केजरीवाल ने पंजाब में कैसे किया कमाल, कांग्रेस, अकाली कहां पिछड़े

kejriwal, केजरीवाल, भगवंत मान, पंजाब विधानसभा चुनाव 2022

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आम आदमी पार्टी ने पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में दिल्ली के बाहर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और पंजाब में दांव लगाया, लेकिन उसका पूरा ज़ोर पंजाब की 117 विधानसभा सीटों पर रहा और रुझान भी उसके अनुरूप ही आ रहे हैं.

पंजाब विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत के साथ आम आदमी पार्टी इतिहास रचने की ओर बढ़ती दिख रही है. पंजाब विधानसभा चुनाव के अब तक मिले रुझानों के अनुसार अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी का शासन अब दिल्ली के बाहर दूसरे राज्य पंजाब में भी कायम होता दिख रहा है.

इस तरह पंजाब के शासन में एक नई पार्टी के आने का इतिहास बनेगा तो आम आदमी पार्टी वर्तमान में देश के एक से अधिक राज्य में शासन करने वाली तीसरी पार्टी भी बनेगी.

पंजाब की 117 विधानसभा सीटों पर शुरुआती रुझानों में आप को दो तिहाई बहुमत मिलता दिख रहा है.

कैप्टन अमरिंदर सिंह, नवजोत सिंह सिद्धू और वर्तमान मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी जैसे लगभग सभी बड़े नेता शुरुआती मतगणना में पीछे दिख रहे हैं.

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"मुफ़्त" बांटने की राजनीति

'आप' को मिल रही इस बढ़त के पीछे क्या वजहें हैं?

चुनाव विश्लेषक भावेश झा कहते हैं, "रुझानों में जो दिख रहा है, नतीजे उससे अलग शायद ही होंगे. जैसा कि एग्ज़िट पोल में दिखा कि पंजाब में 'आप' को स्पष्ट बहुमत मिलेगा, वही होता दिख रहा है."

वो कहते हैं, "पंजाब में अब तक एक बार कांग्रेस, एक बार अकाली दल के सत्ता में आने की जो परंपरा चली आ रही थी लोग उससे उब गए थे, और लोग नई पार्टी को मौका देना चाहते थे. जैसा कि पूरे भारत में दिख रहा है कि जनता किसी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत देना चाह रही है, वही पंजाब में भी दिख रहा है."

आम आदमी पार्टी को मिली सफलता पर बीबीसी पंजाबी के संपादक अतुल संगर कहते हैं, "कांग्रेस को जो नुक़सान होता दिख रहा है उसका लगभग सीधा लाभ 'आप' को मिल रहा है. 'मुफ़्त' घोषणाओं का असर हुआ लगता है. जनता को आम आदमी पार्टी की घोषणाएं समझ में आई हैं. इस मामले में उसने आम आदमी पार्टी पर अन्य पार्टियों से अधिक भरोसा किया है, ऐसा लग रहा है."

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कांग्रेस की हार 'आप' का लाभ

पंजाब में अन्य बड़ी पार्टियां, शिरोमणी अकाली दल के साथ-साथ सत्तारूढ़ कांग्रेस बहुत पीछे रह गई है. न केवल मुख्यमंत्री चन्नी पिछड़ रहे हैं बल्कि प्रदेश पार्टी अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू भी पीछे चल रहे हैं.

कांग्रेस ने जो दलित वोट बैंक का कार्ड खेला था वो चलता हुआ नज़र नहीं आ रहा है.

अतुल संगर कहते हैं, "कांग्रेस सब को साथ लेकर चलती रही है. कांग्रेस की तरफ़ से ये संकेत आना कि पंजाब का मुख्यमंत्री एक सिख ही होगा. ये चीज़ें शायद लोगों को पसंद नहीं आई हैं. कांग्रेस के लिए हिंदू, दलित सभी वोट करते रहे हैं. कांग्रेस के लिए अमरिंदर सिंह के आने के बाद जाट-सिख भी वोट करता रहा है. लेकिन ये सबको साथ लेकर चलने वाली पार्टी की छवि का धूमिल होना कांग्रेस के लिए अच्छा नहीं रहा है, ऐसा लगता है."

वहीं भावेश कहते हैं, "पंजाब में कांग्रेस के लिए ख़ुद अपने ही पाले में गोल करना आत्मघाती रहा. नवजोत सिंह सिद्धू ने शुरू से अपनी ही पार्टी को टारगेट किया, उसका बड़ा नुक़सान हुआ है."

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राष्ट्रीय राजनीति में भविष्य

अन्य क्षेत्रीय पार्टियां तृणमूल कांग्रेस या अन्य दलों की बात करें तो उनकी सरकार एक-एक राज्य में ही है, लेकिन आम आदमी पार्टी की सरकार दूसरे सूबे में बनती है तो उसके लिए ये एक बड़ी उपलब्धि होगी.

साथ ही यह उसके लिए एक चुनौती भी है. 'दिल्ली मॉडल' जिसकी वो बहुत बातें करती है, उसे पंजाब में 2024 से पहले तक दिखाना होगा कि हमने यहां पर कुछ उससे हासिल कर लिया है. इसलिए ये चुनौती है और साथ ही बहुत बड़ा अवसर भी है.

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, "केजरीवाल की राजनीति का मूल है, शिक्षा, रोज़गार, स्वास्थ्य और आम आदमी के लिए काम करना. अब ये रास्ता उधर जा रहा है. हम आज देश में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार जैसे मुद्दों पर खड़े हैं. केजरीवाल सरकार का मॉडल दिल्ली में सफल हुआ है आगे भी होगा."

वहीं आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा का कहना है, "पंजाब में पार्टी को मिल रही जीत से साबित हो रहा है कि आम जनता जाग चुकी है. हमारी पार्टी कांग्रेस का नैचुरल रिप्लेसमेंट है, ऐसा नहीं है कि हम एक और राज्य में सत्ता में आने जा रहे हैं, अहम बात है कि हम राष्ट्रीय स्तर पर एक विकल्प के तौर पर उभर रहे हैं."

आम आदमी पार्टी को पंजाब में मिली बढ़त पर बीजेपी नेता मनोज तिवारी ने कहा, "जनता के जनादेश को सिर माथे पर रखना चाहिए, यहीं पर परीक्षा होती है बड़े हृदय की."

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