G7 देशों की बैठक में चीन, रूस और ईरान के बारे में क्या कहा गया

जी-7 देशों के नेता

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दक्षिणी जर्मनी के बावरियन आल्प्स की पहाड़ियों के बीच एक लग्ज़री रिजॉर्ट पर दुनिया के सात समृद्ध और लोकतांत्रिक देशों के नेता तीन दिनों के सालाना सम्मेलन के लिए इकट्ठा हुए हैं.

मंगलवार को इस शिखर सम्मेलन का आख़िरी दिन है. जी-7 देशों के बीच रूस पर प्रतिबंध, चीन, ईरान, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और कोरोना समेत कई मुद्दों पर सहमति बनी है.

सम्मेलन में चीन, ईरान और रूस को लेकर कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए गए हैं. पूर्वी और दक्षिण चीन सागर की स्थिति को लेकर चिंता जाहिर की गई है.

जी-7 देशों ने पैरिस समझौते को लागू करने के लिए एक क्लाइमेट क्लब बनाने की बात कही है.

वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए जी-7 देशों ने इस साल 14 अरब डॉलर देने का वादा भी किया है.

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चीन पर क्या कहा गया

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, जी-7 देशों ने कहा, "ईस्ट और साउथ चाइना सी की स्थिति पर हम गंभीर रूप से चिंतित हैं... हम इस बात पर जोर देते हैं कि साउथ चाइना सी में चीन के दावे का कोई क़ानूनी आधार नहीं है."

"जिस तरह से रूस ने यूक्रेन के ख़िलाफ़ एक ग़ैरवाजिब, बिना उकसावे के और अवैध युद्ध छेड़ रखा है, हम चीन से अपील करते हैं कि वो रूस पर यूक्रेन से अपने सैनिक फौरन और बिना शर्त वापस बुलाने के लिए दबाव डाले."

"हम चीन से ये भी अपील करते हैं कि वो साइनो-ब्रिटिश ज्वॉयंट डिक्लेरेशन (चीन-ब्रिटेन साझा घोषणापत्र) और बेसिक लॉ के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करे. इस डिक्लेरेशन में हांगकांग की स्वायत्ता, उसके अधिकारों और स्वतंत्रता की बुनियाद रखी गई थी."

"हम चीन में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं. हम सार्वभौमिक मूल्यों को अपना समर्थन देते रहेंगे. इसके लिए हम चीन से अपील करेंगे कि वो शिनजियांग और तिब्बत में मानवाधिकारों और बुनियादी आज़ादी का आदर करे. शिनजियांग में जबरन मजदूरी कराए जाने को लेकर हम विशेष रूप में चिंतित हैं."

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रूस पर प्रतिबंध का मुद्दा

"हम रूस को यूक्रेन पर हमले से फायदा उठाने से रोकने के लिए और कदम उठाने की दिशा में संभावना तलाशेंगे."

"हम नागरिक इस्तेमाल में होने परमाणु सामाग्री और अन्य संबंधित चीज़ों के लिए रूस पर अपनी निर्भरता और कम करेंगे. इसके लिए उन देशों के साथ मिल कर काम किया जाएगा जो अपनी खरीद में विविधता लाना चाहते हैं."

"जहां तक तेल की बात है, हम कई विकल्पों पर गौर कर रहे हैं. इसमें रूस के कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को दुनिया भर में लाने-ले जाने वाले जहाजों के आवागमन से जुड़ी तमाम सर्विसेज पर पूर्ण प्रतिबंध का विकल्प भी शामिल है. हालांकि अंतररराष्ट्रीय साझीदारों से सलाह-मशविरा करके निर्धारित या उस कम क़ीमत पर खरीदे गए तेल पर ये रोक नहीं लगेगी."

"हम समान विचार वाले देशों से हमारी कार्रवाई में शामिल होने का आग्रह करते हैं."

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ईरान का परमाणु कार्यक्रम

"हमारी इस बात को लेकर स्पष्ट प्रतिबद्धता है और हम इसे दोहराते हैं कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार विकसित करने नहीं दिया जाएगा."

"ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए कूटनीतिक समाधान सबसे अच्छा तरीका है."

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एनर्जी

"इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के साथ मिलकर हम तेल की क़ीमतों को कम करने के लिए और कदम उठाने की संभावना तलाशेंगे ताकि हमारी अर्थव्यवस्थाओं और समाजों पर इसके असर को कम किया जा सके."

"एनर्जी मार्केट में तनाव कम करने के लिए हम तेल उत्पादक देशों को उत्पादन बढ़ाने के लिए बढ़ावा देंगे. इस सिलसिले में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार को दुरुस्त करने के लिए ओपेक ने जो कदम उठाए हैं, हम उसका स्वागत करते हैं. हम उनसे अपील करते हैं कि वे इस सिलसिले में अपनी कार्रवाई जारी रखें."

"फॉसिल फ्यूल के लिए डायरेक्ट पब्लिक सपोर्ट को ख़त्म करने के लिए भी हम प्रतिबद्ध हैं."

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