अदानी समूह ने अपने ख़िलाफ़ रिपोर्ट को बताया 'भारत पर हमला' - प्रेस रिव्यू

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अडानी समूह ने रविवार को अमेरिकी फ़ॉरेंसिक फ़ाइनेंशियल कंपनी हिंडनबर्ग की ओर से लगाए वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर 413 पन्नों का जवाब सौंपा है.
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट भारत में 25 जनवरी की सुबह आई थी जिसके बाद अडानी समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गयी है.
ये रिपोर्ट सामने आने के बाद एक अनुमान के मुताबिक़ अडानी समूह की बाज़ार पूंजी में चार लाख करोड़ रुपये का नुक़सान हुआ है.
इसके साथ ही इस समूह के मालिक गौतम अदानी की नेटवर्थ में 18 फ़ीसद की गिरावट दर्ज की गयी है. और अब वह दुनिया में चौथे सबसे अमीर शख़्स के पायदान से फिसलकर सातवें पायदान पर पहुंच गये हैं.
इस सबके बाद सोमवार सुबह बाज़ार खुलने से एक दिन पहले अदानी समूह ने 413 पन्नों का जवाब पेश किया है.
द हिंदू में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, अदानी समूह ने इस रिपोर्ट को 'भारत और उसके स्वतंत्र संस्थानों पर एक हमला' क़रार दिया है.
रिपोर्ट में लिखा गया है - 'ये सिर्फ़ किसी कंपनी विशेष पर एक अवांछित हमला नहीं है, बल्कि ये भारत और उसके संस्थानों की गुणवत्ता, ईमानदारी और स्वतंत्रता के साथ भारत की महत्वाकांक्षाओं और उसके विकास की कहानी पर नियोजित हमला है.'

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अदानी समूह के सीएफ़ओ जुगेशिंदर सिंह ने अंग्रेजी अख़बार इकोनॉमिक टाइम्स के साथ इंटरव्यू में इस कथित हमले से जुड़े सवालों के जवाब दिए हैं.
इस रिपोर्ट के पीछे किसी कंपनी का हाथ होने से जुड़े कयासों पर जुगेशिंदर सिंह ने कहा है, "हम ये कयास नहीं लगाना चाहते कि इसके पीछे कौन है. हमने कभी ऐसा करने के बारे में नहीं सोचा. ऐसे में हम मानते हैं कि दूसरी कॉरपोरेट कंपनियां भी इस तरह के काम नहीं करती हैं.
लेकिन अगर इसके पीछे कोई है तो वो आख़िरकार सामने आएगा और ये समझने के बाद हम इससे कड़ाई से निपटेंगे. लेकिन प्रक्रिया के रूप में इस तरह की रिपोर्ट पेश करने से पहले (जो कि हमारे मामले में झूठ और तथ्यों को ग़लत ढंग से पेश करने की कोशिश है) ऐसी रिपोर्ट संबंधित पक्षों के साथ साझा की जाती है जो स्टॉक को शॉर्ट करते हैं.''
किसी कंपनी के स्टॉक को शॉर्ट करने से आशय वित्तीय बाज़ार में उस कंपनी की वित्तीय हालत ख़राब होने का अनुमान लगाना है.
इस इंटरव्यू में जब जुगेशिंदर सिंह से पूछा गया कि क्या अदानी समूह की ओर से इस मामले में भारतीय प्रतिभूति और विनिमिय बोर्ड (सेबी) से संपर्क किया गया या उनकी ओर से संपर्क किया गया?
इस सवाल पर सिंह ने कहा, 'हमारा समूह और संस्थापक सिद्धांत: किसी भी अनुमानित गतिविधि में शामिल नहीं हैं. हमारा पूरा ध्यान हमारे द्वारा तैयार की गई संपत्तियों और उन्हें सबसे उचित ढंग से चलाने में लगा है.
ये हमारी ताक़त रही है न कि नियामक संस्थाओं के पास जाना. जब हम इसे पूरी तरह समझ लेंगे और हमें लगेगा कि कुछ ऐसा है जिसे नियामकों को बताने की ज़रूरत है तो हम अपनी जानकारी साझा करेंगे.
लेकिन इसमें समय लगेगा और ये एक गंभीर मसला है. इस तरह के गंभीर मसले की ठीक ढंग से समय और मेहनत से समीक्षा किए जाने की ज़रूरत होती है. ऐसे में फ़िलहाल हमने किसी से संपर्क नहीं किया है क्योंकि हमारे पास पर्याप्त सामग्री नहीं है जिसे हम ठीक ढंग से इस्तेमाल कर सकें.'

