अमेरिका देगा यूक्रेन को लंबी दूरी के रॉकेट, रूस हुआ परेशान

हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम

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रूस-यूक्रेन युद्ध फ़रवरी के अंतिम सप्ताह में शुरू हुआ और अभी भी जारी है. रूस के ख़िलाफ़ युद्ध में यूक्रेन को अमेरिका समेत यूरोपीय देश समर्थन दे रहे हैं. अमेरिका और यूरोपीय देशों ने यूक्रेन को आर्थिक सहायता तो मुहैया कराई है ही, साथ ही सैन्य-सहायता भी दी है.

इस दौरान इस सप्ताह को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने एक अहम घोषणा करते हुए कहा कि यूक्रेन को एडवांस रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम दिए जाएंगे. अमेरिका ने यूक्रेन को HIMARS यानी M142 हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम देने की बात कही है. ये सिस्टम लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम हैं.

यूक्रेन लंबे समय से लंबी दूरी तक मार कर सकने वाले हथियारों की मांग कर रहा था.

एक ओर जहां कीएव लंबे समय से इस घोषणा का इंतज़ार कर रहा था वहीं मॉस्को ने खुले तौर पर इसकी आलोचना की है.

हालांकि अमेरिका की ओर से यह फ़ैसला लेने में काफी समय लिया गया.

अमेरिका की ओर से इस घोषणा में कहा गया कि अमेरिका की यह मदद यूक्रेन की सैन्य-स्थिति को मज़बूत करने के लिए है. यूक्रेन को अपने डोनबास क्षेत्र में सैन्य स्थिति को मज़बूत करने की ज़रूरूत थी क्योंकि रूसी मिसाइलों और गोलीबारी से यह इलाक़ा बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

अमेरिका, यूक्रेन को जो लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम हथियार दे रहा है, वह HIMARS है. HIMARS यानी हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम. जैसा कि इसके नाम से ही ज़ाहिर है, यह रॉकेट सिस्टम एक साथ मल्टिपल गाइडेड मिसाइल्स को सुनिश्चित तरीक़े से लॉन्च कर सकता है.

अमेरिका ने काफी समय लेकर लिया यह फ़ैसला

अमेरिका ने यह फ़ैसला बहुत वक़्त लेकर लिया है. अमेरिका अब जो हथियार यूक्रेन को दे रहा है वो मध्यम और लंबी दूरी में मार करने में सक्षम हथियार हैं और यूक्रेन के कई बार अनुरोध करने के बाद अमेरिका इसे देने के लिए राज़ी हुआ है.

यूक्रेन के कई अनुरोधों के बावजूद, अमेरिका लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम हथियार देने में थोड़ी सतर्कता बरत रहा था. अमेरिका की ओर से यह 'डर' जताया गया था कि इन हथियारों का रूस के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किया जा सकता है और इसके चलते मौजूदा स्थिति और गंभीर हो सकती है.

लेकिन बुधवार को अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा है कि यूक्रेन ने आश्वासन दिया है कि वो रूसी सीमा में अमेरिका द्वारा दी गई लॉन्ग रेंज रॉकेट सिस्टम यानी लंबी दूरी की हथियार प्रणाली का इस्तेमाल नहीं करेगा.

इससे पहले मंगलवार को क्रेमलिन ने उन रिपोर्ट्स पर खुशी जताई थी जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ने यूक्रेन को मिसाइल लॉन्च सिस्टम नहीं भेजने का फ़ैसला किया है. लेकिन अब बाइडन की घोषणा के बाद हालात बिल्कुल बदल गए हैं.

रूस के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने कहा कि हम मानते हैं कि अमेरिका सीधे तौर पर और जानबूझकर इस आग में घी डालने का काम कर रहा है.

इससे पहले, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ ने कहा था कि यूक्रेन को नए हथियार देकर, अमेरिका और रूस के बीच सीधे संघर्ष का ख़तरा और बढ़ गया है.

रूस की सरकारी न्यूज़ एजेंसी आरआईए नोवोस्ती से बात करते हुए उन्होंने कहा, "जिस तरह से यूक्रेन को लगातार हथियारों की सप्लाई बढ़ रही है, इस तरह के जोखिम का ख़तरा बढ़ जाता है."

