रैपर, मेयर और अब नेपाल के पीएम बनने की राह पर बढ़ रहे बालेन शाह को जानिए

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नेपाल के आम चुनाव में वोटों की गिनती अभी जारी है, लेकिन रैपर से नेता बने बालेन शाह शुरुआती रुझानों में निर्णायक बढ़त लेते दिख रहे हैं. इससे यह संकेत मिल रहा है कि वो देश के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं.
जनवरी तक राजधानी काठमांडू के मेयर रहे शाह का, गुरुवार को हुए आम चुनावों में कई बड़े नेताओं से मुक़ाबला था. इनमें नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली और नेपाली कांग्रेस के गगन थापा भी शामिल हैं.
बीबीसी नेपाली के अनुसार, बालेन शाह की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) 165 प्रत्यक्ष निर्वाचित सीटों में से दो-तिहाई से ज़्यादा सीटों पर आगे चल रही है.
नेपाली कांग्रेस दूसरे स्थान पर काफी पीछे है, जबकि यूएमएल तीसरे स्थान पर है.
चुनाव आयोग के अनुसार, शनिवार सुबह तक आरएसपी ने 24 सीटों पर जीत दर्ज की जबकि 93 सीटों पर आगे है. नेपाली कांग्रेस के खाते में एक सीट आई है और वो 11 सीटों पर आगे है. यूएमएल ने अभी तक एक सीट पर जीत दर्ज़ की है जबकि दस सीटों पर आगे है.
अंतिम नतीजे आने में अभी वक़्त है. पहाड़ी क्षेत्र के कारण नेपाल में मतगणना आम तौर पर धीमी होती है.
दूरदराज के इलाकों से मतपेटियां लाने के लिए हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल करना पड़ता है, इसलिए अंतिम परिणाम आने में कई दिन लग सकते हैं.
पिछले आम चुनाव 2022 में अंतिम परिणाम आने में दो हफ़्ते से ज़्यादा समय लगा था.
कौन हैं बालेन शाह?

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35 साल के बालेन शाह ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और कई साल से नेपाल के हिप-हॉप संगीत जगत 'नेफहॉप' से जुड़े रहे हैं.
बीबीसी एक रिपोर्ट के मुताबिक़, बालेन शाह मई 2022 में जब पहली बार नेपाल की राजधानी काठमांडू के मेयर बने तो यह सबके लिए चौंकाने वाला था.
बालेन शाह लोकप्रिय रैपर थे और जब उन्होंने काठमांडू के मेयर चुनाव में ख़ुद को उतारा तभी से उनके नाम चर्चा में आया.
बालेन शाह का जन्म काठमांडू के गैर गाउन में 1990 में हुआ था. बालेन के पिता राम नारायण शाह आयुर्वेद के डॉक्टर हैं और इनकी माँ का नाम ध्रुवदेवी शाह है.
नेपाल के अख़बार माई रिपबल्किा के अनुसार, बालेन बचपन से संगीत प्रेमी थे और टोपियों के शौकीन थे. इनकी पहचान स्ट्रक्चरल इंजीनियर, रैपर, एक्टर, म्यूजिक प्रॉड्यूसर, गीतकार और एक कवि की रही है.
पिछले साल सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ शुरू हुए प्रदर्शनों के दौरान युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता और बढ़ गई. इन प्रदर्शनों में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और आर्थिक ठहराव को लेकर भी गुस्सा था.
इन विरोध प्रदर्शनों में 77 लोगों की मौत हुई, जिनमें कई प्रदर्शनकारी थे जिन्हें पुलिस की गोली लगी.
इसके बाद उस समय के नेता केपी ओली को पद छोड़ना पड़ा था. हालांकि 74 साल के ओली इस चुनाव में फिर मैदान में हैं और उन्होंने जीत का भरोसा जताया है.
शाह ने प्रदर्शनों का समर्थन किया था और एक समय उन्होंने केपी ओली को "आतंकवादी" तक कहा था, जिन्होंने अपने देश से विश्वासघात किया.
उनके ऐसे बयानों के कारण कुछ लोगों का मानना है कि वे देश का नेतृत्व करने लायक नहीं हैं.
मेयर रहते हुए भी उन्हें मानवाधिकार संगठनों की आलोचना का सामना करना पड़ा था.
आरोप था कि राजधानी में सड़कें खाली रखने और बिना लाइसेंस वाले कारोबार पर कार्रवाई के दौरान उन्होंने पुलिस का इस्तेमाल सख़्ती से किया, जिससे फुटपाथ पर सामान बेचने वालों और भूमिहीन लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा.
शाह के चुनाव अभियान ने इस पर बीबीसी के सवालों का जवाब नहीं दिया.
केपी ओली के क्षेत्र में बालेन शाह आगे

