दाग़िस्तान एयरपोर्ट पर फ़लस्तीनी समर्थक यहूदियों को कैसे निशाना बनाने पहुंचे

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- Author, ओल्गा रॉबिनसन, मारिया कोरेनयुक और ग्रिगॉर अतानेसियन
- पदनाम, बीबीसी वैरिफ़ाई और बीबीसी ग्लोबल डिसइंफॉर्मेशन टीम
रूस के दाग़िस्तान में एक एयरपोर्ट पर रविवार को जब इसराइल से फ्लाइट आई तो फ़लस्तीनी समर्थकों ने धावा बोल दिया.
फ़लस्तीनी समर्थकों की भीड़ रनवे तक पहुंच गई और कुछ लोगों को गाड़ी पलटते हुए भी वीडियो में देखा गया.
ऐसी भी रिपोर्ट्स आईं कि फ़लस्तीनी समर्थकों की भीड़ गाड़ियों को रुकवाकर यात्रियों के दस्तावेज़ देख रही थी कि कोई इसराइली तो नहीं है.
ये मामला इतना बढ़ा कि इसराइल को रूस से ये अपील करनी पड़ी कि यहूदियों और इसराइलियों की रूस रक्षा करे.
दाग़िस्तान मुख्य तौर पर एक मुस्लिम रूसी गणतंत्र है जो कि उत्तर कॉकसस में है.
ये कैस्पियन सागर के पश्चिमी किनारे पर स्थित है और यहां की आबादी लगभग 31 लाख है.
मगर दाग़िस्तान के एयरपोर्ट पर यहूदियों और इसराइली नागरिकों के ख़िलाफ़ ये भीड़ आख़िर जुटी कैसे और इसमें सोशल मीडिया की भूमिका क्या रही?
इस कहानी में हम यही समझने की कोशिश करेंगे.

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‘बिन बुलाए मेहमानों से मिलो’
29 अक्तूबर 2023.
दाग़िस्तान के पॉपुलर टेलीग्राम चैनल ‘उटरो दाग़िस्तान’ यानी मॉर्निंग दाग़िस्तान पर तेल अवीव से आने वाली फ्लाइट्स की जानकारियां साझा की गईं.
टेलीग्राम चैनल पर फॉलोअर्स से अपील की गई कि दाग़िस्तान के मुख्य एयरपोर्ट पर बिन बुलाए मेहमानों से मिलिए.
टेलीग्राम चैनल पर बताया गया कि स्थानीय समयानुसार शाम सात बजे फ़्लाइट आएगी.
इस बताए वक़्त पर सैकड़ों युवाओं की भीड़ एयरपोर्ट पहुंची. इससे सुरक्षाकर्मियों के लिए मुश्किलें पैदा हो गईं.
ये भीड़ रनवे की ओर दौड़ पड़ी और कुछ लोग छत पर भी चढ़ गए. ये भीड़ यहूदियों और इसराइली नागरिकों की तलाश कर रही थी.
सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ फ़लस्तीनी झंडे लहरा रही थी और यहूदी विरोधी नारे लगा रही थी. पुलिस को इस भीड़ पर काबू पाने में घंटों लगे.
रूस की न्यूज़ एजेंसियों के मुताबिक़, इस मामले में क़रीब 60 लोगों को गिरफ़्तार किया गया.
इस प्रदर्शन ने सुरक्षाबलों को भी चौंकाया.
ऐसे में सवाल है कि भीड़ ने कैसे सुनियोजित तरीके से इसे किया? बीबीसी ने टेलीग्राम चैनल 'मॉर्निंग दाग़िस्तान' को देखा और ये पाया कि कुछ दूसरे टेलीग्राम चैनल भी ऐसे ही यहूदी विरोधी प्रदर्शन और हिंसा के लिए उकसाने का काम कर रहे थे.