हथियार

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अमेरिका का 'डर'

अमेरिका ने यूक्रेन के कई अनुरोध के बाद, लंबी दूरी के हथियार देने पर सहमति दी है. इस डर का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक बेहद असाधारण घटनाक्रम के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने द न्यूयॉर्क टाइम्स में बुधवार को अपने इस फ़ैसले के पीछे के कारण को स्पष्ट करते हुए एक संपादकीय लिखा.

इस संपादकीय में, अमेरिकी राष्ट्रपति ने आश्वासन दिया कि उसका मक़सद रूस के साथ संघर्ष को बढ़ाना नहीं है. बल्कि युद्ध की इस स्थिति में अमेरिका का मक़सद सिर्फ़ और सिर्फ़ राजनयिक समाधान के लिए कीएव की सैन्य-स्थिति को मज़बूत करना है.

उन्होंने अपने संपादकीय में लिखा है, "इसलिए ही मैंने यह फ़ैसला लिया है कि हम यूक्रेन को और अधिक उन्नत और मारक सिस्टम देंगे, जो उन्हें युद्ध के मैदान में लक्ष्य को ज़्यादा सटीक तरीक़े से मारने में मदद करेगा."

हालांकि पेस्कोव का कहना है कि जिस तरह से हथियारों की आपूर्ति लगातार जारी है तो वह कीएव को शांति वार्ता के लिए आगे बढ़ने में कहीं से भी मददगार नहीं साबित होती है. उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि 'अमेरिका रूस को आख़िरी यूक्रेनियन के साथ लड़ाना चाहता है'.

बाइडन ने न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित संपादकीय में लिखा है कि यूक्रेन ने आश्वासन दिया है कि वो रूसी सीमा में अमेरिका द्वारा दी गई लॉन्ग रेंज रॉकेट सिस्टम यानी लंबी दूरी की हथियार प्रणाली का इस्तेमाल नहीं करेगा.

वहीं दूसरी ओर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलेदिमीर ज़ेलेस्की ने न्यूज़मैक्स को दिए एक साक्षात्कार में यह आश्वासन दिया गया है कि उनका उद्देश्य इन रॉकेट्स को रक्षात्मक तरीक़े से इस्तेमाल करना था.

उन्होंने कहा, "हमारी इस बात में बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं है कि रूस में क्या हो रहा है. हमारा सारा ध्यान सिर्फ़ इस बात पर है कि हमारे देश में, यूक्रेन की सीमा के भीतर क्या हो रहा है."

रॉकेट

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कैसा सिस्टम है ये

लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम HIMARS यानी हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम, यूक्रेन को दिए जा रहे 70 करोड़ डॉलर केअमेरिकी सहायता पैकेज का ही हिस्सा है. फ़रवरी से शुरू हुए रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान अमेरिका की ओर से दी जा रही यह ग्यारहवीं मदद है. इस सहायता पैकेज में हेलीकॉप्टर्स, एंटी-टैंक हथियार, सामरिक हथियार और कल-पुर्जे़ शामिल हैं.

लेकिन HIMARS वो सिस्टम है जिसकी मांग यूक्रेन, युद्ध शुरू होने के बाद से ही कर रहा है.

M142 HIMARS सिस्टम को दुनिया के सबसे अधिक विकसित, लंबी दूरी के रॉकेट लॉन्च प्लेटफ़ॉर्म्स में से एक माना जाता है. यहां इस बात का उल्लेख करना ज़रूरी है कि यह सिस्टम फ़िलवक्त में रूस के इस्तेमाल किये जा रहे सिस्टम और यूक्रेन के मौजूदा सिस्टम की तुलना में सबसे अधिक सटीक और विकसित है.

इस सिस्टम को बनाने वाली कंपनी लॉकहीड मार्टिन की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक़, यह 1970 में विकसित हुए M270 मिसाइल सिस्टम का कहीं अधिक आधुनिक, हल्का और व्हील माउंटेड प्रारूप है.

हालांकि दोनों की सीमाएं अलग-अलग हैं. अमेरिका ने जो ख़बर दी है उसके मुताबिक़, अमेरिका यूक्रेन को जो सिस्टम दे रहा है उसकी रेंज 80 किलोमीटर की है.

ये सिस्टम जीपीएस-डायरेक्टेड है और मौजूदा समय में यूक्रेन जो सिस्टम (M777 हॉवित्ज़र) इस्तेमाल कर रहा है, यह उससे लगभग दोगुनी रेंज तक मार करने में सक्षम है.

