हमास-इसराइल युद्ध: नेतन्याहू-बाइडन के लक्ष्य में अंतर और ख़तरनाक़ भविष्य की आशंका

ग़ज़ा पर इसराइल के हमले के बाद उठता धुंआ

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    • Author, जेरेमी बोवेन
    • पदनाम, बीबीसी इंटरनेशनल एडिटर

इस साल 7 अक्टूबर को इसराइल और हमास के बीच शुरू हुए युद्ध के अंत में एक बड़ी सी अज्ञात जगह छिपी हुई है, जिसे भविष्य कहा जाता है.

पुरानी यथास्थिति खतरनाक और दर्दनाक थी. ख़ासकर इसराइली कब्जे वाले इलाकों में रहने वाले फ़लस्तीनियों के लिए ये सब बहुत जाना-पहचाना था, लेकिन 7 अक्टूबर के हमास के हमले और इसराइल की जवाबी कार्रवाई में यह ध्वस्त हो गया.

एक सदी से भी अधिक समय से जॉर्डन नदी और भूमध्य सागर के बीच जमीन के एक छोटे, लेकिन प्रतिष्ठित टुकड़े पर नियंत्रण हासिल करने के लिए यहूदी और अरब आमने-सामने हैं.

कई बार युद्ध भी कर चुके हैं. शायद सबसे सुरक्षित और सबसे दुखद, यह मान लेना है कि जिस संघर्ष को नया रूप दिया गया है, वह चलता रहेगा.

साल 1948 में इसराइल का गठन हुआ था. उसके बाद हर दूसरे 'मध्य पूर्व युद्ध' के बाद यही हुआ है.

लेकिन कुछ अन्य विकल्प भी हैं. यहां हम उन तर्कों का ज़िक्र कर रहे हैं, जो कुछ अहम लोगों ने दिए हैं.

बिन्यामिन नेतन्याहू

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बिन्यामिन नेतन्याहू के मन में क्या?

इसराइल के प्रधानमंत्री के पास अगर अगले दिन के लिए कोई योजना है तो उसे उन्होंने बताया नहीं है.

इसराइल में बिन्यामिन नेतन्याहू के विरोधी उन्हें सुरक्षा और खुफिया विफलताओं के लिए दोषी ठहराते हैं, जिसकी वजह से 7 अक्टूबर को हमास का हमला संभव हो पाया.

विरोधियों का कहना है कि नेतन्याहू की एकमात्र वास्तविक योजना सत्ता में बने रहना और अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में दोषी साबित होने से बचना है.

नेतन्याहू ने अपना करियर इस वादे पर बनाया कि वह 'मिस्टर सिक्योरिटी' हैं. एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं, जो इसराइल को सुरक्षित रख सकते हैं.

हमास ने उनके ब्रांड को चकनाचूर कर दिया, जो इसराइल के राजनीतिक संघर्ष में पहले से ही बुरी तरह क्षतिग्रस्त था.

युद्ध के बाद क्या होगा, इस बारे में प्रधानमंत्री का व्यापक बयान यह माना जाता है कि इसराइल जीत की घोषणा कर सकता है, ये सभी ग़ज़ा पर कब्जे की ओर इशारा करते हैं.

इसराइली अधिकारियों ने सीमा पर बफर जोन बनाने की बात कही है. हालांकि, वो इसका कोई विवरण नहीं देते हैं.

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गाजा में कोई अरब सैनिक नहीं जाएगा. कोई भी नहीं. हम दुश्मन के रूप में नहीं देखा जाना चाहते हैं.
अयमान सफ़ादी
विदेश मंत्री, जॉर्डन

नेतन्याहू ने विदेशी शांति सैनिकों की भूमिका को अस्वीकार कर दिया है. जॉर्डन के विदेश मंत्री अयमान सफ़ादी पहले ही कह चुके हैं कि अरब देश, इसराइल की ओर से छोड़ी गई गंदगी को साफ़ नहीं करेंगे.

उनका कहना है, "ग़ज़ा में कोई अरब सैनिक नहीं जाएगा. कोई भी नहीं. हम दुश्मन के रूप में नहीं देखा जाना चाहते हैं."

नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की उस योजना को भी खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने हमास को राष्ट्रपति महमूद अब्बास के नेतृत्व वाले फ़लस्तीनी प्राधिकरण (पीए) से बदलने की बात कही थी.

नेतन्याहू का दावा है कि पीए पर भरोसा नहीं किया जा सकता है. वह 'आतंकवाद' का समर्थन करते हैं, भले ही वह इसराइल को मान्यता देते हैं और सुरक्षा पर उसके साथ सहयोग करते हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन

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क्या चाहते हैं जो बाइडन

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भविष्य का जो खाका बनाया है, वो बिन्यामिन नेतन्याहू की सोच से बहुत अलग है.

