फ़्रांस चुनाव के नतीजे सबको हैरान क्यों कर रहे हैं?

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फ़्रांस के संसदीय चुनाव में चौंकाने वाले नतीजे आए हैं. किसी को इन नतीजों की उम्मीद नहीं थी.
चुनाव से पहले कुछ लोगों का मानना था कि फ़्रांस में दक्षिणपंथी पार्टी नेशनल रैली बड़ी जीत दर्ज कर सकती है. एक हफ़्ते पहले तक ये पार्टी पहले चरण में सबसे आगे थी.
मगर जब भारतीय समयानुसार आठ जुलाई की सुबह जब नतीजे आने शुरू हुए तो तस्वीर अलग थी.
नेशनल रैली को रोकने में वामपंथी और मध्यमार्गी पार्टियों के गठबंधन न्यू पॉपुलर फ्रंट यानी एनएफपी को बड़ी सफलता मिली.
न्यू पॉपुलर फ्रंट फ़िलहाल 182 सीटों के साथ पहले पायदान पर है. एनसेंबल गठबंधन 168, नेशनल रैली और सहयोगी दल 143 सीटें जीत सके हैं.
किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है.

वामपंथी नेता का बड़ा एलान
अभी भले ही फ़्रांस में किसी एक गठबंधन के सरकार बनाने के आसार कम ही हैं. मगर वामपंथी नेता ज्यां ने बड़ा एलान कर दिया है.
ज्यां ने कहा कि उनका गठबंधन फ़लस्तीन को मान्यता देने की दिशा में काम करेगा.
हाल ही में यूरोप के चार देशों ने फ़लस्तीन को राष्ट्र के तौर पर मान्यता दी थी.
ये चार देश स्पेन, नॉर्वे, आयरलैंड और स्लोवेनिया हैं.
ज्यां के सोशल मीडिया हैंडल से लिखा गया है, ''प्रधानमंत्री न्यू पॉपुलर फ्रंट से होगा. हम कई चीज़ों पर फ़ैसला कर सकेंगे. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमें फ़लस्तीन को राष्ट्र के तौर पर मान्यता देने पर सहमत होना होगा.''

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चुनावी नतीजों के बाद हिंसा, जश्न
फ़्रांस चुनाव नतीजे के बाद पेरिस के कुछ इलाक़ों में हिंसा देखने को मिली है.
एक्ज़िट पोल्स में नेशनल रैली के तीसरे स्थान पर पिछड़ने के अनुमान और फिर नतीजों के बाद से पेरिस की सड़कों पर हज़ारों लोग जश्न मनाने निकल पड़े.
कुछ जगहों पर हिंसा भी हुई है.
पेरिस में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और दंगों पर काबू पाने के लिए पुलिस तैनात की गई है.
पेरिस में वामपंथी समर्थकों की ओर से रैलियां निकाली जा रही हैं.
तस्वीरों में देखिए पेरिस की सड़कों का हाल

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पेरिस से बीबीसी संवाददाता पॉल किर्बी की रिपोर्ट
हाई ड्रामा और एक तगड़ा झटका.
जब चुनावी आंकड़े फ़्रांसीसी चैनलों पर दिखाई दिए तो ये धुर दक्षिणपंथी मरिन ला पेन और प्रधानमंत्री बनना चाह रहे जॉर्डन बार्डेल्ला के लिए ख़ुशियां नहीं लेकर आए.
चुनाव में लेफ्ट ने बाज़ी मारी. मध्यमार्गी इमैनुएल मैक्रों भी चुनाव में दूसरे नंबर हैं जबकि नेशनल रैली तीसरे नंबर पर.
लेफ्ट विंग के ज्यां-ल्यूक मेलेंशों ने बिना समय गँवाए चुनावी नतीजों को अपनी जीत बताया. आलोचक ज्यां को कट्टरपंथी नेता के तौर पर देखते हैं.
स्टालिन गार्ड स्कॉयर में ज्यां ने कहा, ''राष्ट्रपति को न्यू पॉपुलर फ्रंट को सरकार बनाने के लिए कहना चाहिए.''
ज्यां ने कहा कि मैक्रों को ये स्वीकार करना होगा कि चुनाव में उनकी और उनके गठबंधन की हार हुई है.
हालांकि न्यू पॉपुलर फ्रंट की जीत इतनी बड़ी नहीं है कि सरकार बन जाए.
फ़्रांस में त्रिशंकु संसद रहने वाली है. इनमें से कोई भी गठबंधन अपने बूते 577 सीटों वाली संसद में सरकार बनाने के लिए ज़रूरी 289 सीटों के आंकड़े को नहीं छू पाया है.

