बाइडन और ट्रंप के बहाने सत्ता के शीर्ष पर उम्र की ढलान की बात

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- Author, रेहान फ़ज़ल
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिन्दी के लिए
इस बार जो बाइडन और डोनाल्ड ट्रंप, इनमें से कोई भी चुनाव जीते वो अमेरिकी इतिहास का सबसे बुज़ुर्ग राष्ट्रपति होगा.
चार दशक पहले जब रोनल्ड रीगन अमेरिकी राष्ट्रपति चुने गए थे तो उनकी उम्र 69 वर्ष थी. जब वो अपने दूसरे कार्यकाल के बाद रिटायर हुए तो वो 77 वर्ष के हो चुके थे.
वैसे अमेरिका में बुज़ुर्गों के काम करते रहने की परंपरा-सी रही है, ब्यूरो ऑफ़ लेबर स्टेटिस्टिक्स के आँकड़ों के अनुसार, अमेरिका में अब भी 75 साल से अधिक के क़रीब 20 लाख लोग काम कर रहे हैं.
एजेंसी का आकलन है कि 2032 आते-आते इस तरह के लोगों की संख्या बढ़कर 33 लाख हो जाएगी. यही नहीं, अमेरिका की चोटी की 500 कंपनियों में कम-से-कम चार मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की उम्र अमेरिकी राष्ट्रपति पद के इन दो उम्मीदवारों से भी अधिक है.
पिछले अक्तूबर में अमेरिकी अख़बार यूएसए टुडे और सफ़क यूनिवर्सिटी ने एक हज़ार अमेरिकी मतदाताओं के बीच एक सर्वेक्षण कराया था.
उनमें से अधिकतर का मानना था कि कांग्रेस के सदस्य और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए एक अधिकतम आयु होनी चाहिए लेकिन ये अधिकतम आयु क्या हो उस पर उन लोगों में एक राय नहीं थीं.

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कुछ वर्षों पूर्व न्यूयॉर्क टाइम्स और सीबीएस ने भी अमेरिकी मतदाताओं के बीच एक सर्वेक्षण करवाया था इसमें 52 फ़ीसदी लोगों ने कहा था कि राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को 50 वर्ष से ऊपर नहीं होना चाहिए.
अमेरिका की वरिष्ठ स्तंभकार और पुलित्ज़र पुरस्कार विजेता एना क्विंडलेन ने बड़ी उम्र में अमेरिकी नेताओं के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की प्रवृत्ति की तुलना महिलाओं के 50 से अधिक की उम्र में बच्चे को जन्म देने के प्रयासों से की थी.
उनके शब्दों में ‘इस इच्छा को समझा तो जा सकता है और ये शायद संभव भी है. लेकिन सारे तथ्यों को देखते हुए क्या इसे समझदारी कहा जा सकता है?’
बाइडन और ट्रंप की सेहत पर सवाल
जब बाइडन से सीएनएन की एंकर डाना बैश ने पूछा कि आप इस आलोचना का किस तरह जवाब देंगे कि आप अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान 85 साल की तरफ़ बढ़ रहे होंगे, तो बाइडन का जवाब था, “मेरे आधे राजनीतिक करियर के दौरान मेरी ये कहकर आलोचना की जाती रही है कि मैं राजनीति में कुछ ज़्यादा ही युवा हूँ और अब आप मेरी अधिक उम्र को मुद्दा बना रहे हैं.”
ट्रंप की तरफ़ इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि ये शख्स मुझसे तीन साल छोटा ज़रूर है लेकिन मुझसे कहीं कम काबिल है.
जब ट्रंप से भी यही सवाल पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया, “मेरा स्वास्थ्य इनसे बेहतर है और मेरा वज़न 25-30 साल पहले की तुलना में कहीं कम हो गया है. मैंने हाल ही में दो क्लब स्तर की गॉल्फ़ प्रतियोगिताएं जीती हैं. इस तरह की प्रतियोगिता वही लोग जीत सकते हैं जो गेंद को लंबी दूरी तक मार पाएं. मेरी चुनौती है कि मेरे प्रतिद्वंदी गेंद को 50 गज़ से अधिक दूरी तक नहीं मार सकते.”
वैसे ऊपरी तौर पर बाइडन को कोई मेडिकल समस्या नहीं हैं. वो न तो सिगरेट पीते हैं और न ही शराब. वो रोज़ कसरत करते हैं. लेकिन उन्हें कई मौकों पर लोगों के नाम भूलते और शून्य में ताकते देखा गया है.

