इसराइल हमास संघर्ष बढ़ा तो लेबनान में हिज़बुल्लाह के साथ खुल सकता है नया मोर्चा- ग्राउंड रिपोर्ट

इसराइल-लेबनान सीमा

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    • Author, ह्यूगो बशेगा
    • पदनाम, बीबीसी मध्यपूर्व संवाददाता, दक्षिण लेबनान से

पिछले कुछ दिनों में इसराइल और लेबनान की सीमा पर सशस्त्र चरमपंथियों और इसराइली सेना के बीच बार-बार गोलीबारी की घटनाएं दर्ज की गई हैं.

इसकी वजह से इसराइल के साथ लगने वाली लेबनान सीमा पर तनाव बढ़ गया है. आशंकाएं जताई जा रही हैं कि ये तनाव एक बड़े संघर्ष में तब्दील हो सकता है.

लेबनान में सीमा से कुछ दूर पर बेन जबेल नामक कस्बा है जिसकी सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है. ज़्यादातर दुकानें बंद हैं.

इस कस्बे और इससे जुड़े तमाम दूसरे गांवों में रहने वाले कई लोग अपने-अपने घर छोड़कर जा चुके हैं.

यहां रहने वाले लोगों को इस बात का डर है कि अगर इसराइल और हमास के बीच जारी संघर्ष आगे बढ़ा तो हिज़बुल्लाह की ओर से नियंत्रित ये क्षेत्र एक नए मोर्चे में तब्दील हो सकता है.

'तब तक नहीं जाऊंगा, जब तक...'

रॉकेट से हुए हमलों के बाद इसराइल अपनी सीमावर्ती किरयात शमोना के 20 हज़ार निवासियों को शहर छोड़ने के इस शहर को छोड़ने के लिए कह रहा है

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यहां हमारी मुलाक़ात कुछ लोगों से हुई जो एक प्लास्टिक की टेबल के आसपास बैठे थे. इनमें से कुछ लोग पिज़्ज़ा खा रहे थे तो कुछ लोग धूम्रपान कर रहे थे.

ये समूह हमें चिंतित नज़र नहीं आया.

हम जैसे ही इन लोगों से बात करने के लिए इनकी ओर बढ़े, वैसे ही अलग-अलग दिशाओं से हिज़बुल्लाह की सोच रखने वाले भी इकट्ठे हो गए.

इन लोगों की मौजूदगी में 52 वर्षीय मोहम्मद बेदूं ने हमसे कहा, "मैं तब तक यहां से नहीं जाऊंगा, जब तक स्थिति हाथ से न निकल जाए. और मुझे नहीं लगता कि ऐसा होगा."

बेदूं ने ये भी बताया कि उन्हें हिज़बुल्लाह पर भरोसा है और यकीन है कि वह उनकी सुरक्षा करेगा.

हिज़बुल्लाह के अगले क़दम पर निगाहें

हिज़बुल्लाह समूह का झंडा

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हमास की तरह हिज़बुल्लाह को भी ब्रिटेन और अमेरिका समेत अन्य कई देश एक आतंकवादी संगठन के रूप में देखते हैं.

हिज़बुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह ने हमास और इसराइल के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से कोई बयान नहीं दिया है.

हिज़बुल्लाह में दूसरे नंबर के नेता नईम क़ासेम ने अपने संगठन को पूरी तरह तैयार बताया है.

उन्होंने ये भी कहा है कि उनका संगठन अमेरिका या दूसरे देशों की ओर से इस मामले से दूर रहने की हिदायतों से नहीं घबराएगा.

लेकिन उनके ख़ुफ़िया आचरण से उनकी तैयारियों के बारे में कुछ भी पता लगाना बहुत मुश्किल है.

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इसराइल एक लंबे समय से अस्सी के दशक में जन्म लेने वाले सामाजिक एवं राजनीतिक आंदोलन हिज़बुल्लाह को हमास की तुलना में मजबूत ताक़त मानता है.

इस संगठन के पास लेज़र गाइडेड मिसाइलें हैं जो इसराइली में काफ़ी अंदर हमला कर सकती हैं.

इसके साथ ही हिज़बुल्लाह के पास हज़ारों प्रशिक्षित और युद्ध में लड़ने का अनुभव रखने वाले लड़ाके हैं.

अब तक हिज़बुल्लाह की गतिविधियां सीमा पार हमलों तक सीमित रही हैं.

यहां सीमा से मतलब संयुक्त राष्ट्र की ओर से तय 'ब्लू लाइन' है जो लेबनान और इसराइल के बीच अनाधिकारिक सीमा है.

लेबनान की सीमा पर इसराइली हमला

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लेबनान पर हमले को लेकर इसराइल ने क्या कहा?

जहां इसराइल और हिज़बुल्ला की ओर से एक दूसरे पर गोलीबारी और मिसाइलें दागने की ख़बरें आई, वहीं हिज़बुल्लाह के सहयोगी फ़लस्तीनी गुटों की ओर से भी दक्षिण लेबनान से हमले किए जा रहे हैं.

इस टकराव की वजह से दोनों पक्षों के कई लोगों की मौत हुई है जिनमें आम लोग भी शामिल हैं.