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नजीब जंग के घर फिर जुटे आरएसएस नेता, क्या बात हुई?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत और मुस्लिम बुद्धिजीवियों के बीच अगस्त में हुई मुलाक़ात के बाद शुरू हुए संवाद का दौर अभी भी जारी है.
इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, इन नेताओं के बीच दूसरी मुलाकात दिल्ली के दरियागंज में स्थित पूर्व उप-राज्यपाल नजीब जंग के घर पर 14 जनवरी को हुई.
हालांकि, इस मुलाक़ात के दौरान मोहन भागवत मौजूद नहीं थे. बता दें कि इस बैठक में काशी और मथुरा के मुद्दों के सौहार्दपूर्ण समाधान की संभावना, गोहत्या, बुलडोज़र और नफ़रती भाषणों पर संघ की चुप्पी जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई है.
इस बैठक में संघ की तरफ से रामलाल, कृष्ण गोपाल और इंद्रेश कुमार तो वहीं मुस्लिम बुद्धिजीवियों में पूर्व उप-राज्यपाल नजीब जंग, शाहिद सिद्दीक़ी, एस वाई क़ुरैशी, जमात ए इस्लामी की तरफ़ से मलिक मोहतसिम और दारुल उलूम से जुड़े लोग शामिल हुए थे.
सूत्रों के मुताबिक़, काशी और मथुरा के मुद्दों पर मुस्लिम पक्ष ने सवाल किया कि क्या इन मुद्दों के समाधान से यह तय होगा कि आगे किसी अन्य स्थल की मांग नहीं होगी? इसके जवाब में आरएसएस नेताओं ने कहा कि वे भविष्य में हिंदू समाज की सोच की गारंटी नहीं दे सकते.
आरएसएस नेताओं और मुस्लिम बुद्धिजीवियों के बीच हुई इस दूसरी बैठक में सबसे ज़्यादा चर्चा हाल ही में संघ प्रमुख मोहन भागवत के उस इंटरव्यू को लेकर हुई जिसमें उन्होंने कहा था कि दुनियाभर में हिंदुओं के बीच आक्रामकता समाज में जागृति के कारण थी, जो एक हज़ार से अधिक वर्षों से युद्ध में है.
इस बैठक में काशी और मथुरा के अलावा गोहत्या जैसे मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ मुस्लिम पक्ष द्वारा उठाई गई मुख्य चिंताओं में बुलडोज़र की तैनाती, मॉब लिंचिंग, नफ़रत फैलाने वाले भाषणों पर आरएसएस की चुप्पी जैसे मुद्दे शामिल रहे.
नजीब जंग ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि बैठक बहुत सौहार्दपूर्ण माहौल में आयोजित की गई थी. दोनों पक्षों ने अपनी बात रखी और इस बातचीत को आगे बढ़ाया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह प्रयास समुदायों को एक साथ लाने और भारत को मज़बूत बनाने का है. शायद ही कोई ऐसा विवादस्पद मुद्दा हो जिसे दो समुदायों के बीच सुलझाया न जा सके.
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ऑस्ट्रेलिया में ख़ालिस्तान समर्थकों और भारतीयों की झड़प
ऑस्ट्रेलिया में हिंदू मंदिरों पर ख़ालिस्तान समर्थकों की ओर से लगातार तोड़फोड़ किए जाने के बाद अब भारतीय लोगों के साथ झड़प होने की ख़बर आ रही है.
अमर उजाला में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तान समर्थकों ने कुछ भारतीयों पर हमले किए हैं.
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर वायरल हो रहा है. इस झड़प में पांच लोग घायल हो गए हैं जिन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है.
स्थानीय मीडिया समूह ऑस्ट्रेलिया टुडे ने इस मामले से जुड़ा वीडियो साझा किया है.
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