सरकार नहीं गिराई, इसलिए परेशान कर रही जांच एजेंसियां: संजय राउत - प्रेस रिव्यू

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अंग्रेज़ी अख़बार द टेलीग्राफ़ ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसके मुताबिक़, शिवसेना सांसद संजय राउत ने राज्यसभा सभापति को चिट्ठी लिखकर आरोप लगाया है कि केंद्रीय जांच एजेंसियां उन्हें सिर्फ़ इसलिए परेशान कर रही हैं क्योंकि उन्होंने महाराष्ट्र की गठबंधन वाली सरकार को गिराने में मदद करने से इनकार कर दिया था.
राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने इस कथित बदले की राजनीति को लोकतंत्र के कमज़ोर होने से जोड़ा है. उन्होंने कहा है कि बीजेपी के प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बनाने और दूसरी पार्टी की सरकारों को गिराने के मक़सद से केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है.
राउत ने राजनेताओं से इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की अपील की है. साथ ही उन्होंने राजनेताओं को नाज़ी शासन भी याद भी दिलाई, जिसने समय रहते अन्याय के ख़िलाफ़ एकजुटता न दिखाने वालों को नहीं बख्शा.
राउत ने चिट्ठी में लिखा है, "एक महीने पहले मुझसे कुछ लोगों ने संपर्क किया और कहा कि राज्य सरकार को गिराने में मैं मदद करूं. वे चाहते थे कि मैं ऐसी कोशिश करूं जिससे राज्य में मध्यावधि चुनाव कराने के अलावा दूसरा विकल्प न बचे."
राउत ने पत्र में लिखा, "मैंने ऐसे किसी भी अवैध एजेंडे में शामिल होने से इनकार कर दिया."
राउत ने चिट्ठी में बताया, "मुझे चेतावनी दी गई थी कि मेरे इनकार की बहुत भारी क़ीमत चुकानी पड़ सकती है. मुझे यह तक कहा गया कि मेरा हश्र भी एक पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री की तरह हो सकता है, जिन्होंने कई साल जेल में बिताए. मुझे यह भी चेतावनी दी गई थी कि मेरे अलावा महाराष्ट्र में दो अन्य वरिष्ठ मंत्रियों और दो वरिष्ठ नेताओं को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जेल भेज दिया जाएगा."

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शरद पवार, राहुल गांधी सहित इन "दोस्तों" को भी भेजी चिट्ठी
राज्यसभा सभापति के अलावा राउत ने इस चिट्ठी की प्रति एनसीपी चीफ़ शरद पवार, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, टीएमसी के डेरेक ओ ब्रायन, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, डीएमके के तिरुचि, एआईएडीएमके के एम. थंबीदुरई, बीएसपी के सतीश मिश्रा, समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव, आरजेडी सांसद मनोज झा और टीआरएस नेता के. केशव राव को भी भेजी है.
बाद में मीडिया के सामने राउत ने कहा कि वह इस ब्लैकमेलिंग के आगे घुटने नहीं टेकेंगे और साथ ही उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों को चेताया कि वो जो करना चाहें करें. शिवसेना नेता ने कहा, "प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का मुंबई दफ़्तर साज़िश और उगाही का अड्डा है. ये विपक्षी नेताओं को सुनियोजित तरीके से निशाना बना रहे हैं. मैं अपने समर्थकों के साथ ईडी दफ़्तर के सामने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस करूंगा और उनके भयावह खेल का पर्दाफ़ाश करूंगा."

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'बीजेपी से गठबंधन टूटने के बाद से शिवसैनिकों को बनाया जा रहा निशाना'
राज्यसभा सभापति वेंकैया नायडू को लिखी चिट्ठी में राउत ने आरोप लगाया है कि शिवसेना नेताओं को तब से ही निशाना बनाया जा रहा है जबसे उसने बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़कर कांग्रेस-एनसीपी के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाई है.
राउत ने कहा कि विपक्षियों को परेशान करने के इरादे से पुराने ज़मीन सौदों को खंगाला जा रहा है. उन्होंने कहा कि जिस भूमि सौदे को लेकर विवाद है वह पहले ही सार्वजनिक है और इसको लेकर कोई सवाल नहीं किया गया.
उन्होंने कहा कि अभी तक 28 लोगों से पूछताछ की गई है और उनपर दबाव बनाया जा रहा है कि वे राउत के खिलाफ़ बयान दें.
राउत ने कहा कि ईडी और अन्य एजेंसियों के कुछ अधिकारियों ने उन्हें बताया था कि उनके बॉस ने उन्हें आदेश दिया था कि वे संजय राउत को "ठीक" करें.

