इसराइल ग़ज़ा युद्ध: हमास क्या है और वो इसराइल से क्यों लड़ रहा है? पढ़िए हर सवाल का जवाब

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फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास ने बीती 7 अक्टूबर को ग़ज़ा पट्टी से इसराइल पर अभूतपूर्व हमला करते हुए 1200 लोगों को मारने के साथ ही 240 लोगों को अगवा किया है.
इसके जवाब में इसराइल ने ग़ज़ा पट्टी पर हवाई हमलों के साथ ज़मीनी हमला किया.
हमास नियंत्रित सरकार के मुताबिक़, ग़ज़ा पट्टी में अब तक 14,500 लोगों की मौत हो चुकी है.
कई हफ़्तों तक जारी रही इस कार्रवाई के बाद दोनों पक्षों की ओर से अगवा लोगों को रिहा करने के लिए किए चार दिन लंबे अस्थाई युद्ध विराम को विस्तार दिया गया है.
ग़ज़ा में इसराइल की सैन्य कार्रवाई का मकसद?

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इसराइली सेना के लड़ाकू विमान जहां पूरी ग़ज़ा पट्टी पर बम बरसा रहे हैं. वहीं, इसराइली फ़ौज उत्तरी दिशा से ग़ज़ा पट्टी में घुस रही है.
इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतान्याहू ने कहा है कि इस कार्रवाई का मकसद हमास की सैन्य और प्रशासनिक क्षमता ख़त्म करने के साथ ही अगवा किए गए लोगों को आज़ाद कराना है.
उन्होंने ये भी कहा है कि इसराइल ये संघर्ष ख़त्म होने के बाद अनिश्चितकाल के लिए पूरी ग़ज़ा पट्टी की सुरक्षा व्यवस्था संभालेगा.
लेकिन इस एलान के तुरंत बाद इसराइल ने कहा कि वह इस क्षेत्र पर एक बार फिर कब्जा करने की योजना नहीं बना रहा है.
इसराइल ने अपनी 1.60 लाख सैनिकों वाली फौज की ताक़त में इजाफा करने के लिए इस अभियान के लिए तीन लाख आरक्षितों को भी वापस बुलाया है.
इसराइली सेना ने बताया है कि उसने हमास से जुड़े हज़ारों ठिकाने निशाने पर लिए हैं. इस संगठन को ब्रिटेन, अमेरिका समेत कई दूसरे पश्चिमी देश एक आतंकवादी संगठन के रूप में देखते हैं.
इसराइली सेना ने ये भी बताया है कि उसने ग़ज़ा के नीचे बनाई गई सुरंगों तक ले जाने वाले सैकड़ों मार्गों को तबाह किया है.
हमास का दावा है कि उसकी सुरंगों का मकड़जाल 500 किलोमीटर लंबा है.
इसराइल ने ये भी दावा किया है कि उसने इस युद्ध में हज़ारों हमास चरमपंथियों को मारा है जिनमें कमांडर स्तर के कई लड़ाके शामिल थे.
इस युद्ध में अब तक 390 से ज़्यादा इसराइली सैनिक मारे जा चुके हैं. हालांकि, इनमें से ज़्यादातर सैनिकों की मौत सात अक्टूबर को हमास के हमले के दौरान हुई थी.
कैसे काम कर रहा है ये युद्ध विराम?

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हमास ने अपने हमले के बाद लगभग 240 लोगों को अगवा किया था.
हमास का कहना है कि इन लोगों को ग़ज़ा के अंदर बनाई गयी सुरंगों और सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है. हमास ने ये भी बताया है कि कुछ अगवा किए गए लोगों को दूसरे गुटों ने भी बंदी बनाया हुआ है.
इसराइल का कहना है कि अगवा बनाए गए लोगों में 30 से ज़्यादा बच्चे हैं. और कम से कम दस लोगों की उम्र साठ वर्ष से ज़्यादा है.
इसके साथ ही एक नवंबर तक उपलब्ध आँकड़ों के मुताबिक़, इसराइली जेलों में लगभग 6700 फ़लस्तीनी लोग बंद हैं.
ऐसा माना जा रहा है कि हमास की ओर से इसराइली लोगों को अगवा करने की वजह इसराइल पर दबाव डालकर कुछ फ़लस्तीनी लोगों को रिहा कराना है.
क़तर की मध्यस्थता के ज़रिए हुआ चार दिन लंबा संघर्ष विराम बीती 24 फरवरी को शुरू हुआ था.
इस दौरान हमास की ओर से 150 फ़लस्तीनी कैदियों के बदले में पचास इसराइली नागरिकों को छोड़ा गया है. ये सभी लोग महिला, बच्चे और युवा हैं.
इसके बाद दोनों पक्षों ने इस संघर्ष विराम को 48 घंटों के लिए बढ़ाने का फ़ैसला किया है.
इसके बदले में प्रत्येक इसराइली के बदले में तीन फ़लस्तीनी नागरिकों को छोड़ने पर सहमति बनी है.
हमास ने युद्ध विराम के समझौते पर सहमति बनने से पहले ही चार लोगों को छोड़ा था.
वहीं, इसराइली सेना ने एक इसराइली नागरिक को बचाया था. और उत्तरी ग़ज़ा में अपने अभियान के दौरान उसने दो अगवा किए गए लोगों के पार्थिव शरीर बरामद किए थे.
ग़ज़ा में इस वक़्त क्या हो रहा है, वहाँ के मानवीय हालात कैसे हैं?

