इसराइली टैंकों ने ग़ज़ा के इंडोनेशियाई अस्पताल को क्यों घेरा

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- Author, डेविड ग्रिटन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
ख़बरों के मुताबिक़, इसराइली टैंकों ने उत्तरी ग़ज़ा के इंडोनेशियाई अस्पताल को घेर लिया है. हमास के तहत काम करने वाले स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि रविवार रात को यहाँ इसराइली सेना के हमले में 12 लोगों की जान गई है.
अस्पताल के निदेशक डॉक्टर मारवान अल-सुल्तान ने बीबीसी को बताया कि मरीज़ों के ऑपरेशन के बाद देखभाल के लिए बने विभाग को हमले में नुक़सान पहुँचा है.
सोमवार को उन्होंने बताया कि रुक-रुककर गोलीबारी की आवाज़ सुनी जा सकती है और इसराइली सैनिक अस्पताल से सिर्फ़ 20 मीटर दूर हैं.
वहीं, इसराइली सेना का कहना है कि उसके सैनिक उन 'आतंकवादियों' को निशाना बना रहे थे, जो अस्पताल के अंदर से गोलियां चला रहे थे.
इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने कहा है कि वह 'स्तब्ध' हैं. टेड्रोस अदनोम गेब्रियेसिस ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “स्वास्थ्यकर्मियों और नागरिकों को ऐसे ख़तरे में कभी नहीं डालना चाहिए, ख़ासकर एक अस्पताल में.”

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ग़ज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता अशरफ़ अल-क़ुद्रा ने इसराइल पर उत्तरी इलाक़े के अस्पतालों पर शिकंजा कसने का आरोप लगाया है.
उन्होंने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा कि यहाँ मौजूद क़रीब 200 मरीज़ों को बस से ख़ान यूनिस के नासेर अस्पताल ले जाया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि रेड क्रॉस की इंटरनेशनल कमिटी (आईसीआरसी) बाक़ी बचे 400 मरीज़ों को निकालने में मदद कर रही है.
इस बीच, समय से पहले पैदा हुए 28 बच्चों को रविवार को इसराइली घेराबंदी में आए अल-शिफ़ा अस्पताल से निकालकर इलाज के लिए मिस्र ले जाया गया है.
हमास के लड़ाकों ने सात अक्टूबर को इसराइल पर हमला कर दिया था, जिसमें कम से कम 1200 इसराइलियों की मौत हुई थी और 240 को बंधक बना लिया गया था.
इसके बाद से इसराइल की सेना ने ग़ज़ा में हमास के ख़िलाफ़ एक व्यापक अभियान छेड़ा हुआ है. ग़ज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि अब तक इसराइली कार्रवाई में 13 हज़ार लोगों की जान जा चुकी है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ग़ज़ा में 'पर्याप्त दिनों' के लिए 'ज़रूरी मानवीय पॉज़' (जंग में अस्थायी ठहराव) की अपील की है, ताकि उसकी राहत एजेंसियां इस इलाक़े में सुरक्षित ढंग से दाख़िल हो सकें.
इस अपील को किए पांच दिन हो गए हैं और इंटरनेशनल रेस्क्यू कमिटी का कहना है कि अब फ़लस्तीनियों के मरने और उन्हें नुक़सान पहुंचने में तेज़ी आई है. कमिटी ने तुरंत बिना किसी मियाद या शर्तों वाले संघर्षविराम की अपील की है.

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बख़्तरबंद गाड़ियां और स्नाइपर
सोमवार सुबह आए एक वीडियो में इंडोनेशियाई अस्पताल के बाहर, क़रीब 240 मीटर दूर बहुत सारे टैंक खड़े नज़र आए. बीबीसी ने इस वीडियो की पुष्टि की है. इस अस्पताल को इंडोनेशिया फंड करता है.
आधिकारिक फ़लस्तीनी समाचार एजेंसी 'वफ़ा' ने स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के हवाले से लिखा है कि दर्जनों बख़्तरबंद इसराइली गाड़ियां इलाक़े को घेरे हुए हैं और छतों पर स्नाइपर तैनात हैं. वे एंबुलेंसों को अस्पताल नहीं पहुँचने दे रहे.
ग़ज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि इस अस्पताल की दूसरी मंज़िल में इसराइली गोला गिरने से 12 लोगों की मौत हुई है. मरने वालों में इलाज करवा रहे घायल और उनके साथ आए लोग शामिल हैं.
अस्पताल के निदेशक डॉक्टर मारवान अल-सुल्तान ने बीबीसी को बताया कि उन्हें पूरी रात अस्पताल के चारों ओर से गोलियों की आवाज़ सुनाई दी और इस दौरान कम से कम 10 लोग मारे गए.
अल जज़ीरा ने एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें पत्रकार अनस अल-शरीफ़ इस घटना के बाद अस्पताल का मुआयना कर रहे हैं.
इस वीडियो में कम से कम एक शव देखा जा सकता था. साथ ही कई कमरों में रखे उपकरणों और छतों में भी नुक़सान के निशान भी नज़र आ रहे थे.
शरीफ़ ने बताया कि पीड़ित फर्श पर लेटे हुए हैं और उनमें घबराहट मची हुई है.

