शरद पवार बोले- मैंने पीएम मोदी को मना कर दिया था- प्रेस रिव्यू

मोदी और पवार

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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे गठबंधन के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया था.

पवार ने कहा कि 2019 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी एनसीपी से गठबंधन को लेकर बेक़रार थी, लेकिन वह इसके पक्ष में नहीं थे. पवार ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से कह दिया था कि गठबंधन संभव नहीं है.

अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने शरद पवार के इस बयान को प्रमुखता से जगह दी है. अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, शरद पवार बुधवार को मराठी अख़बार लोकसत्ता की ओर से प्रकाशित एक कॉफ़ी टेबल बुक अष्टावधानी के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे.

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शरद पवार ने कहा, ''यह सच है कि दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन को लेकर बात हुई थी. प्रधानमंत्री ने कहा था कि हमें इस बारे में सोचना चाहिए. हालाँकि मैंने उनसे कहा था कि यह संभव नहीं है और मैं इस मामले में अंधकार में नहीं रखना चाहता. यह बात मैंने प्रधानमंत्री को उनके कार्यालय में ही कही थी.''

पवार ने इस कार्यक्रम में अपने 50 सालों के राजनीतिक सफ़र के बारे में भी बात की. पवार ने कहा कि उन्होंने एक बचकाना बयान दिया था कि एनसीपी बीजेपी को समर्थन देने के लिए गंभीरता से विचार कर रही थी. पवार ने कहा, ''यह शायद शिव सेना को लेकर मन में शक़ की वजह से था क्योंकि वो कांग्रेस के साथ गठबंधन करने जा रही थी.''

शरद पवार

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भतीजे को किसने भेजा?

पवार से पूछा गया कि क्या उन्होंने ही अपने भतीजे अजित पवार को बीजेपी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ सरकार बनाने के लिए भेजा था? इस सवाल के जवाब में पवार ने कहा, ''अगर बीजेपी के पास मैं अजित पवार को भेजता तो इसे अधूरा नहीं छोड़ता. बीजेपी को ऐसा लग रहा था कि एनसीपी और कांग्रेस के रिश्ते ठीक नहीं हैं तो गठबंधन किया जा सकता है.''

2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी और शिव सेना के बीच गठबंधन था. दूसरी तरफ़ कांग्रेस और एनसीपी में गठबंधन था. बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी लेकिन मुख्यमंत्री को लेकर शिव सेना के साथ विवाद हुआ और वो सरकार नहीं बना सकी.

शरद पवार

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लेकिन बीजेपी ने एनसीपी के समर्थन से सरकार बनाने की कोशिश की और आनन फ़ानन में देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली. अजित पवार को उपमुख्यमंत्री बना दिया गया. लेकिन यह सरकार कुछ ही घंटों के लिए रही. शिव सेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया.

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर शरद पवार ने कहा कि वहाँ अभी कोई स्पष्ट विजेता नहीं दिख रहा है. पवार ने कहा कि जिस तरह से प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश जा रहे हैं और योजनाओं की घोषणा कर रहे हैं, उससे तो यही लगता है कि पार्टी उत्तर प्रदेश चुनाव को बहुत गंभीरता से ले रही है.

पवार ने कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के चुनावी नतीजों से राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय होगी. पवार ने कहा, ''मोदी का बनारस से लोकसभा चुनाव लड़ने का फ़ैसला बिल्कुल सही था क्योंकि उनके पीछे पूरा प्रदेश हो गया. मैंने 14 चुनाव लड़े और इनमें से सात लोकसभा के हैं लेकिन महाराष्ट्र से बाहर चुनाव लड़ने के बारे में सोचा तक नहीं.''

शरद पवार

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'मोदी यहाँ पिछड़ते दिख रहे हैं'

पीएम मोदी के बारे में शरद पवार ने कहा, ''वह कड़ी मेहतन करने और वक़्त देने के लिए तैयार रहते हैं...वह किसी चुनौती को स्वीकार करने के लिए तैयार रहते हैं और उसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचाने की मंशा रखते हैं. उन्होंने प्रशासन पर काफ़ी ध्यान केंद्रित किया है. लेकिन आम लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो इसका असर नहीं दिखेगा. मैं मोदी को यहाँ पिछड़ता हुआ पाता हूँ. मोदी नीतिगत फ़ैसलों को सख़्ती से लागू करवाना चाहते हैं और सरकार चलाने का उनका एक अपना तरीक़ा है.''

