लाखों करोड़ गंवा चुके गौतम अदानी पर बांग्लादेश में क्यों उठ रहा है तूफ़ान: प्रेस रिव्यू

गौतम अदानी, नरेंद्र मोदी

इमेज स्रोत, Hindustan Times

इमेज कैप्शन, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ व्यवसायी गौतम अदानी

भारत के अरबपति कारोबारी गौतम अदानी के लिए बांग्लादेश में समस्याएं खड़ी होती नज़र आ रही हैं.

अंग्रेजी अख़बार द टेलीग्राफ़ में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, बांग्लादेश में विपक्षी दलों और सिविल सोसायटी ने अदानी समूह के साथ ऊर्जा क्षेत्र में किए गए क़रार पर सवाल उठाए हैं.

साल 2017 के नवंबर महीने में बांग्लादेश सरकार ने अदानी समूह के साथ 1.7 अरब डॉलर का क़रार किया था जिसके तहत झारखंड के गोड्डा में एक 1600 मेगावाट का कोयला आधारित पावर प्लांट लगाया जाना था. और इस प्लांट से पैदा हुई बिजली को 25 सालों तक बांग्लादेश को बेचा जाना था.

लेकिन पिछले कुछ हफ़्तों में बांग्लादेश में इस समझौते को लेकर तमाम आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं. इनमें इस समझौते को भारत-बांग्लादेश के द्विपक्षीय रिश्तों के लिए जोख़िमपूर्ण बताया जाना शामिल है.

गौतम अदानी का संकट जारी

गौतम अदानी के नेतृत्व वाला अदानी समूह पिछले एक महीने से एक गंभीर आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है.

इस समूह की ज़्यादातर कंपनियों के शेयर मूल्यों में गिरावट का सिलसिला 24 जनवरी के बाद से जारी है.

अमेरिका की एक फ़ॉरेंसिक फाइनेंशियल कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च ने बीते 24 जनवरी को अदानी समूह की कंपनियों पर वित्तीय अनियमितताएं बरतने के आरोप लगाए थे.

इसके बाद इस समूह से जुड़ी कंपनियों के शेयर मूल्यों में तेज़ी से गिरावट आने का दौर शुरू हुआ था जो अब तक जारी है.

अदानी के शेयर

इमेज स्रोत, Anant Prakash

मंगलवार को अदानी समूह की कंपनियों को कुछ राहत ज़रूर मिली है. लेकिन पिछले चार-पांच हफ़्तों में अदानी समूह की बाज़ार पूंजी को 150 अरब डॉलर का नुक़सान हुआ है.

इस वित्तीय संकट का असर गौतम अदानी की निजी संपत्ति पर भी पड़ा है.

ब्लूमबर्ग और फ़ोर्ब्स समूह की ओर से जारी की गई दुनिया की सबसे अमीर हस्तियों की सूची में गौतम अदानी कुछ हफ़्ते पहले तक तीसरे सबसे अमीर शख़्स थे.

लेकिन बीते कुछ हफ़्तों में वह दुनिया के तीसरे सबसे अमीर शख़्स के पायदान से फिसलकर तीसवें स्थान पर पहुंच गये हैं.

अदानी समूह से जुड़ी तस्वीर

इमेज स्रोत, Reuters

शेयर बाज़ार तक सीमित नहीं संकट

इस संकट का असर अदानी समूह की विस्तार योजनाओं पर भी पड़ता दिख रहा है. भारत ही नहीं एशिया के ऊर्जा सेक्टर में अदानी समूह की अदानी पावर के पैर पसारने की रफ़्तार धीमी पड़ती दिख रही है.

अदानी समूह पिछले दिनों में पावर सेक्टर की बड़ी कंपनी डीबी पावर और पीटीसी इंडिया को ख़रीदने में नाकाम रहा है.

इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने अदानी पावर को झटका देते हुए 25 हज़ार करोड़ रुपये का ठेका रद्द कर दिया है.

और कांग्रेस पार्टी की ओर से अदानी और उनके ज़रिए पीएम मोदी को घेरा जाना जारी है. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अपने हालिया बयान में एक बार फिर इस विवाद के केंद्र में बने हुए गौतम अदानी के भाई विनोद अदानी पर सवाल उठाया है.