दोनों को है भूलने की आदत
पिछले वर्ष बाइडन ने एक भाषण के दौरान यूक्रेन में चल रहे युद्ध को इराक में चल रहा युद्ध बताया.
एक चुनाव भाषण में उन्होंने कहा कि वो हाल में फ़्राँस के पूर्व राष्ट्रपति फ़ाँसुआ मितराँ से मिलकर आ रहे हैं. मितराँ की 30 साल पहले मत्यु हो चुकी है, हाँलाकि उन्होंने तुरंत ही भूल सुधार कर लिया.
डिबेट के एक दिन बाद जब उन्होंने नॉर्थ कैरोलाइना में एक रैली को संबोधित किया तो उनकी आवाज़ बुलंद और आत्मविश्वास से भरपूर थी.
उन्होंने कहा, “अगर मुझे विश्वास नहीं होता कि मैं ये काम कर पाऊँगा, मैं दूसरी बार चुनाव नहीं लड़ता.”
लेकिन कभी-कभी बाइडन इतना धीमे बोलते हैं कि माइक्रोफ़ोन पर भी उनकी आवाज़ सुनाई नहीं देती. वो अक्सर वाक्य के बीच में रुक जाते हैं. उनकी चुनाव प्रचार टीम ने उनके बुढ़ापे को छिपाने के लिए उनके विमान एयरफ़ोर्स-1 की सीढ़ियों को छोटा कर दिया है.
अब उनके साथ एक सहयोगी चलता है ताकि उनकी धीमी चाल पर लोगों का कम ध्यान जाए.

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ट्रंप के डाक्टरों का भी कहना है कि उनका स्वास्थ्य अच्छा है लेकिन उन्हें अक्सर जंक फ़ूड खाते और कोका कोला पीते देखा गया है.
कुछ डाक्टरों का मानना है कि अगर ट्रंप का बॉडी-मास इंडेक्स (बीएमआई) 30 से अधिक है तो उन्हें मोटे लोगों की श्रेणी में गिना जाएगा. हाल में गेटी की एक तस्वीर की चर्चा हुई थी जिसके बारे में कहा गया था कि किस तरह कम बूढ़ा दिखने के लिए ट्रंप भारी मेकअप का सहारा ले रहे हैं.
उनको भी भूलने ओर लोगों को न पहचानने की आदत है. बाइडन के चुनाव प्रचार में इस बात को रेखांकित किया गया कि किस तरह ट्रंप निकी हैली को पूर्व स्पीकर नैंसी पलोसी समझ बैठे.
सीआईए और एफ़बीआई जैसी एजेंसियों को चिंता है कि क्या राष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहे इन उम्रदराज़ लोगों के साथ देश की गोपनीय और संवेदनशील सूचनाएं साझा की जा सकती हैं?
सीआईए और व्हाइट हाउस के खुफ़िया अधिकारी रह चुके लैरी फ़ीफ़र ने यूएसए टुडे के 9 सितंबर, 2023 के अंक में छपे अपने एक लेख में लिखा है, “अमेरिकी खुफ़िया विभाग के अधिकारियों की संवेदनशील सूचनाओं तक पहुंच तभी होती है जब ये सुनिश्चित हो जाए कि उनकी मानसिक फिटनेस पर कोई सवाल न उठाया गया हो. कुछ मामलों में सुधार की गुंजाइश होती है लेकिन अगर सुधार की गुंजाइश न दिखे तो उन्हें मेडिकल ग्राउंड पर इस पेशे से अलग कर दिया जाता है.”
वे जताने की कोशिश कर रहे हैं कि अगर एक ख़ुफ़िया एजेंट के लिए ऐसे नियम हैं तो राष्ट्रपति के मामले में क्यों नहीं?
दुनिया के सबसे युवा और बुज़ुर्ग नेता
प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार 187 संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों में बाइडन इस समय नवें सबसे बुज़ुर्ग नेता हैं. ट्रंप भी बाइडन से तीन साल छोटे ज़रूर हैं लेकिन उनकी गिनती भी दुनिया के इस समय के 20 उम्रदराज़ नेताओं में होती है.
इस समय दुनिया के सबसे युवा नेता बुर्किना फ़ासो के इब्राहीम तराउरे हैं जिनकी उम्र सिर्फ़ 36 साल है. वो इक्वाडोर के राष्ट्रपति डेनियल नोबोवा और मॉन्टेनीगरो के प्रधानमंत्री मिलोहाओ स्पाहीत से कुछ ही महीने छोटे हैं.
दो और विश्व नेताओं ने अभी तक 40 की उम्र पार नहीं की है. वो हैं आयरलैंड के साइमन हैरिस और चिली के राष्ट्रपति गैबरियल बोरिच.

