हिज़बुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह की धमकी पर इसराइल ने दिया जवाब- बेरूत को ग़ज़ा बना देंगे...

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लेबनान के ईरान समर्थित चरमपंथी समूह हिज़बुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह ने शनिवार को इसराइल-हमास युद्ध पर अपना दूसरा भाषण दिया है.
शनिवार को ये भाषण हिज़बुल्लाह के टीवी चैनल अल-मनार पर प्रसारित हुआ. 11 नवंबर को हिज़बुल्लाह 'शहीद दिवस' मनाता है.
नसरल्लाह ने कहा कि इसराइल फ़लस्तीनियों से ये कहना चाहता है कि 'विद्रोह का रास्ता छोड़ दें क्योंकि इसकी क़ीमत बहुत ज़्यादा होगी.'
नसरल्लाह ने कहा कि इसराइल कभी भी अपना मक़सद हासिल नहीं कर पाएगा क्योंकि ग़ज़ा में जो हो रहा है उससे भविष्य की पीढ़ियां और अधिक मज़बूत विरोध करेंगी.
नसरल्लाह के बयान पर इसराइल ने सख़्त प्रतिक्रिया दी है. इसराइल के रक्षामंत्री योआव गैलेंट ने नसरल्लाह के भाषण के बाद कहा है कि "हिज़बुल्लाह एक गंभीर ग़लती करने के क़रीब पहुंच गया है. जो इसकी क़ीमत चुकाएंगे वो सबसे पहले लेबनान के नागरिक होंगे. हम जो ग़ज़ा में कर रहे हैं, हम जानते हैं उसे बेरूत में कैसे करना है. बेरूत का भी वही हाल होगा जो ग़ज़ा का है जहां से वो लोग अपना घर छोड़कर सफेद झंडे उठाकर भाग रहे हैं."
इस्लामी देशों को चेताया

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नसरल्लाह ने कहा है कि इसराइल पर दक्षिणी लेबनान की तरफ़ से हमले जारी रहेंगे. उन्होंने कहा कि ये हमले ग़ज़ा में चल रहे इसराइल-हमास युद्ध में फ़लस्तीनियों का समर्थन करने के लिए किए जा रहे हैं.
नरसल्लाह ने दावा किया है कि पिछले एक सप्ताह में हिज़बुल्लाह ने इसराइल पर हमले तेज़ किए हैं और ड्रोन विमानों के अलावा अधिक ताक़तवर मिसाइलें इस्तेमाल की हैं. उन्होंने कहा कि हिज़बुल्लाह ने इसराइल के और अधिक भीतरी इलाक़ों में हमले किए हैं.
नसरल्लाह ने अपने भाषण में इस्लामी देशों से इसराइल के ख़िलाफ़ एकजुट होने की अपील भी की है.
शनिवार को ही सऊदी अरब की राजधानी रियाद में इस्लामी और अरब देशों का असाधारण संयुक्त सम्मेलन हुआ है जिसे आपात सम्मेलन कहा गया है.
इस सम्मेलन में अरब और इस्लामी दुनिया के नेताओं ने इसराइल से तुरंत संघर्ष विराम करने की अपील की है.
'संघर्ष विराम का विरोध'
नसरल्लाह ने कहा फ़लस्तीनी इस सम्मेलन में शामिल नेताओं से ये नहीं कह रहे हैं कि वो अपनी सेनाएं फ़लस्तीन को आज़ाद करने के लिए भेज दें.
नसरल्लाह ने कहा कि फ़लस्तीनी लोग ये मामूली गुज़ारिश कर रहे हैं कि और मुस्लिम दुनिया के नेता एकजुट हों और अमेरिका से तुरंत युद्ध को रोकने के लिए कहें.
नसरल्लाह ने कहा, "क्या 57 अरब और इस्लामी देश ग़ज़ा के लिए चौकी को खुलवाने और वहां मदद पहुंचाने और घायलों को बचाने में समर्थ नहीं हैं."
मिस्र की रफ़ाह बॉर्डर चौकी के संदर्भ में नसरल्लाह ने कहा, "दुनिया इस निर्णय और इस क़दम का इंतज़ार कर रही है."