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युद्ध के आरंभ होने के बाद ग़ज़ा में 36,000 लोग घायल हुए हैं. ग़ज़ा में हमास संचालित प्रशासन का कहना है कि इनमें दो तिहाई बच्चे और महिलाएं हैं.
लेकिन पूरी ग़ज़ा पट्टी में सीमित संख्या में ही अस्पताल काम कर रहे हैं क्योंकि बहुत सी जगहों पर बमबारी हुई है. साथ ही बिजली और ईंधन की कमी के कारण भी अस्पतालों का काम बाधित है.
इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने माना है कि इसराइल आम लोगों की मौतों की संख्या कम नहीं कर पा रहा है. लेकिन उन्होंने ये भी कहा है कि इसकी वजह हमास की ओर से आम नागरिकों को ढाल बनाना है.
यूएनआरडब्ल्यू फ़लस्तीनियों शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी है.
इस एजेंसी का कहना है कि ग़ज़ा में 10 लाख 70 हज़ार लोग विस्थापित हुए हैं. एजेंसी का कहना है कि वो इनमें से 10 लाख को शरण दे रही है.
सात अक्तूबर के हमले के बाद इसराइल ने ग़ज़ा के साथ सारी बॉर्डर क्रॉसिंग बंद कर दी हैं. इसकी वजह से ग़ज़ा में भोजन, पानी, ईंधन और दवाएं नहीं आ पा रही हैं.

बिना बिजली और जेनरेटर के अस्पताल, पानी के पंप और सेनिटेशन सेवाएं ठप हो गई हैं.
बेकरीज़ भी लगभग बंद ही पड़ी हैं.
इसराइल ने ग़ज़ा में नवंबर तक किसी भी किस्म के ईंधन की सप्लाई बंद कर दी है. उसका तर्क है कि हमास इसका इस्तेमाल उसके ख़िलाफ़ कर सकता है.
संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों का कहना है कि 22 लाख लोगों को मूलभूत चीज़ों की आपूर्ति रोकना आपत्तिजनक है. एजेंसियां बार-बार इस आपूर्ति को बहाल करने की गुज़ारिश करती रही हैं.
इसराइल ने 20 अक्टूबर और 21 नवंबर के बीच ग़ज़ा में 1,399 ट्रकों को प्रवेश करने दिया है.
युद्ध से पहले एक महीने में औसत 10,000 ट्रक ग़ज़ा में सामान लेकर आते थे.
अब हुए युद्धविराम के पहले चार दिनों में प्रतिदिन 200 ट्रक ग़जा में आए हैं. इन ट्रकों में ईंधन के अलावा दवाएं और कुकिंग गैस लाई गई है.

ये सारे ट्रक मिस्र के साथ ग़ज़ा की बॉर्डर क्रॉसिंग रफ़ाह के रास्ते आ रहे हैं.
रफ़ाह क्रॉसिंग एकमात्र बॉर्डर पोस्ट है जहां से लोगों और सामान की नियंत्रित आवाजाही होने दी जा रही है.
ब्रिटेन और अमेरिका समेत कई अन्य देशों के नागरिक भी गज़ा की जंग में फंसे हुए थे.
इन्हें भी इसी रास्ते से बाहर जाने दिया जा रहा है. इसके अलावा कुछ गंभीर रूप से घायल लोगों को भी बाहर जाने दिया जा रहा है.
लेकिन मिस्र आवाजाही पर बेहद सख़्त नियंत्रण रख रहा है.
हमास के 7 अक्टूबर को हुए हमले के दौरान क्या हुआ था?

