ईरान के स्कूल पर हुए हमले के बारे क्या लिख रहा है अमेरिकी और अरब मीडिया?

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ईरान के एक स्कूल पर हुए हमले में मारी गई लड़कियों और स्टाफ़ को मंगलवार को दफ़ना दिया गया.
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि ये लोग अमेरिका और इसराइल की ओर से हुए हमले में मारे गए थे.
हालांकि अमेरिका ने अब तक हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है और कहा है कि वो जांच करवा रहा है कि हमला किसने किया है.
ईरानी अधिकारियों के मुताबिक़, शनिवार को दक्षिणी ईरान के शहर मीनाब में लड़कियों के एक स्कूल पर हमला हुआ, जिसमें 160 से ज़्यादा लोग मारे गए. इनमें छात्राओं के अलावा स्कूल के स्टाफ़ के लोग भी शामिल थे.
अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इस घटना की काफ़ी चर्चा हो रही है.
अमेरिकी अख़बार 'न्यूयॉर्क टाइम्स' के मुताबिक यह स्कूल ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य संस्था 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर' के एक नौसैनिक अड्डे के बिल्कुल पास स्थित है.
स्कूल के सामने रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर का ठिकाना होने का ज़िक्र

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न्यूयॉर्क टाइम्स ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड के एक प्रवक्ता के हवाले से लिखा है, ''नागरिकों की सुरक्षा अमेरिका के लिए बेहद अहम है. अमेरिका अनजाने में होने वाले नुक़सान के जोखिम को कम करने के लिए सभी संभव सावधानियां बरतता रहेगा."
अख़बार के मुताबिक़ मीनाब के स्कूल पर हुए इस बड़े हमले की ख़बर अमेरिका में भी चर्चा का विषय बन गई है.
अख़बार लिखता है कि पिछले साल राष्ट्रपति ट्रंप और उनके "मेक अमेरिका ग्रेट अगेन" आंदोलन से दूरी बनाने वाली अमेरिका की पूर्व सांसद मार्जोरी टेलर ग्रीन ने सोशल मीडिया पर इस हमले की आलोचना की.
अख़बार के मुताबिक़ उन्होंने लिखा, "मैंने इसके लिए चुनाव प्रचार नहीं किया. मैंने इसके लिए पैसे दान नहीं किए. मैंने इसके लिए चुनावों या कांग्रेस में वोट नहीं दिया. यह दिल तोड़ देने वाली और दुखद घटना है. और कितने निर्दोष लोग मरेंगे? हमारे अपने सैनिकों का क्या होगा? यह वह अमेरिका नहीं है जिसकी हमने कल्पना की थी."
'न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक अन्य ख़बर में ट्रंप प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों का हवाला दिया गया है. अख़बार के मुताबिक इन अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि वे अभी भी यह जांच कर रहे हैं कि युद्ध के पहले दिन ईरान में लड़कियों के एक प्राइमरी स्कूल पर हुआ हमला क्या अमेरिकी हवाई हमले का नतीजा था.
अख़बार ने लिखा है कि यह अब भी साफ़ नहीं है कि स्कूल पर हमला क्यों हुआ या किस देश की सेना ने उस पर हमला किया.
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ भी कह चुके हैं, "मैं सिर्फ़ इतना कह सकता हूं कि हम इसकी जांच कर रहे हैं. हम कभी भी नागरिक ठिकानों को निशाना नहीं बनाते, लेकिन हम इस मामले को देख रहे हैं और इसकी जांच कर रहे हैं."
अख़बार के मुताबिक़ उसके एक वेरिफ़ाइड वीडियो में स्कूल पर हमले में मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए एक भारी भीड़ सड़कों पर उतरी.
'न्यूयॉर्क टाइम्स' की ओर से वेरिफ़ाइड वीडियो फुटेज के मुताबिक़, स्कूल से लगभग पांच मील दूर एक कब्रिस्तान में मजदूरों ने एक साथ कई कब्रें खोदी थीं.
यूनेस्को ने सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कहा कि स्कूल में 'स्टूडेंट्स की हत्या' अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत स्कूलों को दी गई सुरक्षा का 'गंभीर उल्लंघन' है.
