ग़ज़ा में इसराइल-हमास संघर्ष के बीच यूक्रेन में क्या हो रहा है?

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, कैटरीना खिनकुलोवा
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस लैंग्वेजेज, यूरोप हब एडिटर
नवंबर की शुरुआत के साथ ही यूक्रेन ने बताया कि पिछले 24 घंटों में उसके 120 ठिकानों पर बमबारी हो चुकी है. इस साल की शुरुआत से लेकर अब तक का ये सबसे बड़ा हमला था.
लेकिन पूरी दुनिया का ध्यान इस समय ग़ज़ा में चल रहे इसराइल और हमास के बीच संघर्ष पर है.
इस बीच यूक्रेन को इस बात का डर सताने लगा है कि रूसी हमले के बाद मिल रहा उसका समर्थन घट सकता है.
यूक्रेन को अपने सहयोगियों से सैन्य और आर्थिक सहायता नहीं मिली तो इस बात संभावना कम ही है कि वो जंग में रूस के सामने टिक पाएगा.
यूक्रेन को अपने शहरों को बचाने के लिए आसमान में हो रहे रूसी हमलों का बचाव करना जरूरी है. आइए देखते हैं कि रूस-यूक्रेन के मोर्चे पर पिछले महीने क्या हुआ है?
लंबे युद्ध में टिके रहना कितना अहम

इमेज स्रोत, Getty Images
कई विश्लेषकों ने कहा है कि रूस-यूक्रेन युद्ध में जो भी पक्ष लंबे समय तक नुकसान बर्दाश्त करने की क्षमता हासिल कर लेगा वह इसे जीतने की स्थिति में होगा.
यूक्रेन के कमांडर-इन चीफ वेलेरी ज़ालुज़ेनी ने भी इस मुद्दे पर बात की है.
'द इकोनॉमिस्ट' के लिए एक लेख में उन्होंने लिखा है, "पहले विश्व युद्ध की तरह ही हम टेक्नोलॉजी के उस स्तर पर पहुंच गए हैं, जिसने हमें एक जगह ठिठका दिया है."
पिछले पांच महीनों के दौरान उन्होंने रूस से अपनी जमीन छीनने की कोशिशों का ब्योरा दिया है. उन्होंने लिखा है कि इस अवधि में यूक्रेनी सेना सिर्फ 17 किलोमीटर आगे बढ़ पाई है.
रूस इस वक्त यूक्रेन की 17.5 फीसदी क्षेत्र पर कब्ज़ा किए हुए है. साल 2023 में सीमा से सटे इस इलाके में शायद ही कोई परिवर्तन हुआ है.

पिछले कुछ हफ्तों के दौरान पूर्वी यूक्रेन के आविदवका में भीषण लड़ाई हुई है. यहां दोनों पक्षों को भारी नुकसान हुआ है. लेकिन दोनों शायद ही ज्यादा आगे बढ़ पाए हैं.
ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय का आकलन है कि 2023 में आविदवका को काफी ज्यादा नुकसान हुआ होगा.
जनरल ज़ालुज़ेनी ने बताया कि कैसे दोनों ओर के सेना एक ही तरह की एडवांस टेक्नोलॉजी से लैस है.
इससे दोनों ये पता लगा लेती हैं कि विपक्षी सेना क्या कर रही है. नतीजतन कोई भी सेना आगे नहीं बढ़ पा रही है. इस तरह दोनों अपने मकसद में नाकाम हैं.
उन्होंने यूक्रेन के सहयोगी देशों से ऐसे और हथियारों की मांग की है जो ज्यादा सटीक मार कर सकें. इनमें एंटी आर्टिलरी क्षमता हो और जो बारूदी सुरंग को हटा सकें. इनमें रोबोटिक्स भी शामिल होने चाहिए.
अमेरिका और यूक्रेन

