फ्रांस चुनाव: सत्ता की दहलीज़ पर पहुंचे धुर दक्षिणपंथी, क्या दूसरे दौर में लगेगी जीत पर मुहर

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इमेज कैप्शन, फ़्रांस की धुर दक्षिणपंथी पार्टी नेशनल रैली की नेता मरीन ली पेन पहले दौर के नतीजों से खुश हैं. (फाइल फोटो)
    • Author, पॉल किर्बी
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

फ़्रांस में पहले चरण के संसदीय चुनाव के बाद देश की धुर दक्षिणपंथी पार्टी नेशनल रैली अपनी बढ़त से खुश नजर आ रही है.

पहले दौर की वोटिंग के बाद फ़्रांस की राजनीति में दिख रहे उसके वर्चस्व ने उसे सत्ता की दहलीज तक पहुंचा दिया है.

पहले दौर की बढ़त के बाद धुर दक्षिणपंथी नेता मरीन ली पेन की आप्रवास विरोधी पार्टी नेशनल रैली के समर्थक खुशियां मनाते नजर आए.

खुद मरीन ली पेन ने कहा, ''मैक्रों ग्रुप का लगभग सफाया हो गया है.''

नेशनल रैली को 33.1 फीसदी वोट मिले हैं और वामपंथी गठबंधन को 28 फीसदी. जबकि मैक्रों की पार्टी 20.7 फीसदी वोटों के साथ तीसरे पायदान पर है.

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नेशनल रैली के 28 वर्षीय नेता जॉर्दन बरदेला ने कहा, ''अगर फ़्रांसीसी लोगों ने मुझे वोट दिया तो मैं उनका प्रधानमंत्री बनना चाहूंगा.''

वरिष्ठ टिप्पणीकार एलेन दुमेल ने कहा, ''इससे पहले धुर दक्षिण पार्टियों ने फ़्रांस के संसदीय चुनाव में पहले दौर का चुनाव नहीं जीता था.अब ये हो गया है. ये ऐतिहासिक है.''

मरीन ली पेन और जॉर्दन बरदेला को फ़्रांस की 577 सीटों वाली नेशनल असेंबली में पूर्ण बहुमत के लिए 289 सीटों की जरूरत है.

मैक्रों का 'जुआ' क्या फ़्रांस की राजनीतिक तस्वीर बदल देगा

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इमेज कैप्शन, विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अचानक चुनाव का एलान कर राजनीतिक जुआ खेला है.
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रविवार को होने वाले दूसरे दौर की वोटिंग में सीटों के आकलन के मुताबिक़ भले ही मरीन ली पेन की पार्टी को सफलता मिली हो लेकिन वो पूर्ण बहुमत से दूर रह सकती है.

बगैर पूर्ण बहुमत के फ़्रांस में त्रिशंकु संसद बन सकती है. इस संसद में नेशनल रैली अपनी आप्रवास नीतियों, टैक्स कटौती और नए कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रावधान लागू नहीं कर पाएगी.

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूरोपीय संसद के चुनाव में नेशनल रैली की जीत के बाद अचानक चुनाव का एलान कर दिया था. लेकिन कहा जा रहा है कि इसकी कोई जरूरत नहीं थी.

ये उनका जुआ था लेकिन अब उनके सामने पूरी राजनीतिक स्थिति ही बदलने की आशंका खड़ी हो गई है .

एक करोड़ छह लाख फ़्रांसीसी नागरिकों ने नेशनल रैली को वोट दिया है. कुछ कंजर्वेटिव रिपब्लिकन्स ने भी नेशनल रैली का समर्थन किया है.

1997 के बाद पहली बार पहले दौर में सबसे ज्यादा वोटरों ने वोट दिया है. इस दौर में 66.7 फीसदी वोटिंग हुई है.

पहले दौर की वोटिंग के बाद नेशनल रैली के 37 सांसदों को आधे से अधिक वोट मिले हैं. दूसरी ओर वामपंथी गठबंधन न्यू पॉपुलर फ्रंट के 32 उम्मीदवार चुने गए हैं.

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इमेज कैप्शन, प्रधानमंत्री गैब्रियल एट्टल

नेशनल रैली की कामयाबी के बाद सैकड़ों वामपंथी समर्थकों ने पेरिस के प्रसिद्ध स्क्वायर प्लेस डे ला रिपब्लिक पर जमा होकर नाराजगी जताई. वो नेशनल रैली की सफलता से काफी नाराज थे.

राष्ट्रपति मैक्रों ने एक बयान जारी कर कहा है कि अब समय आ गया है जब दूसरे दौर में एक व्यापक, पूरी तरह लोकतांत्रिक और रिपब्लिकन गठबंधन चुन कर आए.

कई दूसरे नेताओं ने भी समर्थकों को संबोधित किया. हालांकि प्रधानमंत्री गैब्रियल एट्टल ने भी समर्थकों के सामने छोटा भाषण दिया.

उन्होंने कहा, ''एक भी वोट अब नेशनल रैली को नहीं मिलना चाहिए. जोख़िम साफ है. नेशनल रैली को संसद में पूर्ण बहुमत से रोकना है. हालांकि फ्रांस अनबाउंड (ए़लएफआई) के नेता ज्यां-लुक मलेंशो ने कहा, ''एट्टल अब प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे.''

