कौन हैं इरफ़ान सुल्तानी, जिन्हें ईरान में पहले फांसी की सज़ा सुनाई और बाद में रोक दी गई

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ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच एक शख्स को मौत की सज़ा सुनाई गई. इस शख्स का नाम 'इरफ़ान सुल्तानी' है. उनके परिवार और मानवाधिकार समूहों ने कहा है कि इरफ़ान को बताया गया कि उन्हें फांसी हो सकती है.
26 वर्षीय इरफ़ान सुल्तानी पिछले गुरुवार को तेहरान के पश्चिम में स्थित फ़र्दिस शहर से गिरफ़्तार किए गए थे.
कुछ दिनों बाद अधिकारियों ने उनके परिवार को बताया कि उनकी फांसी बुधवार को होनी है, लेकिन कोई और जानकारी नहीं दी.
यह बात नॉर्वे में स्थित कुर्द मानवाधिकार समूह हेंगॉ ने बताई. हालांकि, बाद में ईरान की न्यायपालिका ने कहा कि सुल्तानी को मौत की सज़ा नहीं दी गई.
बीबीसी फ़ारसी सेवा के मुताबिक, न्यायपालिका ने कहा, "अगर मुक़दमे के दौरान सुल्तानी पर आरोप साबित होते हैं और अदालत में क़ानूनी फैसला आता है, तो क़ानून के हिसाब से 'जेल' की सज़ा है. इस तरह के आरोपों के लिए क़ानून में 'मौत की सज़ा' का प्रावधान ही नहीं है."
बुधवार को मानवाधिकार समूह हेंगॉ ने कहा कि सुल्तानी के जीवन को लेकर फ़िक्र बनी हुई है. लेकिन अब परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, उनकी फांसी को टाल दिया गया है.
ईरान की सरकार इंटरनेट बंद कर चुकी है. ऐसे में इरफ़ान जैसी स्थितियों में फंसे दूसरे लोगों की भी जानकारी मिलना मुश्किल हो गया है.
हेंगॉ के अवियर शेखी ने बीबीसी को बताया कि सुल्तानी जैसे और भी मामले हैं. उन्होंने कहा कि ईरानी सरकार पिछले विरोध प्रदर्शनों की तुलना में इस बार तेज़ी से हिंसा से दबा रही है.
कौन है इरफ़ान सुल्तानी?

