इसराइल-ग़ज़ा युद्ध: हमास ने 7 अक्टूबर को महिलाओं से रेप किया, बीबीसी को दिखाए गए सुबूत

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- Author, लूसी विलियमसन
- पदनाम, मिडिल ईस्ट संवाददाता, यरुशलम
बीबीसी ने 7 अक्टूबर को इसराइल पर हमास के हमलों के दौरान बलात्कार, यौन हिंसा और महिलाओं के अंग क्षत-विक्षत किए जाने के साक्ष्य देखे और सुने हैं.
चेतावनी: कहानी में यौन हिंसा और बलात्कार से जुड़ी ऐसी बहुत जानकारियां हैं, जो विचलित कर सकती हैं.
हमास के हमले में मारे गए लोगों के शवों की पहचान करने और उन्हें इकट्ठा करने में जुटे कई लोगों ने हमें बताया कि उन्होंने कटे अंग, टूटे हुए पेल्विस, चोट जैसे यौन हिंसा के कई निशान देखे और पीड़ितों में बच्चों, किशोर और बुज़ुर्ग तक शामिल हैं.
नोवा म्यूज़िक फ़ेस्टिवल में शामिल एक प्रत्यक्षदर्शी की वीडियो गवाही इसराइली पुलिस ने पत्रकारों को दिखाई. इस वीडियो में सामूहिक बलात्कार, शरीर के अंगों को क्षत-विक्षत करने और एक पीड़िता की हत्या का विवरण है.
हमले वाले दिन हमास के निर्वस्त्र और खून से लथपथ महिलाओं के बनाए वीडियो और हमले के बाद घटनास्थलों पर खींची गई शवों की तस्वीरें ये इशारा करती हैं कि महिलाओं के साथ हमलावरों ने यौन दुर्व्यवहार किया.
ऐसा माना जा रहा है कि कुछ ही पीड़ित अपनी कहानियां बयां करने के लिए ज़िंदा बचे हैं.
जो अब नहीं हैं उनकी ज़िंदगी के आख़िरी पलों के बारे में ज़िंदा बचने वालों, शवों को इकट्ठा करने वालों, मुर्दाघर के कर्मचारी और हमले वाली जगहों की फुटेज के सहारे पता लगाने की कोशिश की जा रही है.
पुलिस ने पत्रकारों को अकेले में एक भयावह गवाही का वीडियो दिखाया, जो नोवा फ़ेस्टिवल में आई एक महिला का था. ये महिला हमले के वक्त वहीं थी.
इस महिला ने बताया कि उसने हमास के लड़ाकों को एक अन्य महिला के साथ सामूहिक बलात्कार करते देखा. इस दौरान उसके शरीर के अंग काटे जा रहे थे और आख़िरी हमलावर महिला के सिर पर गोली मारने के बावजूद उसके साथ बलात्कार करता रहा.
वीडियो में एस नाम की ये गवाह बता रही हैं कि कैसे हमलावर पीड़ितों को उठाकर एक से दूसरे तक पहुंचा रहे थे.

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'सिर पर गोली मारने के बाद भी करते रहे बलात्कार'
गवाह कहती हैं, "वह ज़िंदा थी. उसके शरीर के पीछे वाले हिस्से से ख़ून बहे जा रहा था."
ये महिला गवाह विस्तार से जानकारी देने के दौरान ये भी बताती हैं कि कैसे हमलावर यौन हिंसा के वक्त ही पीड़ितों के शरीर के अंग भी काटते रहे.
महिला कहती है, "उन्होंने पीड़ित के स्तन काटकर उसे सड़क पर फेंक दिया. वे उसके साथ खेल रहे थे."
इस पीड़ित को बाद में वर्दी पहने अन्य शख्स को सौंप दिया गया.
"उसने (हमलावर) पीड़िता के साथ बलात्कार किया और इसी दौरान उसके सिर में गोली मार दी. उसने अपनी पैंट तक नहीं पहनी."