इमेज स्रोत, Getty Images
अमेरिकी कांग्रेस में नए स्पीकर के आने के बाद इस बात की समीक्षा की जा रही है यूक्रेन के पार्टनर पश्चिमी देशों ने उसे हथियार और वित्तीय मदद देने में कितनी तत्परता दिखाई. यूक्रेन तक ये मदद कितनी तेजी और बगैर अड़चन के पहुंची.
लुइसियाना के रिपब्लिकन सांसद माइक जॉनसन 25 अक्टूबर को अमेरिकी कांग्रेस के स्पीकर चुने गए.
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने 106 अरब डॉलर के सिक्योरिटी फंडिंग पैकेज को मंजूरी दे दी थी. इसमें 61 अरब डॉलर सिर्फ यूक्रेन की मदद के लिए थे.
नए स्पीकर ने यूक्रेन को अमेरिकी मदद में काफी प्राथमिकता दी है.
उन्होंने कहा है, "हम यूक्रेन में पुतिन को जीतने नहीं दे सकते. साथ ही अमेरिका को ये भी सुनिश्चित करना होगा कि व मध्य पूर्व में अपने अहम सहयोगी इसराइल के साथ खड़ा रहे."
माइक जॉनसन ने यूक्रेन को और मदद का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि व्हाइट हाउस को इस बारे में जिम्मेदारी के साथ और साफ मकसद से काम करना होगा.
यूक्रेन के शीर्ष सुरक्षा प्रमुख यानी राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के प्रमुख ओलेक्सी देनिलोव कहते हैं कि हमें मदद से जुड़ी हर जानकारी साझा करने में कोई दिक्कत नहीं है. इस बारे में हर विकल्प खुले हैं.
इसके बावजूद भी अगर यूक्रेन को नई मदद मिलने में देरी होती है तो युद्ध के मैदान में इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है.
दूसरी ओर अमेरिकी सांसदों में से कुछ का कहना है कि यूक्रेन को दी जा रही मदद में थोड़ी कटौती कर ताइवान को दी जाए.
यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोदोमीर ज़ेलेंस्की ने माना है कि ग़ज़ा में इसराइल और हमास के बीच संघर्ष ने रूस-यूक्रेन युद्ध से ध्यान हटा दिया है. ये बात उन्होंने यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सला वोन डार लेयन के साथ मीडिया को संबोधित करते हुए कही.

ज़ेलेंस्की का नज़रिया

ज़ेलेंस्की ने उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि अमेरिका और यूरोपीय यूनियन यूक्रेन को रूस से समझौता कर लेने के लिए दबाव डाल रहे हैं.
चार नवंबर को उन्होंने उनके साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "हर कोई मेरे रवैये को जानता है और संयोग से यूक्रेनी समाज का भी यही रवैया है. कोई भी हम पर दबाव नहीं डाल रहा है. यूरोपीय यूनियन के और न ही अमेरिका के नेता ने हम पर कोई दबाव डाला."
उन्होंने उन ख़बरों का खंडन किया कि रूस से कोई बातचीत चल रही है. लेकिन ये जरूर कहा कि इसराइल और हमास के संघर्ष ने दुनिया का ध्यान रूस-यूक्रेन युद्ध से ध्यान हटाया है.
उन्होंने भी यूक्रेन के सहयोगी देशों, अमेरिका, यूरोप और एशिया के देशों से इसे मदद जारी रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि यूक्रेन यूरोप साझा मूल्यों की रक्षा करने के लिए युद्ध कर रहा है और वो मूल्य है- लोकतंत्र.
मैदान-ए-जंग
अमेरिकी मीडिया आउटलेट एनबीसी के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "विकल्प काफी ख़तरनाक हैं. अगर रूस हम सबको मार डालता है तो फिर वो नेटो देशों पर हमला कर देगा."
यूक्रेन ने रूस के कब्जे वाले सभी इलाकों को वापस ले लेने की कसम खाई है. इसमे क्राइमिया भी शामिल है, जिसे उसने 2014 में खुद में मिला लिया था.
रूस के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने कहा कि युद्ध में कोई गतिरोध नहीं आया है और रूस की सेना जंग के मैदान में आगे बढ़ती रहेगी.
हालांकि रूसी रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी होने वाले रोजाना अपडेट मोर्चे पर घायलों या दूसरी समस्याओं के बारे में कोई जिक्र नहीं है. इसके बजाय सिर्फ यूक्रेन के नुकसान की जानकारी दी जा रही है.
हालांकि रूसी मिलिट्री ब्लॉगर्स ने शीर्ष कमांडरों की ओर से आवदिविका में लड़ रहे रूसी सेनाओं को पर्याप्त ट्रेनिंग न देने की आलोचना की गई है.
नागरिकों पर हमले