बाइडन का इसराइलियों को सैन्य, कूटनीतिक और भावनात्मक समर्थन जारी है. वो बंधकों के परिवारों से मिले और उन्हें गले लगाया.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपने राजनयिकों को युद्धविराम प्रस्तावों को रोकने के लिए वीटो का उपयोग करने का आदेश दिया.

बाइडन ने इस क्षेत्र में दो विमान वाहक पोतों की तैनाती का आदेश भी दिया और बड़ी मात्रा में हथियार इसराइल भेजे.

इसके बदले में अमेरिकी राष्ट्रपति चाहते हैं कि इसराइल शांति प्रक्रिया में वापस लौटे. वह चाहते हैं कि फ़लस्तीनी प्राधिकरण (पीए) ग़ज़ा को चलाए और इसराइल एक स्वतंत्र फ़लस्तीन की व्यवस्था पर सहमत हो जाए.

इससे फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास सहमत हैं. वो 7 अक्टूबर के बाद से बहुत हद तक दर्शक की भूमिका में हैं.

जो बाइडन और नेतन्याहू

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इस सप्ताह न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि युद्ध के बाद राजनीतिक समाधान निकालने के लिए एक शांति सम्मेलन होना चाहिए ताकि एक फ़लस्तीनी देश की स्थापना हो सके.

उन्होंने कहा, "दो देशों की स्थापना' 1990 के दशक की शुरुआत से अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगी देशों का आधिकारिक उद्देश्य है. इसे साकार करने के लिए सालों तक चली बातचीत विफल रही."

"शांति प्रक्रिया के ध्वस्त होने के करीब एक चौथाई सदी बाद यह एक 'खोखला नारा' बनकर रह गया है. बाइडन इसे पुनर्जीवित करना चाहते हैं. उनका तर्क है कि केवल एक राजनीतिक समाधान ही संघर्ष को खत्म करेगा."

बाइडन ने पिछले हफ्ते उप राष्ट्रपति कमला हैरिस को ग़ज़ा के लिए 'अमेरिकी रेड लाइन' को रेखांकित करने वाला भाषण देने दुबई भेजा था.

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जबरन विस्थापन नहीं होगा, फिर से कोई कब्जा नहीं होगा, कोई घेरेबंदी या नाकेबंदी नहीं होगी, इलाकों में कोई कटौती नहीं होगी और ग़ज़ा का इस्तेमाल आतंकवाद के एक मंच के रूप में नहीं होगा.
कमला हैरिस
अमेरिकी उपराष्ट्रपति

पांच सिद्धांत

भाषण में अमेरिका की उप राष्ट्रपति कमला हैरिस ने पांच सिद्धांत बताए.

इसमें शामिल हैं, "जबरन विस्थापन नहीं होगा. फिर से कोई कब्जा नहीं होगा. कोई घेराबंदी या नाकाबंदी नहीं होगी. इलाकों में कोई कटौती नहीं होगी और ग़ज़ा का इस्तेमाल आतंकवाद के एक मंच के रूप में नहीं होगा."

उन्होंने कहा था, "हम फ़लस्तीनी प्राधिकरण के तहत एक एकीकृत ग़ज़ा और वेस्ट बैंक देखना चाहते हैं. इसके केंद्र में फ़लस्तीनी लोगों की आवाज़ और आकांक्षाएं होनी चाहिए."

बिन्यामिन नेतन्याहू ने फ़लस्तीनी स्वतंत्रता की मांग को विफल करने के लिए कड़ी मेहनत की है.

यह कहना ठीक होगा कि वो अपना मन बदलने वाले नहीं हैं. अगर 'टू नेशन थ्योरी' को पुनर्जीवित किया जा सकता है तो यह उनके प्रधानमंत्री रहते संभव नहीं है.

सिम्चा रोटमैन

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नेतन्याहू को राष्ट्रवादियों का साथ

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समाप्त

मैं सिम्चा रोटमैन से मिलने के लिए इसराइल की संसद नेसेट गया.

वो धुर दक्षिणपंथी धार्मिक ज़ायनिस्ट पार्टी के एक प्रमुख सांसद हैं. बिन्यामिन नेतन्याहू की सरकार रोटमैन की पार्टी और अन्य कट्टर यहूदी राष्ट्रवादियों के समर्थन से चल रही है.

उन्हें 1967 में कब्ज़ा की गई ज़मीन पर यहूदियों को बसाने के आंदोलन से शक्ति मिलती है.

