इसराइल हमास युद्ध: बंधकों की रिहाई से मिली बड़ी राहत, मगर जश्न नहीं मना रहे परिजन

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- Author, जॉर्ज राइट
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
इसराइल और हमास के बीच हुए समझौते के बाद रिहा हुए 13 इसराइली नागरिकों के परिजनों ने राहत की सांस ली है.
क़तर की मध्यस्थता से हुए इस समझौते के तहत, चार दिन के अस्थायी पॉज़ (जंग में अस्थायी ठहराव) के दौरान 50 इसराइली बंधकों और 150 फ़लस्तीनी क़ैदियों की अदला-बदली की जानी है.
रिहा होने वालों में छोटे बच्चे और बुज़ुर्ग महिलाएं भी शामिल हैं. शुक्रवार को रेड क्रॉस की टीम इन्हें ग़ज़ा से मिस्र लेकर आई थी, जहां स्वास्थ्य जांच के बाद अब ये इसराइल पहुंच चुके हैं.
इनमें नौ साल से कम उम्र के चार बच्चे और 85 साल की एक महिला भी शामिल हैं.
इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा, “शुरुआती बंधकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी हो गई है. बच्चे, उनकी माताएं और अन्य महिलाएं लौट चुकी हैं. हर शख़्स ख़ुद में पूरी दुनिया है.”
“लेकिन मैं आपसे कहना चाहता हूं, परिवार और आप- इसराइल के नागरिक, अपने सभी बंधकों की वापसी के लिए प्रतिबद्ध हैं.”
क़तर वाले समझौते के इतर, हमास ने थाइलैंड के दस और फिलीपींस के एक नागरिक को भी रिहा किया है.

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अधूरी ख़ुशी
बंधकों की रिहाई के बाद परिजनों को राहत तो मिली है, लेकिन उनका कहना है कि उन्हें ख़ुशी तब होगी जब सभी बंधक सुरक्षित घर लौट आएंगे.
रिहा हुए इसराइलियों में योनी अशेर की 34 साल की पत्नी दोरोन कात्ज़ अशेर और उनकी दो बेटियां शामिल हैं. एक बेटी की उम्र चार साल है और दूसरी की दो साल है.
अशेर ने बीबीसी से कहा, “मैंने इरादा बनाया है कि जिस सदमे और दुख से हम गुज़रे हैं, उससे परिवार को बाहर निकालना है. मैं जश्न नहीं मनाऊंगा. तब तक नहीं, जब तक कि आख़िरी बंधक की रिहाई न हो जाए.”
उन्होंने कहा, “बंधकों के परिजन कोई पोस्टर या नारे नहीं हैं, वे असली लोग हैं. जिन लोगों को बंधक बनाया गया है, उनके परिजन मेरे अपने परिजन हैं और मैं सुनिश्चित करूंगा कि आख़िरी बंधक की घर वापसी के लिए मुझसे जो कुछ बन सकता है, वह करूं.”
78 साल की मार्गलित मोसेस भी हमास की कब्ज़े से रिहा होने वालों में शामिल हैं. उन्होंने एक समय कैंसर को मात दी थी. हमास ने 7 अक्टूबर को उनका किबुत्ज़ नीर ओज़ से अपहरण कर लिया था.
दानिएल अलोनी और उनकी छह साल की बेटी एमिलिया की रिहाई भी क़तर द्वारा करवाए समझौते के तहत हुई है. ये लोग अपने परिजनों के पास रहने किबुत्ज़ नीर ओज़ गए थे, वहीं से उनका अपहरण कर लिया गया था.
हमलों के दौरान दानिएल ने अपने परिजनों को भेजे आख़िरी मेसेज में लिखा था, “घर में आतंकवादी घुस आए हैं.” दानिएल को लगता था कि शायद वह और उनकी बेटी नहीं बच पाएंगे.

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इते रावी के 78 वर्षीय चचेरे भाई अवराहम अभी भी हमास की गिरफ़्त में हैं. अपने तीन परिजनों की रिहाई पर वह कहते हैं, “अभी तो यह ख़ुशी की ओर एक क़दम है.”
रावी ने बीबीसी से कहा, “रिहा हुए लोग अब इसराइली अस्पतालों और अपने परिजनों के पास आ रहे हैं और यह देखना काफ़ी अच्छा है. हालांकि, हमें पूरी ख़ुशी नहीं मिल पाई है. अभी भी हालात काफ़ी डरावने हैं.”
रावी की आंटी रूथी मुंदेर, चचेरी बहन केरेन मुंदेर और उनके नौ साल के भांजे ओहाद की रिहाई हुई है. इस साल ओहाद का जन्मदिन हमास की गिरफ़्त में रहने के दौरान ही आया.
रावी कहते हैं कि उनका परिवार ओहाद के नौवें जन्मदिन का जश्न मनाएगा.
उन्होंने कहा, "हम एक बड़ा जश्न रखेंगे, सभी परिजनों और दोस्तों को बुलाएंगे. उम्मीद करता हूं कि वह फिर से सामान्य होगा. नौ साल का बच्चा 50 दिन एक आतंकवादी संगठन के पास रहकर लौटा है. उम्मीद करता हूं कि वह अच्छा करेगा."

