महाराष्ट्र: विधायकों की बग़ावत के लिए शरद पवार ने भाजपा पर साधा निशाना

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शिवसेना के बाग़ी विधायकों के गुवाहाटी की बैठक में एकनाथ शिंदे को अपना नेता चुन लेने के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष शरद पवार ने कहा है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार अल्पमत में है या नहीं, इसका पता तो विधानसभा में ही चल पाएगा.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, शरद पवार ने कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी सरकार अल्पमत में है या इसे साबित करने का तरीक़ा विधानसभा में विश्वास मत साबित करना ही है. उन्होंने यह भी कहा कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले बाग़ी विधायकों को इसके लिए मुंबई में विधान भवन में मौजूद रहना होगा.

शरद पवार ने बिना बीजेपी का नाम लिए एकनाथ शिंदे का समर्थन करने के लिए उसकी आलोचना भी की है.

मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, "एकनाथ शिंदे के वीडियो में उल्लेख है कि उन्हें एक राष्ट्रीय पार्टी का समर्थन हासिल है. यह कहने की ज़रूरत नहीं है कि शिंदे के साथ कौन सी राष्ट्रीय पार्टी है. देश में भाजपा, बसपा, कांग्रेस, सपा, भाकपा, माकपा, राकांपा आधिकारिक राष्ट्रीय दल हैं. इसलिए, यह कहने की ज़रूरत नहीं है कि इस विद्रोह में किसका हाथ है."

शरद पवार ने कहा, 'यदि विधायक लौटेंगे तो वे चीज़ों को स्पष्ट करेंगे. मुझे यकीन है कि सभी विधायक लौटेंगे. उसके बाद गुवाहाटी जाने के कारण भी सामने आएंगे. बाग़ियों को यहां विधानसभा परिसर में आना ही होगा."

शरद पवार

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हालांकि शरद पवार के इस बयान के कुछ घंटे पहले उनके भतीजे और राज्य के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा था कि एकनाथ शिंदे की बग़ावत में बीजेपी के कोई बड़े नेता नज़र नहीं आए.

अजीत पवार के उस बयान पर शरद पवार ने कहा, ''अजीत पवार स्थानीय स्थिति जानते हैं. उन्हें बाहरी स्थिति का पता नहीं है.''

और क्या कहा था अजीत पवार ने

महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता अजीत पवार ने कहा है कि उनकी पार्टी ने मौजूदा राजनीतिक हालात में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को अपना पूरा समर्थन देने का फ़ैसला किया है.

पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार की मौजूदगी में गुरुवार को महाराष्ट्र के सभी विधायकों, सांसदों और पदाधिकारियों की बैठक के बाद आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में अजीत पवार ने यह बात कही है.

उन्होंने कहा, "महाविकास अघाड़ी प्रमुख उद्धव ठाकरे को एनसीपी का पूरा समर्थन मिलेगा. हम सभी इस सरकार को बरक़रार रखने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. मैंने सीएम से बात की है. मैंने आदित्य ठाकरे से भी बात की है. अगर वे आमने-सामने होते तो गलतफहमी दूर हो जाती."

उद्धव ठाकरे आणि अजित पवार

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बाग़ी विधायकों के बारे में अजीत पवार ने कहा कि वे उस रास्ते पर जाने की बजाय कांग्रेस और शिवसेना नेताओं से बात की होती तो ग़लतफ़हमी दूर हो जाती. उनके अनुसार, महाविकास अघाड़ी को बनाए रखना तीनों दलों की ज़िम्मेदारी है.

उन्होंने कहा है कि हम इस हालात से ​कैसे निकलेंगे, ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं.

वहीं इस पूरे घटनाक्रम के रचयिता ख़ुद उद्धव ठाकरे के होने के दावों को अजित पवार ने खारिज़ कर दिया. उन्होंने कहा, "मैं शिवसेना के साथ ढाई साल से काम कर रहा हूं. मुझे नहीं लगता कि उनका ऐसा स्वभाव है."

वहीं विधायकों को नुक़सान पहुंचाने के आरोपों को खारिज़ करते हुए अजीत पवार ने कहा है कि उन्हें कभी नुकसान नहीं पहुंचाया गया और न ही एमएलए फंड में कभी कोई कटौती की गई.

