महाराष्ट्र की राजनीति में तूफ़ान, एकनाथ शिंदे 12 विधायकों के साथ सूरत पहुँचे

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महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनाव के बाद, महाविकास अघाड़ी सरकार में मंत्री एकनाथ शिंदे अचानक ग़ायब हो गए हैं.
बीबीसी मराठी के अनुसार उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है. चुनाव से पहले ऐसी चर्चा थी कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच संबंधों में दरार आ गई है.
बताया जा रहा है कि एकनाथ शिंदे शिवसेना के 12 विधायकों के साथ गुजरात में सूरत के एक होटल में ठहरे हैं. ताज़ा घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन, महाविकास अघाड़ी में चिंताएं बढ़ गई हैं.
ऐसी ख़बरें हैं कि उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को 12 बजे एक बैठक बुलाई है. बीबीसी मराठी के मुताबिक़ उसी दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं.
बताया जा रहा है कि एकनाथ शिंदे सोमवार शाम से ही नाराज़ चल रहे हैं. जैसे ही शिंदे और उनके साथ विधायकों से संपर्क नहीं हो पाया तो मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास पर अन्य विधायकों की बैठक ली गई जिसमें मुबंई और आसपास के इलाक़ों के विधायक शामिल हुए.
ये बैठक रात क़रीब दो बजे तक चली. शिवसेना की नेता नीलम गोडे़ ने कहा कि अफ़वाहों पर भरोसा नहीं करना चाहिए.
उन्होंने कहा, ''एकनाथ शिंदे कई वर्षों से हमारे सहकर्मी हैं. हमारी अक्सर उनसे मुलाक़ात होती है पर सभी नेता रोज़ एक-दूसरे से नहीं मिलते. मुझे नहीं पता कि कितने घंटे, कितने सेकंड से वो फ़ोन पर उपलब्ध नहीं हैं. वो बहुत ही मेहनती नेता हैं.''

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केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता नारायण राणे ने कहा, ''ऐसी चीज़ों पर कोई टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए. नॉट रिचेबल होने का क्या मतलब है.''
महाराष्ट्र में सोमवार को हुए एमएलसी चुनाव में बीजेपी को 10 में से पांच सीटों पर जीत हासिल हुई है. वहीं, महाविकास अघाड़ी में शामिल एनसीपी और शिवसेना के दो-दो उम्मीदवार जीते हैं और कांग्रेस ने एक सीट हासिल की है.
उद्धव ठाकरे की बैठक कारण इन्हीं विधान परिषद चुनावों पर चर्चा को बताया गया है. लेकिन बदले राजनीतिक हालात में एकनाथ शिंदे और उनके साथ ग़ायब हुए विधायकों पर भी चर्चा संभव है.
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विधान परिषद में महाविकास अघाड़ी के प्रदर्शन के बाद कई बीजेपी नेता, महाराष्ट्र सरकार चुटकी लेते दिखे थे.
किरिट सुमैया ने ट्विटर पर लिखा, "महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के नतीजे-शिवसेना को 52 वोट. 12 विधायकों ने विद्रोह किया ( 55 शिवसेना+9 समर्थक = 64), उद्धव ठाकरे माफ़िया राज का काउंट डाउन शुरू"
शिवसेना के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता संजय राउत ने विधायकों के ग़ायब होने को उद्धव सरकार को गिराने की साज़िश क़रार दिया है. उन्होंने कहा है कि बीजेपी मध्य प्रदेश की तर्ज़ पर महाराष्ट्र में सरकार गिराना चाहती है लेकिन शिव सेना ये नहीं होनी देगी.
संजय राउत ने कहा, मैंने सुना है कि हमारे कुछ विधायक सूरत में हैं और उन्हें वापस नहीं लौटने दिया जा रहा है. लेकिन वे सभी लौटेंगे क्योंकि वे शिवसेना के समर्पित कार्यकर्ता हैं. मुझे यक़ीन है कि वे सभी लौट आएंगे और सब कुछ सामान्य हो जाएगा."
शिव सेना सांसद संजय राउत ने कहा कि बीजेपी को ये याद रखना चाहिए कि महाराष्ट्र राजस्थान या मध्य प्रदेश से काफ़ी अलग है.
संजय राउत ने कहा कि सूरत में मौजूद विधायकों से वे संपर्क में हैं.
संजय राउत ने कहा, ''हम उद्धव ठाकरे जी और पवार साहिब से स्थिति पर विचार कर रहे हैं. जो ये सोच रहे हैं कि वे किंगमेकर हैं, वे नाकाम होंगे. महाराष्ट्र में ताज़ा सियासी स्थिति को देखते हुए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी विधायकों की बैठक बुलाई है.''

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कौन हैं एकनाथ शिंदे?
सोमवार को विधान परिषद में शिवसेना के दो उम्मीदवार चुने गए हैं, लेकिन इस चुनाव ने शिवसेना और महाविकास अघाड़ी के बीच एक आंतरिक विवाद को जन्म दिया है.
ये तो फ़िलहाल पता नहीं चला है कि क्रॉस वोटिंग कांग्रेस की तरफ़ से हुई शिवसेना की तरफ़ से. लेकिन फ़िलहाल शिवसेना के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है.
शिवसेना के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे रातोरात सूरत पहुँच गए और पूरे महाराष्ट्र की राजनीति को हिला कर रख दिया. कहा जाता है कि एकनाथ शिंदे के साथ शिवसेना के 12 विधायक हैं.
ठाणे में कोपारी-पछपाखड़ी के विधायक एकनाथ शिंदे, कई दशकों से शिवसेना में एक महत्वपूर्ण नेता रहे हैं. उनके पुत्र श्रीकांत शिंदे, कल्याण सीट से चुनकर दूसरी बार लोकसभा के सांसद बने हैं.
ठाणे नगर निगम में विपक्ष के नेता के रूप में काम करने के बाद, वह 2004 से विधान सभा के लिए चुने गए हैं. लेकिन उनके सफर की शुरुआत एक रिक्शा वाले से हुई.

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ठाणे के वरिष्ठ पत्रकार मिलिंद बल्लाल एकनाथ शिंदे को 'आक्रामक शिव सैनिक' बताते हैं.
एकनाथ शिंदे के बारे में मिलिंद बल्लाल कहते हैं, "एकनाथ शिंदे सातारा से आते हैं. वह पढ़ाई के लिए ठाणे आए थे. यहीं वो शिवसेना के दिग्गज नेता आनंद दीघे के संपर्क में आए."
दीघे के संपर्क में आने के बाद 18 साल की उम्र में उन्होंने शिवसेना में अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया. फिर 1997 में आनंद दिघे ने शिंदे को ठाणे नगर निगम का टिकट दिया.
अपने पहले ही प्रयास में शिंदे ने नगर निगम का चुनाव जीता और ठाणे नगर निगम के हाउस लीडर भी बने. 2004 में उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा. यहां भी, उन्हें अपने पहले प्रयास में सफलता मिली.
तब से वे चार बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं. शिंदे ने पहले लोक निर्माण मंत्री के रूप में काम किया था. वे इस समय शहरी विकास मंत्री और ठाणे ज़िले के संरक्षक मंत्री हैं
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