इसराइल-हमास युद्धः ‘सारे अरब कहाँ हैं, सबने फ़लस्तीनियों को अकेला छोड़ दिया’

ग़ज़ा में घरेलू गैस की लाइन में खड़ी इस महिला का आरोप है कि दुनिया ने फ़लस्तीनी लोगों को अकेला छोड़ दिया है.
इमेज कैप्शन, ग़ज़ा में घरेलू गैस की लाइन में खड़ी इस महिला का आरोप है कि दुनिया ने फ़लस्तीनी लोगों को अकेला छोड़ दिया है.
    • Author, अदनान एल-बुर्श
    • पदनाम, बीबीसी अरबी, दैर अल बालाह, ग़ज़ा से

"सारे अरब ओर मुस्लिम कहाँ हैं? मानवाधिकार की बातें करने वाले सारे लोग कहाँ हैं? आप लोगों ने फ़लस्तीनियों को कष्ट झेलने, भूखे रहने और तबाह हो जाने के लिए छोड़ दिया है."

अधेड़ उम्र की एक महिला ग़ज़ा में खाना बनाने वाली गैस के लिए एक क़तार में खड़ी है.

वो ग़ुस्से में चिल्लाती हैं, उनके चेहरे पर हताशा और निराश साफ़ झलक रही है और इसकी पृष्ठभूमि में नाउम्मीदी है.

"सिर्फ़ एक गैस सिलिंडर भरवाने के लिए हम सुबह से ही इंतज़ार कर रहे हैं. मैंने सुबह की नमाज़ यहाँ लाइन में खड़े खड़े पढ़ी."

उन्होंने मुझे बताया कि वो उत्तरी ग़ज़ा में इसराइल की सीमा से बस दो किलोमीटर दूर बेत हानून से विस्थापित हुई हैं.

"मैं तबाही को बयां नहीं कर सकती. दस्तावेजों से पूरा परिवार मिट गया है. वे अपने घर के नीचे ही मारे गए. ग़ज़ा पूरी तरह बर्बाद हो गया है. हम पर रहम करो."

अब वो मध्य ग़ज़ा के दैर अल-बालाह शहर में संयुक्त राष्ट्र के एक स्कूल में अपने परिवार के साथ शरण लिए हुए हैं.

दैर अल-बलाह में घरेलू गैस के लिए लगी भीड़.
इमेज कैप्शन, दैर अल-बलाह में घरेलू गैस के लिए लगी भीड़.

सात अक्टूबर को हमास ने जब इसराइल पर हमला बोला, जिसमें 1,200 लोग मारे गए और 200 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया, इसराइल ने हवाई हमले शुरू कर दिए और इसके बाद ज़मीनी हमला बोला.

हमास प्रशासित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अभी तक इन हवाई हमलों में 14,800 फ़लस्तीनी मारे गए हैं.

ग़ज़ा पट्टी में क़रीब 24 लाख लोग रहते हैं और संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इसराइल ने जब उत्तरी ग़ज़ा के लोगों को दक्षिण में जाने का आदेश दिया, तबसे 18 लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं.

लोगों को बुनियादी ज़रूरतों के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ रही है.
इमेज कैप्शन, लोगों को बुनियादी ज़रूरतों के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ रही है.

खाना बनाने वाली गैस की लाइन में सैकड़ों लोग लगे हुए हैं. नौजवान इंतज़ार करते हुए गैस सिलिंडरों पर बैठे हैं. माहौल भारी है. लोग थक चुके हैं.

24 नवंबर को जबसे युद्ध विराम हुआ है, हर दिन 200 ट्रक ग़ज़ा में प्रवेश कर रहे हैं, ये संख्या युद्ध से पहले के दिनों के मुकाबले दोगुनी है.

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों का कहना है कि वे उत्तरी इलाक़े में कुछ राहत सामग्री बाँट पाए हैं, जहाँ इसराइली सेना मौजूद है, लेकिन हर जगह ज़रूरी चीज़ों की भारी किल्लत है.

क़तार में लगा एक अन्य व्यक्ति मुझसे बात करने को तैयार होता है.