अजीत पवार ने शिवसेना नेता संजय राउत के ताज़ा बयान पर अपनी हैरानी जताते हुए कहा है कि उन्होंने ऐसा बयान क्यों दिया, यह पता नहीं चल पाया है. मैं उद्धव ठाकरे से पूछूंगा कि संजय राउत ने ऐसा बयान क्यों दिया.

संजय राउत

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क्या कहा था संजय राउत ने

इससे पहले शिवसेना नेता संजय राउत ने गुरुवार को मीडिया से कहा कि अगले 24 घंटों के भीतर अगर पार्टी के बाग़ी विधायक मुंबई वापस आ जाते हैं, तो पार्टी महाविकास अघाड़ी से बाहर जाने को तैयार है. उन्होंने कहा कि विधायकों को गुवाहाटी से बात नहीं करनी चाहिए, बल्कि उन्हें मुंबई आकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से बात करनी चाहिए.

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार संजय राउत ने कहा, "इसे लेकर आमने-सामने बैठकर बात होगी. अगर इसे लेकर एकमत बना तो पार्टी महाविकास अघाड़ी से बाहर जाने को तैयार है."

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उन्होंने कहा, "इससे शिवसेना न तो झुकने वाली है और न ही डरने वाली है. ज़्यादा से ज़्यादा क्या होगा, सत्ता जाएगी लेकिन फिर सत्ता आएगी भी."

बातचीत से ही आगे का रास्ता खुलेगा और इसके लिए पार्टी के दरवाज़े खुले हैं.

संजय राउत ने ट्वीट कर इशारों इशारों में पार्टी के बाग़ी विधायकों सवाल किया कि "जंगल-जंगल में क्यों भटकना? ग़ुलामी करने की बजाय आत्मसम्मान से बैठकर इस पर फ़ैसला लेते हैं."

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संजय राउत के बयान पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया

संजय राउत के बयान पर कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, वहीं कांग्नेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने संयम भरी प्रतिक्रिया दी है.

पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा, "हम शिवसेना की सटीक भूमिका नहीं जानते. हमने आज अपने नेतृत्व के साथ बैठक की. कल ऐसा कोई मुद्दा नहीं उठाया गया था. उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि क्या शिव सेना फिर से भाजपा के साथ जाना चाहती है."

वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा, "हम बीजेपी को सत्ता में आने से रोकने के लिए शिवसेना के साथ हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की वजह से ये खेल हो रहा है. कांग्रेस फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार है. हम एमवीए (महाविकास अघाड़ी गठबंधन) के साथ हैं और रहेंगे. अगर वे किसी के साथ गठबंधन करना चाहते हैं तो हमें इसमें कोई समस्या नहीं है."

वहीं राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्य के मौजूदा राजनीतिक संकट पर कहा है कि यह सब बीजेपी का खेल है और वही सरकार को अस्थिर कर रही है.

गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "मैं सीधा ये कह सकता हूं कि केंद्र सरकार और बीजेपी इसमें हस्तक्षेप करके वहां की स्थिर सरकार को अस्थिर करके महाराष्ट्र में अपनी सत्ता लाना चाहती है."

उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति चुनाव में नंबर के लिए वहां (महाराष्ट्र) की सरकार को अस्थिर करना चाहते हैं."

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महाविकास अघाड़ी में कौन-कौन हैं?

महाविकास अघाड़ी गठबंधन ने 28 नवंबर, 2019 को महाराष्ट्र में सरकार बनाई थी और उद्धव ठाकरे ने सीएम के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली थी.

288 सीटों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में महाविकास अघाड़ी के 169 विधायक हैं जबकि बीजेपी के पास 109 विधायक हैं.

महाविकास अघाड़ी में इस समय निर्दलीय विधायकों सहित सात दलों के कुल 169 विधायक हैं. इन सभी दलों का ब्यौरा इस प्रकार है-

  • शिवसेना - 55
  • नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) - 54
  • कांग्रेस - 44
  • बहुजन विकास अघाड़ी - 3
  • समाजवादी पार्टी - 2
  • प्रहार जनशक्ति पार्टी - 2
  • पीज़ेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी ऑफ़ इंडिया - 1
  • और निर्दलीय - 8
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गुवाहाटी पहुंचे 42 बाग़ी विधायक

शिवसेना नेता और महाराष्ट्र के शहरी विकास मंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में पार्टी के 42 विधायक गुवाहाटी के एक होटल पहुंच गए हैं. हालांकि सबसे पहले शिवसेना के ये बाग़ी विधायक मुंबई से सूरत गए थे.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ एकनाथ शिंदे ने गुरुवार को गुवाहाटी के एक होटल में विधायकों के साथ शक्ति प्रदर्शन किया है. उनके साथ 42 विधायक होटल में नज़र आ रहे हैं. इसमें शिवसेना के 35 और 7 निर्दलीय विधायक हैं.

