केरल में हमास के नेता की स्पीच से बरपा हंगामा, गरमाई सियासत - प्रेस रिव्यू

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केरल में फ़लस्तीनियों के समर्थन में निकाली एक रैली में फ़लस्तीनी विद्रोही गुट हमास के नेता ख़ालिद मशाल के वर्चुअली शामिल होने के बाद वहां राजनीतिक विवाद पैदा हो गया है.
यहां विपक्षी बीजेपी ने रैली में हिस्सा लेने वालों और उसके आयोजकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की है.
अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार शुक्रवार को मलाप्पुरम में हुई इस रैली में ख़ालिद मशाल के भाषण के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे. जिसके बाद बीजेपी ने कहा कि आयोजकों और रैली में हिस्सा लेने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जानी चाहिए.
शुक्रवार को केरल के जमात-ए-इस्लामी हिंद का युवा शाखा सॉलिडेरिटी यूथ मूवमेन्ट (एसवाईएम) ने फ़लस्तीनियों के समर्थन में एक रैली का आयोजन किया था.
इसमें ख़ालिद मशाल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए शामिल हुए. इसका एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो में लिखा है- "बुलडोज़र हिंदुत्व और रंगभेदी यहूदीवाद को उखाड़ फेंको."
एसवाईएम ने ख़ालिद मशाल की स्पीच का ट्रांसलेशन जारी किया है जिसके अनुसार उन्होंने कहा, "सेना के हारने के बाद अब इसराइल ग़ज़ा के लोगों से बदला ले रहा है. उसने यहां घर उजाड़े हैं, उसने ग़ज़ा के आधे से अधिक हिस्से को तबाह कर दिया है. उन्होंने मस्जिदों, पूजास्थलों, यूनिवर्सिटी और संयुक्त राष्ट्र की इमारतों को तोड़ा है. वो ग़ज़ा को पूरी तरह से ख़त्म कर देना चाहते हैं."
उन्होंने कहा, "1967 के बाद से अल-अक़्सा मस्जिद गिरने की कगार पर है. नेतन्याहू के नेतृत्व में इसराइल में धुर दक्षिणपंथी सरकार आई और वो अल-अक्सा को ख़त्म करने के मौक़े तलाश कर रही है. वो अल-अक्सा को गिराकर वहां अपना मंदिर बनना चाहते हैं, ये जगह हमारी पवित्र जगह है, हमारा गौरव है."
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लेकिन इस रैली को लेकर बीजेपी हमलावर हो गई है. केरल बीजेपी अध्यक्ष के. सुरेन्द्रन ने सोशल मीडिया पर लिखा, "हमास के नेता ख़ालिद मशाल का वर्चुअल भाषण चेताने वाला है. पिनाराई विजयन की केरल पुलिस कहां है? 'फ़लस्तीन बचाने' के नाम के तले वो हमास का महिमामंडन कर रहे हैं जो एक आतंकवादी संगठन है. वो उनके नेता को 'योद्धा' कह रहे हैं. ये अस्वीकार्य है."
वहीं केरल एसवाईएम प्रमुख सुहैब सीटी ने कहा है कि हमास नेता का किसी रैली में शामिल होना "न तो असामान्य है और न ही ग़ैर-क़ानूनी" है.
उन्होंने कहा, "हमास भारत में कोई प्रतिबंधित संगठन नहीं है और न ही भारत ने इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया है. भारत में तो ये काम भी नहीं करता. पहले भी केरल में कई कार्यक्रमों में हमास के नेताओं ने शिरकत की है. हमास एक विद्रोही आंदोलन है."
"हमास एक राजनीतिक पार्टी भी है जिसने चुनावों में कई सीटों पर जीत दर्ज की है. इसलिए हमास के नेता का केरल में फ़लस्तीनियों के समर्थन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होना असामान्य नहीं है."
"ये लोग और संघ परिवार फ़लस्तीनियों के समर्थन में आने वालों को बदनाम करने की साजिश कर रहे हैं और ग़लत एजेंडा फैला रहे हैं. ऐसा करके वो भारत के इसराइल के समर्थन के विरोध में होने वाले प्रदर्शनों को रोक रहे हैं. इस तरह की कोशिशें कामयाब नहीं होंगी."