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7 अक्तूबर को हमास के सैकड़ों बंदूकधारी इसराइल की सीमा में घुसे.
उन्होंने सरहद पर बनी दीवार और कंटीली तारों को काटा और भारी सुरक्षा के बावजूद ज़मीन, समुद्र और आसमान के रास्ते इसराइल पर हमला बोला.
बहुत से लड़ाके पेराग्लाडर्स के ज़रिए इसराइल में दाख़िल हुए. ये अपनी क़िस्म का पहला हमला था. इसराइल ने इतना गंभीर आक्रमण अरसे से नहीं देखा था.
हमास के लड़ाकों ने 1,200 लोगों को मारा जिनमें से अधिकतर आम नागरिक थे.
हमलावरों ने इसराइली सुरक्षा चौकियों, किबुत्ज़ और एक म्यूज़िक फेस्टिवल पर कई लोगों को मारा.
वापस ग़ज़ा लौटते वक्त हमास के बंदूकधारी अपने साथ कई लोगों को बंधक बनाकर ले गए.
उस दिन हुए हमले में मौतों का आंकड़ा 1,400 से अधिक बताया जाता है.
ये हमले ऐसे वक़्त पर हुए जब इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच रिश्ते काफ़ी तनाव भरे थे.
साल 2023 इसराइली कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक के फ़लस्तीनी बाशिंदों के लिए काफ़ी घातक साबित हुआ है.
हमास क्या है और इसे क्या चाहिए?

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हमास एक फ़लस्तीनी गुट है जो वर्ष 2007 से ग़ज़ा पर राज कर रहा है.
हमास का नाम है - हरकत अल-मुक़ावमा अल-इस्लामिया. इसका अर्थ होता है इस्लामिक रेज़िसटेंस मूवमेंट.
ग्रुप का मकसद है इसराइल का सर्वनाश और एक इस्लामिक स्टेट की स्थापना.
इसकी एक मिलिट्री विंग है जिसका नाम इज़दीन अल-क़ामस ब्रिगेड है. अल-क़ासम ब्रिगेड के 30,000 सदस्य बताए जाते हैं.
हमास ने ग़ज़ा में सत्ता में आने के बाद इसराइल के साथ कई युद्ध लड़े हैं. वे अक़्सर हज़ारों रॉकेट इसराइल की ओर दागते रहे हैं.
जवाबी कार्रवाई में इसराइल ने हमास पर कई बार हवाई हमले किए हैं.
इसके अलावा साल 2008 और 2014 में इसराइल सेना ने ग़ज़ा में दाख़िल होकर भी हमास के ख़िलाफ़ कार्रवाई की थी.
हमास को इसराइल, अमेरिका, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन एक आतंकवादी संगठन मानता है.
ईरान इस ग्रुप का हिमायती है और वो इसे फंड देने के अलावा हथियार और ट्रेनिंग भी मुहैया करवाता है.
ग़ज़ा पट्टी कहां है और ये कितनी बड़ी है?

ग़ज़ा पट्टी 41 किलोमीटर लंबी और 10 किलोमीटर चौड़ा इलाका है.
इसके दक्षिण में मिस्र और पश्चिम में भूमध्यसागर. बाक़ी दिशाओं में ये इसराइल से घिरा हुआ है.
अतीत में इसपर मिस्र का कब्ज़ा था लेकिन 1967 में हुए छह दिन के युद्ध के बाद इसराइल ने यहां कब्ज़ा कर लिया था.
इसराइल में वर्ष 2005 में यहाँ से अपने सैनिक और क़रीब 7,000 यहूदी बाशिंदे बाहर निकाल लिए थे.
ग़ज़ा में 22 लाख लोग रहते हैं. ये दुनिया की सबसे घनी आबादी वाली संकरी पट्टी है.
सयुंक्त राष्ट्र के अनुसार इन 22 लाख लोगों में से सिर्फ़ 10 लाख 70 हज़ार लोगों को ही शरणार्थी का दर्जा मिला हुआ है.
ताज़ा युद्ध से पूर्व ग़ज़ा में 5,00,000 लोग आठ रिफ्यूजी कैंपों में रह रहे थे.
ग़ज़ा के एयर स्पेस और समुद्री तट पर इसराइल का नियंत्रण है. इसराइल सामान और लोगों की आवाजाही पर सख़्त नियंत्रण रखता है.
फ़लस्तीन क्या है?

वेस्ट बैंक और ग़ज़ा को फ़लस्तीनी क्षेत्र कहा जाता है.
रोमन काल से पूर्वी यरुशलम और इसराइल को मिलाकर इस सारे इलाके को 20वीं सदी की मध्य तक फ़लस्तीन ही कहा जाता था.
बाइबल में इसी क्षेत्र में यहूदी साम्राज्य की गद्दी बताया गया है. कई लोग इसे यहूदियों की प्राचीन भूमि मानते हैं.
इसराइल का गठन 1948 में हुआ था. हालांकि जो देश इसराइल को मान्यता नहीं देते वो इसे अब भी फ़लस्तीन ही बुलाते हैं.
फ़लस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास हैं जिन्हें अबु माज़ेन भी बुलाया जाता है. वे वेस्ट बैंक से फ़लस्तीनी प्राधिकरण की सरकार चलाते हैं. लेकिन वेस्ट बैंक पर इसराइल का कब्ज़ा है.
महमूद अब्बास 2005 से फ़लस्तीनी प्राधिकरण के नेता हैं और हमास की प्रतिद्वंद्वी पार्टी फ़तह के लीडर हैं.
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