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बेरोज़गारी की वजह से 25 हज़ार भारतीयों ने आत्महत्या की, सरकार ने संसद में बताया
अंग्रेज़ी अख़बार द टेलीग्राफ़ की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार ने बुधवार को संसद में बताया है कि साल 2018 से 2020 के बीच 25,000 से ज़्यादा भारतीयों ने बेरोज़गारी या कर्ज़ की वजह से आत्महत्या कर ली.
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय की ओर से पेश किए गए एनसीआरबी आंकड़ों के मुताबिक़, कोरोना महामारी की शुरुआत वाले साल 2020 में आत्महत्या करने वाले बेरोज़गारों की संख्या 3548 पर पहुंच गई, जो अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है. साल 2018 और 2019 में यह आंकड़ा क्रमशः 2741 और 2851 था.
कंगाली और क़र्ज़ की वजह से साल 2018 में 4970 लोगों ने आत्महत्या की. वहीं, 2019 में 5908 और 2020 में 5213 लोगों ने अपनी जान ली.
एनसीआरबी डेटा के मुताबिक़, 2020 में बेरोज़गारों द्वारा आत्महत्या के मामले में कर्नाटक सबसे आगे था जहां 720 लोगों ने सुसाइड किया. इसके बाद महाराष्ट्र (625), तमिलनाडु (336), असम (234) और उत्तर प्रदेश (227) थे.

आईआईटी में 40 प्रतिशत से ज़्यादा शिक्षकों के पद खाली
अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने लोकसभा में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के सवाल के जवाब में बताया है कि देश के सभी 23 इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) में 40 प्रतिशत से ज़्यादा टीचिंग पोस्ट खाली पड़े हैं.
आंकड़ों के मुताबिक़, कुल 23 आईआईटी में अभी 6511 प्रोफ़ेसर पढ़ा रहे हैं, लेकिन 4 हज़ार 370 पद अभी भी खाली हैं.
आंकड़े बताते हैं कि आईआईटी में पढ़ा रहे 6511 टीचिंग स्टाफ़ में से सिर्फ़ 12 फ़ीसदी ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग या आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के हैं.
आरक्षण नीतियों के मुताबिक़, एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्लूएस श्रेणी वाले लोगों को क्रमशः 7.5%, 15%, 27% और 10% रिज़र्वेशन मिलना चाहिए. इसका मतलब हुआ कि आदर्श स्थिति में कुल पढ़ाने वाले कर्मियों में आरक्षित वर्ग के 59.5 प्रतिशत लोग होने चाहिए.
आईआईटी धनबाद में 57.2 प्रतिशत पद खाली हैं और इसके बाद आईआईटी खड़गपुर में 53.4 प्रतिशत. आईआईटी दिल्ली में 9.4 फ़ीसदी पद खाली हैं.
सज़ा-ए-मौत ही नहीं बल्कि क़ैदी की जान बचाने वाले प्रावधानों पर ध्यान दें जज: सुप्रीम कोर्ट

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अंग्रेज़ी अखबार द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक़, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक मामले में फ़ैसला सुनाते हुए देशभर के न्यायाधीशों से कहा कि सिर्फ़ अपराध के घिनौनेपन को देखते हुए मौत की सज़ा न दें, बल्कि उन कारणों पर भी समान रूप से विचार करें जो क़ैदी को अपनी जान बचाने में मदद कर सकते हैं.
मौत की सज़ा के ख़िलाफ़ एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकने वाले इस फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के जजों को केवल अपराध की भयानक प्रकृति और समाज पर इसके हानिकारक असर को ध्यान में रखकर ही सज़ा-ए-मौत नहीं देनी चाहिए. उन्हें ऐसी वजहों पर भी समान रूप से विचार करना चाहिए, जो आजीवन कारावस के पक्ष में हों.
जस्टिस एएम खानविलकर की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने यह टिप्पणी एक सात साल की बच्ची के बलात्कार और हत्या के मामले की सुनवाई के दौरान दी. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने क़ैदी को मिली मौत की सज़ा को उम्र कैद में बदल दिया.
2 साल ऑनलाइन क्लास के बाद 17 फ़रवरी से ख़ुलेगी दिल्ली यूनिवर्सिटी

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अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, दो साल तक ऑनलाइन क्लास चलने के बाद अब दिल्ली विश्वविद्यालय 17 फ़रवरी से खुलने जा रहा है. डीयू की प्रॉक्टर रजनी अब्बी ने बुधवार को एबीवीपी के प्रदर्शनकारी छात्रों को संबोधित करने के दौरान ये ऐलान किया.
बीते कुछ दिनों से छात्र और ऐक्टिविस्ट्स दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में वीसी दफ़्तर के बाहर धरना प्रदर्शन कर रहे थे. छात्रों की मांग थी कि अब ऑफ़लाइन क्लास तत्काल बहाल की जाए.
बुधवार को डीयू की प्रॉक्टर रजनी अब्बी ने एबीवीपी के प्रदर्शनकार छात्रों के सामने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर 17 फ़रवरी से खुलेगा और जल्द ही कुलपति के कार्यालय से इस संबंध में अधिसूचना जारी की जाएगी.
बुधवार 9 फ़रवीर को एबीवीपी के नौ सदस्यों ने कॉलेज खोले जाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर जाने का ऐलान किया था.
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