इमेज स्रोत, Getty Images
सर्दियों के नजदीक आते ही यूक्रेन की मुख्य चिंताओं में से एक बिजली सप्लाई केंद्रों और परिवहन मार्गों पर रूस के हमलों में होने वाली बढ़ोतरी को लेकर होगी.
रूस की ओर से हमलों का दायरा बढ़ने से यूक्रेन की वायुसेना के लिए प्रभावी सुरक्षा करना मुश्किल हो सकता है.
इस युद्ध के दौरान रूसी टैंक यूनिटों को काफी नुकसान पहुंचा है. यूक्रेन को हर दिन तोपखाने से बमबारी और रॉकेट, मिसाइलों के हमले का सामना करना पड़ रहा है.
सीमा के नजदीकी क्षेत्र रूसी तोपखाने के हमले की जद में हैं. इससे यूक्रेन में बड़ी तादाद में लोग मारे गए हैं और काफी नुकसान हुआ है.
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय कार्यक्रमों से जुड़े कार्यालय में समन्वय निदेशक रमेश राजसिंघम ने 31 अक्टूबर को सुरक्षा परिषद में बताया कि रूसी हमले यूक्रेन के लोगों को असहनीय दर्द दे रहे हैं.
उनमें से चालीस फीसदी से अधिक लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत है. 22 फरवरी को रूस के हमले के बाद में यूक्रेन में हजारों लोग मारे गए हैं.
संयुक्त राष्ट्र ने पहले अपनी जांच में 9,900 नागरिकों के मरने की पुष्टि की थी लेकिन राजसिंघम ने कहा कि मौतों की संख्या इससे ज्यादा हो सकती है.
यूक्रेन को वहां खराब हो रहे स्वास्थ्य व्यवस्था से भी जूझना होगा.
रूसी हमले के बाद डब्ल्यूएचओ ने अस्पताल जैसे बुनियादी हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर पर 1300 हमलों की पुष्टि की है. यह संख्या इसी अवधि के दौरान दुनिया भर में हुए सभी हमलों के 55 फीसदी से भी अधिक है.
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़, इस साल सितंबर की शुरुआत से अब तक 13 हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमले हुए हैं. इनमें 111 हेल्थकेयर कर्मचारी और मरीज़ मारे गए हैं.
अनाज निर्यात सौदा
पिछले महीने यूक्रेनी अधिकारी काला सागर के सटे एक संकीर्ण कॉरिडोर से अनाज ले जाने सफल रहे थे.
ये अनाज रोमानिया और बुल्गारियाई जल मार्ग से तुर्की तक आया था. ऐसा इस खेप पर रूसी हमले से बचने के लिए किया गया था.
यह व्यवस्था केवल सीमित मात्रा में अनाज निर्यात करने की इजाजत देती है. एक अनुमान के मुताबिक अगस्त के बाद से लगभग दस लाख टन अनाज नए मार्ग से यूक्रेनी बंदरगाहों से निकला होगा.
रूसी हमले से पहले यूक्रेन साठ लाख टन अनाज निर्यात कर रहा था. जबकि मौजूदा निर्यात अक्टूबर में किए गए निर्यात का आधार है. फिर भी ये उम्मीद से ज्यादा है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
