अपने ताज़ा भाषण में नसरल्लाह ने कहा है कि "अमेरिका और उसका 'पिट्ठू ब्रिटेन' ग़ज़ा में जारी युद्ध को नियंत्रित कर रहे हैं और यही देश संघर्ष विराम का विरोध कर रहे हैं."
'ग़ज़ा के लोगों के समर्थन में'
नसरल्लाह ने कहा है कि इस समय अमेरिका ही इस युद्ध को रोक सकता है.
उन्होने कहा कि "इसराइल की सरकार में इस समय नेतन्याहू और गैलेंट जैसे लोग हैं जो सिर्फ़ अपना फ़ायदा चाहते हैं. युद्ध रोकने का सभी दबाव अमेरिका पर बनाया जाना चाहिए."
नसरल्लाह ने कहा है कि अभी सबसे अहम ये है कि इसराइल, जो हज़ारों बच्चों और औरतों को मार रहा है, को लेकर दुनिया के विचार बदल रहे हैं.
उन्होंने कहा, "ये घटनाक्रम इसराइल का विरोध कर रहे रेज़िस्टेंस और ग़ज़ा के लोगों के समर्थन में है."
उन्होने कहा कि ग़ज़ा में जारी इसराइल की बर्बरता से फ़लस्तीनियों का संघर्ष और मज़बूत होगा.
उन्होंने कहा कि ये धारणा बदल रही है कि इसराइली शांतिप्रिय लोग हैं. इसराइल के रिश्ते सामान्य करने के प्रयास धराशायी हो रहे हैं.
इसराइल पर हमले तेज़ किए

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नसरअल्लाह ने अपने भाषण में बताया है कि हिज़बुल्लाह ने हाल के दिनों में इसराइली के ख़िलाफ़ बुर्कान रॉकेट का इस्तेमाल किया है. ये रॉकेट आधा टन तक विस्फोटक ले जा सकता है.
नसरल्लाह ने ये भी का कि वो पहली बार ये बताना चाहते हैं कि हिज़बुल्लाह इसराइल के ऊपर जासूसी ड्रोन भेज रहा है और कई बार ये ड्रोन हाइफ़ा तक पहुंच रहे हैं.
उन्होंने बताया कि इनमें से कुछ ड्रोन को मार गिराया गया जबकि कई ड्रोन जानकारियां जुटाकर वापस लौटे हैं.
इसी बीच लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी का कहना है कि इसराइली ड्रोन ने लेबनान-इसराइल सीमा से क़रीब 50 किलोमीटर दूर, लेबनान के भीतर हवाई हमले किए हैं.
अभी तक लेबनान की सीमा के सबसे भीतर हुए इस ड्रोन हमले में एक वाहन को निशाना बनाया गया है.
हवाई हमले
रिपोर्ट के मुताबिक़, ज़ाहरानी इलाक़े में केले लेकर जा रहे एक पिक अप ट्रक पर हमला हुआ. इस हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है.
इस ड्रोन हमले के कुछ घंटे बाद जारी बयान में इसराइली सेना ने कहा है कि उसके लड़ाकू विमानों ने हिज़बुल्लाह के कई ठिकानों को निशाना बनाया है.
हालांकि, ये स्पष्ट नहीं है कि जिन हवाई हमलों का ज़िक्र इसराइली सेना ने किया है, वो इस ट्रक हमले से संबंधित हैं या नहीं.
पिछले एक महीने से अधिक समय से, इसराइल और हिज़बुल्लाह के बीच सीमा पर लगातार गोलीबारी हो रही है. अभी तक हुए अधिकतर हमले सैन्य ठिकानों या खुले मैदानों तक सीमित रहे हैं. अभी तक दोनों ही पक्ष संघर्ष को बढ़ाने से बचते हुए नज़र आ रहे हैं.
हिज़बुल्लाह समर्थित एक मीडिया संस्थान ने शुक्रवार को दावा किया था कि अभी तक की लड़ाई में हिज़बुल्लाह ने अभी तक 120 से अधिक इसराइली सैनिकों को मारा और घायल किया है. अभी तक की लड़ाई में 60 से अधिक हिज़बुल्लाह लड़ाके भी मारे गए हैं.