वाम धड़ों की पार्टियों में वो सबसे रेडिकल पार्टी के नेता हैं. न्यू पॉपुलर फ्रंट में ये पार्टी भी शामिल है. हालांकि वो प्रधानमंत्री से इस बात पर सहमत हैं कि नेशनल रैली को अब एक भी वोट नहीं मिलना चाहिए.

नेशनल रैली की सफलता

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इमेज कैप्शन, पहले दौर में जीत के बाद नेशनल रैली के समर्थक ( फाइल फोटो)

नेशनल रैली के लिए ये लंबा सफर रहा है. ये पार्टी फ़्रांस के समाज में धुर दक्षिणपंथियों के बीच जड़ जमाने के बाद अब यहां के तीन वोटरों में से एक का वोट हासिल करने में सफलता हासिल कर चुकी है.

पार्टी के पास करिश्माई युवा नेता हैं जो फ़्रांस के प्रधानमंत्री बन सकते हैं. पार्टी के पास कई एजेंडे हैं. जिनमें क्लासरूम में मोबाइल पर प्रतिबंध, टैक्स में कटौती और विदेशियों को मिल रहे फायदों को ख़त्म करना शामिल है.

पूर्वी पेरिस में नेशनल रैली की मजबूती वाले इलाके के एक वोटर पैट्रिक ने कहा, ''जब फ्रांंस गलियां असुरक्षित हों तो लोग खुश नहीं होते हैं.''

रिपब्लिकन पार्टी को तोड़ कर अपनी नई पार्टी बनाने वाले कंजर्वेटिव नेता एरिक सिओती ने कहा, '' जीत नजदीक है.''

उन्होंने नेशनल रैली के साथ गठबंधन किया है. सिओती ने नेशनल रैली की जीत को 'अभूतपूर्व और ऐतिहासिक' बताया है.

टिप्पणीकार पियरे हस्की बीबीसी से कहते हैं, ''फ़्रांस एक अनजाने क्षेत्र में घुस गया है और इसके नतीजे खराब ही होंगे. यही वजह है बहुत सारे लोग राष्ट्रपति मैक्रों से ख़फ़ा हैं.''

फ़्रांस में नेशनल रैली के पास पूर्ण बहुमत हासिल करने का मौका है. हालांकि इस वक़्त जो हालात हैं उनमें नेशनल रैली को भले ही पूर्ण बहुमत न मिले लेकिन वो सीटों के मामले में सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है.

न्यू पॉपुलर फ्रंट को दूसरे दलों के वोटरों का समर्थन मिल सकता है. इससे उसका वोट शेयर बढ़ सकता है.

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इमेज कैप्शन, फ़्रांस अनबाउंड (ए़लएफआई) के नेता ज्यां लुक मेलेंशो ने कहा कि अब एक भी वोट नेशनल रैली को नहीं मिलना चाहिए.

इस रविवार को जब दूसरे दौर (रन ऑफ राउंड) के लिए मतदान होगा तो दो या तीन दलों के बीच मुकाबला होगा.

पिछले चुनाव में काफी कम उम्मीदवार थे लेकिन ज्यादा वोटिंग की वजह से तीसरे स्थान पर रहे 300 से ज्यादा उम्मीदवार त्रिकोणीय चुनाव के लिए क्वालीफाई कर गए हैं.

देखना ये है कि तीसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार रेस से बाहर होंगे कि नहीं ताकि नेशनल रैली को जीतने से रोका जा सके.

प्रधानमंत्री एट्टल ने कहा कि कई सौ निर्वाचन क्षेत्रों में उनकी पार्टी, नेशनल रैली को रोकने में सबसे अच्छी स्थिति में होगी.

उन्होंने कहा, ''धुर दक्षिणपंथियों को विनाशकारी योजनाओं के साथ देश का शासन चलाने से रोकना हमारा नैतिक कर्तव्य है.''

लेकिन तीसरे स्थान पर आए मध्यमार्गी दलों के कई उम्मीदवार पीछे हट सकते हैं. खास कर तब जब सोशलिस्ट, ग्रीन या कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार नेशनल रैली के उम्मीदवारों को हराने की स्थिति में दिख रहे हों.

नेशनल रैली को रोकने की रणनीति

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हो सकता है कि वो मैक्रों की पार्टी के लिए जगह बनाने के लिए राजी न हों. लेकिन तीसरे स्थान पर आए मैक्रों की पार्टी की एक उम्मीदवार अल्बेन ब्रेनलेंत ने कहा कि वो इसलिए पीछे हट रही हैं ताकि प्रतिद्वंद्वी एलएफआई के कैंडिडेट फ्रांस्वा रफिन चुनाव जीतने की बेहतर स्थिति में हों.

अल्बेन ब्रेनलेंत ने कहा, ''मैं राजनीतिक प्रतिस्पर्धियों और गणतंत्र के दुश्मनों के बीच एक लाइन खींचना चाहती हूं."

ज्यां लुक मेलेंशो ने कहा कि जहां भी उनकी पार्टी के उम्मीदवार तीसरे स्थान पर होंगे और नेशनल रैली आगे होगी, वे वहां से पीछे हट जाएंगे.

सोशलिस्ट नेता और मैक्रों के पूर्ववर्ती फ्रांस्वा ओलांद ने कहा, ''ये हमारे लिए बेहद जरूरी कर्तव्य है कि धुर दक्षिणपंथियों को फ्रांस की असेंबली में बहुमत न मिल पाए.''

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