ख़ौफ़, जनाज़ा और सियासी अस्थिरता, वेस्ट बैंक की चिंताओं की कहानी

- Author, फेरास किलानी
- पदनाम, बीबीसी अरबी सेवा, रामल्लाह
आँखों में बेपनाह दर्द समेटे अपने चार बच्चों के साथ गुमसुम बैठीं महिला इलकास सालेह हैं.
इनके पति बिलाल सालेह को पिछले महीने (अक्टूबर) के आख़िरी हफ़्ते में इसराइली सैटलर्स की ओर से गोली मार दी गयी थी.
इसराइली सैटलर्स से आशय उन लोगों से है जो पिछले कुछ सालों में इसराइली नियंत्रण वाले क्षेत्र में बसाई गईं यहूदी बस्तियों में रहते हैं.
इलकास सालेह अपने पति का ज़िक्र करते हुए कहती हैं, “वह एक अच्छे दिल के इंसान थे जो सबकी फिक्र किया करते थे. बिलाल की हत्या के दो दिन बाद पुलिस ने मुझे बयान देने के लिए बुलाया. जब मैं पुलिस स्टेशन पहुंची तो एक इसराइली सैटलर ने मेरे चेहरे पर थूंक दिया.”
इलकास सालेह ने इस मामले में पुलिस की चुप्पी पर सवाल उठाया.
उन्होंने कहा, “जब मैंने पुलिस अधिकारी से पूछा कि उसने उन पर थूंकने वाले को क्यों नहीं रोका तो इस पर उसने कहा कि हम एक पुलिस स्टेशन में हैं, मैं आपके लिए कुछ नहीं कर सकता.”

पिछले डेढ़ महीने से पूरी दुनिया का ध्यान इसराइल पर हमास के अभूतपूर्व हमले और उसके बाद से ग़ज़ा पट्टी पर जारी इसराइली कार्रवाई पर है.
ग़ज़ा में अब तक मरने वालों की संख्या 12,300 के पार जा चुकी है. लेकिन इसराइली नियंत्रण वाले वेस्ट बैंक में भी हिंसा धीरे-धीरे बढ़ रही है.
फ़लस्तीन प्राधिकरण के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि सात अक्टूबर के बाद से वेस्ट बैंक में 200 फ़लस्तीनी लोग मारे जा चुके हैं जिनमें से सात लोगों की हत्या इसरायली बस्तियों में रहने वाले लोगों ने की है.

'जश्न का दिन'
इन सात लोगों में चालीस वर्षीय फ़लस्तीनी किसान बिलाल सालेह भी शामिल हैं जिन्हें 28 अक्टूबर को एस-सवइय्या गांव में गोली मार दी गयी थी.
बिलाल के भाई हाज़ेम शाहीन बताते हैं, “हम वहां जैतून लेने गए थे क्योंकि हमारा परिवार काफ़ी बड़ा है. जैतून की खेती हमारे लिए एक बड़ा त्योहार है और हम इसे मनाते हैं.”
इस घटना से एक दिन पहले परिवार में किसी ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया था. इस वीडियो में बिलाल का सबसे छोटा बेटा मूसा और बेटी मेयस अपने चचेरे भाई-बहनों के साथ हंसता – खेलता दिख रहा है.
इसके अगले दिन शनिवार को परिवार के बड़े सदस्यों ने जैतून तोड़ने की तैयारियां शुरू कींं.
हाज़ेम ने फ़ोन से रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो दिखाया जिसमें नजदीकी यहूदी बस्ती रेहेलिम के चार सशस्त्र इसराइली सैटलर्स उनकी ओर बढ़ते दिख रहे हैं.
इस क्षेत्र में ऐसी पांच यहूदी बस्तियां हैं.
हाज़ेम ने कहा, “जब हमने उन्हें अपनी ओर आते देखा तो हमने सीढ़ी से उतरकर बच्चों को अपनी गाड़ी के पास सुरक्षित स्थानों के पास पहुंचाया.
बिलाल जैतून के पेड़ के नीचे अपना फोन भूल गए. उनकी पत्नी जा चुकी थीं. और वह अपना फोन लेने के लिए 10 – 15 मीटर पीछे गए होंगे कि तभी हमने गोली चलने की आवाज़ सुनी.”
अगले वीडियो में बिलाल ज़मीन पर बिछी काली प्लास्टिक शीट पर पड़े दिखाई दिए जिसे जैतून बटोरने के लिए बिछाया गया था.
उन्हें सीने में गोली मारी गई थी. इसके बाद उनके पिता और दो चचेरे भाई उन्हें गाड़ी तक लेकर गए.
हाजेम कहते हैं कि नाबलस सबसे नजदीकी शहर था लेकिन इसराइली सेना की ओर से लगाए गए रोड ब्लॉक्स की वजह से सालफिट शहर जाना पड़ा जिससे यात्रा का समय दोगुना हो गया और बिलाल की रास्ते में ही मौत हो गयी.