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'मॉर्निंग दाग़िस्तान' रूस विरोधी चैनल
'मॉर्निंग दाग़िस्तान' रूस विरोधी इस्लामिक चैनल है, जो कॉकसस में रूस के शासन को क़ब्ज़ा करार देता है और उसके ख़ात्मे की वकालत करता है.
इस चैनल पर स्थानीय आयोजनों के साथ-साथ यूक्रेन पर रूसी आक्रमण से जुड़ी जानकारियां साझा की जाती हैं.
साथ ही इस चैनल पर इसराइली-फ़लस्तीनी संघर्ष, हमास समर्थन से जुड़े मैसेज भी पोस्ट किए जाते हैं. इन पोस्ट में हमास के समर्थन से जुड़ी बातें भी होती हैं.
हमास को ब्रिटेन और अन्य देश आतंकवादी संगठन करार देते हैं लेकिन रूस ऐसा नहीं मानता है.
ये एक पब्लिक चैनल है जिसके कुछ दिन पहले तक 50 हज़ार सब्सक्राइबर्स थे लेकिन अब ये संख्या बढ़कर 65 हज़ार हो गई है.
रविवार को इस चैनल पर विस्तार से एयरपोर्ट पर जुटने की जानकारी दी गई. साथ ही इसराइल से आए यात्रियों को एयरपोर्ट से बाहर निकलने वाले रास्ते पर रोकने के लिए भीड़ के जुटने की बात कही गई.
एक मैसेज में कहा गया, ''यात्रियों से कहो कि इसराइल को कोसें और एक-एक करके निकलते जाएं.''
दूसरे मैसेज में कहा गया, ''अगर ये लोग इसराइल को लेकर बुरा नहीं कहते हैं तो हम उन्हें एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकलने देंगे.''

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दूसरे टेलीग्राम चैनलों पर भी हिंसा की बातें
चैनल पर फॉलोअर्स से कहा गया कि यात्रियों की तस्वीरें लो, उनकी कारों को ट्रैक करो और ये लोग दाग़िस्तान में कहां रुके हैं, इसकी लिस्ट तैयार की जाए.
बीते दिनों से इस चैनल पर लोगों से माख़ाचकला में 20 लाख मुसलमानों के समर्थन में रैली निकालने के लिए कहा गया. साथ ही यहूदी विरोधी संदेशों और स्थानीय लोगों से यहूदियों को किराए पर घर ना देने जैसी बातें भी इस टेलीग्राम चैनल पर की जाती रही हैं.
बीबीसी ने ये पाया कि हज़ारों सब्सक्राइबर्स वाले दूसरे टेलीग्राम चैनलों पर भी हिंसा की बातें पोस्ट की गई थीं. इनमें वो चैनल भी शामिल हैं, जिन पर इससे पहले कभी राजनीति से जुड़ी बातें नहीं होती थीं.
अविटो ख़रीद और बिक्री से जुड़ी वेबसाइट है.
इस चैनल पर भी हमने पाया कि दाग़िस्तान के उस यहूदी परिवार को निशाना बनाया जा रहा है, जिसके सदस्य कथित तौर पर इसराइल की तरफ़ से लड़ रहे हैं.
17 हज़ार सब्सक्राइबर्स वाले गोरेट्स चैनल पर भी ऐसी पोस्ट थीं, जिनमें स्थानीय यहूदियों और दाग़िस्तान आने वाले नए इसराइलियों पर ज़ुल्म ढाने की बातें की जा रही थीं.
सोमवार शाम टेलीग्राम के मालिक पावेल दुरोव ने ये एलान किया कि ऐसे चैनल जो हिंसा के लिए उकसा रहे हैं, उन्हें ब्लॉक किया जाएगा. इसके साथ दुरोव ने मॉर्निंग दाग़िस्तान की पोस्ट का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया.
इसके कुछ देर बाद ये चैनल ब्लॉक हो गया.