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बयान में कहा है कि 'हमने पहले ही अदानी समूह की ओर से स्टॉक एक्सचेंज को दिए गए उस ज्ञापन के बारे में बताया था जिसमें विनोद अदानी का ज़िक्र था.'

छोड़िए X पोस्ट
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त

कांग्रेस के आरोप

कांग्रेस के मुताबिक़, इस दस्तावेज़ में लिखा था, "अदानी समूह का मतलब एस. बी. अदानी फ़ैमिली ट्रस्ट, अदानी प्रॉपर्टीज़ प्राइवेट लिमिटेड, अदानी ट्रेडलाइन एलएलपी, गौतम अदानी, राजेश अदानी, विनोद एस. अदानी..."

बीते सोमवार कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि ''हमें पता चला है 18 मार्च 2020 को अदानी समूह की ओर से अहमदाबाद में कंपनी रजिस्ट्रार को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि "कंपनी के प्रमोटर, श्री विनोद एस. अदानी ने लाभान्वितों जुड़े बदलावों की सूचना दी है.

इस पत्र पर अदानी एंटरप्राइजेज़ के कंपनी सचिव और संयुक्त अध्यक्ष (विधि) जतिन जालूंधवाला ने हस्ताक्षर किए थे जिससे स्पष्ट होता है कि अदानी समूह के मामलों में विनोद अदानी एक केंद्रीय भूमिका में हैं.''

कांग्रेस पार्टी ने सवाल उठाया है कि ''क्या इतने अकाट्य सबूत सामने आने के बाद भारत की जांच एजेंसियां विनोद अदानी की विदेशी शेल कंपनियों के ख़िलाफ़ राउंड-ट्रिपिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच करेंगी? या आप अपने क़रीबी दोस्त का बचाव करना जारी रखेंगे?''

बांग्लादेश के साथ ऊर्जा क्षेत्र में अदानी समूह के क़रार पर भी कांग्रेस पार्टी ने सवाल उठाते हुए बीती 14 फ़रवरी को कहा था कि क्या केंद्र सरकार ने अदानी समूह को फ़ायदा पहुंचाने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र से जुड़े नियमों में परिवर्तन किया.

कांग्रेस पार्टी ने अपने बयान में कहा था कि ''फ़रवरी 2018 में अदानी पावर ने कर में छूट का लाभ उठाने के लिए गोड्डा पावर प्लांट को एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईज़ेड) के अंतर्गत स्थापित करने के लिए आवेदन किया था.

लेकिन वाणिज्य मंत्रालय ने इस आवेदन को अस्वीकार कर दिया था क्योंकि यह उन दिशानिर्देशों का उल्‍लंघन करता था, जो विशेष आर्थिक क्षेत्र के अंदर एक अकेले बिजली संयंत्र की स्थापना को प्रतिबंधित करते थे.

फिर भी 9 जनवरी, 2019 को वाणिज्य मंत्रालय ने अपना दृष्टिकोण बदला और उन दिशानिर्देशों में संशोधन कर दिया. इसके तुरंत बाद, 25 फ़रवरी 2019 को, विशेष आर्थिक क्षेत्रों के प्रभारी अनुमोदन बोर्ड ने अदानी पावर के आवेदन को अपनी मंज़ूरी दे दी.

इस नीतिगत बदलाव में प्रधानमंत्री कार्यालय की क्या भूमिका थी, जिससे अदानी पावर को कोयले के आयात शुल्क के उन्मूलन से प्रति वर्ष 300 करोड़ रुपए का लाभ प्राप्‍त हुआ?''

अदानी समूह से जुड़ी तस्वीर

इमेज स्रोत, Reuters

बांग्लादेश में आपत्ति की वजह

भारतीय विपक्षी दलों की ओर से इन समझौतों पर सवाल उठाने के बाद बांग्लादेश में भी विरोध के स्वर मुखर हो रहे हैं.

