पाँच मार्च को राष्ट्रीय चुनाव के लिए मतदान हैं.

न कहीं पोस्टर, न बैनर और न ही होर्डिंग्स. सड़कों पर बहुत शोर भी नहीं है. शहर के किसी भी नुक्कड़ पर चुनाव को लेकर बहस नहीं.

यह तस्वीर उस संसदीय क्षेत्र की है, जो नेपाल की सबसे हॉट सीट बनी हुई है. यहाँ से काठमांडू के चर्चित मेयर रहे बालेन शाह और नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री खड़ग प्रसाद शर्मा ओली आमने-सामने हैं.

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी) के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली झापा-5 संसदीय क्षेत्र से छह बार सांसद रहे.

अगर 2008 के चुनाव को छोड़ दें तो ओली इस सीट से 1991 से लगातार चुनाव जीतते रहे हैं.

लेकिन पिछले साल सितंबर महीने के जेन ज़ी आंदोलन और बालेन शाह के उम्मीदवार बनने से ओली को यहाँ कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

केपी शर्मा ओली
इमेज कैप्शन, 27 फ़रवरी को नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री झापा-5 के उम्मीदवार केपी शर्मा ओली विद्यार्थियों से संवाद करते हुए

झापा-5 तक ही सिमटे ओली

दोपहर के दो बज रहे हैं. दमक शहर के बीच से नौजवानों का एक काफ़िला गुज़र रहा है. अबकी बार, बालेन सरकार का नारा लग रहा है.

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यह नारा सुनते ही 2014 में बीजेपी के कैंपेन का नारा बरबस ही याद आ जाता है.

जिस सड़क से नौजवानों का यह काफ़िला गुज़र रहा था, उसी के किनारे 60 साल के तिलक केसी के समोसे की दुकान है.

तिलक नौजवानों को काफ़िले को बहुत ध्यान से देख रहे हैं. उनसे हमने पूछा कि इस चुनाव में क्या होने जा रहा है? तिलक कहते हैं- बालेन ही जीतेगा.

तिलक केसी कहते हैं, ''मैं पिछले कई चुनावों से ओली को वोट करता रहूँ. लेकिन इस बार नहीं करूँगा. ऐसा नहीं है कि ओली ने काम नहीं किया है. झापा में ओली ने विकास के काफ़ी काम किए हैं. वह झापा के अभिभावक की तरह रहे हैं लेकिन पिछले साल उन्होंने बच्चों पर गोलियाँ चलवाईं. ये ठीक नहीं था. इस बार अब बालेन को मौक़ा मिलेगा.''

दमक के गुंबा चौक में चंद्रमा डेयरी की दुकान पर बैठे 37 साल के विनोद काफ्ले कहते हैं कि झापा-5 में लड़ाई एकतरफ़ा नहीं है.

काफ्ले कहते हैं, ''झापा-5 के लोग बदलाव चाह रहे हैं लेकिन शहर में आप जितनी सड़कें देख रहे हैं, सब केपी ओली ने बनवाई हैं. आसपास के सारे गाँवों को केपी ओली ने ही पक्की सड़कों से जोड़ा है. केपी ओली पर काम के मामले में आप सवाल नहीं उठा सकते हैं. उनका संगठन भी बहुत मज़बूत है. लेकिन कई बार प्यार अंधा होता है. इसके बावजूद मेरा मानना है कि हार-जीत का अंतर बहुत ज़्यादा नहीं रहेगा.''

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इमेज कैप्शन, जेन ज़ी आंदोलन के दौरान दमक में भी ओली के घर को आग के हवाले कर दिया गया था, यह घर आज भी उसी हालत में है

ओली झापा-5 से केवल एक बार चुनाव हारे

2008 के चुनाव में ओली को झापा-5 से हरा चुके प्रचंड की पार्टी के उम्मीदवार विश्वदीप लिंगदेन कहते हैं कि निश्चित तौर पर केपी ओली हारने जा रहे हैं. विश्वदीप लिंगदेन अभी नेपाली कांग्रेस के नेता हैं.

वह कहते हैं, ''जब मैंने उनको 2008 में हराया तब भी उनके पास कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं था और इस बार तो उनसे लोग नफ़रत कर रहे हैं. बालेन शाह को मेयर के तौर पर केपी ओली ने ही काम नहीं करने दिया. इसमें कोई शक नहीं है कि बालेन शाह युवाओं के बीच काफ़ी लोकप्रिय हैं.''

एक स्थानीय पत्रकार ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि बालेन शाह जब नामांकन भरने आए थे, तब उनकी लोकप्रियता बहुत ज़्यादा थी लेकिन चुनाव क़रीब आते-आते कुछ विवाद उनके साथ जुड़ गए.