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बीबीसी मराठी के मुताबिक़ बुधवार रात चार विधायक गुवाहाटी पहुंचे, वहीं गुरुवार सुबह भी और चार विधायक गुवाहाटी पहुंचकर एकनाथ शिंदे समूह में शामिल हो गए.

बुधवार शाम को कैबिनेट बैठक के बाद उद्धव ठाकरे ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा था कि अगर उनके विधायक और कार्यकर्ता चाहते हैं तो वे अपने पद से इस्तीफ़ा देने के लिए तैयार हैं. राज्य में चल रहे राजनीतिक घमासान के बाद यह उनका पहला संबोधन था.

इसके बाद देर रात उद्धव ठाकरे अपने परिवार के साथ सीएम आवास 'वर्षा' छोड़कर अपने पैतृक निवास 'मातोश्री' लौट आए. देर रात उद्धव ठाकरे अपनी पत्नी रश्मि, बेटे आदित्य और तेजस के साथ अपने आधिकारिक आवास से निकलते दिखाई दिए थे.

हालांकि संजय राउत ने गुरुवार को कहा कि उद्धव ठाकरे बहुत जल्द वर्षा बंगले में वापस लौट आएंगे.

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उद्धव

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और क्या कहा उद्धव ठाकरे ने?

एकनाथ शिंदे के सियासी विद्रोह के बाद पहली बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने फ़ेसबुक लाइव के ज़रिए लोगों से बात की.

उद्धव ठाकरे ने कहा, "लोग कह रहे थे कि मुख्यमंत्री मिलते नहीं हैं. शिवसेना कौन चला रहा है. मेरा ऑपरेशन हुआ था, इस वजह से मैं लोगों से मिल नहीं पाया. वो समय काफ़ी मुश्किल था. मैं हॉस्पिटल से ऑनलाइन काम कर रहा था. शिवसेना और हिंदुत्व एकदूसरे से जुड़े हुए शब्द हैं. शिवसेना हिंदुत्व से दूर नहीं हो सकती, क्योंकि शिवसेना प्रमुख ने मंत्र दिया था कि हिंदुत्व हमारी सांसों में है."

उद्धव ठाकरे ने कहा कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के लिए तैयार हैं लेकिन इसके लिए शिवसेना के विधायकों को उनके सामने आकर बात करनी होगी, ये फ़ैसला पार्टी लेगी और साथ में बैठकर लेगी.

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उन्होंने कहा, "एकनाथ शिंदे को सूरत जाकर बात करने की क्या ज़रूरत थी. कुछ विधायक यहां नहीं हैं. कुछ लोग फ़ोन कर रहे हैं कि वे लौटना चाहते हैं."

"मैंने हमेशा अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाया है. मैं सीएम पद छोड़ने के लिए तैयार हूं, लेकिन मेरे बाद कोई शिव सैनिक मुख्यमंत्री बने तो मुझे ख़ुशी होगी. लापता विधायक यहां आएं और मेरे त्यागपत्र के साथ राजभवन जाएं."

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एकनाथ शिंदे के क्या हैं आरोप?

गुरुवार को शिवसेना के बाग़ी विधायकों का नेतृत्व करने वाले एकनाथ शिंदे ने सीएम उद्धव ठाकरे के नाम लिखे एक खुले ख़त को अपने ट्विटर हैंडल से शेयर किया. हालांकि इस ख़त को विधायक संजय शिरसाट ने लिखा है, लेकिन इस ख़त को विधायकों की भावना बताते हुए एकनाथ शिंदे ने शेयर किया है.

