टी-20 वर्ल्ड कप: 'बुमराह ना होते तो मैं भी यहां ना होता', संजू सैमसन ने ऐसा क्यों कहा

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- Author, प्रवीण
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
"ये अवॉर्ड जसप्रीत बुमराह को मिलना चाहिए. अगर वो नहीं होते तो मैं यहां नहीं होता."
इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफ़ाइनल मुकाबले में संजू सैमसन को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया.
लेकिन उन्होंने टीम इंडिया के फ़ाइनल में पहुंचने का श्रेय जसप्रीत बुमराह की गेंदबाजी को दिया.
एक ऐसे मुकाबले में जहां टीम इंडिया ने 20 ओवर में 253 रन का बड़ा स्कोर तो खड़ा किया लेकिन आखिरी ओवर तक उसकी जीत तय नहीं थी.
हालांकि किसी तरह से भारत ने इस मैच को सात रन से जीत लिया.
लेकिन जिस मैच में दोनों टीमों ने 499 रन बना डाले हों, वहां भारत और इंग्लैंड के बीच एक ही गेंदबाज बड़ा अंतर साबित हुआ.
और वो रहे जसप्रीत बुमराह. जिन्होंने इंग्लैंड की पारी के 18वें ओवर में 6 रन देकर भारत की मैच में वापसी कराई.
हालांकि इंग्लैंड ने मैच गंवाने के बावजूद भारत को फ़ाइनल से पहले कई सबक दे दिए हैं, जो न्यूजीलैंड के खिलाफ 8 मार्च को खेले जाने वाले फ़ाइनल मुकाबले में उसके काम आ सकते हैं.
'जसप्रीत बुमराह जैसा कोई नहीं'

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इंग्लैंड को आखिरी तीन ओवर में जीत के लिए 45 रन की जरूरत थी. जैकब बेथेल 42 गेंद में 94 रन बनाकर बल्लेबाजी कर रहे थे और सैम करन क्रीज पर उनका साथ दे रहे थे.
उस वक्त ऐसा लग रहा था मानो जैकब बेथेल भारत को फ़ाइनल में नहीं पहुंचने देंगे. पर जसप्रीत बुमराह ने एक बार फिर वही कर दिखाया जिसके लिए उन्हें जाना जाता है.
उन्होंने 18वें ओवर में महज 6 रन दिए और इंग्लैंड को दबाव में डाल दिया. किसी भी टीम के लिए आखिरी दो ओवर में 39 रन बनाना आसान काम नहीं है और वो भी तब जब उसके पांच बल्लेबाज आउट हो चुके हों.

इसके बाद रही सही कसर हार्दिक पंड्या ने अगले ओवर में महज 9 रन खर्च कर पूरी कर दी. 19वें ओवर में पंड्या ने भारत के लिए फ़ाइनल का टिकट तय कर दिया.
पर इस जीत के असली हकदार जसप्रीत बुमराह ही रहे. जिन्होंने चार ओवर में महज 33 रन खर्च किए और हैरी ब्रूक का विकेट भी लिया.
बुमराह की इस परफॉर्मेंस पर संजू सैमसन ने कहा, "बुमराह वर्ल्ड क्लास गेंदबाज हैं. वो ऐसे गेंदबाज हैं जो एक जेनरेशन में एक ही होता है. और उन्होंने एक बार फिर से इस बात को साबित किया है."
कप्तान सूर्यकुमार यादव ने भी माना कि जसप्रीत बुमराह ही इस मुकाबले में भारत और इंग्लैंड के बीच असली अंतर साबित हुए.
उन्होंने कहा, "हमें पता है कि जसप्रीत बुमराह क्या कर सकते हैं और उन्होंने बीते कुछ सालों में क्या किया है. उन्होंने आज भी वही कर दिखाया. वो आगे आए और मैच को इंग्लैंड से दूर कर दिया. ये बेहद स्पेशल परफॉर्मेंस रही."
ग्राउंड फ़ील्डिंग में सुधार ज़रूरी