हिज़बुल्लाह क्या है?

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हिज़बुल्लाह लेबनान में ईरान से समर्थन प्राप्त शिया इस्लामी राजनीतिक पार्टी और अर्द्धसैनिक संगठन है. वर्ष 1992 से इसकी अगुवाई हसन नसरल्लाह कर रहे हैं. इस नाम का मायने ही अल्लाह का दल है.
1980 के दशक की शुरुआत में लेबनान पर इसराइली कब्ज़ें के दौरान ईरान की वित्तीय और सैन्य सहायता से हिज़बुल्लाह का उदय हुआ. ये दक्षिणी लेबनान में पारंपरिक रूप से कमज़ोर शियाओं की रक्षा करने वाली ताकत के रूप में उभरा. हालांकि, इसकी वैचारिक जड़ें 1960 और 1970 के दशक में लेबनान में शिया पुनरुत्थान तक जाती हैं.
वर्ष 2000 में इसराइल के पीछे हटने के बाद हिज़बुल्लाह ने अपनी सैन्य टुकड़ी इस्लामिक रेज़िस्टेंस को मज़बूत करना जारी रखा.
ये समूह रेज़िस्टेंस ब्लॉक पार्टी के प्रति अपनी वफ़ादारी के चलते धीरे-धीरे लेबनान की राजनीतिक व्यवस्था में इतना अहम बन गया कि इस देश की कैबिनेट में वीटो शक्ति तक हासिल कर ली.
हिज़बुल्लाह पर वर्षों से इसराइली और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए बमबारी और षड्यंत्र रचने का आरोप लगता रहा है. पश्चिमी देश, इसराइल, अरब खाड़ी देशों और अरब लीग हिज़बुल्लाह को 'आतंकवादी' संगठन मानते हैं.
हिज़बुल्लाह के सैन्य, सुरक्षा और राजनीति के क्षेत्र में प्रभाव और साथ ही इसकी ओर से की जाने वाली सामाजिक सेवा के बल पर इसने अपनी छवि एक देश के अंदर अलग देश के तौर पर बनाई है. हिज़बुल्लाह की उसके प्रतिद्वंद्वी खूब आलोचना भी करते हैं. कुछ मायनों में इस संगठन की क्षमता लेबनान की सेना से भी ज़्यादा हो गई है. और इसकी झलक इसराइल के ख़िलाफ़ साल 2006 के युद्ध में दिखी भी थी.
कुछ लेबनानी हिज़बुल्लाह को अपने देश की स्थिरता के लिए ख़तरा मानते हैं, लेकिन ये संगठन शिया समुदाय के बीच में बहुत लोकप्रिय है.
हिज़बुल्लाह प्रमुख कौन हैं?

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हसन नसरल्लाह एक शिया आलिम (धार्मिक विद्वान) हैं जो लेबनान में हिज़बुल्लाह ग्रुप के प्रमुख हैं. इस ग्रुप को इस समय लेबनान के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक दलों में गिना जाता है जिसकी अपनी सशस्त्र विंग भी है.
हसन नसरल्लाह को, जो लेबनान और दूसरे अरब देश दोनों जगह लोकप्रिय हैं, हिज़बुल्लाह का केंद्रीय चेहरा माना जाता है. उन्होंने इस समूह के इतिहास में निर्णायक भूमिका निभाई है.
उनके ईरान और अली ख़ामनेई के साथ बहुत निकट के और विशेष संबंध हैं. इस वास्तविकता के बावजूद कि हिज़बुल्लाह को अमेरिका की ओर से आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल किया गया है, न तो ईरान के नेताओं और न ही नसरल्लाह ने अपने निकट संबंधों को कभी छिपाया.
हसन नसरल्लाह के जितने उत्साही समर्थक हैं उतने ही उनके दुश्मन भी हैं. इसी वजह से वह इसराइल के हाथों मारे जाने के भय से वर्षों से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए. लेकिन इसी वजह से उनके समर्थक उनके भाषणों से वंचित रहते हैं.
