इसराइल हमास युद्ध: जब ग़ज़ा के अल-शिफ़ा हॉस्पिटल में पहुंची बीबीसी की टीम

- Author, लूसी विलियमसन, अल-शिफ़ा हॉस्पिटल, ग़ज़ा सिटी
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
हम ग़ज़ा के अल-शिफ़ा हॉस्पिटल के कैंपस में जैसे-तैसे दाखिल हुए. रात के अंधेरे में एक गिरी हुई दीवार के ऊपर से.
मंगलवार को एक बख़्तरबंद बुलडोज़र की मदद से हॉस्पिटल की दीवार के एक हिस्से को ढहा दिया गया था ताकि इसराइली फौज के उस कैंपस में दाखिल होने का सुरक्षित रास्ता तैयार किया जा सके.
बीबीसी और एक अन्य टेलीविजन चैनल के क्रू के लोग उन पहले और चुनिंदे पत्रकारों में से थे जिन्हें इसराइली मिलिट्री ने अल-शिफ़ा अस्पताल दिखाने के लिए आमंत्रण दिया था.
इसराइली मिलिट्री हमें ये दिखाना चाहती थी कि हमास किस तरह से अल-शिफ़ा हॉस्पिटल का इस्तेमाल जंग के लिए कर रहा है.
वहां जरा सी भी अतिरिक्त रोशनी हमारे लिए जोख़िम पैदा कर सकती थी, इसलिए हम धीरे-धीरे रास्ता टटोलते हुए कैंपस में आगे बढ़ रहे थे. हमारे आगे भारी-भरकम हथियारों से लैस सैनिक रास्ता दिखा रहे थे और हम उनके पीछे अस्थाई तंबुओं, मलबे और सोये हुए लोगों के बीच से रास्ता बनाते हुए आगे बढ़ रहे थे.
भूमिगत सुरंगों का नेटवर्क

हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने बताया कि वे बिजली और दाना-पानी के बिना पिछले कई दिनों से काम कर रहे हैं. इसकी वजह से गंभीर रूप से बीमार मरीज़ मर रहे हैं जिसमें नवजात बच्चे भी शामिल हैं.
ग़ज़ा की लड़ाई के कारण बेघर हुए बहुत से लोगों ने अल-शिफ़ा हॉस्पिटल के कैंपस में पनाह ले रखी है.
लेकिन इसराइल का कहना है कि हमास भूमिगत सुरंगों का एक बड़ा नेटवर्क मेनटेन करता है और ये टनल्स अल-शिफ़ा हॉस्पिटल के नीचे से भी होकर गुजरती हैं.
हमारे साथ चल रहे इसराइली सैनिकों ने मास्क पहन रखे थे. हम मलबे और बिखरी हुई कांच के ऊपर से चलकर एक बिल्डिंग की तरफ़ बढ़ रहे थे.
वहां का मंज़र साफ़ तौर से ये बयान कर रहा था कि अल-शिफ़ा हॉस्पिटल का माहौल किस कदर अभी तक तनावपूर्ण बना हुआ है.
इसराइली मिलिट्री

इमेज स्रोत, AFP
एक दिन पहले ही इसराइल ने इस हॉस्पिटल का कंट्रोल अपने हाथों में लिया था. और हम वहां इसलिए मौजूद थे क्योंकि इसराइल दुनिया को ये दिखलाना चाहता है कि वे वहां क्यों हैं?
अस्पताल के एमआरआई यूनिट में रोशनी थी.
इसराइली मिलिट्री के लेफ्टिनेंट कर्नल जोनाथन कॉनरिकस ने हमें वहां रखे हुए कलाशनिकोव (रूसी असॉल्ट राइफ़ल), गोला-बारूद और बुलेट प्रूफ़ जैकेट्स के तीन छोटे ढेर दिखाए.
उन्होंने बताया कि इसराइली फौज ने 15 राइफ़लें और कुछ ग्रेनेड बरामद किए हैं.
लेफ्टिनेंट कर्नल कॉनरिकस ने हमें कुछ मिलिट्री बुकलेट्स, पैम्फलेट्स (पर्चियां) और एक नक़्शा दिखाया जिनके बारे में उनका कहना था कि इसमें अस्पताल में आने-जाने का रास्ता चिह्नित किया हुआ है.
अल-शिफ़ा हॉस्पिटल

लेफ्टिनेंट कर्नल कॉनरिकस का कहना था कि हमास अल-शिफ़ा अस्पताल का इस्तेमाल मिलिट्री उद्देश्यों से करता है.
उन्होंने कहा, "हमने यहां कई कम्प्यूटर्स और अन्य मशीनें बरामद की हैं जो मौजूदा हालात पर रोशनी डाल सकती है. उम्मीद है कि इससे बंधकों के बारे में कुछ पता चल सकेगा."
लेफ्टिनेंट कर्नल कॉनरिकस ने बताया कि अल-शिफ़ा हॉस्पिटल में मिले लैपटॉप में बंधकों की तस्वीरें और वीडियो मिले हैं. ये वो बंधक हैं जिन्हें इसराइल पर हमले के बाद ग़ज़ा लाया गया था.
इसमें इसराइली पुलिस की ओर से हाल ही में जारी की गई वो वीडियो फुटेज भी मिली जो 7 अक्टूबर के हमले के बाद गिरफ़्तार हमास के लड़ाकों से पूछताछ की थीं.
हालांकि लैपटॉप में क्या कॉन्टेंट था, इसके बारे में हमें बताया तो गया लेकिन दिखाया नहीं गया. लेफ्टिनेंट कर्नल कॉनरिकस ने ये संकेत दिए कि कुछ दिनों पहले तक हमास अल-शिफ़ा अस्पताल में मौजूद था.
ग्राउंड ऑपरेशन

