अदानी की गिरती साख का भारत की विकास गाथा पर कितना असर पड़ेगा?

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    • Author, ज़ुबैर अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

अभी कुछ सप्ताह पहले तक भारत के जानेमाने कारोबारी गौतम अदानी ब्लूमबर्ग इंडेक्स की अरबपतियों की लिस्ट में दूसरे नंबर पर थे, लेकिन 24 जनवरी की हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट के बाद इस लिस्ट में अब वो 21वें पायदान पर पहुँच गए हैं. लेकिन लिस्ट में वो इतने पर रुक गए हों ऐसा नहीं है, वो लगातार नीचे फिसलते जा रहे हैं.

रिपोर्ट से सामने आने के बाद से गौतम अदानी अब तक 100 अरब डॉलर से अधिक का नुक़सान उठा चुके हैं और इसमें कोई शक नहीं कि उनके व्यापार साम्राज्य के लिए ये एक बड़ा झटका है.

मगर क्या यह धक्का अकेले अदानी समूह को लगा है? तो इसका जवाब है--नहीं.

अदानी समूह में निवेश करने वाले भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और भारत के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया को भी इसका नुक़सान झेलना पड़ रहा है.

अदानी समूह पर छाए संकट के बादल कितने गहरे हैं इसका अंदाज़ा ख़ास तौर पर बुधवार को उस समय हुआ जब अदानी ने 20 हज़ार करोड़ रुपए जुटाने के लिए जारी किए अपने एफ़पीओ को अचानक वापस ले लिया.

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अदानी मामला: अब तक क्या-क्या हुआ?

4 फ़रवरी 2023 - शेयर बाज़ार नियामक सेबी ने कहा कि वो मार्केट के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ नहीं होनी देगी और इस मामले में हर ज़रूरी क़दम उठाएगी.

4 फ़रवरी 2023 - वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि नियामक अपना काम करने के लिए स्वतंत्र हैं इसमें सरकार का कोई दबाव नहीं है.

3 फ़रवरी 2023 - एक टेलीविज़न चैनल को दिए इंटरव्यू में वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर अच्छी स्थिति में है और वित्तीय बाज़ार नियमों के साथ काम कर रहे हैं.

2 फ़रवरी 2023 -निवेशकों के बीच घबराहट के माहौल के बीच आरबीआई ने कंपनी को लोन देने वाली कंपनियों से इस सिलसिले में पूरी जानकारी मांगी.

2 फ़रवरी 2023 - कंपनी के मालिक गौतम अडानी ने 4 मिनट 5 सेकंड का एक वीडियो जारी कर एफ़पीओ वापिस लेने की वजह बताई.

1 फ़रवरी 2023 - अदानी कंपनी ने अपना एफ़पीओ वापस लिया.

31 जनवरी 2023 - इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू से मुलाक़ात करने के लिए गौतम अदानी हाइफ़ा बंदरगाह पहुंचे थे. हिंडनबर्ग रिपोर्ट आने के बाद पहली बार वो यहां सार्वजनिक तौर पर देखे गए.

31 जनवरी 2023 - एफ़पीओ की बिक्री इस दिन बंद होनी थी. इसी दिन ख़बर आई कि नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर के तौर पर सज्जन जिंदल और सुनील मित्तल समेत कुछ और जानेमाने अरबपतियों ने कंपनी के 3.13 करोड़ शेयर खरीदने के लिए बोली लगाई.

30 जनवरी 2023 - इस दिन तक एफ़पीओ को केलव 3 फ़ीसदी सब्स्क्रिप्शन मिला. इसी दिन अबू धाबी की कंपनी इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी ने कहा कि वो अपनी सब्सिडियरी ग्रीन ट्रांसमिशन इन्वेस्टमेंट होल्डिंग आरएससी लिमिटेड के ज़रिए अदानी के एफ़पीओ में 40 करोड़ डॉलर का निवेश करेगी.

27 जनवरी 2023 - अदानी ने 2.5 अरब डॉलर का एफ़पीओ बाज़ार में उतारा.

26 जनवरी 2023 - हिंडनबर्ग ने कहा कि वो अपनी रिपोर्ट पर क़ायम है और क़ानूनी कार्रवाई का स्वागत करेगी.

26 जनवरी 2023 - अदानी ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को सिरे से खारिज किया. कंपनी ने कहा कि वो क़ानूनी कार्रवाई के बारे में विचार कर रही है.

24 जनवरी 2023 - हिंडनबर्ग ने अदानी से जुड़ी अपनी रिपोर्ट 'अदानी ग्रुपः हाउ द वर्ल्ड्स थर्ड रिचेस्ट मैन इज़ पुलिंग द लार्जेस्ट कॉन इन कॉर्पोरेट हिस्ट्री' जारी की.

