शेख़ हसीना ने संसद में मुस्लिम देशों का हवाला देकर अमेरिका पर जमकर हमला बोला

शेख़ हसीना

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना सोमवार को संसद में अमेरिका के ख़िलाफ़ जमकर बोलीं

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने अमेरिका पर जम कर वार किया है.

शेख़ हसीना ने अमेरिका का सीधे तौर पर नाम लिए बिना कहा कि वे चाहें तो किसी भी देश की सत्ता पलट सकते हैं.

देश की संसद में उन्होंने अमेरिका पर हमला करने से पहले बांग्ला दैनिक 'प्रोथोम आलो' को आड़े हाथों लिया.

उन्होंने कहा कि 'प्रोथोम आलो' उनकी पार्टी अवामी लीग, लोकतंत्र और बांग्लादेश के लोगों का दुश्मन है.

बांग्लादेश की संसद के 50वें वर्ष पर आयोजित सत्र में पेश एक प्रस्ताव पर बहस के दौरान शेख हसीना ने अलग-अलग देशों पर अमेरिकी रुख़ का ज़िक्र करते हुए कहा, ''आज भी मैं यह कहती हूँ कि यह देश अपनी बातों से हमें लोकतंत्र का झांसा देता रहता है. इस पर हमारी विपक्षी पार्टी और कुछ लोग तालियां बजाते हैं, नाचते हैं.''

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री ने कहा, ''वे किसी भी देश की सत्ता को पलट सकते हैं. ख़ास कर मुस्लिम देशों की. जब तक उनका इस्लामी देशों पर नियंत्रण था, सब ठीक था. हालांकि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पूरी दुनिया आर्थिक मंदी की चपेट में है. यही वास्तविकता है.''

शेख़ हसीना ने ये आरोप ऐसे वक़्त में लगाए हैं, जब बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ. अब्दुल मोमिन अमेरिका के दौरे पर हैं.

अमेरिकी विदेश मंत्री ने एंटनी ब्लिंकन ने डॉ. मोमिन से मुलाक़ात के दौरान कहा कि अमेरिका बांग्लादेश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव होते देखना चाहता है. उनका कहना था कि पूरी दुनिया बांग्लादेश में होने वाले अगले राष्ट्रीय चुनाव पर नज़र रख रही है.

बांग्लादेश

इमेज स्रोत, Getty Images

'बंगबंधु के हत्यारे को अमेरिका ने पनाह दी है'

दरअसल पिछले कुछ वक़्त से अमेरिका और बांग्लादेश के रिश्ते तल्ख़ दिख रहे हैं. अमेरिका रोहिंग्या मुसलमानों के मानवाधिकार के सवाल पर बांग्लादेश की आलोचना कर चुका है.

हालांकि ब्लिंकन ने बांग्लादेश के विदेश मंत्री से मुलाक़ात के दौरान कहा कि उनका देश 11 लाख रोहिंग्या के प्रति बांग्लादेश की उदारता का प्रशंसक है.

इस साल फ़रवरी में अमेरिका ने बांग्लादेश को डेमोक्रेसी समिट में नहीं बुलाया था. इसमें दक्षिण एशिया से भारत, मालदीव, नेपाल और पाकिस्तान को बुलाया गया था.

संसद में अमेरिका पर हमला करते हुए शेख़ हसीना ने कहा, ''कुछ दिनों पहले टेनिसी के तीन सांसदों ने गन कंट्रोल के लिए आवेदन दिया था. उन्होंने बंदूक से मार डाले गए तीन बच्चों की हत्या के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया था. लेकिन ये उनका अपराध था.''

''इसके लिए संसद से जस्टिस जॉन और जस्टिस पियर्सन को बर्खास्त कर दिया गया. एक सांसद बच गया क्योंकि वह गोरा था.''

उन्होंने कहा, ''अमेरिका में हर दिन लोगों को स्कूलों में घुसकर बच्चों और शिक्षकों को गोलियों से भूनते देखा जा सकता है. वे शॉपिंग मॉल, क्लब में घुस जाते हैं और गोलियां चलाने लगते हैं.''

शेख़ हसीना ने कहा, ''15 अगस्त के नरसंहार का गुनहगार रशीद (रशीद चौधरी) ने अमेरिका में पनाह ले रखी है. मैंने वहां के सभी निर्वाचित राष्ट्रपतियों से अपील की और क़ानूनी क़दम भी उठाए ताकि उसे बांग्लादेश लाया जा सके. इसके बावजूद अमेरिका ऐसे अपराधियों को पनाह दिए हुए है.''