लॉकहीड मार्टिन के मुताबिक, एक छह हिमार गाइडेड मिसाइलें, उन्हें उठाने वाली गाड़ी पर लोड की जा सकती हैं. इन गाड़ियों पर एटाक्मस-टाइप टेक्टिकल मिसाइल भी लोड की जा सकती हैं. इनका रेंज 300 किलोमीटर तक हो सकता है. हांलाकि अमेरिक एटाक्सम मिसाइलें यूक्रेन को नहीं दे रहा है.

इसे संचालित करने के लिए बहुत कम सैनिकों की ज़रूरत होती है और यह सिस्टम कुछ ही मिनटों में रिचार्ज किया जा सकता है. ऐसे में यह युद्ध के लिहाज़ से बहुत व्यवहारिक हो जाता है.

अमेरिकी सेना के पास यूरोप में पहले से ही HIMARS यूनिट हैं. इसके अलावा नेटो के दो सदस्य देशों पोलैंड और रोमानिया ने भी इसे हासिल कर लिया है.

अमेरिका को उम्मीद है कि यूक्रेन पूर्वी डोनबास इलाक़े में इन हथियारों को तैनात करेगा, जहां रूसी हमला सबसे तीव्र है. अमेरिका को उम्मीद है कि यूक्रेन इन हथियारों का इस्तेमाल रूस के तोपों और यूक्रेन को निशाना बनाने वाले हथियारों को लक्ष्य बनाने के लिए कर सकता है.

सीरिया और अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध समेत दूसरे कई अभियानों में अमेरिकी सेना ने HIMARS का इस्तेमाल किया है.

बाइडन

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जो बाइडन ने अपने संबोधन में और क्या कुछ कहा

बुधवार को न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित हुए इस लेख में कहा गया कि अमेरिका का मक़सद यूक्रेन को लोकतांत्रिक, स्वतंत्र और संप्रभु देखना है, ना कि पुतिन को उनकी सत्ता से बदखल करने की कोशिश करना या फिर मॉस्को के साथ संघर्ष को हवा देना.

इस संपादकीय में बाइडन की ओर से लिखा गया है कि रूस की आक्रामकता, शांति के लिए किये जा रहे प्रयासों के बीच का सबसे बड़ा रोड़ा है. उन्होंने यह भी लिखा कि अमेरिका ने यूक्रेन पर इस बात के लिए कभी भी दबाव नहीं बनाया कि वो युद्ध को समाप्त के लिए अपने कुछ हिस्से से समझौता कर ले.

यूक्रेन में परमाणु हथियारों के ख़तरे को सीधे तौर पर संबोधित करते हुए बाइडन ने कहा कि फिलहाल हमें इसके कोई संकेत नहीं दिख रहे. हालांकि उन्होंने चेतावनी भरे लहज़े में कहा कि अगर रूस, यूक्रेन के ख़िलाफ़ परमाणु हथियार का इस्तेमाल करेगा तो इसे किसी भी क़ीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा और इसके गंभीर परिणाम होंगे.

जो बाइडन के इस संपादकीय के छपने के कुछ देर बाद ही रूस की सेना ने घोषणा की थी देश की न्यूक्लियर फ़ोर्स मॉस्को के पास इवानोवो प्रांत के निकट अभ्यास कर रही थीं.

इस अभ्यास में क़रीब एक हज़ार सैनिक शामिल थे और क़रीब 100 से अधिक वाहन.

हालांकि यूक्रेन को इतने ताक़तवर हथियार मुहैया कराने वाला अमेरिका अकेला देश नहीं है. जर्मनी ने भी यूक्रेन की मदद के लिए अपने अत्याधुनिक सिस्टम देने का फ़ैसला किया है.

अमेरिका की यह घोषणा देर से भले हुई है लेकिन यह बेहद महत्वपूर्ण है. ख़ासतौर पर यूक्रेन के प्रति अमेरिकी प्रतिबद्धता के लिहाज़ से यह एक बड़ा क़दम है.

अमेरिका ने यूक्रेन को HIMARS की मदद ऐसे समय में दी है जबकि यूक्रेन डोनबास में एक भीषण हमला झेल रहा है और उसकी शिकायत थी कि उसके पास हथियार की कमी है.

जानकार मानते हैं कि HIMARS के युद्ध में शामिल होने से हालात बदल सकते हैं.

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