म्यूज़िक फ़ेस्टिवल में आए एक शख्स से हमने बात की. उन्होंने भी लोगों के कत्ल किए जाने, बलात्कार और सिर कलम किए जाने जैसी चीख-पुकारें सुनीं.
जब हमने पूछा कि वो बिना देखे सिर्फ़ आवाज़ों को लेकर इतने भरोसे के साथ ऐसा कैसे कह सकते हैं तो उन्होंने कहा कि जिस समय वो आवाज़ें सुन रहे थे, तभी यकीन हो गया था कि ये सिर्फ़ बलात्कार ही हो सकता है.
एक सहायता संगठन के माध्यम से दिए गए इस शख्स के बयान में इसे 'अमानवीय' बताया गया है.
इसमें कहा गया है, "कुछ महिलाओं के मरने से पहले उनका बलात्कार हुआ, कुछ के साथ घायल अवस्था में रेप किया गया और कुछ बलात्कार से पहले ही मर चुकी थीं. मैं उनकी मदद करना चाहता था, लेकिन मैं कुछ नहीं कर सकता था."
पुलिस का कहना है कि उनके पास यौन उत्पीड़न के "कई" चश्मदीद गवाह हैं, लेकिन इनकी संख्या कितनी है, इस पर कोई जानकारी नहीं दी गई. जब हमने उनसे बात की, तब तक उन्होंने किसी भी ज़िंदा बचे पीड़ित का साक्षात्कार नहीं लिया था.
इसराइल की महिला सशक्तीकरण मंत्री मे गोलान ने बीबीसी से कहा कि यौन उत्पीड़न की कुछ पीड़ित हमले में बच गई हैं और फिलहाल वे मनोचिकित्सकों की निगरानी में हैं.
उन्होंने कहा, "लेकिन उनकी संख्या बहुत ही कम है. अधिकांश पीड़ितों को बर्बरतापूर्वक कत्ल कर दिया गया. जो बचे हैं वे बात करने की स्थिति में नहीं हैं. मेरे साथ और सरकार में किसी के भी साथ या मीडिया से भी नहीं."
हमास के बनाए वीडियो में एक महिला का फुटेज है, जिन्हें हथकड़ी पहनाकर बंधकों के साथ ले जाया गया. इस महिला का हाथ कई जगह कटा हुआ है और पैंट में खून का बहुत बड़ा धब्बा दिख रहा है.
दूसरे कई वीडियो में लड़ाकों द्वारा ले जाई गई महिलाएं नग्न या अर्द्ध-नग्न हालत में दिखाई देती हैं.
हमले के बाद घटनास्थल की खींची कई तस्वीरों में महिलाओं के शव कमर से नीचे बिना कपड़े के दिख रहे हैं. कुछ में महिलाओं के पैर छितरे हुए हैं और उनके प्राइवेट पार्ट, पैरों में चोट के निशान हैं.

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'ज़िंदा बचे पीड़ित नहीं कर पा रहे बात'
हीब्रू यूनिवर्सिटी के डेविस इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंटरनेशनल रिलेशंस में लीगल एक्सपर्ट डॉक्टर कोचाव एलकायम लेवी का कहना है, "वाकई ऐसा लगता है कि हमास ने इराक़ के इस्लामिक स्टेट समूह से सीखा है कि महिलाओं के शरीर को किस तरह हथियार बनाया जाए."
"यह सोचकर मुझे सिहरन होती है कि वे जानते थे कि महिलाओं के साथ क्या करना है: उनके अंगों को काटना, उनके गुप्तांगों को क्षत-विक्षत करना, बलात्कार करना. ये सब जानना भयावह है."
इसराइली मंत्री मे गोलान ने मुझे बताया, "मैंने कम से कम तीन लड़कियों से बात की जो आंखों के सामने हुए बलात्कारों की वजह से अभी बेहद खराब मानसिक स्थिति से जूझ रही हैं और अस्पताल में हैं. उन्होंने मरने की एक्टिंग की और रेप होते हुए देखे, सबकुछ सुना."