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यूपी जदयू का आग्रह- फूलपुर या वाराणसी से चुनाव लड़ें नीतीश कुमार
जनता दल यूनाइटेड की उत्तर प्रदेश इकाई के कई नेताओं ने शनिवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाक़ात की और उनसे गुज़ारिश की कि अगले लोकसभा चुनाव में वो उत्तर प्रदेश की फूलपुर या वाराणसी सीट से बतौर उम्मीदवार उतरें.
अख़बार द हिंदू के अनुसार उन्होंने नीतीश कुमार से कहा कि वह प्रधानमंत्री पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार हैं और उन्हें कम से कम तीन महीनों तक यहां चुनाव प्रचार करना चाहिए.
जदयू का कहना है कि फूलपुर में 20 फ़ीसदी आबादी कुर्मी जाति के लोगों की है, खुद नीतीश कुमार इस जाति से आते हैं. उत्तर प्रदेश में कुर्मी जाति के लोगों का सरनेम पटेल होता है. इससे पहले जवाहरलाल नेहरू और वीपी सिंह ने फूलपुर से चुनाव लड़ा था और दोनों बाद में देश के प्रधानमंत्री बने थे.
ये पहली बार नहीं है जब नीतीश कुमार से इस तरह की मांग की गई है. हालांकि इस तरह की मांगों पर अब तक नीतीश कुमार ने कुछ नहीं कहा है.
अख़बार लिखता है कि जदयू ने उत्तर प्रदेश की कुछ सीटों पर सर्वेक्षण कराया है. जदयू यूपी सत्येन्द्र पटेल कहते हैं कि यूपी में क़रीब एक दर्जन ऐसी लोकसभा सीटें हैं जहां से नीतीश कुमार चुनाव जीत सकते हैं.
उनका कहना है, "इनमें फूलपुर, मिर्ज़ापुर, आंबेडकर नगर और वाराणसी हैं. हम चाहते हैं कि वो वराणसी से प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ मैदान में उतरें. अगर नीतीश कुमार वाराणसी से चुनाव लड़ने का फ़ैसला लेंगे तो मोदी यहां से अपना नामंकन नहीं भरेंगे क्योंकि वो इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार होंगे और उन्हें सभी राजनीतिक पार्टियों का समर्थन मिलेगा."
नीतीश कुमार ने बीते बीस सालों में लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा है. आख़िरी बार 2004 में उन्होंने बिहार के नालंदा से लोकसभा चुनाव जीता था.

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मोदी की मिज़ोरम यात्रा रद्द, कांग्रेस ने कहा- मणिपुर नहीं गए इसलिए...
प्रधानमंत्री मोदी के अगले सप्ताह मिज़ोरम में चुनावी रैली में हिस्सा न लेने की ख़बर के बाद विपक्षी कांग्रेस ने इस मुद्दे पर हमलावर रुख़ अपना लिया है. कांग्रेस ने कहा है कि ऐसा इसलिए क्योंकि मणिपुर में क़रीब छह महीने पहले हिंसा भड़कने के बाद से मोदी ने अब तक मणिपुर का दौरा नहीं किया है.
अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के चुनाव आयोग को सौंपी गई बीजेपी की स्टार प्रचारकों की लिस्ट के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी को अगले सप्ताह मिज़ोरम जाना था जहां उन्हें चुनावी अभियान की शुरुआत करनी थी. उनका पहला कार्यक्रम 30 अक्तूबर को आइज़ोल से 80 किलोमीटर दूर मामित में तय था.
इसे लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है, "क्या ऐसा इसलिए क्योंकि ये सवाल उठाए जाएंगे कि हिंसा के 180 दिनों के बाद भी उन्हें अब तक पड़ोसी राज्य मणिपुर जाने का वक्त क्यों नहीं मिल पाया है... किस दलील के साथ वो मिज़ोरम में रैली में शामिल होंगे?"
मिज़ोरम भाजपा अध्यक्ष वनलालमुआका ने पुष्टि की कि मोदी की ये यात्रा अब रद्द हो गई है. उन्होंने कहा कि "मुझे बताया गया है कि उनकी दूसरी व्यस्तताएं हैं."
उन्होंने कहा कि ये उम्मीद की जा रही है कि गृह मंत्री अमित शाह मिज़ोरम का दौरा करेंगे, हालांकि अब तक ये नहीं बताया गया है कि ये दौरा कब और कहां होगा.
बीजेपी मिज़ोरम के ईसाई आदिवासी समाज में अपनी पहुंच बढ़ाना चाहती है, साथ ही यहां के अल्पसंख्यक ब्रू और चकमा आदिवासी समुदायों के बीच पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही है.
मामित में 7 नवंबर को वोटिंग होनी है. मिज़ोरम में बीजेपी की पैठ अधिक नहीं है, बीते चुनावों में बीजेपी ने यहां केवल एक- तुईचांग सीट जीती थी.
मणिपुर में हुई हिंसा का कुछ असर मिज़ोरम में भी देखा गया है. मिज़ोरम के मिज़ो और मणिपुर के कुकी-ज़ोमी आदिवासी समुदाय एक-दूसरे के करीब माने जाते हैं. यहां की मिज़ो नेशनल फ्रंट सरकार और मिज़ो सिविल सोसयटी में कुकी-ज़ोमी आदिवासियों के लिए मज़बूत समर्थन देखने को मिला है.