करीब सात लाख इसरायली यहूदी अब पूर्वी यरुशलम समेत कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में रहते हैं. सेटलर नेता उनकी कैबिनेट में हैं. वो इसराइली राजनीति के केंद्र में है.

अब जब इसराइल हमास से लड़ रहा है, तो उसे हमेशा के लिए खत्म करने की कसमें खाई जा रही हैं. यहूदी राष्ट्रवादियों को यह 1967 के बाद से सबसे बड़ा अवसर दिख रहा है, जब इसराइल ने छह दिनों तक चले युद्ध में अपने सभी अरब पड़ोसियों को हरा दिया था.

7 अक्टूबर के बाद से वेस्ट बैंक में सैनिकों और पुलिस समर्थित सशस्त्र निवासियों ने फ़लस्तीनी किसानों को जैतून की कटाई करने और अपने खेतों की देखभाल करने से रोक दिया है.

यहां रहने वालों ने अवैध सड़कें बना ली हैं और उन चौकियों को मजबूत कर खुद को मजबूती से स्थापित करने की कोशिश की है. ये सब इसराइली और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत अवैध हैं.

ग़ज़ा में यहूदियों की वापसी की मांग वाले पोस्टर हर जगह लगे हुए हैं.

अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक कब्ज़ा जमाने वाली शक्ति को ऐसी जमीन पर अपने नागरिकों को नहीं बसाना चाहिए, जिस पर उसने कब्ज़ा किया है. लेकिन इसराइल का कहना है कि यह कानून लागू नहीं होता है.

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आप अपनी ही ज़मीन पर कब्ज़ा नहीं कर सकते. इसराइल, इसराइल में कब्ज़ा जमाने वाला नहीं है क्योंकि वह इसराइल की जमीन है.
सिम्चा रोटमैन
इसराइली सांसद

सिम्चा रोटमैन ने नेसेट में मुझसे कहा, "कब्ज़ा कोई शब्द नहीं है."

उन्होंने कहा, "आप अपनी ही ज़मीन पर कब्ज़ा नहीं कर सकते. इसराइल, कब्ज़ा जमाने वाला नहीं है क्योंकि वह इसराइल की जमीन है."

सिम्चा रोटमैन और अन्य राष्ट्रवादी यहूदियों के लिए ग़ज़ा भी इसराइल की जमीन का हिस्सा है.

सिम्चा रोटमैन

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वो कहते हैं, "हमारे पास कोई आतंकवादी संगठन नहीं हो सकता है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसका नाम क्या है. क्या यह हमास होगा? क्या यह फतह होगा?"

"इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. आतंकवादी संगठन हमारे जीवन को नियंत्रित नहीं कर सकता."

मुस्तफा बारघोथी

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हमास का विकल्प

7 अक्टूबर के बाद शुरू हुए युद्ध के खत्म होने के बाद अगर फ़लस्तीनी चुनाव होते हैं, तो मुस्तफ़ा बरग़ोती राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल हो सकते हैं.

वो फ़लस्तीन नेशनल इनिशिएटिव के महासचिव हैं. यह संगठन फलस्तीनी राजनीति में तीसरी ताकत बनना चाहता है. वह हमास और राष्ट्रपति महमूद अब्बास के नेतृत्व वाले फ़तह का विकल्प बनना चाहता है.

फ़लस्तीन नेशनल इनिशिएटिव हमास और फ़तह को भ्रष्ट और अक्षम मानता है. बरगोती का मानना ​​है कि कब्जे़ का विरोध करना वैध और कानूनी है, हालांकि वो इसे अहिंसक बनाना चाहते हैं.

वेस्ट बैंक के रामल्ला स्थित अपने दफ्तर में मुस्तफ़ा बरगोती ने मुझसे कहा कि इसराइल युद्ध का उपयोग न केवल हमास को बल्कि फ़लस्तीनी स्वतंत्रता और स्वतंत्रता के विचार को कुचलने के लिए कर रहा है.

कई फ़लस्तीनियों की तरह, बरगोती का भी मानना है कि जो कुछ भी हो रहा है वह 1948 की घटनाओं की प्रतिध्वनि है, जब इसराइल ने अपनी स्वतंत्रता हासिल की थी और सात लाख से अधिक फ़लस्तीनी वहां से चले गए थे या बंदूक के बल पर उन्हें इसराइल में अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था.

ग़ज़ा

फ़लस्तीनी इसे अल-नकबा या 'तबाही' कहते हैं. उनका मानना है कि इसराइल चाहता है कि यह फिर से हो.