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बड़े उलटफेर की वजह?
फ़्रांस में हुए इस बड़े फेरबदल की वजह गठबंधन की राजनीति को बताया जा रहा है.
नेशनल रैली के ख़िलाफ़ वोट बँट ना जाएं, इसलिए कई वामपंथी और मध्यमार्गी उम्मीदवार चुनावी दौड़ से अलग हो गए.
यही कारण है कि वामपंथी नेता ज्यां ने एनएफ़पी की जीत को धुर दक्षिणपंथ के ख़िलाफ़ जीत और मैक्रों के एजेंडे की हार कहा.
ज्यां ने नेशनल रैली के ख़िलाफ़ एक व्यापक लामबंदी की कोशिशों की तारीफ़ की.
नेशनल रैली के नेता जॉर्डन बारदेला ने कहा, ''बेईमानों के गठबंधन ने उनकी पार्टी को सत्ता से दूर करके फ़्रांस को कट्टर वामपंथ के हाथों में डाल दिया है.''
स्पेन के वामपंथी प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने इन रुझानों का स्वागत किया है और कहा कि फ्रांस ने धुर दक्षिणपंथ को नकारा है.
फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलांद ने कहा कि देश दक्षिणपंथ की ओर जाने से बाल-बाल बचा.

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नेशनल रैली का प्रदर्शन सुधरा
चुनावी नतीजों के बाद अपने पहले संबोधन के बाद ज्यां एक बड़े स्कॉयर यानी प्लेस द ल रिपब्लिक गए, जहां क़रीब आठ हज़ार लोगों के बीच उन्होंने जीत का जश्न मनाया.
वहीं नेशनल रैली के समर्थकों की बात करें तो वहां उदासी का माहौल है.
एक हफ़्ते पहले तक नेशनल रैली के समर्थक और नेता बहुमत हासिल करने की बात कर रहे थे.
मरिन ले पेन ने कहा, ''दो साल पहले तक हमारे पास बस सात सांसद थे. आज नेशनल रैली सांसदों की संख्या के लिहाज़ से पहले नंबर की पार्टी है.''
बीते चुनाव में नेशनल रैली के 88 सांसद थे और अब उनके पास 140 से ज़्यादा सांसद हैं.
जॉर्डन ने कहा कि उनकी पार्टी ग़लत गठबंधन वालों से हारी है और ये बेमेल गठबंधन है.
दूसरे चरण में 200 से ज़्यादा उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिए थे ताकि वो नेशनल रैली को जीतने से रोक सकें.
मरिन ल पेन की बहन मैरी कैरोलिन को भी इन चुनावों में ख़ुशियां नहीं मिल सकीं. वो बस 225 वोटों से हार गईं.
फ्रांस के संसदीय चुनाव में मतदान फ़ीसद 66.63 रहा था. 1997 चुनाव के बाद ये रिकॉर्ड टर्नआउट रहा है.
मैक्रों ने मई में संसद को भंग करके चुनाव का एलान किया था.
अब जब चुनाव नतीजे आ गए हैं, तब ख़बर लिखे जाने तक मैक्रों की ओर से कोई बयान नहीं आया है.
हालांकि फ़्रांस के पीएम गैब्रिएल अटल ने कहा है कि वो इस्तीफ़ा देंगे.
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