मुंबई: राज ठाकरे का अल्टीमेटम और हॉकर्स की क्या है मजबूरी?

- Author, राहुल रनसुभे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने मुंबई के एल्फ़िंस्टन रोड स्टेशन के फ़ुटओवर ब्रिज पर हुए हादसे के लिए रेल प्रशासन को ज़िम्मेदार ठहराया है.
मनसे नेता राज ठाकरे ने गुरुवार को संताप रैली कर रेलवे को स्टेशनों पर बैठने वाले छोटे विक्रेताओं को हटाने का अल्टीमेटम दिया है.
राज ठाकर ने कहा कि अगर प्रशासन ये नहीं करता तो मनसे अपने स्टाइल से उन्हें हटाएगी.
मुंबई के रेलवे स्टेशनों और फुटओवर ब्रिज़ों पर हज़ारों हॉकर्स बैठते हैं और अपनी रोज़ी रोटी कमाते हैं.

'हररोज़ कुआं खोदकर पानी पियो'
ऐसी ही एक हॉकर यास्मीन पिछले 15 साल से दादर वेस्ट के टिकट केंद्र के सामने स्टॉल लगाती हैं.
बांद्रा की रहने वाली यास्मीन ने बताया, "सुबह 5-6 बजे हम यहाँ आते हैं. हम सिज़नल धंधा करते हैं. अब पुलिसवाले, बीएमसी वाले हमें बैठने नहीं देते हैं. पहले आरपीएफ़ वाले बैठने नहीं देते थे.
- अभी राज ठाकरे कह रहे हैं कि हॉकर्स को काम करने नहीं देंगे, तो हॉकर्स खाएँगे क्या? एक दिन का कितना खर्च लगता है, पता है?
- हम राशन नहीं भरते हैं. रोज़ कमाना, रोज़ खाना, ऐसे ही चलता है. हम बस यही चाहते हैं कि हमारा काम जैसा चल रहा है, वैसा चलने दो."

यास्मीन के पति शमशेर सिंह कहते हैं , ''मैं 12 साल का था तब अकेले बिहार से मुंबई आया था. अभी मुझे यहां आकर 20 साल हो गए.
एल्फिंस्टन फुटओवर ब्रिज पर जो हुआ वो भगदड़ में हुआ है, उसमें किसी एक का दोष नहीं है. दशहरे के पहले थोड़ी कमाई हुई थी, तब एक-दो हज़ार रुपए जोड़ पाए थे, पर अब धंधा बंद है. इसी कमाई से खर्च चल रहा है.''

पिछले 40 साल से इस जगह पर टी शर्ट बेचने वाले दिनेश श्रीवास्तव कहते हैं, ''फेरीवालों के कारण तकलीफ़ होती है ऐसा कहना ग़लत है, क्योंकि ब्रिज की चौड़ाई 36 फ़ुट है.
अगर ब्रिज से 3-3 फ़ुट की जगह फेरीवालों को बैठने के लिए दी जाए, तो भी 30 फ़ुट जगह पैदल चलने वालों के लिए होती है. जिसमें वो आराम से आ-जा सकते हैं.''
वो कहते हैं, ''साल भर में हॉकर्स सिर्फ़ 6-7 महीने ही कमा पाते हैं. गणेश चतुर्थी, दिवाली जैसे त्यौहारों में ज़्यादा कमाई होती है, इसे बचाकर साल भर गुज़ारा किया जाता है.''
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