एकनाथ शिंदे: कभी ऑटोरिक्शा चलाने वाले वो शख़्स जो आज महाराष्ट्र की सियासत के केंद्र में हैं

एकनाथ शिंदे

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महाराष्ट्र में हाल में हुए विधान परिषद चुनाव के बाद शिवसेना और महाविकास अघाड़ी के भीतर विवाद पैदा हो गया. इससे पहले कि इस विवाद की सही वजह पता चलती, शिवसेना के विधायकों ने बग़ावत कर दी.

शिवसेना के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे कई विधायकों को लेकर रातोंरात गुजरात के शहर सूरत पहुंच गए, जिससे पूरे महाराष्ट्र की राजनीति में जैसे भूचाल आ गया. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, एकनाथ शिंदे के साथ अब तक शिवसेना के 35 विधायक हैं.

एकनाथ शिंदे न केवल ठाणे की कोपरी-पचपाखड़ी सीट से विधायक हैं, बल्कि कई दशकों तक वे पार्टी के अहम नेता भी रहे हैं. उनके बेटे श्रीकांत शिंदे कल्याण लोकसभा क्षेत्र से दूसरी बार सांसद चुने गए हैं.

एकनाथ शिंदे कई सालों से शिवसेना के सदस्य रहे हैं. ठाणे नगर निगम में विपक्ष के नेता के रूप में काम करने के बाद वे 2004 में पहली बार विधायक बने थे. हालांकि उनके करियर की शुरुआत एक ऑटोरिक्शा चालक के रूप में हुई थी.

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ठाणे वैभव नामक अख़बार के संपादक मिलिंद बल्लाल की नज़र में एकनाथ शिंदे की राजनीतिक यात्रा 'आक्रामक शिवसैनिक से शाखा प्रमुख और फिर ज़िम्मेदार मंत्री' की रही है.

एकनाथ शिंदे के बारे में मिलिंद बल्लाल कहते हैं, "सतारा एकनाथ शिंदे का गृहनगर है. वे अपनी पढ़ाई के लिए ठाणे आए थे, जहां वे आनंद दिघे के संपर्क में आए."

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एकनाथ शिंदे का राजनीतिक सफर

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  • 18 साल की उम्र में शिवसेना से अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया.
  • पार्टी में क़रीब डेढ़ दशक तक काम करने के बाद 1997 में आनंद दिघे ने शिंदे को ठाणे नगर निगम के चुनाव में पार्षद का टिकट दिया.
  • पहली ही कोशिश में शिंदे ने न केवल नगर निगम का यह चुनाव जीता, बल्कि वे ठाणे नगर निगम के हाउस लीडर भी बन गए.
  • उसके बाद 2004 में उन्होंने ठाणे विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और यहां भी पहली ही कोशिश में जीतने में कामयाब रहे.
  • इसके बाद 2009 से वो लगातार कोपरी-पचपाखड़ी विधानसभा क्षेत्र के विधायक चुने गए हैं.
  • 2015 से 2019 तक राज्य के लोक निर्माण मंत्री रहे.
  • फ़िलहाल राज्य के शहरी विकास मंत्री होने के साथ ठाणे जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं.
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नीलम गोर्हे

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विधायकों के साथ एकनाथ शिंदे के राज्य के बाहर चले जाने और उनसे संपर्क न हो पाने के बाद शिवसेना के बारे में यह राय बन गई है कि पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है.

हालांकि शिवसेना नेता नीलम गोर्हे ने भरोसा जताया है कि एकनाथ शिंदे से जल्द ही संपर्क हो जाएगा.

शिवसेना के ख़िलाफ़ हो रही साज़िश: नीलम गोर्हे

शिवसेना नेता और राज्य विधान विधान परिषद की उप सभापति नीलम गोर्हे ने कहा है कि अफ़वाहों पर यकीन नहीं करना चाहिए.

गोर्हे ने कहा, "एकनाथ शिंदे कई सालों से हमारे सहयोगी रहे हैं. भले ही हर नेता हर दिन एकदूसरे से नहीं मिलते लेकिन एकनाथ शिंदे हमेशा नेताओं से मुलाक़ात करते रहे हैं. मुझे नहीं पता कि कितने घंटों तक उनसे हमारा संपर्क नहीं हो सकेगा."

गोर्हे के अनुसार, "वे बहुत ही कुशल और मेहनती नेता हैं. उन्होंने विधान परिषद चुनाव के लिए कई दिन काम किया. वे दिनरात काम कर रहे थे. उनके पास अहम विभागों की ज़िम्मेदारियां भी हैं. चुनाव के बाद जब इस सप्ताह हम पार्टी कार्यालय में थे तब एकनाश शिंदे वहां थे."

उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री ने वहां आकर विधायकों से बात की थी. लेकिन इस समय वे कहां हैं, इस पर बहस करने की ज़रूरत नहीं है. वे जल्द ही सबसे संपर्क करेंगे."

उद्धव ठाकरे

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गोर्हे कहते हैं, "शिवसेना के ख़िलाफ़ साज़िशें होती रहती हैं. ऐसी सोच से कुछ भी हासिल नहीं होता. ये दुश्मनों की साज़िश है. चुनाव के समय हर विधायक से मेरी मुलाक़ात हुई थी. बातचात से शिवसेना के दोनों उम्मीदवार चुने गए."

नीलम गोर्हे ने कहा, "वोट बंटने की ख़बर आधारहीन है. किसी विधायक का वोट कहां गया इसका पता अध्ययन और चर्चा के बाद ही चल सकता है. चुने जाने के बाद हम मातोश्री जाते हैं. जीतने वाले उम्मीदवारों को बहन रश्मि ठाकरे बधाई देती हैं."

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