रशीद चौधरी शेख़ हसीना के पिता बंगबंधु शेख़ मुजीब-उर रहमान के खिल़ाफ़ सैनिक विद्रोह का नेतृत्व कर रहे थे. उन पर शेख़ मुजीब की हत्या का आरोप है.

हसीना ने अमेरिका को भ्रष्टाचार के सवाल पर भी घेरा. उन्होंने कहा वे भ्रष्टाचार की बात करते हैं लेकिन भ्रष्टाचार में पकड़े गए लोगों की ओर से बोलते हैं.

बांग्लादेश

इमेज स्रोत, Getty Images

बांग्लादेश के अख़बार को देश का दुश्मन बताया

शेख़ हसीना ने संसद में बांग्लादेश के दैनिक अख़बार प्रोथोम आलो की आलोचना करते हुए कहा कि ये अख़बार अवामी लीग, लोकतंत्र और बांग्लादेश के लोगों का दुश्मन है.

उन्होंने कहा कि जो लोग भष्ट्राचार के ख़िलाफ़ बात करते हैं, वे अब भ्रष्टाचार के दोषियों का समर्थन कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, ''एक सात साल के बच्चे को दस टाका देकर झूठ बोलने के लिए उकसाया गया. वो भी इस तरह के बयान देने के लिए कि सबको मीट और चावल मिल सके इसके लिए हमें आज़ादी चाहिए.''

शेख़ हसीना ने कहा, ''उन्होंने उसके बयान को छापा. ये सब एक लोकप्रिय दैनिक ने किया. नाम है प्रोथोम आलो (पहली रौशनी) लेकिन उन्होंने अंधेरे में ये काम किया.''

शेख़ हसीना ने जब प्रोथोम आलो को देश का दुश्मन कहा तो संसद सदस्यों ने मेजें थपथपा कर इसका स्वागत किया.

शेख हसीना ने कहा, ''मैं ये भरे दिल से कहना चाहती हूं कि वे कभी भी देश में स्थिरता नहीं चाहते थे. जब देश में 2007 में इमर्जेंसी लगी तो उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था. उस वक़्त देश को दो अख़बारों ने अपना मक़सद हासिल करने के लिए कमर कस ली थी.''

शेख़ हसीना

इमेज स्रोत, Getty Images

पिछले दिनों प्रथम आलो के एक पत्रकार को झूठी ख़बर प्रकाशित करने के आरोप में जेल भेज दिया गया था. पत्रकार ने देश में बढ़ी हुई खाद्य क़ीमतों को लेकर रिपोर्ट की थी जो बाद में वायरल हो गई.

उनकी न्यूज़ रिपोर्ट देश के स्वतंत्रता दिवस के दिन यानी 26 मार्च को प्रकाशित हुई थी. उन पर कथित तौर पर सरकार को बदनाम करने का आरोप लगा.

जिस रिपोर्ट के लिए शम्स को हिरासत में लिया गया था, उस रिपोर्ट में सामान्य बांग्लादेशी लोग स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर अपने जीवन के बारे में बात कर रहे थे.

रिपोर्ट में एक मज़दूर की बात को लिखा गया था, जिन्होंने कहा था, "इस आज़ादी का क्या मतलब है, अगर हम चावल तक भी नहीं ख़रीद सकते?"

मज़दूर की इस टिप्पणी ने बताया कि बढ़ती महंगाई के बीच खाने पीने की चीज़ों को ख़रीदना कितना मुश्किल है.

बांग्लादेश

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, प्रोथोम आलो के पत्रकार को गिरफ़्तार कर ले जाती पुलिस

नोबेल विजेता मोहम्मद युनूस की संपत्ति पर खड़े किए सवाल

उन्होंने ग्रामीण बैंक के संस्थापक और नोबेल से सम्मानित मोहम्मद यूनुस पर हमला करते हुए कहा, ''उनका साथ एक ऐसे शख़्स ने दिया जिसने सूदखोरी से अपना कारोबार खड़ा किया. वो व्यक्ति अमेरिका का प्रिय है.''

उन्होंने कहा, अमेरिका ने कभी ये सवाल नहीं उठाया कि ग्रामीण बैंक के एमडी जो एक रजिस्टर्ड सामाजिक कारोबारी संगठन के प्रमुख हैं ने कैसे लाखों डॉलर इकट्ठा कर लिए. कभी उन्होंने उस व्यक्ति के देश और विदेश में इकट्ठा धन के स्रोत के बारे में पूछा.''