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थाइलैंड और फ़िलीपींस के नागरिक भी रिहा
हमास की गिरफ़्त से रिहा हुए थाइलैंड और फ़िलीपीन्स के नागरिकों के परिजन भी अब चैन से सो सकेंगे.
28 साल के थाई बंधक विचाई कलापत की गर्लफ़्रेंड कित्तिया थुएनसाएंग ने बताया कि इस दौरान उन्हें कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ा.
थाइलैंड के स्थानीय अधिकारियों ने उन्हें बताया था कि उनके बॉयफ्रेंड की हमास के हमले में मौत हो गई है. लेकिन जब मरने वालों की सूची जारी की गई तो उसमें विचाई का नाम शामिल नहीं था.
पांच दिन पहले उन्हें बताया गया कि विचाई का नाम थाइलैंड के बंधकों की सूची में शामिल है.
33 साल के फ़िलीपीन्स के नागरिक गेलिनॉर (जिमी) पचेको भी रिहा हुए हैं. उनका किबुत्ज़ ओ नीर से अपहरण हो गया था.
वह यहां रहने वाले अमिताई बेन ज़्वी की देखभाल करते थे, जिनकी हमास के हमले में मौत हो गई थी.

फ़लस्तीनी क़ैदियों की रिहाई
समझौते के तहत इसराइल ने कुल 39 फ़लस्तीनी कैदियों को रिहा किया है. इन पर कई तरह के आरोप थे. कुछ पर पत्थर फेंकने के, तो कुछ पर हत्या की कोशिश के.
कुछ को अदालतों ने दोषी ठहरा दिया था तो कुछ मुक़दमा चलने का इंतज़ार कर रहे थे.
इसराइली जेलों से रिहा होने वालों में 24 महिलाएं और 15 किशोर भी शामिल हैं. इन्हें कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में बेतूनिया नाके पर छोड़ा गया. नारे लगा रही विशाल भीड़ ने इनका यहां स्वागत किया.

रिहा होने वाली फ़लस्तीनी युवती माराह बकीर को 2015 में गिरफ़्तार किया गया था. तब उनकी उम्र 16 साल थी. उन्हें बॉर्डर पुलिस के एक अधिकारी पर चाकू से हमला करने पर साढ़े आठ साल की सज़ा सुनाई गई थी.
बकीर ने पत्रकारों को बताया, “हमारी रिहाई का समझौता कई सारे लोगों की मौत के बाद हुआ है और इससे हम नाख़ुश और बेचैन हैं.”
उन्होंने कहा कि उन्हें सबसे अलग कैद करके रखा गया था और उन्हें बिल्कुल पता नहीं था कि बाहर क्या हो रहा है और ग़ज़ा में कैसे हालात हैं.
उन्होंने कहा, “समझौते की ख़बर मिलना चौंकाने वाली बात थी.”

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इसराइल ने 300 महिलाओं और नाबालिग लड़कों की एक लिस्ट बनाई थी, जिनमें से इन लोगों को रिहा किया गया.
इन 300 में से एक चौथाई से भी कम दोषी सिद्ध हुए हैं. ज़्यादातर तो वो हैं, जिनपर मुक़दमा ही शुरू नहीं हुआ था.
इस लिस्ट में 40 फ़ीसदी लोग 18 से कम उम्र के लड़के हैं. एक किशोरी और 32 महिलाएं भी इसमे शामिल हैं.
हमास ने दक्षिणी इसराइल में 7 अक्टूबर को धावा बोल दिया था, जिसमें 1200 लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद इसराइल ने ग़ज़ा पर जवाबी हमले शुरू कर दिए थे.
हमास के तहत काम करने वाले ग़ज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इन हमलों में अब तक 14 हज़ार से ज़्यादा फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं.
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि 7 अक्टूबर के बाद इसराइल की जेलों में बिना आरोप तय किए फ़लस्तीनियों को जेल में डालने में तेज़ी आई है.
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