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बॉलीवुड में फिर छाने लगा बंगाल का जादू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पश्चिम बंगाल ने पहले भी बॉलीवुड को कई मशहूर हीरोइनें दी हैं. अगर मौसमी चटर्जी, राखी, जया भादुड़ी, शर्मिला टैगोर और सुचित्रा सेन का एक दौर था तो उसके बाद काजोल और रानी मुख़र्जी ने भी अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया. और अब बंगाली हीरोइनों की नई पौध बॉलीवुड में तेज़ी से अपनी पहचान बना रही है. इनमें बिपाशा बसु, सुष्मिता सेन के बाद कोंकणा सेन, राइमा सेन, रिमी सेन, रिया सेन और तनुश्री दत्ता के नाम शामिल हैं. और यह सूची लगातार लंबी होती जा रही है. संयोग यह महज एक संयोग ही है कि नई हीरोइनों में ‘सेन’ ही ज्यादा हैं. और अब इस कड़ी में एक नया नाम जुड़ गया है. वह है बांग्ला फिल्मों की रानी कही जाने वाली ऋतुपर्णा सेन का. बंगाल की इस बिंदास हीरोइन कोई आधा दर्जन हिंदी फ़िल्मों में काम कर रही है. नई हीरोइनों में जानी-मानी फ़िल्मकार अपर्णा सेन की पुत्री कोंकणा ने हालांकि ‘इंदिरा’ में बाल कलाकार के तौर पर अपना सफ़र शुरू किया था. लेकिन ‘मिस्टर एंड मिसेज अय्यर’ ने उनको हिंदी फ़िल्मों में एक गंभीर अभिनेत्री के तौर पर स्थापित कर दिया है. इस फ़िल्म में उनको सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था.
‘ट्रैफ़िक सिग्नल’, ओमकारा और ‘लाइफ़ इन ए मेट्रो’ में भी उनके काम की काफ़ी सराहना हुई. उनके पास भी फिलहाल कई फ़िल्में हैं. उनमें प्रदीप सरकार की ‘लागा चुनरी में दाग़’, ‘आजा नचले’, ‘सनग्लास’, ‘गुलेल’ और ‘मेरीडियन’ शामिल हैं. अपने समय की जानी-मानी अभिनेत्री मुनमुन सेन बोल्ड और सेक्सी इमेज में क़ैद होकर रह गईं, लेकिन उनकी दोनों बेटियाँ राइमा और रिया धीरे-धीरे अपने पाँव जमा रही हैं. नई पहचान हाल में आई ‘हनीमून ट्रेवल्स प्राइवेट लिमिटेड’ ने राइमा को एक नई पहचान दी है. राइमा कहती हैं कि "हिंदी फ़िल्मों का कैनवास बांग्ला के मुक़ाबले काफ़ी बड़ा है. बॉलीवुड में कामयाबी किसी हीरो या हीरोइन को दुनिया भर में मशहूर कर सकती है." लेकिन उन्हें बांग्ला फ़िल्मों से भी लगाव है. हाल में आई ‘बॉन्ग कनेक्शन’ और ‘अनुरनन’ में उनके काम की काफ़ी सराहना हुई है. उनकी बहन रिया को हालांकि अब तक कोई बड़ा ब्रेक नहीं मिल सका है. बावजूद इसके उनके पास फ़िल्मों की कोई कमी नहीं है. एन चंद्रा की कॉमेडी फ़िल्म 'स्टाइल' से हिंदी फ़िल्मों का सफर शुरू करने वाली रिया की इमेज बिंदास बाला की है. रिमी सेन ने अपने पाँव बॉलीवुड में जमा लिए हैं. 'हैट्रिक', 'धूम', 'धूम-2', 'फिर हेराफेरी', 'दीवाने हुए पागल', 'क्योंकि', 'गरम मसाला' जैसी फ़िल्मों में काम कर चुकी रिमी के पास फिलहाल कई फ़िल्में हैं. जमशेदपुर में जन्मी बंगाली बाला तनुश्री दत्त ने वर्ष 2004 में फेमिना मिस इंडिया का खिताब जीतने के बाद हिंदी फ़िल्मों में क़दम रखा था लेकिन उसके बाद बहुत कम समय में ही उन्होंने अपना एक अलग मुकाम बना लिया है. ‘आशिक बनाया आपने’ में उनकी भूमिका ने उनको रातोंरात बॉलीवुड की नई सेक्स बम का तमगा दे दिया. अब उनकी गिनती हिंदी फ़िल्मों की सबसे बोल्ड हीरोइनों में होती है. उसके बाद तनुश्री ‘भागमभाग’ में भी नज़र आईं.
इस साल अब तक उनकी तीन फिल्में -‘रिस्क’, ‘रकीब’ और ‘गुड ब्वाय बैड ब्वाय’ रिलीज हो चुकी हैं. अब बॉलीवुड का रुख करने वाली बंगाली बालाओं की कड़ी में सबसे ताजा नाम है ऋतुपर्णा सेन का. बांग्ला फिल्मों की इस स्थापित और बिंदास हीरोइन को भी लगता है कि हिंदी फ़िल्मों में काम किए बिना उनका फ़िल्मी करियर अधूरा ही रहेगा. टॉलीवुड में कामयाबी के डंके बजाने के बाद उन्होंने भी मुंबई का रुख किया है. अश्विनी चौधरी की 'गुरुदक्षिणा' के बाद वे 'गौरी द अनबॉर्न', 'लव गेम', 'साब-चाय पानी' और 'सिर्फ़' जैसी फ़िल्मों में काम कर रही हैं. वे कहती हैं, "मैं, मेरी पत्नी और वो में अभिनय ने मुझे एक पहचान दी है. हिंदी फिल्मों में बेहतर अभिनय और अपने काम के प्रति लगन से ही कामयाबी मिल सकती है. मैं बंगाल में भले नंबर वन हूँ. लेकिन बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने के लिए मुझे अपनी अभिनय क्षमता साबित करनी ही होगी." वजह जाने-माने फ़िल्मकार अनूप सेनगुप्ता मानते हैं कि "बंगाली हीरोइनें बिना किसी गॉडफ़ादर के अपने अभिनय के बूते पर ही बॉलीवुड में कामयाब हो रही हैं." उनका मानना है कि हिंदी फ़िल्मों के प्रति आकर्षण की एक बड़ी वजह यह है कि एक फ़िल्म में बेहतर अभिनय उन्हें रातोंरात दुनिया भर में मशहूर बना सकता है. फिल्म समीक्षक प्रियब्रत राय भी लगभग यही बात दोहराते हैं. वे कहते हैं कि "हिंदी फ़िल्मों का बाज़ार क्षेत्रीय फिल्मों के मुक़ाबले काफ़ी बड़ा है. वहाँ अपनी अभिनय क्षमता साबित करने के मौके भी ज़्यादा हैं. बॉक्स आफिस पर कामयाब एक फ़िल्म ही हीरोइनों को सफलता की नई सीढ़ी पर खड़ा कर सकती है." वे कहते हैं, "इसके अलावा ये हीरोइनें अपनी भूमिका पर काफ़ी मेहनत कर रही हैं. पहले भी बंगाल की कई हीरोइनें हिंदी फ़िल्मों पर लंबे अरसे तक छाई रही हैं." इसके अलावा बॉलीवुड में कमाई भी मोटी है. ऐसे में बॉलीवुड का रुख करने वाली बंगाली बालाओं की सूची दिन-ब-दिन लंबी ही होगी. मगर उन्हें मराठी, और दक्षिण भारतीय अदाकारों से लगातार टक्कर भी मिलती रहेगी. |
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