बांग्लादेश

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, बांग्लादेश ग्रामीण बैंक के संस्थापक मोहम्मद यूनुस

'लोकतंत्र बांग्लादेश के ख़ून में'

एक तरफ़ शेख़ हसीना बांग्लादेश की संसद में अमेरिका पर हमला बोल रही थीं तो दूसरी ओर अमेरिका बांग्लादेश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की बात कर रहा था.

अमेरिकी विदेश मंत्री ने वॉशिंगटन में बांग्लादेश के विदेश मंत्री अब्दुल मोमिन से मुलाक़ात के दौरान कहा कि अमेरिका चाहता है कि बांग्लादेश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव हो. पूरी दुनिया की नज़र बांग्लादेश में होने वाले चुनाव पर है.

एंटनी की इस टिप्पणी पर बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने बाद में मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनका देश भी चाहता है कि देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और आदर्श चुनाव हो.

उन्होंने कहा, ''लोकतंत्र हमारे ख़ून में है. हमारे देश में लोगों ने लोकतंत्र, न्याय और मानव गरिमा के लिए अपना ख़ून बहाया है.''

उन्होंने देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए अमेरिका से मदद भी मांगी.

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश अमेरिकी पर्यवेक्षकों को स्वागत करेगा लेकिन वो पक्षपाती पर्यवेक्षकों का स्वागत नहीं करेगा.

बांग्लादेश

इमेज स्रोत, Getty Images

बांग्लादेश और अमेरिका के रिश्तों में तल्खी

2023 के डेमोक्रेसी सम्मेलन में बांग्लादेश को शामिल नहीं करने से पहले 2021 में भी उसने उसे इससे दूर रखा था. उसके विशेष बलों ने मानवाधिकार दिवस (10 दिसंबर) के दिन बांग्लादेश के रैपिड एक्शन बटालियान (RAB) और कई अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिया.

इसके अलावा, छह साल पहले बांग्लादेश के लेखक अभिजीत रॉय को मारने वाले भगोड़े हत्यारों को पकड़ने के लिए सूचना देने वालों को 50 लाख डॉलर (क़रीब 37 करोड़ रुपये) का इनाम देने का एलान भी था.

इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय मामलों की जानकार प्रोफ़ेसर रुख़साना किबरिया ने बीबीसी से कहा था, "दोनों देशों के रिश्तों ने जटिल मोड़ ले लिया है. अमेरिका एक महाशक्ति है, इसलिए जब यह मामला सामने आया तो सरकार बहुत कुछ कर रही है. ज़ाहिर है, अमेरिकी सरकार बांग्लादेश से कई मसलों पर काफ़ी नाराज़ है."

वो कहती हैं कि अमेरिका के उठाए गए क़दम काफ़ी अहम और फ़ैसले राजनीतिक हैं.

किबरिया बताती हैं, "बाइडन प्रशासन के ताज़ा फ़ैसले को देखकर हम कह सकते हैं कि उसकी नीति साफ़ तौर पर बदल रही है. हम देख रहे हैं कि अमेरिका बांग्लादेश में हो रही कई चीज़ों से नाख़ुश है."

बांग्लादेश

इमेज स्रोत, Getty Images

अमेरिका की इलिनोइस स्टेट यूनिवर्सिटी में 'शासन और राजनीति' के जाने-माने प्रोफ़ेसर अली रियाज़ ने बीबीसी बांग्ला से कहा था, ''मेरा मानना है कि बाइडन प्रशासन ने विदेश नीति के केंद्र में मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों को रखा है. हालांकि, इस नीति का इस्तेमाल राष्ट्रीय हित और सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से किया जा रहा है.

वो कहते हैं, "बाइडन प्रशासन का कहना है कि वह मानवाधिकारों के लोकतांत्रिक मूल्यों को महत्व देता रहेगा. अमेरिका को विदेश नीति के कुछ मसलों से समस्या है. अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय हित उसकी रणनीति है. अमेरिका दो चीज़ें करने की कोशिश कर रहा है- पहला, मानवाधिकार या लोकतंत्र का सवाल है और दूसरा बाइडन प्रशासन शुरू से ही एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर फ़ोकस बनाए हुए है."

डॉ. रियाज़ ने कहा था, "इस तरह वो चीन को प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बनने और चीन के बढ़ रहे प्रभाव क्षेत्र को रोकने की कोशिश कर रहा है. इसी वजह से अमेरिका कई देशों की सरकारों पर अपना दबाव बना रहा है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)