ट्रंप की हत्या की कोशिश पर संदेह जताने वाले लोगों के पास क्या कोई सबूत है?

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इमेज कैप्शन, डोनाल्ड ट्रंप पर हमले की ख़बर से अमेरिका में सनसनी मच गई थी
    • Author, मारियाना स्प्रिंग
    • पदनाम, बीबीसी डिसइनफ़ॉर्मेशन और सोशल मीडिया संवाददाता

'स्टेज़्ड'. अंग्रेज़ी के इस शब्द का मतलब होता है प्रायोजित.

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की कोशिश की ख़बर आने के कुछ ही मिनट बाद ये शब्द अमेरिका में ''एक्स'' पर ट्रेंड करने लगा.

सोशल मीडिया पर किसी हमले या गोलीबारी की घटना पर संदेह को आगे बढ़ाने के लिए अक्सर इस शब्द का इस्तेमाल होता है.

लेकिन पिछले 24 घंटे में ये शब्द मुख्यधारा की ऑनलाइन बातचीत में शामिल हो गया.

साथ ही ''एक्स'' पर बिना सबूत के अटकलें लगाई जाने लगीं, नफ़रत और गालियों से भरी पोस्ट लाखों बार देखी गईं.

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इमेज कैप्शन, डोनाल्ड ट्रंप पर हमले के बाद की तस्वीर

पहले भी अमेरिकी राष्ट्रपतियों की हत्या की कोशिशों को लेकर साज़िश की अफ़वाहें फैलाई जाती रही हैं. नवंबर 1963 में जॉन एफ़ कैनेडी की हत्या इसका सबसे बड़ा उदाहरण है.

ये पहली बार था जब हमले को सार्वजनिक तौर पर देखा गया और इसकी वजह से तरह-तरह की अफ़वाहें भी फैलीं.

लेकिन अब जो बात सामने आई, वो ये है कि ट्रंप की हत्या की कोशिश से जुड़ी अफ़वाहों ने हर तरह की विचारधारा को जकड़ लिया है.

ये अफ़वाहें और 'कॉन्स्पिरेसी थ्योरी' सिर्फ़ किसी एक राजनीतिक समर्थकों के समूह तक सीमित नहीं रही हैं.

इसे सोशल मीडिया पर ''फॉर यू (For You)'' वाले सेक्शन में ज़्यादा से ज़्यादा दिखाया गया क्योंकि लोग जानना चाह रहे थे कि आख़िर हुआ क्या है.

ऐसी चीज़ों को उन लोगों ने पोस्ट किया, जिन्होंने ब्लू टिक ख़रीदे हैं, जिस वजह से उनकी पोस्ट को ख़ासतौर पर जगह मिलती है.

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वायरल हो रही हैं अफ़वाहें

साज़िश की शंका, हमेशा की तरह कुछ जायज सवालों और भ्रम से शुरू होती है.

लोग पूछते हैं कि आख़िर सुरक्षा एजेंसियां नाकाम कैसे हो सकती हैं?

हमलावर छत तक कैसे पहुंच गए? उन्हें रोका क्यों नहीं गया?

इन सवालों के बीच एक अविश्वास पनपता है, जिससे अटकलों को बल मिलता है और ग़लत सूचनाएं फैलने लगती हैं.

एक्स पर एक पोस्ट में लिखा गया है, ''ये बहुत ज़्यादा नाटकीय लगता है. भीड़ में कोई भाग नहीं रहा है न तो घबराया हुआ है. भीड़ में किसी ने असली बंदूक की आवाज़ नहीं सुनी. मुझे इस पर भरोसा नहीं है. मुझे उन पर भरोसा नहीं है.''

इसके बाद इस पोस्ट के नीचे एक्स की तरफ़ से एक लेबल लगा दिया गया, जिसमें बताया गया है कि शूटिंग असली थी.

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इमेज कैप्शन, पोस्ट के नीचे एक्स की तरफ़ से एक लेबल लगा दिया गया, जिसमें बताया गया है कि शूटिंग असली थी

जब रैली के अंदर और बाहर से और अधिक फ़ुटेज आने लगीं तो वहां मौजूद लोगों के घबराहट और भय को साफ़ देखा जा सकता था.

