ट्रंप की रैली में चली गोलियों ने अमेरिका में सुरक्षा को लेकर सारे भ्रम तोड़े

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- Author, एंथोनी ज़र्चर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नॉर्थ अमेरिका से
अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में शनिवार की रात एक रैली में गोलियों की आवाज़ गूंजी. गोली भले ही पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को छूकर निकल गई, लेकिन इससे रैली में शामिल एक शख़्स की मौत हो गई और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए.
इस घटना ने साल 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अभियान को भी बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. इससे देश के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को भी नुक़सान पहुँचा है.
इस घटना से अमेरिका की राजनीति में कई दशक से बनी देश की सुरक्षा का भ्रम भी टूट गया है.
इस गोलीबारी में ट्रंप को केवल मामूली चोटें आई हैं, लेकिन उनके लिए यह मामला काफ़ी क़रीबी भी हो सकता था. न्यूयॉर्क टाइम्स अख़बार के डग मिल्स की ली हुई एक तस्वीर में पूर्व राष्ट्रपति के सिर के पास से एक गोली हवा में एक लकीर की तरह चलती हुई दिखती है.
साल 1981 में जॉन हिंकले जूनियर ने रोनाल्ड रीगन की गोली मारकर हत्या करने की कोशिश की थी. उस घटना के बाद अमेरिका में किसी राष्ट्रपति या राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के ख़िलाफ़ हिंसा की ऐसी वारदात नहीं हुई है.

यह पांच दशक पहले के अमेरिकी इतिहास के काले दौर की याद दिलाता है. उस दौर में अमेरिकी राष्ट्रपति और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रहे दो कैनेडी भाइयों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
अमेरिका में नागरिक अधिकार के लिए काम करने वाले नेताओं मेडगर एवर्स, मार्टिन लूथर किंग जूनियर और मैल्कम एक्स ने भी राजनीतिक हिंसा में अपनी जान गंवाई थी.
आज के वक्त के अमेरिकी की ही तरह 1960 के दशक का अमेरिका भी बड़े राजनीतिक ध्रुवीकरण और अव्यवस्था से भरा हुआ था. ये वो दौर था जब एक बन्दूक और उसका इस्तेमाल करने वाला एक इंसान इतिहास के रुख़ को बदल सकता था.
हालाँकि अमेरिका में पहले से ही राष्ट्रीय एकता को नुक़सान पहुँचाने वाली बयानबाज़ी चल रही है और शनिवार की हुई इस घटना का अमेरिका और उसके राजनीतिक विमर्श पर क्या असर होगा, इसका अनुमान लगाना आसान नहीं है.
ताज़ा घटना के कुछ ही घंटों के भीतर डेलावेयर में ट्रंप के प्रतिद्वंद्वी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने प्रेस को अपना बयान दिया.
बाइडन ने कहा, "अमेरिका में इस तरह की हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है. जिसने भी ऐसा किया है वह बीमार है. हम ऐसे नहीं हैं. हम यह बर्दाश्त नहीं कर सकते."

रिपब्लिकन नेताओं ने डेमोक्रेट नेताओं पर लगाया आरोप
राष्ट्रपति बाइडन ने बाद में पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप से फ़ोन पर बात भी की. उन्होंने समंदर के किनारे सप्ताहांत बिताने की अपनी योजना बीच में ही छोड़कर व्हाइट हाउस लौटने के फ़ैसला किया.
लेकिन यह हिंसा हाल के दशकों में अमेरिकी राजनीति की ख़ासियत बन चुकी नूरा कुश्ती और राजनीतिक दलों के बीच बनी खाई में पहुँच गई है.
रिपब्लिकन पार्टी के कुछ नेताओं ने इस हमले का दोष डेमोक्रेटिक पार्टी पर मढ़ दिया है. डेमोक्रेटिक पार्टी के जो बाइडन ने डोनाल्ड ट्रंप की वजह से अमेरिकी लोकतंत्र के सामने पैदा ख़तरे की चेतावनी दी थी.
ओहायो के सीनेटर जेडी वेंस जो कथित तौर पर ट्रंप के उप-राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवार की सूची में हैं, उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि बाइडन ट्रंप को रोकना चाहते हैं.
उन्होंने लिखा, "बाइडन के चुनाव अभियान का मुख्य आधार यह है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक सत्तावादी फासीवादी हैं और उन्हें हर कीमत पर रोका जाना चाहिए. ट्रंप को लेकर दिए गए इसी बयान की वजह से शनिवार को उनकी हत्या की कोशिश की गई है."
वहीं डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव अभियान की प्रबंधक क्रिस लैसीविटा ने कहा है, "वामपंथी कार्यकर्ताओं, डेमोक्रेटिक पार्टी के दान दाताओं और यहाँ तक कि जो बाइडन को नवंबर में होने वाले चुनावों में नफ़रत भरी बयानबाज़ी के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. यही शनिवार के हमले की वजह बनी है. "

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भले ही डेमोक्रिटिक पार्टी को इस बात पर आपत्ति हो सकती है लेकिन जब साल 2011 में डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता और कांग्रेस सदस्य गैबी गिफ़र्ड्स पर एरिज़ोना में गोलीबारी हुई थी, तो कई वामपंथियों ने दक्षिणपंथियों को ज़िम्मेदार ठहराते हुए इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल किया था.
ज़ाहिर तौर पर सोमवार से मिलवॉकी में शुरू हो रहे रिपब्लिकन पार्टी के सम्मेलन पर पेंसिल्वेनिया में हुई हिंसा का बड़ा असर देखने को मिलेगा.
अब ऐसी जगहों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल सख़्त कर दिए जाएंगे और सम्मेलनों की जगह पर विरोध प्रदर्शन या उनका जवाबी विरोध, भी नई तैयारियों में हो सकता है.
इस घटना के बाद गुरुवार की रात जब पार्टी का उम्मीदवार मंच पर आएगा तो राष्ट्रीय स्तर पर उस पर और भी ज़्यादा नज़रें होगी.
रिपब्लिकन पार्टी के लिए मिलवॉकी के लोगों को आकर्षित करने के लिए ख़ून से सने और मुट्ठी उठाए पूर्व राष्ट्रपति की तस्वीरें एक ज़रिया बन सकती हैं.
रिपब्लिकन पार्टी पहले से ही एक मज़बूत शख़्सियत को बड़ा मुद्दा बनाने की योजना बना रही थी. अब शनिवार की घटना उसे नई ऊर्जा देगी.

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इस बीच डोनाल्ड ट्रंप के बेटे एरिक ट्रंप ने गोलीबारी के बाद अपने पिता की एक तस्वीर के साथ सोशल मीडिया पर लिखा है, "यह वह योद्धा है जिसकी अमेरिका को ज़रूरत है."
शनिवार की घटना के बाद ट्रंप की रैली में सुरक्षा व्यवस्था को संभालने के लिए अमेरिकी सीक्रेट सर्विस को भी कड़ी जाँच का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि एक शख़्स घातक बंदूक के साथ राष्ट्रपति पद के एक प्रमुख उम्मीदवार के फ़ायरिंग रैंज में पहुँच गया था.
अमेरिकी सदन के अध्यक्ष माइक जॉनसन ने वादा किया है कि सदन इस घटना की पूरी जाँच करेगा और जाँच को पूरा करने में समय लगेगा.
फ़िलहाल एक बात स्पष्ट है कि चुनावी माहौल में इस साल अमेरिका की राजनीति ने एक नया और भयानक मोड़ ले लिया है.
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