इसराइल के पुलिस चीफ़ याकोव शब्तई ने कहा कि हमले में बचे बहुत से लोगों के लिए बात करना मुश्किल हो रहा है और उनमें से कुछ तो कभी भी ये नहीं बता सकेंगे कि उन्होंने क्या देखा या झेला.
उन्होंने कहा, "18 लड़के-लड़कियों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े अस्पतालों में भर्ती किया गया है क्योंकि वे कोई काम नहीं कर पा रहे थे."
कुछ लोग कथित तौर पर आत्महत्या जैसे खयालों से भी जूझ रहे हैं. पीड़ितों के साथ काम कर रही टीम के एक सदस्य ने बीबीसी को बताया कि कुछ लोगों ने आत्महत्या कर भी ली है.
अधिकांश सबूत उन वॉलंटियर्स की ओर से आए हैं जो हमले के बाद से ही शवों को इकट्ठा करने में लगे हुए हैं और जो पहचान के लिए शूरा सैन्य अड्डे तक ले जाए गए शवों को संभाल रहे हैं.
ऐसे ही एक स्वयंसेवी धार्मिक संगठन ज़का की तरफ़ से शव उठाने में लगे एक शख्स ने मुझे टॉर्चर और शरीर के अंगों को काटने के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि एक गर्भवती महिला की हत्या से पहले ही उनके गर्भाशय को बाहर निकाल दिया गया और भ्रूण पर वार किए गए.
बीबीसी स्वतंत्र रूप से इन दावों की पुष्टि नहीं कर सकता है और इसराइली मीडिया रिपोर्टों में कुछ स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं की गवाही पर भी सवाल किए गए हैं, जो हमास के हमले के बाद भयावह परिस्थितियों में काम कर रहे हैं.

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'महिलाओं के शवों से भरे पड़े थे शेल्टर'
एक अन्य शख्स ने लिखित गवाही में बताया है कि उन्होंने किबुत्ज़ में दो ऐसी महिलाओं के शव देखे जिनके हाथ और पैर पलंग से बंधे हुए थे.
उनके बयान में कहा गया है, "इनमें से एक के गुप्तांग में चाकू फंसा हुआ था और उनके शरीर के कई अंदरूनी अंग बाहर निकले हुए थे."
उन्होंने बताया कि म्यूज़िक फेस्टिवल वाली जगह "छोटे छोटे शेल्टर महिलाओं से भरे पड़े थे. इनके शरीर के ऊपरी हिस्से के कपड़े फटे थे लेकिन निचला हिस्सा तो पूरी तरह निर्वस्त्र था. वहां ऐसी ढेरों महिलाएं थीं. जब आप उन्हें पास से देखते तो आप पाते कि उनके माथे के बीचोंबीच गोली मारी गई थी."
वॉलंटियर्स ने हमले वाली जगह से सैकड़ों शव इकट्ठे किए.
जांचकर्ताओं ने माना कि हमले के बाद के कुछ दिनों में अफ़रा-तफ़री जैसा माहौल था और कुछ इलाकों में संघर्ष जारी था. ऐसे में अपराध वाली जगहों से सबूत जुटाने, उनकी फॉरेंसिक जांच करवाने के मौके कम थे और कई मौकों पर चूक भी हुई.
मे गोलान कहती हैं, "शुरुआती पांच दिनों तक तो हम इसराइल की धरती पर आतंकवादियों से लड़ रहे थे और हर तरफ़ सैकड़ों शव थे. इनमें से कुछ शव जले हुए थे, कुछ बिना अंगों के साथ, उन्हें पूरी तरह से काट दिया गया था."
पुलिस प्रवक्ता डीन एल्सडन ने एक प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों से कहा, "ये ऐसा पल था जब एक साथ कई लोगों को मार दिया गया. हमारा पहला काम था कि पीड़ितों की पहचान हो जाए. अपराध वाली जगह पर जांच नहीं. लोग ये जानने के लिए इंतज़ार में थे कि उनके अपनों के साथ क्या हुआ."