साज़िश की अफ़वाहों और अटकलों को और बल तब मिलने लगा जब शुरुआती क्लिप्स के बाद असाधारण तस्वीरें सामने आईं. ख़ासतौर पर, वो तस्वीर जो एसोसिएटेड प्रेस के चीफ़ फ़ोटोग्राफ़र इवान वुची ने ली थी और जिसकी ख़ूब चर्चा हो रही है.

इस तस्वीर में ट्रंप मुठ्ठी बांधे नज़र आ रहे हैं, उनके चेहरे और कान पर ख़ून लगा है, पीछे अमेरिकी झंडा दिख रहा है.

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पोस्ट X समाप्त

यूएस स्थित एक यूट्यूब अकाउंट ने कहा कि ये तस्वीर ''कुछ ज़्यादा ही परिपूर्ण है.'' और बताया कि कैसे ''झंडे को एकदम सही तरीक़े से लगाया गया और हर चीज़ एकदम सटीक है.''

एक्स पर पोस्ट को 10 लाख व्यूज़ मिले लेकिन बाद में इस पोस्ट को शेयर करने वाले ने ही इसे डिलीट कर लिया. एक दूसरे पोस्ट में उन्होंने लिखा कि अगर आप ग़लत हैं तो ख़ुद को सुधारना ज़रूरी है.

कुछ लोगों ने कहा कि जब गोलियां चल रही थीं, तो मंच पर ट्रंप ने अपना हाथ उठाया था. इससे वो ये कहना चाह रहे थे कि इस पूरी घटना को रचा गया था, जबकि ऐसा कोई सबूत नहीं है.

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यूएस के टिप्पणीकार ने लिखा, 'सहानुभूति पाने के लिए ये नाटक किया गया है? आप इन लोगों पर किसी बात के लिए भरोसा नहीं कर सकते. मैं उनके लिए प्रार्थना करने नहीं जा रहा हूँ.''

इस पोस्ट समेत ज़्यादातर पोस्ट जो वायरल हुई हैं, वो वामपंथ की तरफ़ झुकाव रखने वाले यूज़र की तरफ़ से पोस्ट किए गए हैं, जो अक्सर ट्रंप के ख़िलाफ़ अपने विचार रखते आए हैं.

पहले भी ऐसे लोगों के फॉलोअर्स लाखों में थे, इस वजह से उनकी पोस्ट की पहुंच काफ़ी है.

जाना पहचाना पैटर्न

एक्स पर जो दिख रहा है, वो साफ़ तौर से अफ़वाहों और साज़िशों को फैलाने के पुराने पैटर्न जैसा ही है. ऐसी बातें कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स फैलाते हैं जो पहले भी ज़्यादातर वास्तविक घटनाओं जैसे कोविड महामारी, युद्ध, गोलीबारी, आतंकी हमलों को नकारते आए हैं.

ऐसे ही निराधार दावा करने का ट्रैक रिकॉर्ड रखने वाले एक अमेरिका स्थित अकाउंट ने पोस्ट किया है, ''ये वो क़ीमत है, जो आप तब चुकाते हैं, जब आप शैतानी पीडोफ़ाइल ताक़तों को हराते हैं.''

ऐसी पोस्ट ''क्यूनॉन कॉन्स्पिरेसी थ्योरी'' की तरफ़ इशारा करते हैं. इस थ्योरी के मुताबिक़, ट्रंप ने 'डीप स्टेट' के ख़िलाफ़ जंग छेड़ रखी है, जो कि सुरक्षा और ख़ुफ़िया सेवाओं का एक गठबंधन है और ये गठबंधन ट्रंप के हर क़दम को नाकाम करना चाहता है.

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इस विचार को पुख़्ता करने के लिए किसी के पास कोई सबूत नहीं है, इसके बावजूद ये लोग कहते हैं कि हत्या के लिए ''आदेश'' शायद सीआईए की तरफ़ से आया होगा. ये बराक ओबामा, हिलरी क्लिंटन और माइक पेंस के मिले होने की भी बात करते हैं.