इस मामले में मुख्य अभियुक्त एक ऑफ़ ड्यूटी इसराइली सैनिक है.
इसराइली सेना ने एक बयान जारी करके कहा है, "मिलिट्री पुलिस इस मामले की जांच कर रही है. संबंधित सिपाही को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था. लेकिन बाद में छोड़ दिया गया."
"जब जांच पूरी हो जाएगी तो उसके नतीजे सेना के अभियोजकों को भेज दिए जाएंगे."
लेकिन इस सबके बीच बिलाल का परिवार उनके इस तरह अचानक चले जाने से ग़म और सदमे में है.

इमेज स्रोत, BBC
हवा में चलती गोलियां और बढ़ता गुस्सा
उत्तर दिशा में आगे बढ़ते हुए हम मुख्य फ़लस्तीनी शरणार्थी कैंप जेनिन पहुंचते हैं जहां 11 पुरुषों को दफ़नाए जाने से पहले उनका ज़नाजा निकाला जा रहा है.
जेनिन कैंप इसराइल के ख़िलाफ़ पनप रहे चरमपंथ का केंद्र माना जा रहा है.
यहां अक्सर हवा में गोलियां चलने की घटनाएं सामने आती हैं. जिन लोगों की मौत हुई है, वे सभी सशस्त्र संगठनों के सदस्य थे.

फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास की सैन्य शाखा इज़्ज़ेदीन अल-क़ासम ब्रिगेड के सदस्य अपने भाई को दफ़ना रहे हैं.
हमास की इस विंग को अमेरिका और ब्रिटेन में एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन का दर्जा हासिल है.
काले नकाब के पीछे ढके चेहरे से अबु अल-इज़, जो उनका असली नाम नहीं है, कहते हैं, "हम एक हैं. हम खून के रिश्ते से जुड़े हुए हैं. मैं अल-क़ासम, फतेह और इस्लामिक जिहाद से जुड़ा हुआ हूं. मैं हर उस शख़्स का समर्थन करता हूं जो ऑक्यूपेशन (इसराइली कब्ज़े) के ख़िलाफ़ हथियार उठाते हैं."
यहां ऑक्यूपेशन से आशय इसराइल है.
फ़तह वेस्ट बैंक की मुख्य राजनीतिक पार्टी है. ये पार्टी फ़लस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन (पीएलओ) से जुड़ी है.
फ़लस्तीन के लिए संघर्ष कर रहे तमाम दल पीएलओ से संबंद्ध हैं.
हमास ने साल 2007 में बेहद कड़े संघर्ष के साथ फ़तह को ग़ज़ा पट्टी से बेदखल किया था. इसके साथ ही अल-क़ासम और इस्लामिक जिहाद चरमपंथी गुट अब तक एक दूसरे के प्रतिद्वंदी थे.
अबु अल-एज़ कहते हैं, "इसराइली सेना अब रामल्लाह पर छापा मार सकती है. और मैं वहां जाऊंगा, चाहें मेरी मौत हो जाए."

