क्या भारतीयों के निकलने के लिए रूस ने खारकीएव में कुछ घंटे के लिए हमले रोके थे?

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- Author, मेधावी अरोड़ा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
यूक्रेन के विभिन्न शहरों में अस्थाई युद्ध विराम की कोशिशें जारी हैं, ताकि वहां फंसे नागरिकों को बहार निकाला जा सके. क्या भारतीयों को भी इन प्रयासों से फ़ायदा होगा?
सोमवार को रूस ने कहा है कि वह कीएव, खारकीएव, मारियुपोल और सूमी जैसे कई शहरों में मानवीय गलियारे खोलेगा. लेकिन यूक्रेनी अधिकारियों ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है
सूमी भारत के निकासी प्रयासों के लिए एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक़, शुक्रवार तक सूमी में क़रीब 700 भारतीय छात्र फ़ंसे हुए थे. यह देखना अभी बाक़ी है कि प्रस्तावित युद्धविराम से सूमी में भारतीयों को लाभ होगा या नहीं.
सप्ताह के आख़िर तक, मारियुपोल शहर से नागरिकों को निकालने के लिए युद्ध विराम के दो प्रयास विफल हो चुके हैं.
निकासी के प्रयास सफल न होने के लिए, रूस और यूक्रेन दोनों पक्षों ने एक दूसरे को ज़िम्मेदार ठहराया है.
मारियुपोल के अधिकारियों ने रूस पर लगातार बमबारी करने और "युद्ध विराम पर अमल न करने" का आरोप लगाया है. जवाब में, रूस ने भी यूक्रेन के अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने लोगों को बाहर जाने से रोका है.
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भारत रूस और यूक्रेन दोनों पर भारतीय नागरिकों और छात्रों को निकालने के अस्थाई युद्ध विराम के लिए दबाव बना रहा है. यूएनजीए में भी भारत के प्रतिनिधि ने ये मांग उठाई गई है.
गज़ा में और सीरिया गृहयुद्ध के दौरान अतीत में भी संघर्षरत क्षेत्रों में विशेष रूप से नागरिकों को निकालने या मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए, मानवीय गलियारों का इस्तेमाल किया गया है.
रविवार को, प्रधानमंत्री मोदी ने पुणे की यात्रा के दौरान कहा कि यूक्रेन में भारत के निकासी प्रयासों का श्रेय भारत के "बढ़ते प्रभाव" को जाता है.
फ़ेक न्यूज़ और राजनीतिक बयानबाजी
यूक्रेन में भारत का निकासी प्रयास जारी हैं, इस दौरान कुछ फ़ेक न्यूज़ और राजनीतिक बयानबाज़ी भी सामने आई है विशेष रूप से खारकीएव शहर की स्थिति के बारे में.
पिछले हफ्ते, बहुत सी फ़ेक न्यूज़ रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हुई, जिनमे दावा किया गया कि भारत के अनुरोध पर रूस ने खारकीएव में 6-8 घंटे के लिए युद्ध रोक दिया है, ताकि भारतीय छात्रों को सुरक्षित निकाला जा सके".

बीबीसी ने पाया कि इन झूठी ख़बरों को कम से कम 8 प्रमुख राष्ट्रिय समाचार आउटलेट्स ने प्रसारित किया था. और उनमें से किसी ने भी इसमें सुधार या स्पष्टीकरण जारी नहीं किया, और ये रिपोर्ट उनकी वेबसाइट्स और फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं. इनमे से कुछ के तो एक करोड़ से भी ज़्यादा फॉलोवर हैं.
यही झूठा दावा महाराष्ट्र बीजेपी ने अपने आधिकारिक हैंडल से शेयर किया था. इसे भी कम से कम 6 प्रमुख भाजपा नेताओं ने अपने वेरिफाइड हैंडल से शेयर किया, जिनके लाखों फॉलोवर हैं. इस झूठे दावे को साझा करने वाले कुछ प्रमुख नेताओं में भाजपा के राष्ट्रीय सचिव अरविंद मेनन और तरुण चुग, भाजपा गुजरात के महासचिव प्रदीप सिंह वाघेला और दिनेश देसाई जैसे युवा नेता शामिल हैं.
इनमें से कई ट्वीट्स में झूठा दावा किया गया है कि "मोदी वह करने में कामयाब रहे जो अमेरिका, नेटो और यूरोपीय संघ नहीं कर सके. कुछ ट्वीट्स में पीएम मोदी के पोस्टर और #ModiHaiTohMumkinHai जैसे हैशटैग थे.
पत्रकारों, टिप्पणीकारों और विश्लेषकों ने भी इन दावों को प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ़ करते हुए साझा किया. एक पत्रकार ने दावा किया कि "यूक्रेन में फंसे भारतीय नागरिकों को बचाकर प्रधानमंत्री मोदी वैश्विक नेताओं के लिए एक उदाहरण स्थापित कर रहे हैं. अगर वह अपने देशवासियों को बचाने के लिए 6 घंटे के लिए युद्ध रुकवा सकते हैं, तो सोचो जब दुश्मन हमला करने की हिम्मत करेगा तो वह क्या करेंगे."