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इस समय दुनिया के सबसे बुज़ुर्ग नेता कैमरून के राष्ट्रपति पॉल बिया हैं. उनका जन्म 1933 में हुआ था और उन्होंने 40 साल पहले सत्ता सँभाली थी. वर्ष 2018 में उन्हें एक बार फिर इस पद के लिए चुना गया.
अब उन्हें अगला चुनाव नहीं लड़ना पड़ेगा क्योंकि अब वहाँ कानून बनाया गया है कि वो जब तक जीवित रहेंगे उस पद पर बने रहेंगे.
इस समय वो दुनिया के अकेले नेता हैं जिनकी उम्र 90 वर्ष से अधिक है. उनको ‘अनुपस्थित नेता’ की संज्ञा दी गई है क्योंकि वो अपना अधिकतर समय देश के बाहर बिताते हैं.
फ़लस्तीन प्रशासन के प्रमुख महमूद अब्बास की उम्र इस समय 88 वर्ष हैं. वो सन 2005 से इस पद पर बने हुए हैं. उनका राजनीतिक जीवन 50 के दशक में शुरू हुआ था और उन्होंने ओस्लो समझौते में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
सऊदी अरब के शाह सलमान भी 88 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं. उन्होंने सऊदी की सांस्कृतिक विरासत को संभालने के साथ साथ आधुनिकता की तरफ़ भी कदम बढ़ाया है.
ईरान के धार्मिक नेता अली ख़मेनाई भी 84 वर्ष के हो चुके हैं. वो वर्ष 1989 से इस पद पर बने हुए हैं. इससे पहले 1981 से 1989 तक वो ईरान के राष्ट्रपति रह चुके हैं.
महिलाओं में सबसे बुज़ुर्ग शेख़ हसीना

इसके बाद आते हैं बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना (76), भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (73), रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (71), तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगान और चीन के प्रधानमंत्री शी जिनपिंग (71). इस समय दुनिया के नेताओं की उम्र का औसत 62 वर्ष है.
दुनिया के करीब 34 फ़ीसदी नेताओं की उम्र 60 और 70 के बीच की है. करीब एक चौथाई नेताओं ने 50 की उम्र पार की है. 19 फ़ीसदी नेता 70 के ऊपर के हैं और 16 फ़ीसदी नेताओं ने 40 और 50 साल के बीच के हैं.

दुनिया के सिर्फ़ तीन फ़ीसदी नेता ऐसे हैं जो 40 से कम उम्र के हैं. जहाँ तक महिला नेताओं की बात है डेनमार्क की मेटु फ़्रेडरिक्सन दुनिया की सबसे कम उम्र की नेता हैं जिनकी उम्र 46 साल की है.
उनसे थोड़ी ही अधिक उम्र इस्तोनिया की प्रधानमंत्री काया कालास की है. बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना दुनिया की सबसे बुज़ुर्ग महिला नेता हैं. उनकी उम्र 76 साल है.
महातिर मोहम्मद से मोरारजी देसाई तक
जब मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद को दूसरी बार इस पद की शपथ दिलाई गई तो उनकी उम्र 92 साल 10 महीने थी. इससे पहले वो 1981 और 2003 के बीच प्रधानमंत्री रह चुके थे.
दुनिया के दूसरे बुज़ुर्ग नेताओं की बात की जाए जो दिवंगत हो चुके हैं उनमें सबसे पहले नाम आता है ज़िम्बाब्वे के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे का जिन्होंने 84 साल की उम्र में अंतिम साँस ली और 28 सालों तक सत्ता में रहे.

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मिस्र के राष्ट्रपति होस्ने मोबारक भी 30 वर्ष तक इस पद पर रहे और 2011 में 83 वर्ष की आयु में जाकर अपना पद छोड़ा. क्यूबा के राष्ट्रपति फ़िदेल कास्त्रो 1959 से 2008 तक 49 सालों तक सत्ता में रहे.
सन 2008 में जब वो रिटायर हुए तो उनकी उम्र 82 साल थी. भारत में मोरारजी देसाई को कई प्रयासों के बाद 1977 में जाकर सत्ता हाथ लगी. उस समय वो 81 वर्ष के हो चुके थे. नरसिम्हा राव जब भारत के प्रधानमंत्री बने तो उनकी उम्र 70 साल की थी और वो एक तरह से राजनीति को अलविदा कह चुके थे. जब उन्होंने वो पद छोड़ा तो वो 75 साल के हो चुके थे.
मनमोहन सिंह भी प्रधानमंत्री पद से हटने तक 81 वसंत देखने के करीब थे. ये सही है कि बुजुर्ग उम्मीदवार को अपनी ज़िम्मेदारियाँ पूरी करने में अधिक मशक्कत करनी पड़ती है लेकिन दुनिया में ऐसे बहुत से नेता हुए हैं जिन्होंने अधिक उम्र होने के बावजूद इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया है.
फ़्राँस के चार्ल्स डि गॉल, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल, जर्मनी के कॉनरड एडनॉर और इसराइल की गोल्डा मायर ने उस समय अपने देश का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया जब वो 70 की उम्र पार कर चुके थे. जब 2007 में इसराइल ने शिमोन पेरेस को अपना राष्ट्रपति चुना उस समय उनकी उम्र 84 साल थी.
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