इन सब बातों का कोई सबूत नहीं है लेकिन इसके बावजूद पोस्ट को 47 लाख बार देखा जा चुका है.

ये एक जाना पहचाना पैटर्न है लेकिन यहां असली बदलाव ये देखने को मिला है कि कैसे आम सोशल मीडिया यूज़र्स की तरफ़ से भी इसी तरह की शब्दावली का इस्तेमाल किया जा रहा है.

इसमें सिर्फ़ वो लोग नहीं हैं जो ट्रंप को पसंद नहीं करते हैं और कह रहे हैं कि ये सब नाटक है. बल्कि वो लोग भी हैं जो ट्रंप का समर्थन करते हैं और ये आरोप लगा रहे हैं कि ये एक व्यापक साज़िश का हिस्सा है.

चुने गए नेता भी इस तरह की बातचीत में शामिल हो गए हैं. माइक कॉलिंस जो कि जॉर्जिया से रिपब्लिकन के नेता और सांसद हैं, उन्होंने पोस्ट किया है कि, ''आदेश जो बाइडन की तरफ़ से आए हैं.''

उन्होंने इसके लिए बाइडन की एक टिप्पणी को आधार बनाया है, जिसमें बाइडन ने ट्रंप को निशाने पर रखने के लिए कहा था, जो कि एक चुनावी भाषण का हिस्सा था.

कॉलिंस के पोस्ट को 60 लाख से ज़्यादा बार एक्स पर देखा गया है. लेकिन इस पोस्ट पर एक लेबल लगाया गया है, जिसमें लिखा गया है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि बाइडन इसमें किसी भी तरह से शामिल हैं.

हमलावर के बारे में ग़लत जानकारी फैलाई गई

हमलावर की पहचान को लेकर भी अलग-अलग तरह की अफ़वाहें सोशल मीडिया पर फैलाई गईं, जो बिल्कुल निराधार थीं.

एफ़बीआई ने हमलावर की पहचान 20 साल के थॉमस मैथ्यू क्रुक्स के तौर पर की. एफ़बीआई के एलान से पहले बहुत सारे लोगों की प्रतिष्ठा पर चोट की गई.

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फ़ुटबॉल कमेंटेटर मार्को वियोली ऐसे ही पीड़ितों में से एक हैं. मार्को ने इटली से आधी रात को इंस्टाग्राम पर पोस्ट करके कहा कि उनके ख़िलाफ़ झूठे दावे किए जा रहे हैं कि वो एंटीफ़ा के सदस्य हैं और हमले के पीछे उनका हाथ है. एंटीफा वामपंथी संगठन है.

इस तरह के नैरेटिव को सही किए जाने से पहले इसे एक्स पर लाखों लोग देख चुके थे.

एक्स प्लेटफॉर्म पर राजनीतिक कार्यकर्ता और किसी विचारधारा से जुड़े लोग लगातार सक्रिए रहे, उन पोस्टों को पढ़ते रहे जो एक्स उन्हें अपने एल्गोरिदम के ज़रिए दिखा रहा था और वो पोस्ट ऐसे लोगों की सोच को और पुख़्ता कर रहे थे.

वहीं दूसरे लोग साज़िश और अटकलों से बचने के लिए संघर्ष करते रहे.

ये पूरी घटना एलन मस्क के ट्विटर यानी एक्स के लिए भी एक परीक्षा थी और ये कहना कठिन है कि प्लेटफॉर्म इसमें पास हो गया.

दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस तरह की सूचनाओं की बाढ़ नहीं आई. शायद इसकी वजह उनका टारगेट ऑडिएंस रहा हो या इसकी एक वजह है कि एक्स को राजनीतिक विमर्श के केंद्र के तौर पर जाना जाने लगा है.

बीबीसी ने एक्स से टिप्पणी मांगी थी, जिसका जवाब प्लेटफॉर्म ने नहीं दिया है.

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