सच क्या है?
बुधवार को, भारत सरकार ने खारकीएव में फंसे भारतीय नागरिकों को एक तत्काल एडवाइज़री जारी की थी, कि सभी भारतीय तुरंत शहर छोड़ दे चाहे पैदल ही निकलना हो. खारकीएव में भारतीयों को आसपास की बस्तियों तक पहुंचने के लिए लगभग चार घंटे का समय दिया गया, जिनमें से एक 15 किलोमीटर से भी ज़्यादा दूर है. उसी दिन पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन के हालात की समीक्षा के लिए फोन पर बात की थी.
इस एडवाइज़री ने कुछ लोगों को हैरान कर दिया. यूक्रेन में एक भारतीय छात्र ने बीबीसी को बताया कि एडवाइजरी मिलने पर, वह और कई अन्य छात्र खारकीएव से पिसोचिन के लिए पैदल निकल गए जो लगभग 11 किलोमीटर दूर है. उन्होंने कहा कि बस्ती तक पहुंचने के लिए चार घंटे का समय देना "पागलपन" था. "ये सफर बहुत डरावना था. हर समय धमाकों का खतरा था. हम देख रहे थे कि इमारतें कैसे चकनाचूर हो गईं, मॉल जहां हमने कभी यादें बनाई थी सब तहसनहस हो गया था. नतीजों के डर से वह छात्र अपना नाम उजागर नहीं करना चाहता था.
जब युद्धग्रस्त खारकीएव में फंसे भारतीयों ने पास की बस्तियों में जाने के लिए अपना रास्ता बना लिया, तो रूस के बारे में ये वायरल दावा "6-8 घंटे के लिए युद्ध को रोकना" ताकि भारतीयों को निकाला जा सके, समाचार आउटलेट और सोशल मीडिया पर फैल गया.
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गुरुवार को भारत सरकार ने इस दावे का खंडन किया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने एक ब्रीफ़िंग में कहा, कि बुधवार को जारी की गई एडवाइज़री "इन इनपुट्स पर आधारित थी कि यह रास्ता उपलब्ध है और ये वो स्थान हैं जहां भारतीय नागरिकों को इस समय तक पहुंच जाना चाहिए."
उन्होंने कहा, "लेकिन यह कहना बिल्कुल ग़लत है कि कोई बमबारी रोक रहा है या यह कि कुछ ऐसा है जिसके लिए हम कोर्डिनेट कर रहे हैं." "मुझे लगता है कि यह असल में अपने आप हो रहा है."
सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी उदय भास्कर ने शुक्रवार को बीबीसी को बताया, कि विदेश मंत्रालय के स्पष्टीकरण से पता चला, नहीं तो "मैंने सोशल मीडिया पर इनमें से कुछ ट्वीट देखे थे और मान लिया था कि यह सच है. "हालांकि, चुनावी कारणों से जिस तरह से '6 घंटे के लिए युद्धविराम' को सोशल मीडिया पर पेश किया जा रहा था - साफ़ था किसी अनाड़ी ने ऐसा किया. मेरे अनुसार युद्ध के दौरान ऐसा करने से भारतीय नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित हुई."
बीबीसी ने टिप्पणी के लिए दिल्ली में स्थित रूसी दूतावास से संपर्क किया, लेकिन इस रिपोर्ट के प्रकाशन के समय तक उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली थी.
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