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लिविट ने इस हमले के बारे में बुधवार को कहा, "अमेरिका कभी भी नागरिकों को निशाना नहीं बनाता, जबकि ईरान का दुष्ट शासन ऐसा करता है. वह नागरिकों को निशाना बनाता है, बच्चों को मारता है और पिछले कुछ हफ्तों में अपने ही हजारों लोगों को मार चुका है."
कनाडाई मीडिया आउटलेट ने क्या कहा

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वहीं कनाडा के न्यूज़ आउटलेट सीबीसी न्यूज़ ने लिखा है कि उनकी एक विज़ुअल जांच में नई सैटेलाइट तस्वीरों और सोशल मीडिया के वीडियो के आधार पर संकेत मिलता है कि स्कूल पर हुई बमबारी दरअसल उस इमारत के बिल्कुल पास मौजूद एक सैन्य परिसर पर किए गए सटीक हवाई हमले का नतीजा था.
सीबीसी के मुताबिक हमले के तुरंत बाद कई वीडियो सामने आए जिनमें मीनाब शहर का एक लड़कियों का स्कूल लगभग पूरी तरह तबाह दिखाई दिया.
न्यूयॉर्क टाइम्स की तरह सीबीसी ने लिखा है कि यह स्कूल पहले इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के एक ठिकाने का हिस्सा था.
सीबीसी ने लिखा है कि बमबारी के तुरंत बाद सोशल मीडिया और आधिकारिक स्रोतों से अलग-अलग दावे सामने आने लगे कि स्कूल पर हमला किसने किया और क्या यह जानबूझकर किया गया था.
सीबीसी ने लिखा है कि उसकी विज़ुअल जांच टीम ने घटनास्थल के कई वीडियो की जांच और पुष्टि की. इनमें कई अलग-अलग धुएं के गुबार दिखाई देते हैं, जिससे संकेत मिलता है कि उस इलाके पर एक से अधिक बार हमला हुआ.
बुधवार को जारी प्लैनेट लैब्स के सैटेलाइट चित्रों ने भी इसकी पुष्टि की, जिनमें परिसर के भीतर कई गड्ढे दिखाई दिए.
सीबीसी के मुताबिक़ टोरंटो स्थित ईरानी फैक्ट-चेकिंग ग्रुप "फैक्टनेमेह" के मिलिट्री रिसर्चर यूसुफ रियाज़ी ने कहा, "यह रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के एक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाकर किया गया सटीक हमला था. सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक़ हमलों का पैटर्न सटीक टारगेटेड हथियारों का लगता है. इसमें गलती की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए थी."
उन्होंने सीबीसी को बताया कि स्कूल का निशाना बन जाना या तो हथियार प्रणाली की गलती हो सकती है या फिर अमेरिकी सेंट्रल कमांड की खुफिया जानकारी जुटाने में बड़ी चूक.
अब तक न तो इसराइल की सेना और न ही अमेरिकी सेना ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है.
बच्चों की जानबूझकर हत्या की गई : अल-ज़जीरा

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ब्रिटिश अख़बार गार्डियन ने स्कूल पर हमले का ज़िक्र करते हुए लिखा है, ''सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में, कथित तौर पर हमले के तुरंत बाद का दृश्य दिख रहा है. जली हुई दीवारों से उठता धुआं दिख रहा है और सड़क पर मलबा बिखरा पड़ा है. सैकड़ों लोग घटनास्थल पर जमा हैं.''
अख़बार लिखता है कि वो बम विस्फोट की रिपोर्ट, मृतकों की संख्या और वीडियो के स्रोत की तुरंत स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका है.
फैक्टचेक संगठन फैक्टनेमेह ने स्कूल परिसर की अन्य तस्वीरों के साथ वीडियो का मिलान किया और निष्कर्ष निकाला कि वीडियो प्रामाणिक है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने भी फुटेज की पुष्टि की है और बताया है कि यह स्कूल का ही है.
'गार्डियन' ने लिखा है कि यह स्कूल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर की बैरक में स्थित लग रहा है.
दूसरी ओर क़तर के न्यूज़ आउटलेट अल जज़ीरा की अरबी सेवा के मुताबिक अमेरिका ने मीनाब की स्कूली छात्राओं की जानबूझकर हत्या की है.