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शाह झापा-5 सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जो पारंपरिक रूप से केपी ओली का मजबूत क्षेत्र माना जाता है. अब तक की मतगणना में शाह यहां स्पष्ट बढ़त में दिख रहे हैं.
चुनाव आयोग के अनुसार, बालेन शाह केपी ओली से लगभग 10,000 से अधिक वोटों से आगे चल रहे हैं.
चुनाव प्रचार के दौरान शाह ने मीडिया से दूरी बनाए रखी. मतदान के दिन भी उन्होंने पत्रकारों से सीधे बात करने से इनकार कर दिया और अपने पहचान वाले काले चश्मे में पत्रकारों की भीड़ के बीच से निकल गए.
नेपाल के मीडिया को चिंता है कि अगर वे सत्ता में आए तो यह रवैया आगे भी जारी रह सकता है. हालांकि बीबीसी से बात करने वाले कई युवा मतदाताओं का मानना है कि उनकी युवा ऊर्जा ही देश को चाहिए और वे नेपाल के भविष्य का नया अध्याय बन सकते हैं.
प्रमुख चेहरों में नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के नेता पुष्प कमल दहाल प्रचंड रुकुमपुर से अपने प्रतिद्ंद्वी सीपीएन यूएमएल उम्मीदवार से 6,778 वोटों के अंतर से जीत गए हैं.
नेपाली कांग्रेस के शेखर कोइराला मोरांग में 14,000 वोटों से पीछे चल रहे हैं, यहां आरएसपी की रूबिना आचार्य आगे हैं.
नेपाल में कैसे होता है आम चुनाव?

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गुरुवार को मतदाताओं ने केवल अगले नेता के चुनाव के लिए ही वोट नहीं दिया, बल्कि संसद के 275 सदस्यों के चुनाव के लिए भी मतदान किया.
नेपाल का आम चुनाव मिश्रित प्रणाली पर आधारित है. हर मतदाता को दो वोट देने का अधिकार मिला.
165 सांसद फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली से चुने जाते हैं, यानी जिस उम्मीदवार को सबसे ज़्यादा वोट मिलते हैं वह सीट जीतता है.
बाकी 110 सांसदों का चुनाव राष्ट्रीय स्तर पर किसी पार्टी को मिले कुल वोट प्रतिशत के आधार पर होता है.
इस चुनाव में करीब 1.9 करोड़ लोग वोट देने के पात्र थे. मतदान खत्म होने के बाद अधिकारियों ने अनुमान जताया कि मतदान प्रतिशत करीब 60 प्रतिशत रहा.
यह चुनाव क्यों अहम है?

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पिछले साल के प्रदर्शनों के बाद यह चुनाव पुराने और नए नेतृत्व के बीच मुक़ाबले के रूप में देखा जा रहा है.
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी 2022 में हुए आम चुनाव में चौथे स्थान पर रही थी.
करीब 8 लाख पहली बार वोट देने वाले देश के युवाओं ने इस चुनाव में अहम भूमिका निभाई है.
राजनीतिक दलों ने उन्हें रोज़गार, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई और बेहतर शासन के वादों के साथ लुभाने करने की कोशिश की.
पिछले तीन दशकों से नेपाल में अस्थिर गठबंधन सरकारों का दौर रहा है, जिन पर मुख्य रूप से तीन बड़े दलों का दबदबा रहा है.
इस बार किसी बड़े राष्ट्रीय गठबंधन का गठन नहीं हुआ है. इसके कारण यह साफ़ हो सकेगा कि मतदाताओं के बीच अलग-अलग दलों और उम्मीदवारों की वास्तविक स्थिति क्या है.
इस चुनाव में कई नई पार्टियां और नए चेहरे भी सामने आए हैं. लगभग एक-तिहाई उम्मीदवार निर्दलीय हैं.
इन सब संकेतों से लगता है कि नेपाल के कई लोग नई सोच और नए नेतृत्व की तलाश में हैं.
अगर बालन शाह जीतते हैं तो यह नेपाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा, क्योंकि लंबे समय से वही पुराने चेहरे अस्थिर गठबंधन सरकारों का नेतृत्व करते रहे हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.