शवों को पहचान के लिए जब शूरा सैन्य अड्डे पर लाया गया, तो वहां मौजूद स्टाफ़ ने जांचकर्ताओं को कुछ बेहद अहम सबूत दिए.
ये सबूत इस सैन्य अड्डे पर शवों को रखने के लिए बनाए गए अस्थायी टेंट से मिले.
हमने जब इस जगह का दौरा किया तो वहां कुछ ट्रॉली, स्ट्रेचर बड़ी सफ़ाई से उन कंटेनरों के सामने रखे थे, जिनमें कुछ समय पहले तक शवों रखा गया था.
ग़ज़ा में जारी इसराइली हमलों के बीच आसमान में उड़ रहे लड़ाकू विमानों की आवाज़ हमारे कानों तक पहुंच रही थीं.
वहां मौजूद टीम ने हमें बताया कि उन्हें यहां लाए गए शवों के साथ यौन हिंसा, बलात्कार के साफ़ संकेत दिखे. कुछ शवों का निचला हिस्सा टूटा हुआ था.
फॉरेंसिक टीम की एक सदस्य कैप्टन मायन ने बीबीसी से कहा, "हमें हर उम्र की महिलाएं दिखीं. हमने रेप पीड़िताओं को देखा. हमने ऐसी महिलाएं देखीं जिनके साथ कुछ न कुछ गलत हुआ. हमने शवों पर चोट के निशान देखे हैं, शव कई जगह से कटे थे और हम जानते हैं कि उनके साथ यौन शोषण हुआ है."
मैंने उनसे पूछा कि उन्होंने जितने शव देखे उनमें से कितने शवों में ऐसे निशान थे?
जवाब में उन्होंने कहा, "बहुत सारी...बच्चों से लेकर बुज़ुर्ग तक हर उम्र की बहुत सारी महिलाएं."

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पीड़ितों की संख्या पता लगाना मुश्किल
शव जिस हाल में हैं, उससे हमास के हमले में पीड़ितों की संख्या बता पाना मुश्किल है.
ऐविगायेल नाम की सैनिक बताती हैं कि पीड़ितों की संख्या कई गुणा है.
वह कहती हैं, "इस बारे में बताना मुश्किल है. मैंने काफी सारे जले हुए शव भी देखे. मैं ये सोच भी नहीं सकती कि मरने से पहले उन पर क्या गुज़री होगी. कई शव ऐसे हैं, जिनके कमर के नीचे का पूरा हिस्सा ही नहीं था. मुझे ये भी नहीं मालूम कि उनका रेप हुआ था या नहीं. पर अगर आप पूछें कि क्या कुछ औरतों का स्पष्ट तौर पर रेप हुआ था. हां, बड़ी संख्या में ऐसा हुआ था. ये संख्या काफ़ी ज़्यादा थी.''
डॉ. एलकायम लेवी ने मुझे बताया, ''कई बार हमें शव का बस एक छोटा सा हिस्सा ही मिला. कभी सिर्फ़ उंगली मिलती, कभी पैर और कई बार हाथ... जिससे पहचान करना काफी मुश्किल हो जाता. कई लोग जलकर राख बन चुके थे. कुछ नहीं बचा था. मैं ये कहना चाहूंगी कि हमें ये कभी नहीं पता चल पाएगा कि हिंसा का शिकार कितने लोग हुए.''
इस बातचीत में शामिल कुछ लोग निजी तौर पर पीड़ितों की संख्या दर्जनों में बताते हैं लेकिन वो फौरन ये भी कहते हैं कि अभी सबूत जुटाए जा रहे हैं.