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क्या होता है एफ़पीओ?

एफ़पीओ यानी फ़ॉलोऑन पब्लिक ऑफ़र. बाज़ार से, आम लोगों और वित्तीय संस्थाओं से जिस तरह पहली बार पैसे की उगाही के लिए कंपनियां आईपीओ यानी इनिशियल पब्लिक ऑफ़र का सहारा लेती हैं, उसी तरह कंपनियां आगे बढ़ने के लिए ज़रूरी अतिरिक्त पैसा जुटाने के लिए एफ़पीओ लाती हैं.

अदानी के शेयरों में निवेश करने के मौक़े का इंतज़ार करने वाले आम निवेशकों ने इस साल जारी हुए अदानी के एफ़पीओ में बहुत दिलचस्पी नहीं दिखाई क्योंकि हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के सामने आने के बाद निवेशकों का भरोसा डगमगा गया.

लेकिन कंपनी को पैसा नहीं मिला ऐसा नहीं हुआ. संयुक्त अरब अमीरात की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी यानी आईएचसी ने अदानी के एफ़पीओ में पैसा लगाने की घोषणा की. बची हुई रकम लगाने के लिए देश के कुछ अन्य जानेमाने कारोबारी आगे आए.

अदानी अपनी कंपनी के शेयर एफ़पीओ के ज़रिए बेचकर समूह पर चढ़े कर्ज़ को घटाना चाहते थे लेकिन विवादों के बीच उन्होंने अचानक एफ़पीओ रद्द करने की घोषणा कर दी.

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बड़ा जहाज़, बहुत सारे सवार थे

अर्थव्यवस्था और शेयर बाज़ार के जानकार मानते हैं कि इस घटना का एक बड़ा नुकसान भारत का भी हुआ है. इससे व्यावसायिक नियमन के मामले में देश की छवि प्रभावित हुई है जिसके दूरगामी नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं.

एक ज़माने से विदेशी निवेशक और ऋण देने वाली बड़ी विदेशी संस्थाएं भारत की अर्थव्यवस्था को निवेश के लिए आकर्षक ठिकाना मानती रही हैं.

भारत सरकार के अनुसार साल 2022 में 25 दिसंबर तक भारत को लगभग 85 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ़डीआई) मिला.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ अप्रैल 2000 से सितंबर 2022 के बीच भारत में कुल एफ़डीआई 888 अरब डॉलर के क़रीब पहुँच गया.

लगभग 26 प्रतिशत निवेश मॉरीशस के रास्ते से आया, इसके बाद सिंगापुर से 23 प्रतिशत, अमेरिका से 9 प्रतिशत, नीदरलैंड से 7 प्रतिशत, जापान से 6 प्रतिशत और ब्रिटेन से 5 प्रतिशत. संयुक्त अरब अमीरात, जर्मनी, साइप्रस और केमैन आइलैंड से 2 प्रतिशत का निवेश आया.

अदानी समूह के कारोबार में बंदरगाह, सड़क, रेल, हवाई अड्डे और ऊर्जा शामिल हैं. अदानी समूह को मोदी सरकार के दौर में भारत की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के मामले में एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखा जाता है. कहा जाता है कि अदानी और मोदी आपस में सालों से एकदूसरे के निकट रहे हैं.

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अब हिंडनबर्ग रिसर्च की इस रिपोर्ट ने अदानी को उनके कॉर्पोरेट जीवन के सबसे बुरे संकट में डाल दिया है, इससे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के सामने भारत की विश्वसनीयता के बारे में भी बड़े सवाल उठ रहे हैं.

हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट में समूह पर शेयरों में हेराफेरी करने और टैक्स हेवन का अनुचित तरीके से उपयोग करने का आरोप लगाया गया है. अदानी ने इसका ज़ोरदार खंडन किया है.

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लगातार गिरती साख

गुरुवार को सिटीग्रुप की निवेश शाखा ने घोषणा की कि उसने कर्ज़ देने के लिए अदानी समूह के शेयरों को गारंटी के रूप में स्वीकार करना बंद कर दिया है.

इससे पहले क्रेडिट सुइस की ऋण देने वाली शाखा ने भी अदानी कंपनियों के बांड्स को गारंटी के तौर पर स्वीकार न करने की घोषणा की थी. वैश्विक ऋण देने वाली कंपनियां अदानी समूह के बांड्स से दूरी बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं. इससे गौतम अदानी समूह का संकट और भी गंभीर होता जा रहा है.

सिंगापुर में रहने आर्थिक विश्लेषक सन शी का कहना है, "मौजूदा संकट ने निश्चित रूप से विदेशों में भारत की छवि को नुकसान पहुंचाया है."