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अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानूनों के तहत अस्पतालों को विशेष सुरक्षा मिली होती है.
अस्पतालों के इर्द गिर्द किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई करते समय मरीज़ों, मेडिकल स्टाफ़ और अंदर मौजूद अन्य नागरिकों को बचाने के लिए क़दम उठाना ज़रूरी होता है.
इसराइली सेना ने अस्पताल पर गोला दाग़ने के आरोप को ग़लत बताया है.
सेना के एक प्रवक्ता ने कहा, “रात को आतंकवादियों ने ग़ज़ा के इंडोनेशियाई अस्पताल के बाहर मौजूद हमारे सैनिकों पर गोलियां चलाईं. जवाब में हमने गोली चलने की दिशा में सीधे कार्रवाई की. अस्पताल की ओर किसी तरह का गोला नहीं दाग़ा गया.”
प्रवक्ता ने कहा, “अस्पताल से गतिविधियां चला रहे आतंकवादी संगठन के खिलाफ़ जंग में चुनौतियों का सामना कर रहा है, मगर फिर भी इसराइली सेना अंतरराष्ट्रीय क़ानून को लेकर प्रतिबद्ध है और आम लोगों को होने वाला ख़तरा कम करने के लिए कई सारे क़दम उठा रही है.”

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चैरिटी संस्था के क्लीनिक पर हमला और इसराइली टैंक
इसराइल इस जंग से शुरुआती दिनों से ही हमास पर ग़ज़ा के अस्पतालों से गतिविधियां चलाने का आरोप लगा रहा है.
अब इसराइली सेना ने एक सीसीटीवी कैमरे की फ़ुटेज जारी करके दावा किया है कि सात अक्टूबर के हमले में बंधक बनाए गए लोगों को हमास के लड़ाके ग़ज़ा के अल-शिफ़ा अस्पताल लेकर पहुंचे थे.
इस वीडियो में हथियारबंद लोगों को दो बंधकों को अस्पताल में लाते हुए दिखाया गया है. एक क्लिप में एक बंधक को अस्पताल के मुख्य द्वार से लाया जा रहा है, जबकि दूसरी क्लिप में एक घायल व्यक्ति स्ट्रेचर पर लेटा हुआ है.
इसराइली सेना के प्रवक्ता डेनियल हगारी ने कहा कि यह वीडियो अल-शिफ़ा अस्पताल में हमास द्वारा बंधकों को ले जाने का 'ठोस सबूत' है. हालाँकि, हमास ने इसराइल के इन आरोपों को ख़ारिज किया है.
इस बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि वह अल शिफ़ा अस्पताल में फंसे 250 के क़रीब घायलों और बीमारों को निकालने की योजना को अंतिम रूप दे रहा है.
इस बीच, एक अन्य घटना में मेडिकल चैरिटी संस्था 'एमएसएफ़' ने कहा कि सोमवार सुबह ग़ज़ा में उसके क्लीनिक पर हमला हुआ है.
बयान में कहा गया है, "हमारे सहकर्मियों ने देखा कि एक दीवार टूट चुकी थी और गोलीबारी के बीच इमारत को आग की लपटों ने घेर लिया. बाहर सड़क पर एक इसराइली टैंक नज़र आ रहा था."
एमएसएफ़ का कहना है कि इस इमारत में मौजूद उसके सदस्य और उनके 20 परिजन ख़तरे में थे. पास की ही एक दूसरी इमारत में 50 और लोग मौजूद थे.
इसराइली सेना की ओर से इस बारे में अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

बंधकों की रिहाई पर 'बन रही बात'
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि उन्हें लगता है कि ग़ज़ा में बंधक बनाकर रखे गए इसराइलियों की रिहाई को लेकर समझौता बहुत क़रीब है.
अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रवक्ता जॉन किर्बी ने भी कहा, "अब हम बहुत क़रीब हैं और हमें बहुत ज़्यादा उम्मीद है."
वहीं, आईसीआरसी ने कहा है कि उसके अध्यक्ष क़तर गए हैं, ताकि हमास और क़तर सरकार के प्रतिनिधियों से मिल सकें.
आईसीआरसी किसी तरह का समझौता करवाने वाली बातचीत में शामिल नहीं होती, मगर वह इस मामले में समन्वय बनाने में मदद कर रही है.
अब तक चार बंधकों को इसी तरह से छुड़ाया गया है. क़तर हमास के साथ बातचीत करता है और आईसीआरसी बंधकों को सहमति वाली जगह से लेकर इसराइल ले जाती है.
क़तर के प्रधानमंत्री ने कहा है कि कुछ छोटे 'व्यावहारिक' मसलों के चलते कुछ बंधकों को छुड़ाने का समझौता अटका हुआ है.
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