बरगोती कहते हैं, "मुझे 100 फीसदी यकीन है कि शुरू से ही उनका मुख्य लक्ष्य ग़ज़ा का नस्लीय सफाया, और लोगों को मिस्र में धकेलने की कोशिश करना है, यह एक भयानक युद्ध अपराध है."

वे कहते हैं, "अगर वे ऐसा करने में कामयाब रहते हैं तो मुझे लगता है कि उनका अगला लक्ष्य वेस्ट बैंक का नस्लीय सफाया करने की कोशिश करना और लोगों को अपने साथ आने के लिए मजबूर करना होगा."

बरगोती कहते हैं, "अगर वे सभी ग़ज़ा वासियों का नस्लीय सफाया करने में विफल रहते हैं, तो मुझे यकीन है कि नेतन्याहू का प्लान-बी ग़ज़ा शहर और ग़ज़ा के उत्तर को पूरी तरह से इसराइल में शामिल करना और उसे एक सुरक्षित इलाके के रूप में बदलने का दावा करना है."

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अगर इसराइली सैनिक लंबे समय तक ग़ज़ा में रहते हैं तो इसराइल को गंभीर स्थितियों का सामना करना पड़ेगा.
मुस्तफ़ा बरग़ोती
महासचिव, फ़लस्तीन नेशनल इनिशिएटिव

बरगोती चेतावनी देते हुए कहते हैं कि अगर इसराइली सैनिक लंबे समय तक ग़ज़ा में रहते हैं तो इसराइल को गंभीर स्थितियों का सामना करना पड़ेगा.

वो कहते हैं, "इसराइल ने पहले भी ऐसा किया था, लेकिन बात नहीं बनी. उनके कब्जे़ का विरोध किया जाएगा, इसे वे बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं. यही कारण है कि नेतन्याहू का लक्ष्य वास्तव में लोगों का नस्लीय सफाया करना है. वो लोगों के बिना ग़ज़ा पर सैन्य नियंत्रण चाहते हैं. वो यह अच्छी तरह जानते हैं कि लोगों के रहते हुए ग़ज़ा एक ऐसी चीज है जिसे संभालना मुश्किल है."

बरगोती का मानना ​​है कि ग़ज़ा लोकतांत्रिक फ़लस्तीनी देश का हिस्सा होना चाहिए.

वो कहते हैं, "हम फ़लीस्तीनी समझदार लोग हैं. हमें किसी के संरक्षण की जरूरत नहीं है. और हम यह नहीं चाहते हैं कि कोई दूसरा देश हमें यह बताए कि खुद पर कैसे शासन करना चाहिए."

ग़ज़ा पर इसराइल के हमले के बाद उठता धुंआ

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कैसा होगा इसराइल-हमास युद्ध का अंत

ऐसा लग रहा है कि इस संघर्ष के अभी और अध्याय लिखे जाएंगे. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में नवीनतम युद्धविराम प्रस्ताव पर अमेरिका के वीटो से इसराइल को युद्ध छेड़ने के लिए और अधिक समय मिल गया है. लेकिन यह अतिरिक्त समय अनिश्चित नहीं है.

इसराइल को लगातार समर्थन पर बाइडन को आगामी चुनावी साल में राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी. उनकी डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रभावी सदस्य और युवा उनके कामकाज का विरोध करते हैं, जिनके समर्थन की उन्हें जरूरत है.

बाइडन प्रशासन पहले से ही इस बात पर बेहद असहज हैं क्योंकि इसराइल लगातार अमेरिका की उन अपीलों की अनदेखी कर रहा है, जिसमें उसने नागरिकों की सुरक्षा और युद्ध के कानूनों का पालन करने की बात कही है.

बिन्यामिन नेतन्याहू ने हमास को कुचलने का जो वादा किया है, उसे हासिल करने के लिए इसराइल को संघर्ष करना पड़ सकता है.

उन्होंने जीत के लिए ऊंचे मानदंड बनाए हैं, हमास को न केवल एक सैन्य शक्ति के रूप में नष्ट किया जा रहा है, बल्कि शासन करने की उसकी क्षमता को भी नष्ट किया जा रहा है.

अमेरिकी हथियारों की सप्लाई से बढ़ी इसराइल की विशाल सैन्य शक्ति ने अभी तक हमास की लड़ने की क्षमता को नष्ट नहीं किया है.

हमास का इस्लामी राष्ट्रवाद का विचार कई फ़लस्तीनियों के दिमाग में दर्ज है. बंदूकें अक्सर विचारों को मारती नहीं हैं, बल्कि उन्हें मजबूत बनाती हैं.

भविष्य बदसूरत और ख़तरनाक है. ग़ज़ा में युद्ध ठीक ढंग से खत्म नहीं होगा.

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