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फ़ाइनल में पहुंचने के बावजूद इस मुकाबले में भी टीम इंडिया की कई कमजोरियां खुलकर सामने आईं. बीते कुछ मुकाबलों की तुलना में भारत ने अपनी फील्डिंग पर काफी काम किया और उसका असर मैच के नतीजे में भी देखने को मिला.
पांचवें ओवर की पहली गेंद पर अक्षर पटेल ने बैकवर्ड पॉइंट पर पीछे भागते हुए हैरी ब्रूक का शानदार कैच पकड़ा और कहीं ना कहीं भारत को मैच में बढ़त दिला दी.
इस मैच से पहले तक टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने 13 कैच छोड़े थे. कप्तान सूर्यकुमार यादव ने कहा, "फील्डिंग में सुधार का श्रेय फील्डिंग कोच दिलीप को देना चाहिए. हम प्रैक्टिस सेशन में अच्छा कर रहे हैं और अब उसका असर मैच के दौरान भी देखने को मिला."
लेकिन ग्राउंड फील्डिंग पर टीम इंडिया को फ़ाइनल मैच से पहले और भी काम करने की जरूरत है. अगर भारत की ग्राउंड फील्डिंग और ज्यादा अच्छी रहती तो वह इंग्लैंड की टीम को 230 तक रोकने में ही कामयाबी हासिल कर सकती थी.
फील्डिंग के अलावा भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता वरुण चक्रवर्ती साबित हो रहे हैं. वरुण चक्रवर्ती ने चार ओवर में 64 रन खर्च किए. जब-जब इस मैच के दौरान वरुण चक्रवर्ती गेंदबाजी करने आए इंग्लैंड का पलड़ा मैच में भारी होता ही दिखा.
जैकब बेथेल ने उनके पहले ओवर में ही तीन छक्के जड़ दिए थे. सेमीफ़ाइनल से पहले पिछले दो मैचों में भी वरुण चक्रवर्ती ने 8 ओवर में 87 रन खर्च किए. ऐसी स्थिति में फ़ाइनल के लिए वरुण चक्रवर्ती को प्लेइंग 11 में बनाए रखना टीम इंडिया के लिए बेहद मुश्किल फैसला हो सकता है.
छठा गेंदबाज और अभिषेक शर्मा

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फील्डिंग और वरुण चक्रवर्ती के अलावा दो और पहलू हैं जो टीम इंडिया के लिए बड़ी चिंता की बात हैं. वो हैं अभिषेक शर्मा का खराब फॉर्म और छठे गेंदबाज की कमी.
20वें ओवर में जब इंग्लैंड को जीत के लिए 30 रन चाहिए थे तब भी कप्तान के सामने जो सबसे बड़ा चैलेंज था, वो था कि किसे गेंद थमाई जाए. अर्शदीप, बुमराह और हार्दिक के ओवर्स का कोटा पूरा हो चुका था.
ऐसे में अक्षर पटेल या शिवम दुबे का ही विकल्प बचा था. शिवम दुबे ने आखिरी ओवर की पहली गेंद पर बेथेल को आउट तो किया. पर आर्चर ने आखिर तीन गेंद पर तीन छक्के जड़कर जीत के अंतर को महज 7 रन पर ही ला दिया.
शिवम दुबे के इस ओवर में 22 रन स्कोर हुए. इससे पहले ज़िम्बाब्वे के खिलाफ भी उन्होंने दो ओवर में 46 रन खर्च कर दिए थे. दक्षिण अफ़्रीका के खिलाफ उनके दो ओवर में 32 रन स्कोर हुए.
इन सभी परफॉर्मेंस से साफ होता है कि अब फ़ाइनल जैसे अहम मुकाबले में भारत कम से कम शिवम दुबे पर छठे गेंदबाज के रूप में भरोसा तो नहीं कर सकता है.
वहीं अभिषेक शर्मा के नाकाम होने का सिलसिला सेमीफ़ाइनल में भी जारी रहा. अभिषेक शर्मा के बल्ले से इंग्लैंड के खिलाफ 9 रन ही निकले.
अभी तक उन्होंने इस टूर्नामेंट में 7 पारियों में 89 रन ही बनाए हैं. इनमें ज़िम्बाब्वे के खिलाफ खेली गई 55 रन की पारी भी शामिल है.
अभिषेक के आउट ऑफ फॉर्म होने की वजह से एक बार भी टीम इंडिया इस टूर्नामेंट में 50 रन की ओपनिंग पार्टनरशिप हासिल नहीं कर पाई है.
फ़ाइनल मैच की अहमियत को देखते हुए अभी तक अभिषेक शर्मा का समर्थन करता हुआ आया टीम मैनेजमेंट कोई बड़ा फैसला भी ले सकता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