वह कहते हैं, ''बालेन जब नामांकन के लिए आए थे तो नेपाल के एक व्यापारी ने उन्हें महंगी गाड़ी दी थी और वे उसी गाड़ी से यहाँ आए थे. ऐसे में सवाल उठने लगा कि बालेन ऐसे व्यापारियों के लिए काम करेंगे या आम लोगों के लिए? इस विवाद के बाद उन्होंने उस गाड़ी से चलना बंद किया. इसके बाद सुदूर पश्चिम की एक रैली में बालेन ने कहा कि जो कॉन्ट्रैक्टर समय पर सड़क नहीं बनाएगा, उसे पेड़ में लटका देंगे.''

''अब सवाल उठना लाजिमी था कि क्या बालेन शाह की कार्यशैली ऐसी होगी? बालेन शाह मीडिया के किसी सवाल का सामना नहीं करते हैं. संभव है कि उनकी यह चुनावी रणनीति हो लेकिन मुझे लगता है कि सवालों के जवाब देन में वे फँस जाएँगे. इन सबके बावजूद मेरा मानना है कि अभी की लड़ाई में वह सबसे आगे चल रहे हैं.''

झापा-5 में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के स्थानीय सभापति भेषराज भट्टराई कहते हैं कि बालेन शाह जनता के प्रति ज़िम्मेदार हैं न कि मीडिया के प्रति.

भट्टराई कहते हैं, "किसने कितनी महंगी गाड़ी से नामांकन किया, इस पर मुझे बात नहीं करनी है. जनता ने बालेन को पसंद कर लिया है. जिसको विवाद देखना है, वो देखते रहे.''

केपी शर्मा ओली नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी) के अध्यक्ष हैं.

इस पार्टी के उम्मीदवार पूरे नेपाल में चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन ओली ने झापा-5 के बाहर किसी जनसभा को संबोधित नहीं किया है.

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इमेज कैप्शन, इस बार के नेपाल चुनाव में किसी भी बड़ी पार्टियों के बीच गठबंधन नहीं हुआ है

ओली का चुनाव प्रचार झापा में केंद्रित

चिरंजीवी घिमिरे नेपाली भाषा के अख़बार नया पत्रिका के झापा में रिपोर्टर हैं.

घिमिरे कहते हैं, ''2026 के चुनाव से पहले ओली झापा-5 में सबसे कम समय देते थे. ओली कहते थे कि झापा में प्रचार की ज़रूरत नहीं है. लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल उलट है. ओली झापा-5 के अलावा कहीं कैंपेन नहीं कर रहे हैं दूसरी तरफ़ बालेन शाह झापा-5 के अलावा हर जगह कैंपेन कर रहे हैं.''

रोहित कहते हैं कि इस बार नेपाल के चुनावी मैदान में तीन प्रधानमंत्री हैं- माधव कुमार नेपाल, प्रचंड और केपी शर्मा ओली. लेकिन जीत के आसार केवल प्रचंड के हैं.

नेपाली अख़बार कांतीपुर के वरिष्ठ पत्रकार राजेश मिश्र कहते हैं, ''प्रचंड जिस रुकुम ईस्ट सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, वहाँ कुल 34 हज़ार मतदाता हैं और मुश्किल से 25 हज़ार लोग वोट डालते हैं. इनमें से सात से आठ हज़ार प्रचंड के कार्यकर्ता ही हैं. ऐसे में उनके सारे कार्यकर्ता भी उन्हें वोट कर देंगे तो चुनाव जीत जाएंगे.''

इसके बावजूद प्रचंड इस बार अपने संसदीय क्षेत्र रुकुम ईस्ट से बाहर कैंपेन नहीं कर रहे हैं. रोहित कुमार उप्रेती झापा-5 में ओली के चुनाव प्रचार का प्रबंधन देख रहे हैं.

उप्रेती कहते हैं, ''जीत हमारी होगी. हम यहाँ के स्थानीय हैं. बालेन यहाँ के नहीं हैं.''

उप्रेती कहते हैं, ''ओली सातवीं बार यहाँ से चुनाव जीतेंगे और बालेन शाह का माहौल सोशल मीडिया तक ही सीमित रहेगा. अगर झापा से बाहर के उम्मीदवारों को ओली की ज़रूरत होगी तो ज़रूर जाएँगे.''

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इमेज कैप्शन, झापा-5 से प्रचंड की पार्टी के उम्मीदवार रंजित तामंग की बेटी आकृति (बाएं) और उनकी बहन

झापा-5 ओली का गढ़

झापा-5 में क़रीब एक लाख 63 हज़ार वोटर्स हैं. 2022 के चुनाव में ओली को कुल 52,319 वोट मिल थे.

उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी नेपाली कांग्रेस के खगेन्द्र अधिकारी को 23,743 वोट मिले थे. उस समय राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार को 11,748 वोट मिले थे.

