फ़लस्तीनियों के बायो का ग़लत अनुवाद कर 'आतंकवादी' बताने के लिए मेटा ने मांगी माफ़ी

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- Author, लिव मैकमोहन और जो टिडी
- पदनाम, टेक्नोलॉजी टीम
फ़लस्तीन के कुछ इंस्टाग्राम यूज़र्स के बायो में 'आतंकवादी' शब्द जोड़ने के लिए मेटा ने माफ़ी मांगी है.
मेटा ने कहा है कि उसके कुछ प्लेटफ़ॉर्म में उस समस्या को ठीक कर लिया गया है, जिसके कारण थोड़े समय के लिए अनुचित अरबी अनुवाद हुआ.
मेटा ने बीबीसी को बताया, "हम ईमानदारी से माफ़ी मांगते हैं कि ऐसा हुआ."
इस प्लेटफॉर्म पर इसराइल-ग़ज़ा संघर्ष के दौरान फ़लस्तीनियों के समर्थन में आवाज़ उठाने वाली सामग्री को दबाने के भी आरोप लगे हैं.
मेटा- फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप की मालिकाना कंपनी है.

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यूज़र्स ने क्या आरोप लगाए हैं?
कुछ यूज़र्स का कहना है कि फ़लस्तीनी समर्थक पोस्ट के कारण उन्हें इंस्टाग्राम पर 'प्रतिबंधित' कर दिया गया है. ऐसा तब होता है जब कोई प्लेटफॉर्म यह सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करता है कि पोस्ट अन्य लोगों के फ़ीड में न दिखाई दे.
यूज़र्स ने दावा किया कि इसराइल-ग़ज़ा संघर्ष का संदर्भ देने वाली कहानियों पर 24 घंटे की पोस्ट को दूसरों की तुलना में कम देखा गया. उन्हें आसानी से सर्च भी नहीं किया जा सकता है.
इस दिग्गज टेक कंपनी ने स्वीकार किया कि एक बग से ये कहानियां प्रभावित हुईं. इसके साथ ही उसका यह भी कहना है कि इस समस्या का कहानियों के विषयवस्तु से कोई लेना-देना नहीं है.
यूज़र्स के बायो पर भ्रम
रविवार को एक इंस्टाग्राम यूज़र ने एक्स (पूर्व नाम ट्विटर) और टिकटॉक पर अपनी एक पोस्ट में अनुवाद की समस्या की ओर ध्यान दिलाया. उन्होंने इसे स्क्रीन रिकॉर्डिंग में दर्ज किया.
उन्होंने अपने बायो में लिखा था कि वो फ़लस्तीनी हैं. इसके बाद उन्होंने फ़लस्तीनी झंडा और अरबी में 'अल्हम्दुलिल्लाह' शब्द लिखा था. इसका अनुवाद 'भगवान की प्रार्थना करो' होता है.
हालांकि 'सी ट्रांसलेशन' पर क्लिक करने पर यूज़र्स को इसका जो अंग्रेज़ी अनुवाद दिखा, उसका आशय था, "भगवान की प्रार्थना करो, फ़लस्तीनी आतंकवादी अपनी आज़ादी के लिए लड़ रहे हैं.''
इस यूज़र ने अपनी पोस्ट में कहा है कि वह ख़ुद फ़लस्तीनी नहीं थे, लेकिन एक अनाम फ़लस्तीनी मित्र की ओर से इस तरफ ध्यान दिलाए जाने के बाद उन्होंने इस त्रुटि का परीक्षण किया था.
इंस्टाग्राम ने जब इस समस्या को ठीक कर लिया, उसके बाद उन्होंने एक वीडियो पोस्ट में कहा कि यह गड़बड़ी कम से कम तीन घंटे से थी. उन्होंने यह भी कहा कि निजी तौर पर मेरे लिए तथ्य यह है कि यह उन्मादी था.

