आदित्य ठाकरे जिस कंपनी के निदेशक थे, उसके रजिस्टर्ड पते पर क्या मिला? बीबीसी पड़ताल

- Author, मयंक भागवत
- पदनाम, बीबीसी मराठी के लिए
महाराष्ट्र की महाविकास आघाडी सरकार के वन और पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे 2014 से 2019 तक पांच साल तक कोमो स्टॉक एंड प्रॉपर्टीज (एलपीपी) कंपनी के निदेशक पद पर थे.
आदित्य ठाकरे ने 2019 में कंपनी छोड़ दी थी. लेकिन वर्तमान में नंदकिशोर चतुर्वेदी, जिन पर हवाला ऑपरेटर होने का आरोप है, वे इस कंपनी के निदेशक हैं.
भाजपा ने इसी नंदकिशोर चतुर्वेदी के आदित्य ठाकरे के साथ संबंध होने का आरोप लगाया है.
भाजपा नेताओं ने मांग की है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को इस पूरे मामले की जांच करनी चाहिए.
ये कंपनी फिलहाल कौन सा व्यवसाय करती है? क्या नंदकिशोर चतुर्वेदी के साथ कोई संपर्क हो पाता है? इन बातों का पता लगाने के लिए हमने इस कंपनी के पते पर जाकर पूछताछ की.

कोमो स्टॉक एंड प्रॉपर्टीज (एलपीपी) कंपनी क्या है?
सरकार के कॉर्पोरेट मंत्रालय की वेबसाइट पर इस कोमो स्टॉक एंड प्रॉपर्टीज (एलपीपी) के बारे में जानकारी मिलती है. इस के अनुसार, "1202, मैराथन ओमेगा, सेनापति बापट मार्ग, लोअर परेल, मुंबई" इस कंपनी का पंजीकृत पता दिया गया है.
कॉरपोरेट मंत्रालय की इसी वेबसाइट के मुताबिक़, कोमो कंपनी कंस्ट्रक्शन कारोबार से जुड़ी है. हम इस पते पर गए और पूछताछ करने की कोशिश की.
क्या नंदकिशोर चतुर्वेदी से संपर्क किया जा सकता है? यह कंपनी क्या कारोबार करती है, इन बातों का पता लगाने की हमने कोशिश की.
यहां तैनात सुरक्षाकर्मी ने कहा कि मैराथन ओमेगा एक आवासीय इमारत है और इस इलाके में ऐसी कोई कंपनी नहीं है. मकान नंबर 1202 पिछले कई सालों से बंद है, वहां कोई नहीं रहता है.
उन्होंने कहा, "हम ये भी नहीं जानते कि इस मकान का मालिक कौन है."
उन्होंने हमें ऊपर नहीं जाने दिया. लेकिन, हम बिल्डिंग मैनेजर से मिले. हमने उनसे भी कोमो स्टॉक एंड प्रॉपर्टीज (एलपीपी) के बारे में पूछा.
उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "फ्लैट नंबर 1202 नंदकिशोर चतुर्वेदी का है. लेकिन ये घर कोरोना महामारी के बाद से ही बंद है. मकान में कोई नहीं रहता. हमें नहीं पता कि वे (चतुर्वेदी) कहां हैं."
उन्होंने आगे कहा कि इस मकान में कोई कारोबारी कंपनी नहीं थी.
उन्होंने आगे कहा, हम नंदकिशोर चतुर्वेदी से भी संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन उनका कोई पता नहीं है.

इमेज स्रोत, HTTPS://WWW.MCA.GOV.IN/MCAFOPORTAL/SHOWDIRECTORMAS
इस कंपनी का आदित्य ठाकरे से क्या संबंध है?
आदित्य ठाकरे पहली बार 2014 में कोमो स्टॉक एंड प्रॉपर्टीज (एलपीपी) के निदेशक बने. कॉरपोरेट मंत्रालय की वेबसाइट की जानकारी के मुताबिक, आदित्य ठाकरे ने 2019 में ये कंपनी छोड़ दी थी.
लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि 2020 में नंदकिशोर चतुर्वेदी कंपनी के निदेशक बने.
राज्य के एक मंत्री जिस कंपनी के निदेशक थे, उसी कंपनी के नंदकिशोर चतुर्वेदी अब निदेशक हैं, इस तथ्य की जांच करने की मांग भाजपा विधायक नितेश राणे ने की है.
लेकिन खुद आदित्य ठाकरे ने अभी तक भाजपा के आरोपों पर कोई टिप्पणी या प्रतिक्रिया नहीं दी है.
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नंदकिशोर चतुर्वेदी की अन्य कंपनियों का क्या हुआ?
कॉरपोरेट मंत्रालय की वेबसाइट के मुताबिक़, नंदकिशोर चतुर्वेदी फिलहाल दस कंपनियों के निदेशक हैं. इनमें से छह कंपनियों की स्थापना 2017 में उसी दिन, 30 मार्च को की गई थी.
ये कंपनियां क्या करती हैं, नंदकिशोर चतुर्वेदी वहां हैं क्या? इसका पता लगाने के लिए हमने दूसरी कंपनियों के दफ्तरों में जाकर भी जानकारी लेने की कोशिश की.
इनमें से एक कंपनी, प्राइम टैक्स ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड, कमला मिल्स कंपाउंड, लोअर परेल में स्थित है. कॉर्पोरेट मंत्रालय की वेबसाइट से पता चलता है कि यह कंपनी मार्च 2010 में शुरू की गयी थी.
कमला मिल्स कंपाउंड में ट्रेड वर्ल्ड बिल्डिंग की 13वीं मंजिल पर प्राइम टैक्स ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड का दप्तर है. इस मंजिल पर पूरा अँधेरा छाया हुवा था. सामने एक दरवाजा था लेकिन कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. मोबाइल की रोशनी में हमें दरवाजे पर चिपकाया हुआ एक नोटिस दिखाई दिया.
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ये नोटिस जारी किया है. इसमें लिखा है, ''इस जगह की तलाशी ईडी मुंबई के जोन-1 ने की है. तलाशी 25 मई 2021 को की गई. फिलहाल इस कार्यालय के प्रवेशद्वार की दो चाबियां ईडी के पास हैं.''

दो गवाहों के सामने पंचनामा करने के बाद इस दरवाजे पर नोटिस की एक कॉपी रखी हुई थी.
अन्य एक कंपनी- वत्सला ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड, भी उसी पते पर पंजीकृत पाया गया.

नंदकिशोर चतुर्वेदी का नाम तब सामने आया जब ईडी ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बहनोई श्रीधर पाटणकर के खिलाफ कार्रवाई की थी.
ईडी ने दावा किया कि चतुर्वेदी एक हवाला ऑपरेटर था. उसके बाद भाजपा ने नंदकिशोर चतुर्वेदी के नाम पर आदित्य ठाकरे पर आरोप लगाना शुरू कर दिया.
कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय की वेबसाइट से प्राप्त जानकारी के अनुसार, आदित्य ठाकरे ने 2019 में आशेर प्रोजेक्ट डीएम (एलपीपी) छोड़ दी थी.
लेकिन एक साल बाद, 2020 में श्रीधर पाटणकर इसी कंपनी के निदेशक बने.
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