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इरफ़ान सुल्तानी के रिश्तेदारों ने बीबीसी फ़ारसी को बताया कि अदालत ने सिर्फ दो दिनों में मौत की सज़ा सुना दी.
सुल्तानी ईरान के कराज शहर के फ़र्दिस के रहने वाले हैं. वह वहाँ कपड़ों की दुकान चलाते हैं.
मानवाधिकार समूह हेंगॉ ने कहा कि सुल्तानी को उनके घर से गिरफ़्तार किया गया. ईरानी अधिकारियों ने परिवार को मामले की और कोई जानकारी नहीं दी, सिर्फ़ इतना कहा कि वह विरोध प्रदर्शन से जुड़े हुए थे.
सुल्तानी की बहन पेशे से वकील हैं. उन्होंने मामले को आगे बढ़ाने की कोशिश की तो अधिकारियों ने कहा कि आगे कुछ नहीं किया जा सकता है.
हेंगॉ से जुड़े शेखी ने बीबीसी रेडियो को बताया, "वह (इरफ़ान सुल्तानी) सिर्फ ईरान की मौजूदा स्थिति के खिलाफ है. उसे अपनी राय रखने के लिए मौत की सज़ा मिली. ईरान में सुल्तानी जैसी स्थिति कई लोगों की है, लेकिन इंटरनेट बंद होने के कारण जानकारी नहीं मिल पा रही है."
शेखी ने बताया, "ईरान में मौत की सज़ा पाए कैदियों को आमतौर पर फांसी से पहले परिवार से आखिरी मुलाक़ात करने की इजाज़त मिलती है. ईरानी अधिकारियों ने सुल्तानी के परिवार को बताया था कि फांसी से पहले इरफ़ान से मुलाकात करा देंगे, लेकिन गिरफ़्तारी के बाद परिवार से उसका कोई संपर्क नहीं हो पाया."
डोनाल्ड ट्रंप ने दी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान विरोध करने वालों को फांसी देगा तो अमेरिका बहुत सख्त कदम उठाएगा. उन्होंने ट्रुथ सोशल पर ईरानियों से विरोध जारी रखने के लिए कहा.
ट्रंप ने लिखा कि जब तक विरोध करने वालों की बेवजह हत्या बंद नहीं होती. तब तक ईरानी अधिकारियों से सभी मीटिंग रद्द कर दी गई हैं. ट्रंप ने बाद में कहा कि उनकी टीम को सूत्रों से पता चला है कि ईरान में हत्याएं रुक गई हैं और किसी को फांसी देने की योजना नहीं है.
ईरान की राजधानी तेहरान में अधिकारियों ने पिछले गुरुवार को ही इंटरनेट बंद कर दिया. तब विरोध बढ़ गया था और हिंसक दमन भी तेज हो गया था.
बीबीसी समेत ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय समाचार संस्थाएं ईरान के अंदर से रिपोर्ट नहीं कर पा रही हैं. इससे वहां के हालात की जानकारी मिलना और उसकी पुष्टि करना मुश्किल हो गया है.
अमेरिकी ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी (एचआरएएनए) ने बताया है कि अब तक 2 हज़ार 417 प्रदर्शनकारियों की मौत की पुष्टि हुई है. साथ ही 12 बच्चे और 10 आम नागरिक भी मारे गए. सुरक्षा बलों या सरकार से जुड़े लगभग 150 लोग भी मारे गए. जबकि 18 हज़ार 434 प्रदर्शनकारियों की गिरफ़्तारी हो चुकी है.
ईरान के ज्यूडिशरी चीफ़ गुलाम हुसैन मोहसिनी-इजेई ने उपद्रव करने वालों के ख़िलाफ़ तेज़ कार्रवाई करने की बात कही है.
उनके अनुसार, "जिन्होंने आतंकी गतिविधियां की, उनके मुक़दमों की सुनवाई और सज़ा की प्रक्रिया तेज़ी से चलेगी."
उन्होंने कहा, "हाल के उपद्रव में मुख्य लोगों के मुक़दमे पर खुली अदालत में बहस होगी, जिनमें मीडिया को आने की इजाज़त भी होगी.
लेकिन मानवाधिकार समूह से जुड़े हेंगॉ ने कहा कि सुल्तानी के मामले मे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का साफ़ उल्लंघन है. इतनी जल्दबाज़ी हो रही है और पारदर्शिता के बग़ैर मामले को आगे बढ़ाया जा रहा है. इससे चिंता बढ़ गई है कि विरोध को दबाने के लिए 'मौत की सज़ा' को हथियार बनाया जा रहा है.

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अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने फारसी एक्स अकाउंट पर लिखा, "इरफ़ान पहले प्रदर्शनकारी हैं जिन्हें मौत की सज़ा मिली है, लेकिन वह आखिरी नहीं होंगे."
विरोध प्रदर्शन सभी 31 प्रांतों और 180 से ज्यादा शहरों और कस्बों में फैल गए हैं. इनकी शुरुआत ईरानी मुद्रा के गिरने और महंगाई से जनता में आए रोष से हुई. हालांकि, बहुत जल्द विरोध सत्ता परिवर्तन की मांग तक पहुंच गया. 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से इसे धार्मिक सत्ता के लिए सबसे बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है.
पिछले तीन साल में ईरान में कम से कम 12 लोगों को फांसी दी गई, जो 2022 के "वुमन, लाइफ, फ़्रीडम" विरोध से जुड़े थे. तब ईरान में महसा अमीनी की मौत से हंगामा शुरू हुआ था. महसा एक युवा कुर्द महिला थी, जिनकी हिरासत में मौत हो गई. मोरैलिटी पुलिस ने उस पर "गलत" तरह से हिजाब पहनने का आरोप लगाया था.
मानवाधिकार समूहों के अनुसार, ऐसी फांसी की सज़ा आखिरी बार 6 सितंबर, 2025 को हुई, जब मेहरान बहरामियन को इस्फ़हान शहर में फांसी दी गई.
नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स ने तब बताया था कि अधिकारियों ने मेहरान को यातना देकर जबरन क़बूलनामा लिया और उसे निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिली. उसे जनवरी 2024 में अदालत ने "एनिमिटी अगेंस्ट गॉड" के आरोप में मौत की सज़ा दी, क्योंकि उन पर दिसंबर 2022 में सेमिरोम में एक विरोध प्रदर्शन में रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कोर के सदस्य की हत्या का आरोप था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिवन्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















