बिखरे विपक्ष के बीच मोदी को 2024 में कौन देगा चुनौती?

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- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
कहा जा रहा था कि पाँच राज्यों में हालिया चुनाव सेमीफ़ाइनल हैं और फ़ाइनल मैच 2024 का आम चुनाव है.
तो क्या पाँच राज्यों में से चार में जीत हासिल करके भारतीय जनता पार्टी ने फ़ाइनल मैच में अपनी जीत सुनिश्चित कर ली है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मार्च 2022 को मिली इस जीत के बाद उसी शाम दिल्ली के बीजेपी मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं के सामने दिए भाषण में कहा, "2019 के चुनाव नतीजों के बाद, कुछ पॉलिटिकल ज्ञानियों ने कहा था कि भई 2019 की जीत में क्या है, ये तो 2017 में ही तय हो गई थी. क्योंकि 2017 में यूपी का रिज़ल्ट आया था. मैं मानता हूँ कि इस बार भी ये ज्ञानी ज़रूर कहने की हिम्मत करेंगे कि 2022 के नतीजों ने 2024 के नतीजे तय कर दिए हैं."
प्रसार भारती के पूर्व अध्यक्ष और मोदी समर्थक सूर्य प्रकाश के विचार में इन ताज़ा चुनावी नतीजों का असर 2024 में देखने को मिलेगा. उनके अनुसार बीजेपी की जीत के पूरे आसार हैं.
वे कहते हैं, "आज के हालात के हिसाब से मुझे निश्चित रूप से 2024 के चुनावों में भाजपा के लिए कोई समस्या नहीं दिख रही है. देश भर में मोदी समर्थक भावना बहुत मज़बूत है. सरकारी स्कीमों की डिलिवरी और विचारों के प्रसार के मामले में उनका रिकॉर्ड काफ़ी उल्लेखनीय है. अगर चीज़ें स्थिर रहीं तो मुझे 2024 में भाजपा के लिए कोई समस्या नहीं दिख रही है."
उनका कहना था कि लोग मोदी के नाम पर आज भी वोट देते हैं और इसे आगे रोकना मुश्किल है.
बीबीसी से उन्होंने कहा, "इसमें कोई शक नहीं कि उत्तर प्रदेश जैसा राज्य जीतना कोई मज़ाक़ नहीं है. ये जहाँ योगी आदित्यनाथ के लिए एक सकारात्मक संकेत है तो दूसरे राज्यों में पीएम मोदी के लिए भी एक व्यापक संकेत है."
सियासी विश्लेषक सीमा चिश्ती के अनुसार ताज़ा चुनावी नतीजे ये दर्शाते हैं कि फ़िलहाल माहौल हिंदुत्व के पक्ष में है. उनके अनुसार ये विपक्ष की हार से ज़्यादा वोटरों की मानसिकता को दर्शाता है. वो कहती हैं, "वोटर अपने ख़ुद के हित में वोट नहीं कर रहा है, उसे कुछ और चाहिए". उन्हें लगता है कि अगर ऐसा ही हाल रहा तो 2024 के आम चुनाव में हिंदुत्व पर ही वोट पड़ेगा.''
"अगर मैं बीजेपी हूँ तो मैं यही समझूंगी कि हिंदुत्व को पूरी तरह से वोट मिला है. सिर्फ़ हिंदी बेल्ट की बात नहीं. ये चुनाव अलग-अलग राज्यों में हुए हैं."

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मोदी को रोकना मुश्किल
लगभग सभी विश्लेषक इस बात को अब स्वीकार करते हैं कि नरेंद्र मोदी को रोकना फ़िलहाल विपक्ष के बस से बाहर की बात है. प्रधानमंत्री 70 वर्ष के हैं और स्वस्थ्य हैं. उनके समर्थक कहते हैं कि वो छुट्टी लेते ही नहीं, केवल काम करते रहते हैं. ज़ाहिर है 2024 के फ़ाइनल मैच में बीजेपी के कप्तान मोदी ही होंगे और विश्लेषक मानते हैं कि अगर विपक्ष एक जुट भी हो जाए तो उन्हें शिकस्त देना मुश्किल है.
विश्लेषक पिछले आठ सालों से कांग्रेस के ख़त्म होने की बात कह रहे हैं. ताज़ा हार के बाद एक बार फिर से ये बात उठने लगी है.
लेकिन पिछले आठ सालों में कांग्रेस ने अगर कई राज्यों में शिकस्त खाई है तो कई अन्य राज्यों में जीत भी हासिल की है. साल 2018 में जब पार्टी ने छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में जीत हासिल की थी तो लगा कि पार्टी का रिवाइवल हो रहा है. लेकिन, राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी दो बार चुनाव हार चुकी है.
सीमा चिश्ती कहती हैं, "कांग्रेस बुरी तरह से हारी है. पंजाब में भी बुरी हार हुई है, जिसके चलते देश में एक पार्टी का सिस्टम बन कर रह गया है".