वो कहते हैं, “आपको एक कप चाय या एक बिस्कुट का पैकेट नहीं मिलेगा. कल, सड़क पर सो रहे लोग आपस में ब्रेड साझा कर रहे थे. कल बारिश हुई और हम लोग ठंड में रह रहे हैं. लोगों ने रात यहीं गुजारी. अल्लाह मदद करे.”

तीन-तीन दिन से घरेलू गैस की लाइन में लगे रहने पर मज़बूर लोगों में हताशा और निराशा बढ़ रही है.
इमेज कैप्शन, तीन-तीन दिन से घरेलू गैस की लाइन में लगे रहने पर मज़बूर लोगों में हताशा और निराशा बढ़ रही है.

संघर्ष शुरू होने के बाद से ही इसराइल ने सभी ईंधन आपूर्ति को रोक दिया था और बहुत सीमित मात्रा में ईंधन जाने की इजाज़त दी थी.

अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, हर दो दिन में 1,40,000 लीडर ईंधन की इजाज़त दी गई थी.

इसराइली सरकार का कहना है कि अतिरिक्त ईंधन हमास इस्तेमाल कर सकता है. हमास को यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और अमेरिका ने आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है.

मोहम्मद अल क़िद्राह खाना बनाने वाली गैस की लाइन में बड़े धैर्य से इंतज़ार कर रहे हैं.

वो कहते हैं, "हम यहाँ तीन दिन से हैं. हम यहाँ दो रात पहले ही पहुंचे, लेकिन अभी तक हमें गैस नहीं मिली है."

"हमें ईंधन, आटा या कुछ भी नहीं मिल पा रहा है. हर चीज़ के लिए आपको लाइन में लगना है और आपको उसे पाने के लिए संघर्ष करना है."

इस युद्ध में ओलिव की जितनी भी फसल बच गई है उसे लोग बचाना चाहते हैं.
इमेज कैप्शन, इस युद्ध में ओलिव की जितनी भी फसल बच गई है उसे लोग बचाना चाहते हैं.

अमेरिका सहायता सामग्री से भरे तीन विमान भेज रहा है, जिसमें मेडिकल आपूर्ति, राशन सहायता और सर्दियों से बचने के लिए सामान हैं. इसे ग़ज़ा में संयुक्त राष्ट्र वितरित करेगा.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) चेतावनी दे रहा है कि अगर स्वास्थ्य ढांचे को फिर से बहाल नहीं किया गया तो जितने लोग युद्ध में मारे गए उससे अधिक बीमारियों से मारे जाएंगे.

इस बीच संयुक्त राष्ट्र की अगुवाई वाले सहायता फोरम ने कहा है कि ग़ज़ा की 60% इमारतें या तो क्षतिग्रस्त हो गई हैं या तबाह हो चुकी हैं.

युद्ध विराम के दौरान ग़ज़ा में फिर से जिंदगी लौटने के संकेत मिल रहे हैं. यहां इस साल की बची ओलिव ऑयल की फसल को काटा जाना है.

ग़ज़ा में ईंधन की आपूर्ति बहुत कम है लेकिन फिर भी फ़लस्तीनी किसान उसे किसी तरह प्रासेस कर रहे हैं.
इमेज कैप्शन, ग़ज़ा में ईंधन की आपूर्ति बहुत कम है लेकिन फिर भी फ़लस्तीनी किसान उसे किसी तरह प्रासेस कर रहे हैं.

फ़लस्तीनी किसान फैथी अबू सलाह ने रॉयटर्स न्यूज़ एजेंसी को बताया, "हमें इस मौके का फ़ायदा उठाना है, वक़्त नहीं बचा है." वो दक्षिण में ख़ान यूनिस में रहते हैं.

वो कहते हैं, "इस युद्ध ने हमें तबाह कर दिया, बमुश्किल ही कोई फसल हो पाई है. अधिकांश फसल बर्बाद हो गई."

बिजली की कमी ने ओलिव प्रेस की मशीन को चलाने के लिए ईंधन पर निर्भरता बढ़ा दी है.

ओलिव किसान और प्रेस वर्कर मोहम्मद वाफ़ी कहते हैं, "ईंधन पाना एक ऐसा संकट है जिससे सभी जूझ रहे हैं. जितना जल्दी हमें ईंधन मिलेगा, हम अपने ओलिव प्रेस शुरू कर देंगे, भले ही वो अपनी न्यूनतम क्षमता में काम करे."

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