ग्रोज़नी से अलेप्पो और यूक्रेन तक, रूस करता आया है भीषण बमबारी: ग्राउंड रिपोर्ट

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- Author, जेरेमी बोवेन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, कीएव
जिस वक़्त मैं ये लिख रहा हूं, उस वक्त तक कीएव और उसके उपनगरीय इलाक़ों में रूसी सेना नहीं पहुंच सकी है. सायरन और अलर्ट की आवाज़ बीच-बीच में थोड़े-थोड़े वक़्त पर सुनाई दे रही हैं.
सबको पता है कि स्थितियां कभी भी बदल सकती हैं.
यूक्रेन का दूसरा सबसे बड़े शहर खारकीएव, रूसी सैनिकों के युद्ध के तरीक़े को देख चुका है. मारियुपोल और पूर्व के शहर भी इस ख़तरे को देख चुके हैं.
रूस, प्रतिरोध का जवाब भारी गोलीबारी से देता है. घर-घर लड़ने के लिए सैनिकों को भेजने की बजाय, रूस के सैन्य सिद्धांत में दुश्मनों को ख़त्म करने के लिए भारी पैमाने पर हथियारों और हवा से बमबारी का इस्तेमाल किया जाता है.
खारकीएव और दूसरे शहरों-कस्बों को गंभीर नुक़सान हुआ है, और जहां तक जानकारी है कि कई नागरिक हताहत हुए हैं. खारकीएव की स्थानीय सरकार को भी काफ़ी नुक़सान पहुंचा है. शायद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कीएव को संदेश दे रहे हैं- पूर्व की तरफ़ देखिए, क्योंकि ऐसा आपके साथ भी हो सकता है.
मैंने इससे पहले जो युद्ध देखे हैं, उसके हिसाब से ये निष्कर्ष निकाला है कि रूसी कार्रवाई में हालात और भी ख़राब हो सकते हैं.
'जब ज़मीन हिल रही थी'
पुतिन ने अब तक उस स्तर का आदेश नहीं दिया है, जिस तरह का आदेश 1990 के दशक में ग्रोज़नी के लिए दिया गया था, या 2015 में जिस तरह पुतिन ने सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप किया था. बता दें कि 1990 के दशक में चेचेन्या में ज़बरदस्त विद्रोह हुआ था और इस विद्रोह को दबाने के लिए रूसी सैनिकों ने ग्रोज़नी में दख़ल दिया था.
मैंने 1994-95 में शुरू हुए पहले चेचेन युद्ध को कवर किया था. रूसी सेना ने यूक्रेन की ही तरह यहां भी ज़मीनी सैन्य अभियानों में गंभीर गलतियां की थीं. चेचन विद्रोहियों ने तंग गलियों में रूस की बख़्तरबंद सैन्य गाड़ियों पर घात लगाकर हमला किया था और उन्हें नष्ट कर दिया था. कई सैनिक लड़ना और मरना नहीं चाहते थे.
अब यूक्रेन पर रूस के हमले से पहले सैन्य विश्लेषकों का आकलन था कि रूस की सेना बेहद पेशेवर है. शायद वो हैं भी लेकिन रूस के हमले को एक बार फिर से सैन्य बाधाओं, सामरिक गलतियों और डरे हुए टीनेजर्स ने धीमा कर दिया है, ये वो टीनेजर्स हैं जिन्हें ये नहीं बताया गया था कि वो युद्ध में जा रहे हैं. साथ ही प्रतिरोध भी उतना ही शक्तिशाली है जितना कि रूस को 1995 में चेचेन्या में सामना करना पड़ा था.