लेबनान से लगती सीमा के पास इसराइली क्षेत्र में रहने वाले लोग भी अपने घर छोड़कर भाग रहे हैं.

शुक्रवार को इसराइली सेना ने कहा कि वह उत्तरी शहर किरयात श्मोना में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही थी.

इस शहर में बीस हज़ार लोग रहे हैं. पिछले दिनों ये शहर एक रॉकेट हमले की चपेट में आया था.

वीडियो कैप्शन, COVER STORY: ग़ज़ा में अस्पताल पर हमले के बाद कैसे हैं हालात?

इससे कुछ दिन पहले इसराइल सीमा से दो किलोमीटर क्षेत्र को 'प्रतिबंधित क्षेत्र' घोषित करके 28 समुदायों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का एलान किया था.

बीते मंगलवार ग़ज़ा के अस्पताल पर हमला होने के बाद लेबनान में तनाव काफ़ी बढ़ गया था. हमास ने इसके तुरंत बाद इसराइल पर आरोप लगाया था.

लेकिन इसराइली सेना ने कहा कि इस हमले के लिए फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन का एक रॉकेट ज़िम्मेदार है जो मिस फायर कर गया.

ग़ज़ा के एक अस्पताल पर मंगलवार को हुए विस्फोट के बाद से लेवबनान में तनाव बढ़ गया है.

इसराइल ने तत्काल इस धमाके के लिए हमास को जिम्मेदार ठहराया. लेकिन इसराइली सेना का कहना है कि धमाका फ़लस्तीनी चरमपंथियों की एक मिसाइल के मिसफायर हो जाने की वजह से हुआ.

इसराइली हमला

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क्या कहते हैं जानकार

हालाँकि, हिज़बुल्लाह ने इसे इसराइल की ओर से किया गया 'नरसंहार' बताया है. बेरुत में उसके सैकड़ों समर्थकों ने विरोध-प्रदर्शन किया और अमेरिका-इसराइल विरोधी नारे लगाए.

हालांकि यह एक छोटा सा प्रदर्शन था, इसे हिज़बुल्लाह ने नाराज़गी का अभूतपूर्व दिन बताया था.

हिज़बुल्लाह के अगले क़दम की समझ रखने वाले एक सोर्स ने अपनी पहचान न उजागर करने की शर्त पर बताया कि यह समूह आगे क्या करेगा वह ग़ज़ा में होने वाली घटनाओं पर आधारित होगा.

वे कहते हैं, "अगर इसराइल ने उस पर हमला किया तो इस क्षेत्र में तबाही मचेगी."

वहीं कुछ अन्य जानकारों का मानना है कि हिज़बुल्लाह के अगले क़दम का फ़ैसला उसका समर्थक ईरान लेगा.

वीडियो कैप्शन, COVER STORY: बमबारी के बावजूद आखिर ग़ज़ा क्यों नहीं छोड़ रहे कई लोग?

पिछले हफ़्ते अपने क्षेत्र किए गए लगातार हमले के लिए इसराइल ने ईरान पर आरोप लगाया है कि उसने हिज़बुल्लाह को इसके लिए आदेश दिया था.

इस बीच ईरान ने चेतावनी दी है कि सीरिया, इराक़ और यमन की संयुक्त भागीदारी वाला उसका 'रेसिस्टेंस फ़्रंट' इसराइल के कुछ भी करने से पहले उसे रोकने के लिए कार्रवाई कर सकता है.

ताज़ा हिंसा के भड़कने से पहले समीक्षकों के बीच इस बात को लेकर सहमति थी कि न तो इसराइल और न ही हिज़बुल्लाह को एक और युद्ध में दिलचस्पी थी क्योंकि ये सभी को पता है जब 2006 में दोनों के बीच हुई लड़ाई महीनों चली थी.

कई सालों से लेबनान आर्थिक तंगी से गुज़र रहा है और आंतरिक राजनीतिक लड़ाई की वजह से यह देश सरकार या राष्ट्रपति के बग़ैर चल रहा है और यहां सांप्रदायिक विभाजन भी बढ़ रहा है.

लेबनान के सीमावर्ती गांव पर इसराइली हमला

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सीमावर्ती गांव धयारा में पिछले हफ़्ते इसराइल की जवाबी कार्रवाई में एक स्थानीय मस्जिद और कुछ घरों पर हमले हुए.

इस युद्ध के शुरू होने के बाद वहां से राजधानी बेरुत जा चुकीं 36 वर्षीय सबरीना फ़नाश चरमपंथियों की आलोचना में मुखर रही हैं, उन्होंने चरमपंथियों के सुन्नी बहुल गांव के इस्तेमाल पर एतराज जताया था.

वे अपने चचेरे भाई के आंशिक रूप से नष्ट हुए घर के मलबे से गुज़रते हुए सवाल उठाती हैं, "हमारे घरों का ये हाल सही नहीं है, उन्हें फिर से कौन बनवाएगा?"

वे कहती हैं, "हम सभी दुखी हैं... सब भगवान पर निर्भर है, वो हमारी रक्षा करेंगे."

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