इस ख़त में लिखा है, "असल मायनों में कल मातोश्री के दरवाज़े खुले, ये दरवाज़े पिछले ढाई साल से बंद थे. हम शिवसेना के विधायक हैं लेकिन फिर भी ये दरवाज़े हमारे लिए भी बंद थे. हमें आपके आसपास के लोगों को मनाना पड़ता था कि वे आपसे हमारी मुलाक़ात करवा दें. हमें आपसे वर्षा या मंत्रालय में कभी भी मिलने का मौक़ा नहीं मिला."

पत्र में लिखा गया है, "लेकिन एकनाथ शिंदे वो शख़्स थे जिनके दरवाज़े हमारे लिए हमेशा खुले थे. उन्होंने हमें हमेशा सुना. हमने ही एकनाथ शिंदे से हमारे लिए ये फ़ैसला लेने को कहा."

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इस पत्र में आगे लिखा गया, "हम आपसे नहीं मिल सकते थे, लेकिन कांग्रेस और एनसीपी के विधायकों की आप तक पहुंच थी. वे अपने निर्वाचन क्षेत्रों में काम करने, वित्तीय सहायता के लिए और दूसरे कामों के लिए पूरी तरह सक्षम थे. वहीं हमारे निर्वाचन क्षेत्र के लोग हमसे सवाल किया करते थे कि कैसे हमारे मूल विरोधी (कांग्रेस और राकांपा) अपने क्षेत्र में विकास कर रहे हैं लेकिन हम नहीं... और हमारे पास इसका कोई जवाब नहीं होता था."

उन्होंने कहा, "भले ही हिंदुत्व शिवसेना का एजेंडा है, लेकिन जब आदित्य ठाकरे अयोध्या जा रहे थे तो उन्होंने हमें अपने साथ अयोध्या जाने से रोक दिया. हममें से कई लोगों को निजी तौर पर फ़ोन करके यात्रा पर न जाने के लिए कहा गया."

इस पत्र में आरोप लगाया गया, "आपका कल का भाषण बेहद भावनात्मक था, लेकिन उसमें हमारे सवालों के जवाब नहीं थे. इसलिए मैं आपको अपनी भावनाओं से अवगत कराने के लिए यह पत्र लिख रहा हूं."

शरद पवार और उद्धव ठाकरे

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शरद पवार ने क्या कहा?

मौजूदा राजनीतिक संकट पर एनसीपी प्रमुख और पुराने दिग्गज शरद पवार ने मंगलवार को दावा किया कि महाराष्ट्र सरकार सही तरह से काम कर रही है और तीनों सहयोगी दलों में सही तालमेल है. उन्होंने कहा कि जो परेशानी है, भी उसे हम बातचीत करके दूर कर लेंगे.

उन्होंने ट्वीट में लिखा, "पिछले ढाई सालों में पहली नहीं तीसरी बार हमारे विधायकों को उठाने का काम हुआ है. पिछली बार हमारे विधायकों को हरियाणा, गुड़गांव मे रखा गया था. वहां से वो निकलकर आए और उद्धव ठाकरे जी की सरकार बनी."

शरद पवार ने लिखा, "उद्धव ठाकरे के पास मुख्यमंत्री पद, हमारे पास डिप्टी सीएम पद और कांग्रेस के पास महत्त्वपूर्ण मंत्रालय की ज़िम्मेदारी है. शिवसेना की लीडरशीप इस विषय मे जो तय करेगी, उसके साथ हम रहेंगे. मुझे यक़ीन है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में जो सरकार चल रही है, उसमें कुछ बदलाव की ज़रूरत नहीं है."

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हालांकि बुधवार को शरद पवार ने सीएम उद्धव ठाकरे से मुलाक़ात की. मीडिया की ख़बरों में बताया गया कि शरद पवार ने उद्धव ठाकरे को सलाह दी कि शिवसेना में बग़ावत को ख़त्म करने के लिए नाराज़ नेता एकनाथ शिंदे को सीएम बना दिया जाए.

वैसे गुरुवार को एनसीपी नेता जयंत पाटिल ने कहा है कि वे आख़िरी दम तक उद्धव ठाकरे का समर्थन करेंगे. उनके अनुसार, महाविकास अघाड़ी का गठन विकास के लिए हुआ है.

उन्होंने यह भी कहा कि बालासाहेब ठाकरे से श्रद्धा रखने वाला कोई भी शिव सैनिक पार्टी से धोखा नहीं करेगा.

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