'अल जज़ीरा' ने लिखा कि सोशल मीडिया पर इस तबाही की तस्वीरें फैलते ही इसराइल और अमेरिका के अधिकारियों ने इस हमले से खुद को अलग बताने की कोशिश की.
अल जज़ीरा ने लिखा, ''कुछ इसराइल समर्थित वेबसाइटों और सोशल मीडिया अकाउंट्स ने दावा किया कि यह जगह "इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर" के बेस का हिस्सा थी."
''लेकिन अल जज़ीरा की डिजिटल इन्वेस्टिगेशन यूनिट ने एक दशक से अधिक समय के सैटेलाइट चित्रों, हाल के वीडियो, समाचार रिपोर्टों और ईरानी सरकारी बयानों के विश्लेषण से बिल्कुल अलग तस्वीर सामने आती है."
''जांच के निष्कर्ष बताते हैं कि कम से कम पिछले दस वर्षों से यह स्कूल पास के सैन्य ठिकाने से स्पष्ट रूप से अलग था. जांच यह भी संकेत देती है कि हमले के पैटर्न से उस ख़ुफ़िया जानकारी की सटीकता पर गंभीर सवाल उठते हैं, जिसके आधार पर बमबारी की गई."
अल जज़ीरा ने आगे लिखा, ''सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि सुबह 10:23 बजे तक स्कूल की इमारत पूरी तरह सुरक्षित थी. ईरानी सूत्रों के अनुसार सुबह 10:45 बजे एक गाइडेड मिसाइल ने सीधे स्कूल को निशाना बनाया."
अल जज़ीरा की जांच टीम ने टेलीग्राम पर पोस्ट किए गए दो वीडियो का विश्लेषण किया और उन्हें सैटेलाइट चित्रों से मिलाकर उनकी सटीक लोकेशन निर्धारित की.
अल जज़ीरा ने लिखा, ''पहले वीडियो में सैय्यद अल-शुहदा सैन्य परिसर के भीतर से उठता धुआँ दिखाई देता है, जिससे पुष्टि होती है कि सैन्य बेस भी निशाने पर था. लेकिन दूसरे वीडियो में दो अलग-अलग जगहों से उठता काला धुआँ साफ दिखाई देता है. एक सैन्य बेस के भीतर से और दूसरा लड़कियों के स्कूल के स्थान से. दोनों के बीच की दूरी सैटेलाइट चित्रों में दिखाई गई दूरी से मेल खाती है."
''इससे यह दावा कमजोर पड़ता है कि स्कूल को नुकसान पास के सैन्य ठिकाने से उड़े मलबे या छर्रों से हुआ. इसके बजाय यह संकेत मिलता है कि स्कूल पर अलग से सीधा हमला हुआ था."
'अल अरबिया' ने उस ख़बर का ज़िक्र किया जिसमें कहा गया है कि ईरान में मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच कर रही संयुक्त राष्ट्र की एक स्वतंत्र जांच समिति ने बुधवार को तेहरान पर इसराइल और अमेरिका के हमलों की निंदा की है.
अल अरबिया ने संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय फैक्ट-फाइंडिंग मिशन ऑन ईरान के हवाले से लिखा है, ''ये हमले संयुक्त राष्ट्र चार्टर की भावना के ख़िलाफ़ हैं. संयुक्त राष्ट्र चार्टर किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल प्रयोग पर रोक लगाता है."
तुर्की के सरकारी मीडिया आउटलेट टीआरटी वर्ल्ड ने भी स्कूल पर हमले के बाद व्हाइट हाउस के उस बयान का जिक्र किया है, जिसमें कहा गया है कि इसमें अमेरिका की भूमिका नहीं है.
टीआरटी वर्ल्ड ने लिखा है, ''बुधवार को मीडिया ब्रीफ़िंग के दौरान जब यह पूछा गया कि शनिवार को ईरान पर अमेरिका-इसराइल के शुरुआती हमलों में से किसी एक के कारण स्कूल के बच्चों की मौत हुई थी या नहीं, तो व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने कहा कि अमेरिका नागरिकों को निशाना नहीं बनाता."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.