शरद पवार ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाक़ात के दौरान कभी भी अपने नेताओं के ख़िलाफ़ ईडी की कार्रवाई को लेकर कुछ नहीं कहा.

बाल ठाकरे से पवार के संबंध कैसे थे? इस सवाल के जवाब में पवार ने कहा, ''उनसे मेरा दोस्ती का ही रिश्ता था. राज्य से जुड़े मसलों में हमने हमेशा एक-दूसरे का सहयोग किया.'' उद्धव ठाकरे की सरकार के बारे में पवार ने कहा कि स्थिरता को लेकर कोई मसला नहीं है. पवार ने कहा, ''मैं मुख्यमंत्री की सेहत को लेकर चिंतित था लेकिन पिछले दस दिनों से ऐसा लग रहा है कि वही फ़ैसले ले रहे हैं.''

कोविड

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भारत में कोरोना फिर से पसारने लगा पाँव

भारत एक बार फिर से कोरोना संक्रमण की चपेट में आता दिख रहा है. इस साल मई महीने से कोरोना संक्रमण के मामलों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही थी लेकिन दिसंबर महीने के आख़िरी हफ़्ते से संक्रमण के मामले बढ़ने लगे हैं.

अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने इस ख़बर को पहले पन्ने की लीड बनाई है. 29 दिसंबर को कोरोना संक्रमण के कुल 13,187 नए मामले दर्ज किए गए. इसमें अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मेघालय, त्रिपुरा और छोटे केंद्र शासित प्रदेशों की संक्रमण की संख्या शामिल नहीं हैं. केरल में संक्रमण के सबसे ज़्यादा मामले हैं. मुंबई, पुणे, थाणे, कोलकाता, बेंगलुरु, चेन्नई, अहमदाबाद और दिल्ली में संक्रमण तेज़ी से बढ़ रहा है.

मुंबई में बुधवार को कोविड संक्रमण के 2,510 नए मामले दर्ज किए गए. पिछले दिन की तुलना में 80% की बढ़ोतरी है और पिछले हफ़्ते की तुलना में 40 फ़ीसदी की बढ़ोतरी है. दिल्ली में बुधवार को कोविड-19 संक्रमण के 923 नए मामले मिले और यह पिछले हफ़्ते की तुलना में 600 फ़ीसदी ज़्यादा है. बेंगलुरु में 400 नए मामले मिले हैं जो पिछले हफ़्ते की तुलना में 80 फ़ीसदी ज़्यादा है. चेन्नई में बुधवार को 294 केस मिले और यह 100 फ़ीसदी की बढ़ोतरी है.

सुप्रीम कोर्ट

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EWS आरक्षण के मानकों में बदलाव के मूड में नहीं है सरकार

ग़रीब सवर्णों को आरक्षण के लिए आठ लाख ही रहेगी आय सीमा. इस ख़बर को हिन्दी अख़बार दैनिक जागरण ने पहले पन्ने की लीड बनाई है.

अख़बार की ख़बर के अनुसार, सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़ों (ईडब्ल्यूएस) को दिए गए 10 प्रतिशत आरक्षण के लिए तय मानकों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सवालों से सरकार वैसे तो भारी उलझन में है लेकिन वह अभी इसके लिए तय मानकों में बदलाव के पक्ष में नहीं है.

यानी मौजूदा समय में ईडब्ल्यूएस आरक्षण के लिए आठ लाख रुपए सालाना आय सहित जो मानक तय हैं, फ़िलहाल वही बरक़रार रहेंगे. यह बात अलग है कि सरकार भविष्य में इसके लिए एक स्पष्ट गाइडलाइन तैयार करेगी ताकि फिर कोई सवाल खड़ा ना हो सके.

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