ग़ज़ा में कितने हथियारबंद संगठन हैं और उनके बारे में हमें क्या मालूम है?

इमेज स्रोत, Reuters
- Author, फ़ेरास किलानी
- पदनाम, बीबीसी अरबी
हमास के सीनियर लीडर मूसा अबु मरज़ूक ने हाल में बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि इसराइल से अग़वा किए गए सभी लोग हमास के कब्ज़े में नहीं हैं.
उन्होंने बताया था कि अग़वा किए लोगों को "अलग-अलग धड़ों" ने अपने कब्ज़े में रखा है. बीबीसी वेरिफ़ाई ने पाया है कि 7 अक्टूबर को इसराइल पर हुए हमले में पाँच ग्रुप शामिल थे.
हालांकि ये सभी गुट इसराइल के ख़िलाफ़ हिंसा को लेकर एकमत रहते हैं. लेकिन भविष्य का फ़लस्तीनी राज्य कैसा होगा और क्या इसमें धर्म की कोई भूमिका होगी, इस पर ये सभी गुट असहमत हैं.
भरोसे के साथ ये कहना कि कुल मिलाकर ऐसे कितने ग्रुप हैं, बहुत मुश्किल है.
तो ऐसे गुटों के बारे में हमारे पास क्या-क्या जानकारियाँ उपलब्ध हैं?
हमास/अल-क़ासम ब्रिगेड

इमेज स्रोत, Reuters
इज़ अल-दीन अल-क़ासम ब्रिगेड हमास आंदोलन का मिलिट्री विंग है. वर्ष 2007 से ही ग़ज़ा पट्टी पर हमास का नियंत्रण हैं.
इस ग्रुप का नाम एक मौलवी पर रखा गया है जिसे फ़लस्तीनी विरोध का प्रतीक माना जाता रहा है.
इस ग्रुप ने इसराइल के साथ कई जंगें लड़ीं हैं. इनमें कई आत्मघाती हमले और हज़ारों रॉकेट दाग़ना शामिल है.
हमास दरअसल मिस्र में सक्रिय मुस्लिम ब्रदरहुड से ही निकला है. मु्स्लिम ब्रदरहुड का गठन 1920 के दशक में हुआ था. इसका उद्देश्य इस्लामी नैतिकता और अच्छे कामों का प्रसार करना था. लेकिन बाद में ये समूह राजनीति में कूद गया.
मुस्लिम ब्रदरहुड का एक मकसद इस्लामी क़ानून शरिया पर आधारित इस्लामिक स्टेट का गठन है.
वर्ष 2017 में हमास ने ऐलान किया था कि उसने मुस्लिम ब्रदरहुड से सारे संबंध तोड़ लिए हैं. लेकिन ऐसा मानना है कि ये ऐलान सिर्फ़ दिखावटी है और पर्दे के पीछे संबंध पहले जैसे ही हैं.
हमास को इसराइल, अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और अन्य कई देश एक आतंकवादी संगठन मानते हैं. सात अक्टूबर को इसराइल पर हुए हमले की अगुवाई हमास के मिलिट्री विंग अल-क़ासम ब्रिगेड ने ही की थी.
एक अनुमान के अनुसार ग़ज़ा पट्टी में इस गुट के 20,000 से 30,000 हज़ार लड़ाके हैं. ग़ज़ा में और कोई गुट इतना ताक़तवर नहीं है.
ईरान, हमास को फंडिंग, हथियार और ट्रेनिंग मुहैया करवाता है. हमास के नेता कई बार सार्वजनिक तौर पर इस समर्थन के लिए ईरान को धन्यवाद करते रहे हैं.
फ़लस्तीनी इस्लामिक जिहाद/अल-क़ुद्स ब्रिगेड

इमेज स्रोत, Reuters
अल-क़ुद्स को ग़ज़ा की दूसरे सबसे बड़ी सैन्य ताक़त माना जाता है. इस ग्रुप का गठन 1980 में हुआ था. ये इस्लामिक जिहाद मूवमेंट का ही एक अंग है. इसे भी अधिकतर पश्चिमी देश आतंकवादी संगठन मानते हैं.
अल-क़ुद्स अरबी भाषा में यरूशलम का नाम है. ये ग्रुप वर्ष 2002 में वेस्ट बैंक के जेनिन रिफ़्यूजी कैंप में इसराइली सेना के साथ लड़ाई के बाद ख़बरों में छाया था.
बीबीसी संवादाताओं के मुताबिक़ इस ग्रुप में 2,000 लड़ाके हैं और ईरान के साथ इसके संबंध हमास से भी गहरे हैं.
हमास और अल-क़ुद्स दोनों ही फ़लस्तीन को अलग देश बनाना चाहते हैं, जहां की सरकार में इस्लाम की अहम भूमिका होगी. लेकिन इस्लामिक जिहाद हमास से भी अधिक सख़्त धार्मिक देश का हिमायती रहा है.
अल-जज़ीरा के अरबी चैनल को दिए हाल के एक इंटरव्यू में इस ग्रुप के नेताओं से स्वीकार किया था कि उन्होंने 7 अक्टूबर को 30 लोगों को होस्टेज बनाया था.
इन लोगों ने दावा किया है कि अब इनमें जो बच्चे और महिलाएं थीं उन्हें इसराइल को सौंप दिया गया है. लेकिन ये नहीं बताया कि इस वक़्त कितने लोग इनके कब्ज़े में हैं.
पॉपुलर फ़्रंट फ़ॉर लिबरेशन ऑफ़ फ़लस्तीन/अबु अली मुस्तफ़ा ब्रिगेड