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कैसा होगा 2024 का चुनाव
तो क्या 2024 का लोकसभा चुनाव बीजेपी बनाम कांग्रेस नहीं होगा? क्या ये बीजेपी बनाम क्षेत्रीय पार्टियों का चुनाव होगा?
हरियाणा के मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता मनोहर लाल खट्टर ने गुरुवार को कहा कि देश में अब भी दो ही पार्टियां हैं बीजेपी और कांग्रेस. वे कहते हैं, "आज भी देश के अधिकतर क्षेत्रों में बीजेपी और कांग्रेस ही मौजूद हैं. लेकिन कांग्रेस, की विचारधारा में लोगों की दिलचस्पी कम हो रही है."
महाराष्ट्र में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले को उम्मीद है कि 2024 के चुनाव में उनकी पार्टी मज़बूत रहेगी. वे कहते हैं, "कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व अब भी मज़बूत है, जिससे हमें 2024 के चुनाव में कड़ा मुक़ाबला करने में मदद मिलेगी."
सीमा चिश्ती के मुताबिक़ 2024 में बीजेपी के मुक़ाबले कांग्रेस दम दिखा पाएगी या नहीं ये इस बात पर निर्भर करेगा कि कांग्रेस आने वाले राज्यों के चुनावों में कैसा प्रदर्शन करेगी.

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वे कहती हैं, "ये निर्भर करेगा कि आने वाले राज्यों के चुनावों में किस तरह के नतीजे सामने आते हैं. हमारा आकलन बदलता रहता है. अब देखिए बंगाल के चुनाव के बाद गति अलग तरह की हो गई थी. तो अगर कांग्रेस वाक़ई जुट कर राज्यों के स्तर पर दमदार प्रदर्शन करती है (कर्नाटक और गुजरात के चुनावों में), अगर कांग्रेस ने फिगर आउट कर लिया कि लोग प्रतिक्रिया कैसे करते हैं फिर तो उम्मीद है. उसे अपनी वापसी का रास्ता चुनना तो पड़ेगा."
सूर्य प्रकाश कहते हैं कि 2024 के चुनाव में फ़ाइनल मैच बीजेपी बनाम क्षेत्रीय पार्टियों के बीच होगा.
उन्होंने कहा, "पहली बात हमें यह ध्यान रखना होगा कि भाजपा पिछले कुछ सालों से भारत की नंबर वन पार्टी बनी हुई है. इसका मुक़ाबला कई क्षेत्रीय दलों के एक समूह से होगा. इन चुनावों के बाद आज के भारत के सियासी नक्शे पर नज़र डालें तो पता चलेगा कि कई राज्यों में क्षेत्रीय दल सत्ता में हैं. जहाँ भी कांग्रेस सत्ता में है, जैसे कि राजस्थान और छत्तीसगढ़, वहाँ बीजेपी मुख्य विपक्ष है और वे वैकल्पिक रूप से सत्ता में आती है.''
''दूसरी स्थिति ओडिशा जैसे राज्य की है, जहाँ एक स्थानीय पार्टी (बीजेडी) ने कांग्रेस को ख़त्म कर दिया है. बीजू जनता दल ने कांग्रेस को पछाड़ दिया है. अब बीजेपी बीजेडी की मुख्य प्रतिद्वंदी है. तेलंगाना में, जो एक कांग्रेसी राज्य था, सत्तारूढ़ दल ने चुनाव में कांग्रेस को पछाड़ा और अब भाजपा क्षेत्रीय दल की मुख्य प्रतिद्वंदी बन गयी है. पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश में भी कुछ ऐसा ही हुआ.''
वह कहते हैं, ''अब आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस की क़ीमत पर पंजाब में क्लीन स्वीप किया है. अब कांग्रेस के लिए दोबारा सत्ता में वापस आना मुश्किल होगा. आप दिल्ली को देखें, जहाँ आम आदमी पार्टी ने लगातार दो बार विधानसभा में कांग्रेस को शिकस्त दी है.''

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आम आदमी पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर एक नया विकल्प?
पंजाब में भारी जीत के बाद आम आदमी पार्टी के हौसले बुलंद हैं. दो सीटों के साथ गोवा में भी इसने अपना खाता खोल दिया है. साफ़ है कि अब ये पार्टी दिल्ली तक सीमित नहीं है. तो क्या अब ये एक राष्ट्रीय स्तर की पार्टी बनकर उभरेगी और क्या बीजेपी के लिए एक चुनौती बनेगी?
सूर्य प्रकाश कहते हैं, "ये शुरुआती दिन हैं. आपने एक पौधा देखा है, अभी आगे इसे बढ़ते देखेंगे". वे कहते हैं कि आम आदमी पार्टी फिलहाल केवल दिल्ली और पंजाब में बीजेपी के लिए चुनौती है, राष्ट्रीय स्तर पर नहीं.
सीमा चिश्ती के अनुसार आम आदमी पार्टी एक राष्ट्रीय स्तर की पार्टी बन सकती है. वे कहती हैं, "इससे आरएसएस को भी कोई समस्या नहीं होगी. ये (आम आदमी पार्टी) इसके क़रीब देखी जाती है और बीजेपी का विरोध तो करती ही नहीं है. मेरे विचार में आप हिंदुत्व के लिए प्रतिबद्ध है."
शायद 2024 में आम आदमी पार्टी राष्ट्रीय स्तर बीजेपी को चुनौती देने योग्य न हो सके. विश्लेषक कहते हैं कि कई विपक्षी नेता जिनकी पार्टियां कई राज्यों में सत्ता में हैं एक जुट होकर एक थर्ड फ्रंट बनाएं तो फ़ाइनल का मुक़ाबला दिलचस्प हो सकता है.
ममता बनर्जी, चंद्रशेखर राव और शरद पवार जैसे ऊंचे क़द के विपक्ष के नेता ऐसे फ़्रंट की बात कर रहे हैं लेकिन फिलहाल ये बन नहीं पाया है.
आम चुनाव दो साल बाद हैं. राजनीति में दो साल का अरसा एक लंबा समय होता है. दो साल में हालात बदल सकते हैं. लेकिन मौजूदा हालात में प्रधानमंत्री मोदी को शिकस्त देना लगभग असंभव लगता है.
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