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श्रीकांत और मन को एक दूसरे से प्यार है. लेकिन क्या कोई अपने प्यार का कितना इंतज़ार कर सकता है? और जब इंतज़ार बीस साल लंबा हो तो? राहुल राजेश की कहानी. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नानी कहती कि पिछले जन्म में क्या सोते-सोते मरी थी जो उसकी कमी अब जागकर पूरी कर रही है....समय के साथ माँ-बेटी के संबंधों में आते उतार-चढावों पर क्षमा शर्मा की एक कहानी. | गाँव को इससे फ़र्क नहीं पड़ रहा था कि वह रामलाल था या रहीम. वह सुबह नहाता और पेड़ के साथ रखे पत्थर पर भी पानी चढ़ाता...लेकिन एक दिन सबकुछ बदल गया...परदेशी राम वर्मा की कहानी. | जब बात कल्पना की आती है तो कल्पनाएँ अक्सर अपने अनुभव संसार के आसपास ही मंडराती रहती हैं. कल्पना का दायरा भी अक्सर सीमित होता है. पढ़िए 'कूप-मंडूक' मुहावरा बनने की कथा. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||