बीबीसी हिंदी से बातचीत में उन्होंने कहा, "पारंपरिक रूप से और अतीत में भारतीय कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय निवेश समुदाय ने हमेशा आलोचना की है इसलिए परंपरागत रूप से पहले से ही भारतीय कंपनियों में विश्वास की कमी थी. अदानी से संबंधित ताज़ा घटना ने निवेशकों के विश्वास को और कमज़ोर किया है."

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सरकारी एजेंसियों की भूमिका

बाज़ार का नियमन करने वाली रेगुलेटरी अथॉरिटी 'भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड' यानी सेबी ने संकट पर कहा है कि वो मार्केट के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ नहीं होनी देगी और इस मामले में हर ज़रूरी क़दम उठाया जा रहा है.

सेबी ने अपने बयान में सीधे तौर पर अदानी ग्रुप का नाम तो नहीं लिया, लेकिन कहा कि मार्केट के सुचारू, पारदर्शी और कुशल तरीके से काम करने के लिए किसी खास शेयरों में उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए निगरानी व्यवस्था मौजूद है.

वहीं केंद्रीय वित्त सचिव टीवी सोमनाथन ने कहा है कि शेयर बाज़ार में एक कंपनी के प्रदर्शन से बहुत परेशान होने की ज़रूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि इससे "एसबीआई और एलआईसी पर कोई असर नहीं पड़ेगा."

हेमिंद्र हज़ारी एक स्वतंत्र मार्केट विश्लेषक हैं. उन्होंने बीबीसी से कहा, "मैं हैरान हूँ कि बाजार नियामक सेबी या सरकार ने इस मामले में पहले क्यों कुछ नहीं कहा. उन्हें निवेशकों की चिंताओं को दूर करने के लिए कुछ बोलना चाहिए था."

लेकिन दूसरी ओर, एक इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ और इंफ्राविजन फाउंडेशन के संस्थापक और प्रबंध ट्रस्टीविनायक चटर्जी बीबीसी के साथ बातचीत में उन लोगों से असहमत नज़र आते हैं जो मानते हैं कि इस ताज़ा संकट से अदानी या भारत की प्रतिष्ठा पर कोई असर पड़ेगा.

चटर्जी का कहना है, "मुझे नहीं लगता कि इससे कंपनी की प्रतिष्ठा या भारत में भविष्य के निवेश पर कोई असर पड़ेगा. मौजूदा समस्या ज़्यादा लंबे तक नहीं चलेगी. यह एक छोटी अवधि का झटका है."

विनायक चटर्जी कहते हैं, "मैंने अदानी समूह को 25 सालों से एक इन्फ्रस्ट्रक्चर एक्सपर्ट के तौर पर देखा है, मैं बंदरगाहों, हवाई अड्डों, सीमेंट से लेकर नवीकरणीय ऊर्जा तक विभिन्न परियोजनाओं को देखता हूँ जो ठोस और स्थिर हैं, मुनाफ़ा कमा रहे हैं. वे शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव से पूरी तरह सुरक्षित हैं."

अदानी समूह की कंपनियों पर भरोसा जताते हुए वो कहते हैं, "अदानी परियोजनाओं में निवेश करने वाली कंपनियों के पास ऐसे विशेषज्ञ हैं जो अदानी समूह के काम के बारे में बहुत स्पष्ट हैं और शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव का प्रभाव अदानी समूह के निवेश या भविष्य की परियोजनाओं पर नहीं पड़ेगा."

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मूडीज़ और स्टैंडर्ड एंड पुअर की राय अलग

रेटिंग एजेंसी फिंच ने भी शुक्रवार को कहा कि पिछले सप्ताह अमेरिकी शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद अदानी समूह की संस्थाओं और उनकी प्रतिभूतियों की रेटिंग पर इसका कोई तत्काल प्रभाव नहीं पड़ेगा लेकिन भविष्य में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से धन हासिल करने की योजनाओं पर असर पड़ सकता है.

दुनिया की जानीमानी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज़ की राय फिंच से बिल्कुल अलग है.

मूडीज़ ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में अदानी समूह को भविष्य की परियोजनाओं के लिए कर्ज़ जुटाने में दिक्कत हो सकती है और कंपनी पहले ही काफ़ी कर्ज़ में है यानी उसके पास कुछ दूसरी कंपनियों की तरह मोटा कैश रिज़र्व नहीं है.

इतना ही नहीं, इससे पहले शुक्रवार को एक और बड़ी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर ने अदानी पोर्ट्स और अदानी इलेक्ट्रिसिटी की रेटिंग को नकारात्मक कर दिया था, इससे पहले तक इसी एजेंसी ने इन दोनों कंपनियों को स्थिर माना था.

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