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चेचेन्या में रूस ने जवाब देने के लिए भारी बमबारी का इस्तेमाल किया. कुछ ही हफ़्तों में भारी गोलीबारी और हवाई हमलों ने कंक्रीट और स्टील के सोवियत शहर ग्रोज़नी को मलबे में तब्दील कर दिया.
मैं उस दिन चेचन प्रतिरोध के केंद्र मिनुत्का स्क्वायर में था, इस पर बार-बार एयर स्ट्राइक हो रहे थे. यहां के ज़्यादातर लोग तहखाने में थे, जब भी वो खाना या पानी के लिए बाहर निकलते उन्हें मारे जाने का ख़तरा रहता था.
उस दिन मिनुत्का स्क्वायर पर हुए क्लस्टर बमों के हमले में चेचन लड़ाके मारे गए, इमारतों में आग लगा दी गई. चौबीस घंटे बाद शहर के सारे अहम रास्ते मिसाइलों की चपेट में थे और पूरा शहर धुएं और आग की लपटों से घिरा हुआ था. जब हम इसे शूट कर रहे थे वहां ज़मीन हिल रही थी.
हवा से बमों की बारिश
अब तक की युद्ध की रिपोर्टिंग में मैंने ग्रोज़नी के अलावा जो सबसे तबाह जगह देखी वो सीरिया में थी. सीरिया में रूस के हस्तक्षेप के फ़ैसले ने बशर अल-असद के शासन को बचा लिया. साथ ही रूस को वर्ल्ड पावर के तौर पर फ़िर से पेश करने के मक़सद को लेकर पुतिन का ये बड़ा कदम था.
रूस की भीषण गोलीबारी ही वो वजह थी जिसके दम पर विद्रोहियों के ख़िलाफ़ दो निर्णायक जीत हासिल हुई.
इनमें से पहली कार्रवाई 2016 के अंत में अलेप्पो में हुई. शहर के पूर्वी भाग पर अलग-अलग विद्रोही गुटों ने क़ब्ज़ा किया हुआ था. जिसे बाद में रूस की गोलीबारी और हवाई हमलों में बर्बाद कर दिया गया.
इस कार्रवाई में रूस की तरफ़ से बड़े स्तर पर हवाई हमले किए गए. घरेलू और ईरान के बॉम्बर्स ने विनाशकारी हमले किए.
सीरिया में इस्तेमाल की गई रणनीति थी कि विद्रोहियों के क़ब्ज़े वाले इलाक़ों को घेर लिया जाए और उनपर हवाई हमले किए जाए, साथ ही भारी गोलीबारी की जाए. इस रणनीति के आख़िर में रूस की तरफ़ से लड़ रहे लोगों और नागरिकों को वहां से बाहर निकालना था. उनमें से भी कई मारे गए.

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पूर्वी अलेप्पो में हुई इस तरह की कार्रवाई के कुछ हफ़्तों बाद मैं वहां गया था. वहां पर जगह-जगह विनाश के सबूत दिख रहे थे. मैं एक भी ऐसी इमारत नहीं देख सका था जो युद्ध के विनाश से अछूती रह गई हो. कस्बा, शहर खंडहर में तब्दील हो गया था. सड़कें मलबों की वजह से बंद पड़ी थीं.
मैंने विद्रोहियों के क़ब्ज़े वाले गुटा में भी इसी तरह की रणनीति को काम करते देखा था. पूर्वी गुटा में रक्षकों ने हवाई हमलों और गोलीबारी से बचने के लिए शहर में सुरंग बनाया था. लेकिन घेराबंदी और भारी गोलीबारी की जीत हुई. ऐसा इसलिए क्योंकि विद्रोह करने वाले मार दिए गए और बाद में इस इलाक़े ने भी आत्मसमर्पण कर दिया.
कीएव में हर किसी के मन में बड़ा सवाल ये है कि क्या जो कुछ खारकीएव, मारियुपोल और बाकी शहरों में हो रहा है वैसा राजधानी में होगा या हालात चेचेन्या और सीरिया जैसे होने वाले हैं.
रूस के इतिहास में यूक्रेन के महत्व के बारे में ख़ुद पुतिन ने लिखा है. तो क्या अब पुतिन, यूक्रेन को फिर से हासिल करने के लिए उसे तबाह करने के लिए तैयार होंगे? अगर प्रतिबंधों और यूक्रेन के प्रतिरोधों से पुतिन के शासन की स्थिरता को ख़तरा है तो क्या वो और अधिक सख़्त कदम उठाएंगे?
रिकॉर्ड से ये पता चलता है कि ज़मीन पर अपने सैन्यबलों की कमज़ोरियों की भरपाई रूस भीषण बमबारी से करता आया है. यूक्रेन के लोग प्रार्थना कर रहे हैं कि यहां ऐसा न हो.
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