2022 के आम चुनाव में यूएमएल को राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) का समर्थन मिला था, जिसके बदले में झापा-3 में आरपीपी अध्यक्ष राजेन्द्र लिंगदेन के लिए ओली की पार्टी ने समर्थन दिया था.

2017 के आम चुनाव में ओली ने प्रचंड की तत्कालीन पार्टी सीपीएन (माओवादी केन्द्र) के चुनावी गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था.

इससे वामपंथी वोटों का एकीकरण हुआ था. अब चुनावी मैदान अधिक बिखरा हुआ है. प्रचंड ने यहाँ रंजित तामंग के अपना उम्मीदवार बनाया है.

आए दिन ऐसी रिपोर्ट्स आती रही हैं कि प्रचंड इस सीट पर ओली को समर्थन दे देंगे लेकिन रंजित तमांग इस बात को ख़ारिज करते हैं.

रंजित तमांग कहते हैं, ''ऐसी अफ़वाहें बता रही हैं कि ओली इस बार किस हद तक घबराए हुए हैं. मेरे पार्टी अध्यक्ष प्रचंड का साफ़ संदेश है कि मज़बूती से चुनाव लड़ना है.''

आरपीपी यानी राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी को राजावादी पार्टी के रूप में देखा जाता है. आरपीपी नेपाल में राजा की वापसी की बात करती है. इसके बावजूद पिछले चुनाव में ओली ने झापा में इस पार्टी से गठबंधन किया था.

आरपीपी ने इस बार मार्बल व्यवसायी लक्ष्मी संग्रौला को अपना उम्मीदवार बनाया है. ऐसे में ओली अपने वोट बैंक पर ही भरोसा कर सकते हैं.

लेकिन बालेन शाह के मैदान में आने के बाद समीकरण उलझे हुए दिख रहे हैं.

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इमेज कैप्शन, झापा-5 से नेपाली कांग्रेस की उम्मीदवार मन्धरा चिमरिया (बीच में)

ओली की मुश्किलें

ओली शायद इस ख़तरे को पहचानते हैं और उन्होंने झापा पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है.

ओली मतदाओं के घर-घर जा रहे हैं. पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं और सीधे संवाद को प्राथमिकता दे रहे हैं.

झापा-5 में 44 प्रतिशत ग़ैर-ब्राह्मण/क्षेत्री आबादी है, जिसमें लगभग 26 प्रतिशत जनजाति शामिल हैं.

ओली ने 1991, 1994, 1999, 2013, 2017 और 2022 में झापा का संघीय संसद में प्रतिनिधित्व किया है. ऐसे में इस इलाक़े में उनकी पैठ तो रही है लेकिन चुनावी हवा में कई बार अतीत के पैटर्न काम नहीं आते हैं.

दमक के मल्टिपल कॉलेज में राजनीति विज्ञान के अध्यापक प्रोफ़ेसर धनंजय सापकोटा कहते हैं कि नेपाल में लोकतंत्र आने के बाद सत्ता में साझेदारी ओली के अलावा प्रचंड और नेपाली कांग्रेस की भी रही लेकिन जेन ज़ी आंदोलन के बाद सारी जवाबदेही ओली के माथे आ गई है.

धनंजय सापकोटा कहते हैं, ''इसका ख़ामियाजा ओली को भुगतना पड़ सकता है. बालेन शाह को लोग समाधान के रूप में देख रहे हैं लेकिन उन नौजवानों से तर्क कीजिए कि कैसे समाधान दे सकते हैं तो उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं है. मुझे लगता है कि नेपाल में राजशाही ख़त्म होने का हैंगओवर उतर गया है. यह चुनाव नेपाल के लिए ऐतिहासिक होगा.''

बालेन शाह मधेशी माता-पिता के बेटे हैं. अगर वह प्रधानमंत्री बनते हैं तो नेपाल के पहले मधेशी मूल के व्यक्ति होंगे.

हालाँकि बालेन शाह ने मधेशी पहचान को कभी उभारा नहीं लेकिन इस चुनाव में जनकपुर की एक रैली में इसका ज़िक्र किया था.

विजयकांत कर्ण डेनमार्क में नेपाल के राजदूत रहे हैं. वह काठमांडू में 'सेंटर फ़ॉर सोशल इन्क्लूजन एंड फ़ेडरलिज़म' (सीईआईएसएफ़) नाम से एक थिंकटैंक चलाते हैं.

कर्ण कहते हैं, ''नेपाल के सबसे बड़े नेता बीपी कोईराला हुए लेकिन उनके पास भी इतनी क्षमता नहीं हुई कि किसी मधेशी को पहाड़ी इलाक़े में चुनाव लड़ाकर जिता दें. इस बार बालेन शाह ऐसा करने में सफल होते दिख रहे हैं. झापा में पहाड़ी वोटर हैं और वहाँ बालेन शाह ने ओली को कड़ी चुनौती दी है.''

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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