हमास के कब्ज़े से रिहा हुईं इसराइली महिला बोलीं- 'नरक से होकर आई हूं'

लिफ़शिट्ज़

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हमास के क़ब्ज़े से रिहा होने के बाद 85 साल की इसराइली नागरिक योचेवेद लिफ़शिट्ज कहती हैं, 'मैं नरक से होकर आई हूं.'

दो हफ़्तों तक बंधक रहीं लिफ़शिट्ज़ और एक अन्य महिला नूरित कूपर को हमास ने सोमवार शाम को रिहा किया.

रिहा होने के बाद लिफ़शिट्ज़ ने बताया कि हमास के बाइकसवार बंदूकधारियों ने उनका और उनके पति का अपहरण कर लिया था और उन्हें ग़ज़ा के नीचे बने सुरंगों के मकड़जाल में ले गए थे.

उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान उन्हें 'छड़ी से पीटा गया' लेकिन ज़्यादातर बंधकों से साथ अच्छा बर्ताव किया गया.

एक वीडियो में लिफ़शिट्ज़ को रिहाई से पहले हमास के बंदूकधारी से हाथ मिलाते हुए देखा जा सकता है. उन्हें ग़ज़ा और मिस्र के बीच रफ़ा क्रॉसिंग पर अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस को सौंपा गया.

वह बंदूकधारी को 'शलोम' कहते हुए नज़र आती हैं. इस हिब्रू शब्द का अर्थ है- शांति.

लिफ़शिट्ज़

सुरंगों का 'मकड़जाल'

लिफ़शिट्ज़ और उनके पति का सात अक्टूबर को दक्षिणी इसराइल के किबुत्ज़ से अपहरण कर लिया गया था.

हमास ने किबुत्ज़ में तड़के हमला करके कोहराम मचा दिया था. यहां के हर चार में से एक व्यक्ति की या तो जान चली गई है या फिर उन्हें अग़वा कर लिया गया है. इनमें बच्चे भी शामिल हैं.

रिहाई के चंद घंटों बाद तेल अवीव के एक अस्पताल में पत्रकारों से बात करते हुए लिफ़शिट्ज़ ने बताया कि अपहरण के बाद उनके साथ क्या-क्या हुआ.

उन्होंने बताया कि गज़ा ले जाते समय उन्हें छड़ी से पीटा गया जससे उन्हें चोट आई और सांस लेने में भी दिक्कत हुई.

उनकी बेटी शारोन पत्रकारों को अनुवाद करके बता रही थीं कि उनकी मां के साथ क्या हुआ.

85 साल की लिफ़शिट्ज़ ने कहा कि उन्हें कुछ किलोमीटर तक पैदल चलने को कहा गया जहां ज़मीन काफ़ी गीली थी.

शारोन ने कहा कि उनकी मां को ग़ज़ा के नीचे सुरंगों के एक बहुत बड़े नेटवर्क में ले जाया गया जो देखने में मकड़ी के जाल की तरह लग रहा था.

वह बताती हैं कि उनकी मां समेत 25 बंधकों को सुरंगों में ले जाया गया. इसके बाद बुज़ुर्ग लिफ़शिट्ज़ और किबुत्ज़ के पांच अन्य लोगों को अलग कमरे में ले जाया गया.

BBC
बंधक बनाने वालों का बर्ताव अच्छा था और बाक़ी बंधक भी अच्छी हालत में हैं.
योचेवेद लिफ़शिट्ज
हमास द्वारा रिहा की गईं इसराइली नागरिक

हमास के अच्छे बर्ताव का दावा

लिफ़शिट्ज़ बताती हैं कि हर कमरे में एक गार्ड था और लोगों को डॉक्टर की सुविधा भी दी गई थी. उन्होंने बताया कि अंदर सफ़ाई थी और सोने के लिए ज़मीन पर गद्दे बिछे थे.

एक अन्य बंधक का ग़ज़ा में इलाज किया गया जिसे वहां ले जाते समय बाइक का एक्सिडेंट होने के कारण चोट आ गई थी.