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'मॉर्निंग दाग़िस्तान' के पीछे कौन है?
मॉर्निंग दाग़िस्तान चैनल का संबंध रूस के पूर्व सांसद इलिया पोनोमारेव से है. इलिया ने 2016 में यूक्रेन की नागरिकता ले ली थी.
पोनोमारेव कई ऐसे सोशल मीडिया चैनल चलाते हैं, जो रूस में विरोध प्रदर्शनों को आयोजित करते हैं और पुतिन को सत्ता से बाहर निकालने की बात करते हैं.
सोमवार को पोनोमारेव ने कहा, ''कुछ वक़्त पहले दाग़िस्तान के इस्लामिक संगठनों की ओर से मुझसे संपर्क किया गया.''
यूक्रेन पर रूसी युद्ध के ख़िलाफ़ रैली निकालने में पोनोमारेव ने इन लोगों की रैली आयोजन और वित्तीय संबंधी मदद की थी.
हालांकि पोनोमारेव ने कहा कि वो इस चैनल का समर्थन करना सितंबर 2022 में बंद कर चुके हैं. पर यहां उनके इस दावे का विरोधाभास भी देखने को मिलता है.
अगस्त 2023 में ही इस मॉर्निंग दाग़िस्तान चैनल को पोनोमारेव ने अपना चैनल बताया था और सितंबर महीने में अपने ऑपरेशन्स के लिए चैनल का हवाला दिया था.
दाग़िस्तान के गवर्नर सेरगई मिलिकोव और रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ाखारोवा ने पोनोमारेव से इस चैनल से कनेक्शन होने की बात का सहारा लेते हुए एयरपोर्ट हिंसा के पीछे यूक्रेन पर आरोप लगाए.
मेलिकोव ने कहा, ''आज हमें ये भरोसेमंद जानकारी मिली है कि मॉर्निंग दाग़िस्तान चैनल यूक्रेन की सरहद से दुश्मनों के हाथों चलाया जाता है.''
इस चैनल की ओर से एक स्टेटमेंट पोस्ट किया गया और कहा गया कि पोनोमारेव या यूक्रेन से मॉर्निंग पोस्ट का कोई नाता नहीं है.

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रूस के दावे पर अमेरिका ने क्या कहा?
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने इस हमले की निंदा की है.
वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को कहा कि इस घटना का मकसद रूस में अराजकता फैलाना है.
पुतिन ने कहा, ''दाग़िस्तान एयरपोर्ट में जो बीती रात सोशल नेटवर्क के ज़रिए हुआ, वो पश्चिमी स्पेशल सेवाओं के एजेंट्स के हाथों हुआ.''
वो कहते हैं, ''इस अराजकता को फैलाने के पीछे कौन है और इससे किसे फायदा मिल रहा है, मेरे ख्याल में ये एकदम साफ है. इसके पीछे अमेरिका का मौजूदा नेतृत्व ज़िम्मेदार है जिन्हें दुनिया में फैली अस्थिरता से फायदा पहुंच रहा है.''
रूस के इस दावे पर व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा, ''आपके देश में जब कुछ बुरा होता है तो आप दूसरे को ज़िम्मेदार ठहराते हैं. दागिस्तान में जो हुआ, उसका पश्चिम से कोई नाता नहीं है.''

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दाग़िस्तान
रूस के सभी प्रांतों में से दाग़िस्तान सबसे ज़्यादा विविधता वाला हिस्सा है.
इस हिस्से में कई धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं. इनमें एक बड़ी आबादी मुसलमानों की है. साथ ही प्राचीन वक़्त से रह रहे यहूदी समुदाय के लोग भी दागिस्तान में रहते हैं.
ये लोग सदियों से एक-दूसरे के साथ रहते आए हैं.
दागिस्तान के समाजशास्त्री रसूल अब्दुलखालिकोव ने कहा- यहूदियों के ख़िलाफ़ जो हिंसा हुई, उसके पीछे स्थानीय प्रशासन का फ़लस्तीन के समर्थन में रैली निकालने की इजाज़त ना देना शामिल है.
वो कहते हैं, ''इस हिंसा के लिए गवर्नर सरगेइ मेलिकोव ज़िम्मेदार हैं कि बात यहां तक पहुंची. वरना इस आक्रोश से सही ढंग से निपटा जा सकता था.''
रसूल मानते हैं कि वॉट्सऐप चैट, टेलीग्राम चैनल और इंस्टाग्राम पेज नफरत फैलाने के लिए ज़िम्मेदार होते हैं.
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