लेफ्टिनेंट कर्नल कॉनरिकस कहते हैं, "आख़िर में ये एक बड़ी समस्या की छोटी सी झलक है. हमास इसलिए यहां नहीं है क्योंकि उसने ये भांप लिया था कि हम यहां आ रहे हैं. ये संभवत: मजबूरी में वे छोड़ गए हैं. हमारा अंदाज़ा है कि यहां और भी बहुत कुछ है."
अल-शिफ़ा हॉस्पिटल के दर तक पहुंचने के लिए इसराइली मिलिट्री ने हफ़्तों तक जंग लड़ी है. पिछले कुछ दिनों में यहां तक पहुंचने वाले रास्ते ग़ज़ा की अब तक की सबसे भीषण जंग के गवाह रहे हैं.
हमारे हॉस्पिटल दौरे को बेहद सख़्ती से नियंत्रित किया गया था. हमारे पास ग्राउंड पर रहने के लिए बहुत कम समय था और हम यहां के डॉक्टरों और मरीज़ों से बात करने की स्थिति में नहीं थे.
हमारी ग़ज़ा यात्रा एक बख़्तरबंद फौजी गाड़ी में हुई थी. इस बात का अच्छे से ख़्याल रखा गया था कि रात के अंधेरे में हमारे यहां आने की किसी को ख़बर न लगे.
हम उसी रास्ते से यहां पहुंचे जहां इसराइल ने कुछ हफ़्ते पहले अपने पहले बड़े ग्राउंड ऑपरेशन को अंज़ाम दिया था.
'ये एक सीक्रेट रेसिपी है...'

मिलिट्री की बख़्तरबंद गाड़ी के भीतर स्क्रीन पर खेतीहर ज़मीन धीरे-धीरे मलबे से अटे पड़े बदतरीन रास्तों में बदल गईं. मलबे में तब्दील हो चुकी इमारतों का धुंधला सा अंदाज़ा लग रहा था.
ग़ज़ा सिटी के दक्षिण में हम गाड़ी बदलने के लिए रुके. विस्फोट के बाद तुड़े-मुड़े सीमेंट और सरिये के ढेर के ऊपर से गुजरकर हमने गाड़ी बदली.
वहां इसराइली सैनिकों की एक छोटी टुकड़ी उलाव जलाकर बैठी थी. टैंकों की कतार के बगल वे खाने के लिए कुछ पका रहे थे. एक सैनिक फुसफुसाया, "ये एक सीक्रेट रेसिपी है."
वहां एक गिरी हुई इमारत अजीबोगरीब तरीके से दिख रही थी. इमारत की एक दुकान का लोहे का मुड़ा-तुड़ा दरवाज़ा हवा में झूल रहा था, वो आधा खुला हुआ था.
दीवार पर लाल रंग की स्प्रे पेंट से स्टार ऑफ़ डेविड बना हुआ था. उसके भीतर किसी ने 'आईडीएफ़' (इसराइली डिफेंस फोर्स) ने लिख दिया था और उसके ऊपर लिखा था, "नेवर अगेन (फिर कभी नहीं)."
लड़ाई के समीकरण

सात अक्टूबर के हमले ने हमास के साथ इसराइल की लड़ाई के समीकरण बदल दिए हैं.
इसराइल ने कसम ली है कि वो हमास की राजनीतिक और मिलिट्री ताक़त को बर्बाद करके सालों से चले आ रहे विवाद को ख़त्म कर देगा. हमास को ब्रिटेन और अमेरिका समेत कई देशों ने चरमपंथी संगठन घोषित कर रखा है.
इसका मतलब था कि इसराइल को ग़ज़ा सिटी के बीचोबीच पहुंचना होगा और अल-शिफ़ा हॉस्पिटल भी इसमें शामिल था.
इसराइली फौज अभी भी हॉस्पिटल के नीचे सुरंगों की तलाश कर रही है. उनका मानना है कि हमास के लड़ाके इन्हीं रास्तों से वहां से निकले होंगे और मुमकिन है कि उनके साथ कुछ बंधक भी हों.
इसराइल की लड़ाई में इस अस्पताल की इमारत पर काफी जोर रहा है. वो इसे हमास का कमांड सेंटर बताता है. उसका कहना है कि हमास यहीं से अपनी गतिविधियों को अंज़ाम देता था.
ग़ज़ा सिटी के सेंटर में मौजूद इस अस्पताल तक पहुंचने का रास्ता बनाने के लिए इसराइली फौज को हफ्तों जंग लड़नी पड़ी है.
और सूचना के इस निर्मम युद्ध में इसराइल इसे अपनी सच्चाई बता रहा है.
अस्पताल कैंपस की 24 घंटों की तलाशी के बाद इसराइल ने कहा है कि उसे यहां हथियार और मशीनें मिली हैं जिससे हमास के लड़ाकों और बंधकों के बारे में जानकारी मिल सकती है.
लेकिन अभी तक इसराइल के हाथ न तो हमास के लड़ाके लगे हैं और न ही बंधक.
हम अस्पताल से बाहर निकले और ग़ज़ा के कोस्टल रोड (तटीय सड़क) की ओर जाने वाले रास्ते पर तेज़ी से बढ़े. ग़ज़ा शहर पर अब टैंकों का राज है.
यहां इतने बड़े पैमाने पर बर्बादी हुई है कि भुतहा से दिखने वाले रास्ते किसी भूकंप प्रभावित क्षेत्र की याद दिलाते हैं.
ये साफ़ है कि इन रास्तों पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए इसराइल को कितनी बड़ा लड़ाई लड़नी पड़ी है.
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