इमेज स्रोत, Getty Images
कभी पॉपुलर रेज़िसटेंस फ़ोर्सज़ के नाम से जाने जाना वाला अबु अली मुस्तफ़ा ब्रिगेड, पॉपुलर फ़्रंट फ़ॉर लिबरेशन ऑफ़ फ़लस्तीन का मिलिट्री विंग है.
ये एक मार्क्सवादी-लेनिनवादी कम्युनिस्ट ग्रुप है.
1960 और 1970 के दशक में ये ग्रुप हाई प्रोफ़ाइल हाइजैकिंग के मशहूर था. हमास के उदय से पहले ये फ़लस्तीन का दूसरा सबसे बड़ा ग्रुप था.
कुछ ख़बरों के मुताबिक इस ग्रुप ने भी कुछ इसराइली नागरिकों को होस्टेज बनाया है पर बीबीसी इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सकता.
अल-नासिर सलाह अल-दीन ब्रिगेड
इस ग्रुप की स्थापना वर्ष 2000 में हुई थी. ऐसी ख़बरें हैं कि ये ग्रुप पहले भी हमास के साथ मिलकर इसराइल की ख़िलाफ़ हमले करता रहा है.
इसका नाम वर्ष 2006 में इसराइली सैनिक गिलाद शालित के अपहरण में भी आया था.
ये ग़ज़ा का तीसरा सबसे बड़ा ग्रुप है. ये हमास और इस्लामिक जिहाद का सहयोगी और ग़ज़ा में पुलिस का काम करता है.
इस ग्रुप ने भी दावा किया था कि 7 अक्टूबर को उसने इसराइल पर रॉकेट दाग़े थे और कुछ इसराइली सैनिकों को अग़वा किया था. लेकिन ग्रुप ने इन दावों की पक्ष में कोई सबूत पेश नहीं किए हैं.
अल-अक़्सा मार्टिर ब्रिगेड
अल-अक़्सा मार्टिर ब्रिगेड फ़तह मूवमेंट से जुड़ा एक ग्रुप है लेकिन फ़तह खुलेआम उनका समर्थन नहीं करता. फ़तह एक सेकुलर राजनीतिक ग्रुप है जो वेस्ट बैंक पर शासन करने वाले फ़लस्तीनी प्राधिकरण को चलाता है.
लेकिन साल 2006 मे हमास ने फ़तह के हाथ से ग़ज़ा पट्टी का नियंत्रण छीन लिया. उसके अगले साल इस ग्रुप को हमास ने ग़ज़ा से बाहर खदेड़ दिया था.
अल-अक़्सा के कई धड़े हैं जो फ़तह के अलग-अलग नेताओं के नियंत्रण में हैं. लेकिन ग़ज़ा अब उनकी मौजूदगी न के बराबर है.
इसके बावजूद अल-अक़्सा के लड़ाके 7 अक्टूबर के हमले में शामिल हुए थे. बीबीसी वेरिफ़ाई ने इसकी पुष्टि की है.
बीबीसी ने इस ग्रुप के लड़ाकों के हमले में शामिल होने का फ़ुटेज देखा है और साथ ही हमले से पूर्व की गई ट्रेनिंग के वीडियो भी देखे हैं.
बीबीसी संवाददाता के मुताबिक ये कहना मुश्किल है कि अल-अक्सा के कुछ लोग इसमें शामिल हुए थे या सारा ग्रुप इस हमले में मौजूद था.
मुजाहिदीन ब्रिगेड

इमेज स्रोत, Getty Images
मुजाहिदीन ब्रिगेड के तार भी फ़तह से जुड़े हैं. लेकिन अतिवादी धार्मिक विचारधारा के कारण ये ग्रुप इस्लामिक जिहाद के क़रीब माना जाता है है.
इस ग्रुप ने भी दावा किया है कि उसने भी 7 अक्टूबर को कुछ लोगों को अग़वा किया था.
अतिरिक्त रिपोर्टिंग - अब्दीरहीम सईद
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















