सुधारवादी नेता मसूद पेज़ेश्कियान होंगे ईरान के नए राष्ट्रपति, कट्टरपंथी जलीली हारे

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    • Author, कासरा नाजी और टॉम बेनेट
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

ईरान के राष्ट्रपति चुनाव में सुधारवादी नेता मसूद पेज़ेश्कियान को जीत मिली है. उन्होंने कट्टरपंथी नेता सईद जलीली को हरा दिया है.

चुनाव नतीजों के मुताबिक़ अब तक गिने गए तीन करोड़ वोटों में से डॉ. मसूद पेज़ेश्कियान को 53.3 फ़ीसदी वोट मिले हैं जबकि जलीली को 44.3 फ़ीसदी वोट मिले हैं.

28 जून को पहले दौर की वोटिंग में किसी भी उम्मीदवार को बहुमत नहीं मिला था.

उस दौरान ईरान में अब तक की सबसे कम 40 फ़ीसदी वोटिंग हुई थी.

ईरान के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की मई महीने में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई थी. इसके बाद ही ईरान में नए राष्ट्रपति के लिए चुनाव हुए थे.

सोशल मीडिया में पोस्ट किए गए कई वीडियो में लोग डॉ. पेज़ेश्कियान की जीत पर तेहरान और देश के दूसरे शहरोंं में खुशियां मनाते दिख रहे हैं.

इनमें उनके समर्थक, जो ज्यादातर युवा हैं नाचते और हरा झंडा लहराते दिख रहे हैं. वहीं कुछ लोग ख़ुशी ज़ाहिर करने के लिए कार की हॉर्न बजाते निकल रहे हैं.

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कौन हैं मसूद पेज़ेश्कियान

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पेज़ेश्कियान पेशे से हार्ट सर्जन रहे हैं. सुधारवादी माने जाने वाले पेज़ेश्कियान देश में ‘मोरल पुलिसिंग’ के कड़े आलोचक रहे हैं.

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उन्होंने ईरान में 'एकता और सद्भाव' लाने का वादा किया था. साथ ही ये भी वादा किया था कि वो दुनिया से ईरान के अलगाव को ख़त्म करेंगे.

इसके बाद ही ईरान के लोगों का उनकी ओर झुकाव बढ़ना शुरू हुआ.

पेज़ेश्कियान ने पश्चिमी देशों के साथ साल 2015 के असफल परमाणु समझौते के नवीनीकरण पर "सकारात्मक बातचीत'' का भी आह्वान किया है.

इस समझौते के मुताबिक़ ईरान पश्चिमी प्रतिबंधों में ढील के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम पर अंकुश लगाने के लिए सहमत हो गया था.

जबकि पेज़ेश्कियान के प्रतिद्वंद्वी कट्टरपंथी सईद जलीली यथास्थिति के पक्ष में थे. जलीली पूर्व परमाणु वार्ताकार रह चुके हैं और उन्हें ईरान के सबसे ताक़तवर धार्मिक समुदायों में मज़बूत समर्थन हासिल रहा है.

जलीली पश्चिम विरोधी रहे हैं. वो परमाणु समझौते को बहाल करने के भी ख़िलाफ़ रहे हैं. उन्होंने कहा था कि इस समझौते ने ईरान की ‘हदों’ को पार कर लिया था.

ईरान में पहले दौर के चुनाव में कम वोटिंग हुई थी लेकिन दूसरे दौर में ज्यादा लोगों ने वोट दिया. पहले दौर में वर्ष1979 में हुई इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे कम वोटिंग हुई थी.

पहले दौर में जिन लोगों ने वोट नहीं डाला था उन्हें दूसरे दौर में वोट देने के लिए प्रोत्साहित किया गया ताकि जलीली को राष्ट्रपति बनने से रोका जा सके.

देश में इस बात को लेकर आशंका जताई जा रही थी कि जलीली जीते तो पश्चिमी दुनिया से ईरान का टकराव और बढ़ जाएगा.

उनकी नीतियां ईरान के लिए ज्यादा प्रतिबंध और अलगाव के अलावा और कुछ नहीं लाएंगीं.

कम वोटिंग पर चिंता

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राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए दोनों उम्मीदवारों को ईरान की गार्डियन काउंसिल की चयन प्रक्रिया से गुज़रना पड़ा.

इसमें ईरान में ख़ासा दबदबा रखने वाले 12 मौलवी और न्यायविद शामिल हैं.

इस प्रक्रिया के दौरान 74 दूसरे उम्मीदवारों को छांट दिया गया था. इनमें कुछ महिलाएं भी शामिल थीं.

मानवाधिकार समूहों ने इस गार्डियन काउंसिल की ये कह कर आलोचना भी की थी कि उसने उन उम्मीदवारों के नाम हटा दिए जो सत्ता के वफ़ादार नहीं माने जाते थे.

ईरान में पिछले कुछ वर्षों से लगातार अशांति रही है. ईरान में नागरिकों का प्रदर्शन होता रहा है लेकिन साल 2022-23 में देश में ज़बरदस्त नागरिक असंतोष दिखा.

ईरान के युवाओं और मध्यवर्गीय लोगों में सत्ता के प्रति नाराज़गी दिखी है. इनमें से बड़ी तादाद में लोग पिछले चुनावों में वोटिंग से दूरी बनाते भी दिखे थे.

ईरानी सोशल मीडिया में पर्शियन हैशटेग 'देशद्रोही अल्पसंख्यक' वायरल हो गया है.

इस हैशटैग के साथ लोगों से किसी भी उम्मीदवार को वोट ना देने की अपील की गई थी और कहा गया था कि जो भी ऐसा करेगा वो 'देशद्रोही' माना जाएगा.

कम वोटिंग पर ख़ामेनेई ने क्या कहा

आयातुल्लाह अली ख़ामेनेई

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लेकिन देश के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली ख़ामेनेई ने कहा है कि कम वोटिंग का मतलब ये नहीं है कि लोग उनकी सत्ता को खारिज कर रहे हैं.

उन्होंने कहा,''कम वोटिंग की वजहें हैं. राजनीतिक नेता और समाजशास्त्री इसकी पड़ताल करेंगे लेकिन जो लोग ये सोचते हैं कि वोट न देने वाले लोग सत्ता के ख़िलाफ़ हैं, वे साफ़ तौर पर ग़लत हैं.''

हालांकि उन्होंने माना कि कुछ ईरानी लोग मौजूदा सत्ता को पसंद नहीं करते. उनके इस बयान को दुर्लभ माना जा रहा है.

उन्होंने कहा, ''हम ऐसे लोगों की सुनते हैं. हम जानते हैं कि वे क्या कह रहे हैं. ऐसा भी नहीं हैं कि ये लोग हमारी नज़रों से ओझल हैं और दिख नहीं रहे हैं."

पहले दौर की कम वोटिंग के बाद ईरान में स्थानीय मीडिया ने लोगों को ज्यादा से ज्यादा मतदान करने के लिए प्रोत्साहित किया था.

सुधारवादी दैनिक अख़बार साज़ेंदगी ने लिखा,’’ भविष्य आपके वोट से जुड़ा है.’’ जबकि हम्मिहन अख़बार ने लिखा, "अब आपकी बारी है."

वहीं तेहरान नगर निगम के अख़बार हमशाहरी ने एक लेख छाप कर वोट देने के 100 कारण गिनाए.

सरकारी अख़बार जाम-ए-जम ने लिखा "लोगों का इंतज़ार’’...

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