हसन नसरल्लाह की पैदाईश के कुछ ही समय बाद लेबनान में गृह युद्ध शुरू हो गया.
हसन नसरल्लाह बेरूत के पूरब में एक ग़रीब मोहल्ले में पैदा हुए. उनके पिता एक छोटी सी दुकान के मालिक थे और हसन उनके नौ बच्चों में सबसे बड़े थे.
जब लेबनान में गृह युद्ध शुरू हुआ तो उनकी उम्र पांच साल थी. यह एक विनाशकारी युद्ध था जिसने भू मध्यसागर के इस छोटे से देश को पंद्रह साल तक अपनी लपेट में रखा और इस दौरान लेबनानी नागरिक धर्म और नस्ल के आधार पर एक दूसरे से लड़े.
इस दौरान ईसाई और सुन्नी मिलिशिया समूहों पर आरोप लगा कि वह विदेशों से मदद हासिल करते हैं.
युद्ध की शुरुआत की वजह से हसन नसरल्लाह के पिता ने बेरूत छोड़ने और दक्षिणी लेबनान में अपने पैतृक गांव वापस जाने का फ़ैसला किया जहां शिया बहुसंख्यक थे.
हसन नसरल्लाह पंद्रह साल की उम्र में उस समय के सबसे महत्वपूर्ण लेबनानी शिया राजनीतिक-सैनिक समूह के सदस्य बन गए जिसका नाम अमल मूवमेंट था. यह एक प्रभावी और सक्रिय समूह था जिसकी बुनियाद ईरानी मूसा सदर ने रखी थी.
इस दौरान नसरल्लाह ने अपनी धार्मिक शिक्षा भी शुरू की. नसरल्लाह के शिक्षकों में से एक ने राय दी कि वह शेख़ बनने का रास्ता चुन लें और नजफ़ जाएं. हसन नसरल्लाह ने यह राय मान ली और सोलह साल की उम्र में इराक़ के शहर नजफ़ चले गए.
हसन नसरल्लाह ने नजफ़ में केवल दो साल शिक्षा प्राप्त की और फिर उन्हें यह देश छोड़ना पड़ा लेकिन नजफ़ में मौजूदगी ने इस युवा लेबनानी के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला. उनकी मुलाक़ात नजफ़ में अब्बास मूसवी नाम के एक और आलिम से भी हुई.

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मूसवी कभी लेबनान में मूसा सदर के शागिर्दों में गिने जाते थे. वह ईरान के क्रांतिकारी नेता आयातुल्लाह ख़ुमैनी के राजनीतिक दृष्टिकोण से बहुत प्रभावित थे. वह नसरल्लाह से आठ साल बड़े थे और बहुत जल्द उन्होंने एक कठोर शिक्षक और प्रभावी लीडर का रोल संभाल लिया.
लेबनान वापस आने के बाद ये दोनों स्थानीय गृह युद्ध में शामिल हो गए. लेकिन इस बार नसरल्लाह अब्बास मूसवी के पैतृक शहर गए जहां की अधिकतर आबादी शिया थी.
उस दौर में नसरल्लाह अमल आंदोलन के सदस्य बने और अब्बास मूसवी के बने मदरसे में शिक्षा भी लेते रहे.
हसन नसरल्लाह की लेबनान वापसी के एक साल बाद ईरान में क्रांति आई और रूहुल्लाह ख़ुमैनी ने सत्ता पर क़ब्ज़ा कर लिया. यहां से न केवल लेबनान के शिया समुदाय का ईरान के साथ संबंध बिल्कुल बदल गया बल्कि उनका राजनीतिक जीवन और सशस्त्र संघर्ष भी ईरान में होने वाली घटनाओं और दृष्टिकोण से बहुत प्रभावित हुआ.
हसन नसरल्लाह ने बाद में तेहरान में ईरान के उस समय के नेताओं से मुलाक़ात की और ख़ुमैनी ने उन्हें लेबनान में अपना प्रतिनिधि बना दिया.
यहीं से हसन नसरल्लाह के ईरान के दौरों की शुरुआत हुई और ईरानी सरकार में निर्णायक और शक्तिशाली केंद्रों से उनके संबंध स्थापित हुए.
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