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कौन बनेगा डॉन के सिक्वेल का हीरो! | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अगर आपने सोचा कि 'डॉन' का सिक्वेल शाहरुख़ खान के साथ बनेगा, तो आप ग़लत हैं. अगर आप ने सोचा कि डॉन का सिक्वेल फ़रहान अख़्तर बनाएँगे, तो भी आप ग़लत हैं. 'डॉन' का सिक्वेल बन तो रहा है मगर अमिताभ बच्चन के साथ. 'डॉन-2 रिटर्न ऑफ़ द किंग' को बनाने वाले हैं पुरानी 'डॉन' के निर्माता नरीमन ईरानी के बेटे-नदीम और नादिर. फ़रहान अख़्तर ने इनसे ही 'डॉन' बनाने का अधिकार ख़रीदा था. जानने वाली बात ये है कि फ़रहान अख़्तर और उनके पार्टनर रितेश सिधवानी के पास सिर्फ़ 'डॉन' के रीमेक अधिकार थे, उसके सिक्वेल के नहीं. नदीम और नादिर ईरानी अमिताभ से दो बार मिल चुके हैं. बच्चन ने सिक्वेल में काम करने की रज़ामंदी भी दे दी है और कहानी पर काम शुरू हो चुका है. इस सिक्वेल के निर्देशक का नाम भी तय नहीं है. तो ये हुई एक और कहानी मीडिया के लिए. ये साबित करने के वास्ते कि अमिताभ और शाहरुख़ में अनबन है, हालाँकि इससे ऐसा कुछ भी साबित नहीं होता. *********************************************** हिमेश की टोपी हिमेश रेशमिया का नया लुक फ़ाइनल हो गया है. सुभाष घई की कर्ज़ के रिमेक के लिए हिमेश ने हेयर ट्रांसप्लांट करवाया है यानि सर पर बाल उगवाए हैं. इस रीमेक का टाइटिल भी कर्ज़ हो होगा. फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि न्यूमरोलॉजी के हिसाब से इस कर्ज़ में तीन एक्स्ट्रा जेड होंगे. इस फ़िल्म में हिमेश टोपी नहीं पहनेंगे क्योंकि अब उनके सिर पर छिपाने वाले नहीं बल्कि दिखाने वाले बाल हैं. नई कर्ज़ का निर्देशन सतीश कौशिक करेंगे और इस फ़िल्म की शूटिंग अगले महीने अफ़्रीका में शुरू होगी. *********************************************** नाचने लगे निर्देशक माधुरी दीक्षित की 'आजा नचले' नहीं चली हो, लेकिन अब भी निर्माताओं की लाइन लगी पड़ी है उन्हें साइन करने के लिए.
इनमें से दो हैं इंद्र कुमार और अशोक थकेरिया, जिनकी 'दिल', 'राजा' और 'बेटा' में माधुरी दीक्षित काम कर चुकी हैं. इंद्र कुमार अपनी बेटी, श्वेता को अभिनय की दुनिया में लेकर आ रहे हैं और उस फ़िल्म में वो माधुरी या श्रीदेवी जैसी एक और अभिनेत्री को साइन करना चाहते हैं. ये दोनो माधुरी को इस सिलसिले में मिले भी थे. कहानी फ़ाइनल होने के बाद माधुरी एक बार उसे सुनेंगी और फिर तय करेंगी कि वो फ़िल्म में काम करेंगी या नहीं. *********************************************** बॉलीवुड में हॉलीवुड हॉलीवुड स्टूडियो कोलंबिया (सोनी) सांवरिया से हिंदी फ़िल्मों के निर्माण में उतरे जिसके बाद वार्नर ब्रदर्स निखिल आडवाणी की मेड इन चाइना से बॉलीवुड में प्रवेश कर रहे हैं. तो ट्वेंटीअथ सेंचुरी फॉक्स पीछे कैसे रह सकता है. फॉक्स पहले भारत और एशिया के लिए हिंदी टेलीविज़न चैनल शुरू करेंगे और उसके बाद हिंदी फ़िल्में बनाएँगे. चैनल के वास्ते प्रोग्राम बनाने के लिए फॉक्स ने मुंबई के एनडी स्टूडियो की सालभर की बुकिंग भी कर ली है. इसका मतलब है कि हॉलीवुड पूरी तरह से बॉलीवुड में आ रहा है. *********************************************** सर्किट का दर्द मानो या न मानो, अरशद वारसी अब सिर्फ़ हीरो के रोल चाहते हैं. कैरेक्टर रोल्स के ऑफ़र वो अब मना कर रहे हैं.
'मुन्ना भाई एमबीबीएस' और 'लगे रहो मुन्नाभाई' के हिट होने के बाद मुन्ना भाई के सर्किट को लगने लगा है कि उन्हें सिर्फ़ हीरो के रोल करने चाहिए. इसलिए वो आजकल निर्माताओं को नकारने में लगे हैं क्योंकि उन्हें ज़्यादातर कैरेक्टर रोल ही ऑफ़र होते हैं. यूटीवी की गोल के प्रमोशन में अरशद ने हिस्सा नहीं लिया था क्योंकि पब्लिसिटी में उनकी तस्वीर जॉन अब्राहम के पीछे दिखाई गई थी. अरशद का कहना था कि वो भी जॉन की तरह फ़िल्म के हीरो थे. वो सब तो ठीक है सर्किट, मगर जॉन जैसी फैन फॉलोइंग कहाँ से लाओगे. और वैसे भी जॉन की खुद की फ़िल्में बॉक्स आफिस पर पिट रही हैं उसका क्या? कहीं हीरो के रोल के चक्कर में कहीं निर्माता अरशद के पास ही जाना बंद न कर दें. अगर ऐसा हुआ तो लोग क्या कहेंगे? हो गया शॉर्ट सर्किट. *********************************************** समझदार विद्या जब विद्या बालान ने सुधीर मिश्रा की 'खोया-खोया चांद' की कहानी सुनने के बाद उन्हें फ़िल्म में काम करने के लिए मना किया तब सुधीर मिश्रा आग बबूला हो गए थे. उन्होंने विद्या को उनके सेक्रेट्री के ज़रिए काफ़ी भला-बुरा कहा था. मिश्रा को ये बात गले से नहीं उतर रही थी कि विद्या जैसी नई हीरोइन ने (तब विद्या की सिर्फ़ परिणीता रिलीज़ हुई थी) उनकी फ़िल्म में काम करने से कैसे मना कर दिया. उसके बाद फ़िल्म में सोहा अली ख़ान आईं. ख़ैर अब जब फ़िल्म रिलीज़ हो गई है और बुरी तरह फ़्लॉप भी, तो सुधीर मिश्रा को ज़रूर विद्या की बातें याद आ रही होंगी. आख़िर विद्या की कहानी की समझ सही निकली, न कि सुधीर मिश्रा की. और उसके लिए, मिश्रा ने विद्या को कितना भला बुरा कहा था. |
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