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क्या होती है शैडो बैनिंग
'शैडो बैनिंग' तब की जाती है, जब ऑनलाइन सेवा प्रदाता किसी अकाउंट की पहुंच या उसके देखे जाने को सीमित कर देते हैं, आमतौर पर यह तब होता है जब कोई उनके दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करता है.
इंस्टाग्राम ने 2022 के अंत में एक ट्रांसपेरेंसी टूल जारी किया था. यह यूज़र्स को यह देखने देता है कि क्या उनके खाते पर कोई प्रतिबंध लगाया गया है, जो उनकी पोस्ट को अन्य यूज़र्स के लिए अनुशंसित होने से रोक सकता है.
बेला हदीद ने दावा किया कि पिछले साल इसराइल-ग़ज़ा संघर्ष के बारे में पोस्ट करने के बाद उन पर इंस्टाग्राम पर 'शैडो बैन' लगाया गया था.
अभी हाल ही में पाकिस्तानी लेखिका फातिमा भुट्टो ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा था कि उन्हें फ़लस्तीन समर्थक पोस्ट के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था. उनके फॉलोवर्स ने उन्हें बताया कि वे अपनी फ़ीड में उनकी स्टोरी नहीं देख सकते या नहीं ढूंढ सकते.
रविवार को एक्स पर जारी एक बयान में मेटा के कम्युनिकेशन डायरेक्टर एंडी स्टोन ने कहा कि प्लेटफ़ॉर्म ने उन स्टोरीज़ की पहुंच को काफ़ी हद तक कम करने वाले एक बग की पहचान की थी. यह उन रीलों या सामग्री के साथ हुआ, जिसे यूज़र्स ने रीपोस्ट किया था.
उन्होंने कहा, "इस बग ने दुनिया भर के अकाउंट को समान रूप से प्रभावित किया. इसका सामग्री के विषयवस्तु से कोई लेना-देना नहीं है. इसे हमने जितनी जल्दी हो सका, उतना जल्दी ठीक कर दिया है."

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पहले भी लगे हैं ऐसे आरोप
मेटा की ओर से फ़लस्तीन के समर्थन में लिखी सामग्री की रीच कम करने के आरोप पहले भी लगे हैं. इन आरोपों को अच्छे से दर्ज किया गया है.
मई 2021 में ह्यूमन राइट्स वॉच ने आरोप लगाया था कि इंस्टाग्राम इस संकट से जुड़े वीडियो, तस्वीरें और लेखों को हटा रहा है.
इसके जवाब में सोशल मीडिया की इस कंपनी ने कहा कि पोस्ट को हेट स्पीच या प्रतीकों के कारण हटाया गया. इसके एल्गोरिदम को बदल दिया गया था. लेकिन इसने मेटा को 2021 के इसराइल-फ़लस्तीनियों के संघर्ष की सामग्री के मॉडरेशन की एक स्वतंत्र समीक्षा शुरू करने के लिए प्रेरित किया.
इसके बाद इन आरोपों पर कंसल्टेंसी फर्म बिज़नेस फॉर सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (बीएसआर) की रिपोर्ट सितंबर 2022 में प्रकाशित की गई थी.
रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया, "ऐसा प्रतीत होता है कि मेटा के काम की वजह से फ़लस्तीनी यूज़र्स की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सभा की स्वतंत्रता, राजनीतिक भागीदारी और गैर-भेदभाव के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा. इससे उनकी अपने अनुभवों की जानकारी और उसके बारे में नज़रिया साझा करने की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा."
बीएसआर का कहना था कि उसे मेटा में जानबूझकर नस्लीय या राजनीतिक पूर्वाग्रह नहीं मिला. लेकिन उसने सिफ़ारिश की कि कंपनी को उन यूज़र्स को अधिक विस्तृत सफाई देनी चाहिए जिनके पोस्ट या अकाउंट हटा दिए गए हैं. इसके अलावा हिब्रू और अरबी भाषा के कर्मचारियों के भाषा कौशल में सुधार की सिफारिश की गई है.
हमास के हमलों के बाद दुष्प्रचार और अवैध सामग्री के प्रसार को सीमित करने के उपायों के बारे में अधिक जानकारी पाने के लिए यूरोपीय कमिशन ने मेटा और टिकटॉक को गुरुवार को औपचारिक अनुरोध भेजा.
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