लिफ़शिट्ज़ कहती हैं, “वो इस बात का ख़्याल रख रहे थे कि हम बीमार न पड़ें. हर दूसरे तीसरे दिन डॉक्टर की सुविधा दी जाती थी.”

उन्हें ज़रूरत की दवाएं भी मुहैया करवाई जाती थीं और वहां ऐसी महिलाएं भी थीं जो बंधक बनाई गई महिलाओं के हाइजीन से जुड़ी ज़रूरतों का ख़्याल रख रही थीं.

शारोन ने बताया कि उनकी मां को वही खाना दिया जाता था जो हमास के गार्ड खाते थे. इसमें खमीरी ब्रेड, चीज़ और खीरा शामिल था.

जब एक पत्रकार ने लिफ़शिट्ज़ से पूछा कि आपने बंदूकधारी से हाथ क्यों मिलाया तो उन्होंने जवाब दिया कि बंधक बनाने वालों ने उनके साथ 'अच्छा बर्ताव किया और बाकी बंधक भी अच्छी हालत में हैं.'

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हमास का वो हमला

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समाप्त

लिफ़शिट्ज़ और नूरित कूपर की रिहाई के कुछ घंटे पहले इसराइली सेना ने पत्रकारों को हमास के बॉडी कैमरे से बरामद एक रॉ फुटेज दिखाई थी ताकि दुनिया को याद दिला सकें कि दो हफ़्ते इसराइल पर कितनी क्रूरता से हमला किया गया था.

इस वीडियो में हमास के बंदूकधारी सड़क पर चल रहे आम लोगों पर गोलियां चलाते समय ख़ुशी से चिल्लाते हुए नज़र आ रहे हैं. बाद में वे किबुत्ज़िम में लोगों के घरों में घुसकर बच्चों और उनके माता-पिता को मार रहे थे.

इस हमले में 1400 से अधिक लोगों की जान गई जिनमें से ज़्यादातर आम नागरिक थे.

लिफ़शिट्ज़ और उनके 83 वर्षीय पति ओडेड जाने-माने शांति कार्यकर्ता हैं. उनके परिजन का कहना है कि इन दोनों ने ग़ज़ा के बीमार लोगों को इसराइल के अस्पतालों में लाने में मदद की थी.

उनकी बेटी शारोन ने बीबीसी को बताया कि ओडेड एक पत्रकार हैं जो दशकों से शांति स्थापना और फ़लस्तीनियों के अधिकारों के लिए काम कर रहे हैं.

नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट्स के मुताबिक़, ओडेड अल हमिश्मार अख़बार के लिए काम करते थे और वह 1982 में बेरूत में फ़लस्तीनी शरणार्थियों के कैंप में हुए नरसंहार की ख़बर सबसे पहले देने वालों में शामिल थे.

शारोन कहती हैं, “वह अरबी भाषा में अच्छे से बात कर सकते हैं. वह ग़ज़ा में कई लोगों को जानते थे.”

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अभी क्या है स्थिति

अब तक हमास ने कुल चार बंधक छोड़े हैं. इनमें अमेरिकी-इसराइली मां-बेटी- जूडिथ और नताली रानन भी शामिल हैं जिन्हें शुक्रवार को रिहा किया गया था.

इसराइल का कहना है कि हमास ने अभी भी 200 लोग बंधक बनाए हुए हैं. माना जा रहा है कि सोमवार रात को रिहा नूरित कूपर के पति भी इन बंधकों में शामिल हैं.

इस बीच, हमास शासित स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी है कि सात अक्टूबर से अब तक ग़ज़ा में 5, 791 लोगों की मौत हुई है और 700 लोग तो पिछले चौबीस घंटों में ही मारे गए हैं.

वहीं, इसराइल ने कहा है कि उसने बीते दिन ग़ज़ा में 400 से अधिक ठिकानों पर हमले किए हैं.

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