कंगना की बंगला ढहाने के मामले में जीत, हाई कोर्ट ने रद्द किया बीएमसी का आदेश

इमेज स्रोत, Kangana Ranaut/Facebook
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभिनेत्री कंगना रनौत के बंगले का हिस्सा तोड़ने के मुंबई महानगरपालिका के आदेश को रद्द कर दिया है. अदालत ने कहा है कि ये कार्रवाई दुर्भावना से प्रेरित और अभिनेत्री को नुक़सान पहुँचाने के लिए की गई थी.
अदालत ने कंगना की याचिका पर अपना फ़ैसला सुनाया जिसमें उन्होंने बीएमसी के आदेश को चुनौती दी थी.
बीएमसी ने नौ सितंबर को पाली हिल्स इलाके में स्थित कंगना के बंगले का एक हिस्सा गिरा दिया था.
फ़ैसला सुनाते हुए दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने साथ ही कहा कि वो सरकारी संस्थाओं के नागरिकों के विरूद्ध ताक़त का इस्तेमाल करने को भी "सही नहीं समझते" हैं.
उन्होंने कहा कि बीएमसी ने जो कार्रवाई की उसमें "थोड़ा सा भी संदेह नहीं रह जाता" कि ये कार्रवाई अनाधिकृत थी.
कंगना ने याचिका में बीएमसी से दो करोड़ रूपए के हर्जाने की भी माँग की थी. अदालत ने इस बारे में कहा कि वो इसका हिसाब लगाने के लिए किसी को नियुक्त करेगी जो अगले साल मार्च तक इस बारे में आदेश जारी करेगा.
बीएमसी ने कंगना रनौत के बंगले के एक हिस्से को ढहाने का क़दम ऐसे वक़्त उठाया था जब वो अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले में जाँच को लेकर महाराष्ट्र सरकार पर लगातार तीखे हमले बोल रही थीं.
इतना ही नहीं, कंगना और शिवसेना सांसद संजय राऊत के बीच इस विषय पर काफ़ी विवाद भी हो गया था.
ऐसे में बीएमसी के कंगना का दफ़्तर ढहाए जाने के फ़ैसले को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया गया था.
अदालत ने लगाई थी बीएमसी को फटकार
दफ़्तर ढहाए जाने के बाद कंगना रनौत ने एक वीडियो जारी करके कहा था कि उद्धव ठाकरे उन्हें डराने और चुप कराने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने ये क़ानून का हवाला देते हुए ये भी कहा था कि बीएमसी 15 दिन पहले नोटिस दिए बिना किसी इमारत पर कार्रवाई नहीं कर सकती.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
हालाँकि बीएमसी ने इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया था और कहा था कि कंगना के दफ़्तर पर कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि ये 'ग़ैरक़ानूनी' था. इस बीच ये मामला हाईकोर्ट में चला गया था और अदालत ने दफ़्तर पर बीएमसी की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी.
मामले की सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी को फटकार भी लगाई थी. अदालत ने कहा था, ''अगर बीएमसी हर मामले में इसी तत्परता से काम करती तो मुंबई शहर का सूरत-ए-हाल आज कुछ और ही होता.''
इस मामले में हाईकोर्ट ने पाँच अक्टूबर को अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था.

इमेज स्रोत, PRODIP GUHA/HINDUSTAN TIMES
कंगना के दफ़्तर पर कार्रवाई उनके उस बयान के ठीक बाद हुई थी जिसमें उन्होंने मुंबई की तुलना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से की थी और कहा था कि उन्हें मुंबई वापस लौटने में डर लग रहा है.
शिवसेना ने उनके इस बयान पर तीखा पलटवार किया था. हाँलाकि केंद्र सरकार ने कंगना के डर को वाजिब मानते हुए उन्हें वाई कैटेगरी की सुरक्षा दे दी थी.
दफ़्तर गिराए जाने के बाद कंगना ने महाराष्ट्र सरकार पर बेहद आक्रामता से जुबानी हमला किया था. उन्होंने यहाँ तक कहा था कि दफ़्तर की इमारत गिराए जाने पर उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे उनके साथ 'बलत्कार हुआ हो'.
कंगना ने इस मामले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी जमकर आड़े लिया था. उन्होंने कहा था, ''आप अपनी पार्टी की प्रमुख हैं और आपकी पार्टी एक महिला के साथ ऐसा सलूक कर रही है. आप उसे रोकती क्यों नहीं?''
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















