पीएम मोदी ने सोना न ख़रीदने और तेल बचत की अपनी अपील पर अब ये कहा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक और तेलंगाना के बाद अब गुजरात में लोगों से अपील की है कि वो सोने की ख़रीद को टालें और तेल की बचत करें.
पीएम मोदी ने गुजरात में एक कार्यक्रम में कहा, "पिछले कुछ सालों में दुनिया लगातार अस्थिर परिस्थितियों से गुज़र रही है. पहले कोरोना का संकट, फिर वैश्विक आर्थिक चुनौतियाँ और अब पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव. इन सारी परिस्थितियों का असर लगातार पूरी दुनिया पर पड़ रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है."
उन्होंने कहा, "पश्चिम एशिया में बनी युद्ध की परिस्थितियां इस दशक के बड़े संकटों में से एक है. जब हमने मिलकर कोरोना संकट का मुक़ाबला कर लिया तो इस संकट से भी पार पा जाएंगे. सरकार भी लगातार प्रयास कर रही है कि देश के आम लोगों पर इन परिस्थितियों का कम से कम असर हो."
पीएम मोदी ने कहा, "इसी समय विदेश से आने वाले उत्पादों की क़ीमतें भी आसमान छू रही हैं और सप्लाई चेन भी पूरी तरह तहस-नहस हो चुकी है और इसलिए देश पर ये दोहरा संकट है."
"जैसे बूंद बूंद से घड़ा भरता है वैसे ही हमें हर छोटे-बड़े उत्पाद का उपयोग कम करना है जो विदेश से आते हैं और ऐसे हर काम से बचना है जिसमें विदेशी मुद्रा खर्च होती है."
सोने और तेल को लेकर ये कहा
पीएम मोदी ने कहा है, "भारत के इंपोर्ट का बहुत बड़ा हिस्सा क्रूड ऑयल है और दुर्भाग्य से जिस क्षेत्र से दुनिया के बड़े हिस्से से दुनिया को तेल मिलता है आज वही क्षेत्र संघर्ष और युद्ध में उलझा हुआ है इसलिए जब तक हालात सामान्य नहीं होते, हम सबको मिलकर छोटे छोटे संकल्प लेने होंगे."
"मैं गुजरात में भी अपने पिछले आग्रहों पर जोर दे रहा हूं. मेरी देश के हर नागरिक से अपील है कि जहां संभव हो पेट्रोल-डीज़ल का उपयोग कम करें. मेट्रो का उपयोग करें, इलेक्ट्रिक बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक इस्तेमाल करें. कार पुलिंग को बढ़ावा दें.
"सरकार और प्राइवेट दोनों ही दफ़्तरों में वर्चुअल मीटिंग्स और वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता दी जाए. मैं स्कूलों से भी कहूंगा कि कुछ समय से लिए ऑनलाइन क्लासेस की व्यवस्था करें."
उन्होंने कहा, "खाने से तेल पर भी बड़ी विदेशी मुद्रा ख़र्च होती है और अगर खाने के तेल की मात्रा कम करें तो इससे देश और हमारी सेहत दोनों को लाभ होगा. मैं देशवासियों से आग्रह करूंगा कि जब तक हलात सामान्य नहीं हो जाते, हम सोने की ख़रीद को टालें."

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भी तेलंगाना में आम लोगों से ऐसी ही अपील की थी. इस पर विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोला और मांग की कि सरकार को आर्थिक स्थिति पर संसद को भरोसे में लेना चाहिए.
नागपुर में ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने समाचार एजेंसी से कहा, "राष्ट्रीय हित में उनकी बात सही है. सोना हमारी संस्कृति का हिस्सा बन चुका है. शायद प्रधानमंत्री मोदी का मतलब निवेश के लिए सोना ख़रीदने वालों से है."
"इस उद्योग में काम करने वाले 1 करोड़ से ज्यादा लोगों पर इसका असर पड़ सकता है. हमने सरकार को गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम का प्रस्ताव दिया है. भारतीयों के पास क़रीब 40 से 50 हज़ार टन सोना है. अगर इसका 10 से 20 फीसदी भी मोनेटाइज हो जाए, तो अगले 10 साल तक सोना आयात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी."



