रामल्लाह फ़लस्तीन प्राधिकरण का मुख्यालय है. इस संस्था को 1993 में हुए ओस्लो समझौते के तहत बनाया गया था.
पीएलओ इसराइल को मान्यता देता है. जबकि हमास ऐसा नहीं करता.
फ़लस्तीन प्राधिकरण वेस्ट बैंक इलाके में इसराइल की ओर से सुरक्षा व्यवस्था पर निगाह रखता है. लेकिन एकता का ये प्रदर्शन फ़लस्तीन प्राधिकरण पर मंडरा रहे संकट को नहीं छिपा सकता.
पैलेस्टीनियन प्रिज़नर्स क्लब नामक एक ग़ैर सरकारी संस्था के मुताबिक़, सात अक्टूबर से अब तक मौतों की संख्या बढ़ने के साथ ही 2,900 से ज़्यादा लोग गिरफ़्तार किए जा चुके हैं. इसके साथ ही फ़लस्तीन प्राधिकरण के प्रति लोगों का समर्थन कम होता जा रहा है.
फ़लस्तीन प्राधिकरण के अनुसार वेस्ट बैंक और पूर्वी यरूशलम में 7.5 लाख इसराइली सैटलर रहते हैं. इसलिए एक अलग फ़लस्तानी देश का सपना फ़िलहाल दूर की कौड़ी है
अंतरराष्ट्रीय क़ानून के मुताबिक़, ये बस्तियां अवैध हैं. लेकिन इसराइल इस क़ानून को नहीं मानता. पीएलओ के मुताबिक़, साल 1993 तक यहां 1,15,000 लोग रहते थे.
राजनीतिक दलदल
हुसैन अल-शेख एक शीर्ष फ़लस्तीनी अधिकारी हैं जिन्हें फ़लस्तीन प्राधिकरण के 88 वर्षीय राष्ट्रपति महमूद अब्बास का उत्तराधिकारी माना जा रहा है.
उनका आधिकारिक ओहदा पीएलओ की कार्यकारी समिति के सचिव एवं नागरिक मामलों के प्रमुख का है.
लेकिन असल में वह फ़लस्तीन प्राधिकरण और इसराइली सरकार को जोड़ने वाली राजनीतिक कड़ी हैं.

हमारी उनसे रामल्लाह स्थित उनके दफ़्तर में मुलाक़ात हुई जिस दौरान वह हमास के हमले की निंदा करने से बचते नज़र आए.
उन्होंने दोनों ओर आम लोगों की मौत होने की निंदा की. और इसके बाद एक चेतावनी जारी की
उन्होंने कहा, “इसराइली सरकार का मुख्य राजनीतिक एजेंडा वेस्ट बैंक और ग़ज़ा पट्टी को वापस लेना है.”
“ग़ज़ा पट्टी और वेस्ट बैंक में सैन्य अभियानों का उद्देश्य पीएलओ और इसराइली सरकार के बीच हुए समझौतों को ख़त्म करते हुए 1967 वाली सीमाओं पर फ़लस्तीनी राज्य की स्थापना के सपने को ख़त्म करना है.”
उन्होंने खुलकर कहा कि अब जब अमेरिका और यूरोपीय संघ इस समस्या के समाधान के रूप में पेश किए गए दोहरे राष्ट्र के प्रस्ताव में नयी जान फूंकने की कोशिश कर रहे हैं तो इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतान्याहू ने कहा है कि फ़लस्तीन प्राधिकरण ग़ज़ा पर इसराइली सुरक्षा कवच के तहत शासन कर सकता है.
उन्होंने कहा, “हम इसराइली टैंक के दम पर ग़ज़ा में नहीं घुसेंगे.”
इसराइल युद्ध से जुड़े इनके दावों को खारिज करते हुए कहता है कि वह ग़ज़ा पट्टी में हमास का ख़ात्मा करना चाहता है.
इसराइली पीएम नेतान्याहू के विदेशी मामलों के सलाहकार डॉ ओफिर फ़ॉक ने बीबीसी को बताया है कि “इसराइल ग़ज़ा पर कब्जा नहीं करना चाहता. कोई भी उम्मीद करेगा कि फ़लस्तीन प्राधिकरण सात अक्टूबर के नरसंहार एवं 1000 से ज़्यादा महिलाओं, बच्चों और पुरुषों की हत्या की निंदा करेगा.
"दुर्भाग्य से फ़लस्तीन प्राधिकरण अब तक इस तरह के अत्याचारों की निंदा करने में विफल रहा है.”

इकलास सालेह की माँ मौना सालेह अपनी बेटी के भविष्य को लेकर चिंतित हैं.
वह कहती हैं, “वे हमारे बच्चों में भय पैदा कर रहे हैं. एक दिन ये बच्चे बड़े होंगे और याद करेंगे कि किस तरह उनके पिता को बिना किसी ग़लती के उनकी आँखों के सामने मार दिया गया था.”
अल-शेख़ ने भी यही बात दोहराते हुए कहा, “अगर इस युद्ध के बाद राजनीतिक विकल्प या समाधान सामने नहीं आया तो सिर्फ़ फ़लस्तीन ही नहीं पूरे क्षेत्र में चरमपंथ का उभार देखने को मिलेगा.”
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