ऊर्जा मामलों के जानकार शम्सुल आलम ने टेलीग्राफ़ से बातचीत में कहा है, "इस समझौते की वजह से दोनों देशों के बीच मित्रवत संबंध ख़राब हो सकते हैं. ज़्यादातर लोगों ने ये मानना शुरू कर दिया है कि अधिकारियों ने एक ख़राब डील स्वीकार की क्योंकि अदानी समूह के मालिक के भारतीय प्रधानमंत्री के साथ रिश्ते हैं. ये छवि बांग्लादेश में भारत को लेकर लोगों का नज़रिया बिगाड़ रहा है."

बीते मंगलवार बांग्लादेश के प्रतिष्ठित अख़बार द डेली स्टार में प्रकाशित एक विस्तृत रिपोर्ट में लिखा गया है कि 'ये समझौता बांग्लादेश के लिए काफ़ी महंगा है और अदानी को फ़ायदा पहुंचाने वाला है.

बांग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी बीएनपी के महासचिव मिर्ज़ा फ़ख़रुल इस्लाम आलमगीर ने टेलीग्राफ़ से बात करते हुए कहा है, "हम विशेषज्ञों से बात करके ये समझ रहे हैं कि आख़िर हो क्या रहा है...लेकिन इतना स्पष्ट है कि इस डील से अदानी को फ़ायदा होगा और हम अतिरिक्त पैसा दे रहे होंगे. हम इस ख़राब डील को स्वीकार करने के लिए अपनी सरकार को ज़िम्मेदार ठहराते हैं. वे अदानी के हितों की रक्षा करने के लिए ज़्यादा चिंतित थे."

इसके साथ ही बीएनपी ने कुछ दिनों के अंदर इस डील पर विस्तृत बयान देने और इसे रद्द कराने के लिए आंदोलन खड़ा करने का एलान किया है.

वहीं, अदानी समूह ने इस विवाद पर कहा है कि बांग्लादेश को इस डील के तहत सस्ती बिजली मिलेगी.

गुरमीत राम रहीम

इमेज स्रोत, DERASACHASAUDA.ORG

खट्टर सरकार बोली - कट्टर अपराधी नहीं है गुरमीत राम रहीम

हरियाणा सरकार ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में कहा है कि डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम हार्डकोर अपराधी नहीं हैं.

अंग्रेजी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, हाई कोर्ट में दाखिल एक याचिका में हरियाणा सरकार की ओर से गुरमीत राम रहीम को दी गई चालीस दिनों के परोल के फ़ैसले को चुनौती दी गयी थी.

खट्टर सरकार ने अपने फ़ैसले का बचाव करते हुए कहा है कि 'इन हत्याकांडों में उन्हें आपराधिक साजिश रचने के लिए कुछ अन्य लोगों के साथ दोषी क़रार दिया गया है.

उन्हें धारा 120-बी में दोषी ठहराए जाने की वजह से आईपीसी की धारा 302 में दोषी पाकर सज़ा दी गयी है. धारा 120-बी एक स्वतंत्र मामला है. इस धारा के तहत अभियोग स्वतंत्र रूप से लगाए जाते हैं.'

सरकार की ओर से पेश किए गए दूसरे तर्क में कहा गया है कि गुरमीत राम रहीम इनमें से किसी मामले में हमलावर नहीं थे.

अरविंद केजरीवाल

इमेज स्रोत, Getty Images

शराब घोटाले में पांच को मिली ज़मानत

सीबीआई की अदालत ने दिल्ली के कथित शराब घोटाले मामले में पांच अभियुक्तों को राहत मिली है.

अमर उजाला में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, सीबीआई की अदालत ने इस मामले से जुड़े समीर महेंद्रू, कुलदीप सिंह, नरेंद्र सिंह, अरुण रामचंद्रन पिल्लई और मूथा गौतम को ज़मानत दे दी है. इनमें आबकारी विभाग के पूर्व अधिकारी भी शामिल हैं.

अदालत ने इस मामले में पहले ही कुलदीप सिंह, नरेंद्र सिंह और मूथा गौतम, अरुण रामचंद्रन पिल्लई और कारोबारी समीर महेंद्रू को अंतरिम ज़मानत दे दी थी.

बता दें कि कारोबारी समीर महेंद्रू मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय से जुड़ी एक जांच में न्यायिक हिरासत में थे. विजय नायर और अभिषेक भी न्यायिक हिरासत में थे.

ये भी पढ़ें -

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)