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सत्ता में आए तो दो घंटे में देंगे जाति जनगणना का आदेश- राहुल गांधी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि अगर उनकी पार्टी की सरकार केंद्र में आई तो दो घंटे के भीतर देश में जाति जनगणना का आदेश पास करेंगे.
अख़बार जनसत्ता के अनुसार छत्तीसगढ़ के बस्तर में रैली में उन्होंने कहा कि "प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषणों में ओबीसी का ज़िक्र तो करते हैं लेकिन जाति जनगणना कराने से डरते हैं. अगर हमारी पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव में जीतती है तो दो घंटे के भीतर देश में जाति जनगणना कराने का आदेश पारित होगा."
उन्होंने कहा, "जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार सत्ता में थी तो उसने जातियों और उप-जातियों की जनसंख्या का पता लगाने के लिए जाति जनगणना की थी. प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा ने इस रिपोर्ट को छिपाए रखा."
साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य में उनकी सरकार बनी तो केजी से लेकर पीजी यानी सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों को मुफ्त शिक्षा दी जाएगी, छात्रों को एक भी पैसा देना नहीं पड़ेगा.
आदिवासी बहुल बस्तर में उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहकों को राजीव गांधी प्रोत्साहन योजना के तहत हर साल चार हज़ार रुपये दिए जाएंगे.
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मुकेश अंबानी को मिली धमकी, 200 करोड़ दो वरना...
रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के चेयरमैन मुकेश अंबानी को लगातार दो दिन जान से मारने की दो धमकियां मिली हैं.
अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक ख़बर के अनुसार शुक्रवार को उन्हें एक ईमेल मिला जिसमें लिखा था, "अगर तुम हमें 20 करोड़ रुपये नहीं दोगे तो हम तुम्हें मार देंगे. हमारे पास भारत में सबसे अच्छे शूटर हैं."
शनिवार को इसी अकाउंट से अंबानी को एक और ईमेल मिला जिसमें व्यक्ति ने 200 करोड़ की मांग की थी और लिखा था, "पहले ईमेल का जवाब नहीं दिया इसलिए हमने रक़म बढ़ा दी है.... नहीं तो तुम्हारी मौत के वारंट पर दस्तख़त हो चुके हैं."

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तकनीकी जानकारों ने कहा है कि आईपी एड्रेस ट्रेस करने के बाद उन्हें पता चला है कि ये ईमेल बेल्जियम स्थित किसी प्राइवेट सर्वर से भेजा गया है.
अंबानी के सुरक्षा इनचार्ज की शिकायत पर मुंबई पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट इस मामले की पड़ताल कर रही है. पुलिस का कहना है कि शादाब ख़ान नाम के एक व्यक्ति के ईमेल से ये मैसेज भेजा गया है जो शायद नया ईमेल आईडी है.
अख़बार लिखता है कि पुलिस के सूत्रों की मानें तो ये फ़र्ज़ी ईमेल हो सकते हैं और हो सकता है कि इसमें बेल्जियम के वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया हो.
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