डॉ एलकायम लेवी सिविल कमीशन का नेतृत्व कर रही हैं. ये कमीशन यौन हिंसा की गवाहियों को जुटा रहा है. इस कमीशन ने सात अक्तूबर को हुई सुनियोजित हिंसा और मानवता के ख़िलाफ़ किए अपराध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाए जाने की मांग की है.
उनका कहना है, ''हमें पैटर्न साफ दिखता है. ये कोई घटना नहीं थी, जो अचानक हो गई थी. वो साफ आदेश के साथ आए थे. ये आदेश था कि नरसंहार की तरह रेप किया जाए.''
ऐविगायेल इससे सहमति जताते हुए कहती हैं कि शूरा बेस में जो शव आएं, उनमें काफी समानताएं थीं.
उन्होंने कहा, "किसी एक इलाके से जिन औरतों के शव आए, उसमें ये देखा जा सकता था कि उनके साथ एक जैसा बर्ताव किया गया. कुछ औरतों का रेप एक जैसे तरीके से किया गया. शवों में भी समानता देखने को मिली. वहीं कुछ ऐसे मामले भी थे, जिनमें रेप नहीं किया गया था लेकिन कई बार गोलियां मारी गई थीं. ऐसा लगता है कि चरमपंथियों के अलग-अलग समूहों ने अलग-अलग तरह की क्रूरताएं कीं."
पुलिस चीफ याकोव ने पत्रकारों से कहा, "ये पहले से सोच समझकर और पूरे व्यवस्थित तरीके से किया हमला था."

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सुनियोजित थी यौन हिंसा?
जांच में जुटी इसराइल की साइबर क्राइम यूनिट के डेविड कात्ज़ ने पत्रकारों से कहा कि अभी ये साबित करना जल्दबाज़ी होगा कि ये यौन हिंसा पहले से योजना बनाकर की गई. लेकिन हमास के हमलावरों के फोन से जो डेटा मिला है वो इस ओर इशारा करता है कि सब कुछ व्यवस्थित तरीके से किया गया.
वह कहते हैं, ''जो भी हुआ, वो पूरे व्यवस्थित ढंग से हुआ. कुछ भी इत्तेफ़ाक नहीं था. रेप व्यवस्थित तरीके से किया गया.''
इसराइल की सरकार उन दस्तावेज़ों की ओर इशारा करती है जिसके बारे में इसराइलियों का कहना है कि वो हमास के पास से मिले हैं. इन दस्तावेज़ों के हवाले से इसराइल कहता है कि ऐसा लगता है कि यौन हिंसा की योजना बनाई गई थी.
इसराइल ने पूछताछ के दौरान के क्लिप्स भी जारी किए हैं. इनमें पकड़े गए लड़ाके ये कहते दिखते हैं कि यौन हिंसा के लिए औरतों को निशाना बनाया गया.
बीते हफ़्ते यूएन वीमेन ने एक बयान जारी कर हमास के हमले और इस दौरान औरतों के साथ की गई यौन हिंसा की निंदा की.

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इस बयान के जारी होने से पहले डॉ एलकायम लेवी ने कहा कि समर्थन मांगने पर अंतरराष्ट्रीय महिला संगठनों ने बहुत देर से प्रतिक्रिया दी.
वह कहती हैं, "मानवता के इतिहास में दर्ज ये सबसे बड़ी क्रूरता है."
पुलिस चीफ याकोव शाब्ती ने कहा कि सात अक्तूबर को जब सुबह हुई तो ये देश पहले जैसा देश नहीं रह गया था.
शूरा आइडेंटिफिकेशन यूनिट की कैप्टन मायान कहती हैं, ''औरतों के साथ यहां जो हुआ, उसमें सबसे ज़्यादा तकलीफ़ उनको देखकर होती है जिन्होंने उस सुबह मसकारा लगाया था, कानों में बालियां पहनी थीं.''
मैंने उनसे पूछा कि औरत होने के नाते इस हमले ने उन पर क्या असर डाला?
वह जवाब देती हैं, "ख़ौफ़, ये हमें आतंकित करता है."
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