अमेरिका और क्यूबा के बीच दुश्मनी क्यों है, इसका इतिहास क्या है?

डोनाल्ड ट्रंप बात करते हुए

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इमेज कैप्शन, ट्रंप ने कहा है कि वेनेज़ुएला में अमेरिका के हमले में अधिकतर क्यूबा के लोग मारे गए हैं
    • Author, रौनक भैड़ा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नज़रें वेनेज़ुएला के बाद अब क्यूबा पर हैं. ट्रंप ने क्यूबा को डील करने या फिर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है.

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "क्यूबा कई वर्षों तक वेनेज़ुएला से मिलने वाले भारी मात्रा में तेल और धन पर निर्भर रहा. बदले में, क्यूबा ने वेनेज़ुएला के पिछले दो तानाशाहों को 'सुरक्षा सेवाएं' प्रदान कीं, लेकिन अब और नहीं."

"पिछले सप्ताह वेनेज़ुएला में अमेरिकी हमले के दौरान वहाँ मौजूद क्यूबा के अधिकतर लोग मारे गए हैं. वेनेज़ुएला को अब उन गुंडों और जबरन वसूली करने वालों से सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है, जिन्होंने इतने वर्षों तक बंधक बनाकर रखा था."

ट्रंप ने आगे लिखा, "वेनेज़ुएला के पास अब अमेरिका है, जो विश्व की सबसे शक्तिशाली सेना है, जो उनकी रक्षा करेगी. क्यूबा को अब और तेल या पैसा नहीं भेजा जाएगा- शून्य. मेरा सुझाव है कि बहुत देर होने से पहले वे (क्यूबा) एक समझौता कर लें."

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अमेरिका और क्यूबा की दुश्मनी कब शुरू हुई?

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ़ इंटरनेशनल स्टडीज़ के प्रोफ़ेसर राजन कुमार कहते हैं, "अमेरिका की नज़र हमेशा से पश्चिमी गोलार्ध वाले देशों पर रही है. अमेरिका चाहता है कि इन देशों में किसी और का दख़ल न बढ़े. लेकिन क्यूबा के संबंध रूस और चीन से अच्छे हैं, यह बात अमेरिका को रास नहीं आ रही. ट्रंप को रूस बड़ा ख़तरा नहीं लगता, वर्तमान में वह चीन से ज़्यादा ख़तरा महसूस करते हैं. वह चीन के प्रभाव को पश्चिमी गोलार्ध से ख़त्म करना चाहते हैं."

डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के इकलौते राष्ट्रपति नहीं हैं जो क्यूबा पर सख़्त हो रहे हैं. क्यूबा और अमेरिका की बीच की दुश्मनी कई दशकों पुरानी है. 1898 में अमेरिका ने स्पेन को हराया, जिसके बाद स्पेन ने क्यूबा पर अपने सभी दावों को छोड़ दिया और इसे अमेरिका को सौंप दिया.

साल 1902 में क्यूबा स्वतंत्र हुआ और टॉमस इस्ट्राडा पाल्मा इसके पहले राष्ट्रपति बने. लेकिन प्लैट संशोधन के कारण द्वीप अमेरिकी संरक्षण में रहा और इसके तहत अमेरिका को क्यूबाई मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार मिला. कुछ वर्षों बाद इस्ट्राडा ने इस्तीफ़ा दे दिया और होजे मिगुएल गोमेज़ के नेतृत्व में हुए विद्रोह के बाद अमेरिका ने क्यूबा पर कब्ज़ा कर लिया.

अमेरिका की निगरानी में साल 1909 में चुनाव हुए, होज़े मिगुएल गोमेज़ राष्ट्रपति बने, लेकिन जल्द ही भ्रष्टाचार के आरोपों से घिर गए. 1912 में नस्लीय भेदभाव के खिलाफ़ ब्लैक लोगों के विरोध प्रदर्शन को दबाने में मदद के लिए अमेरिकी सेना फिर से क्यूबा लौटी.

साल 1933 में क्यूबा की सेना के अफ़सर फुलगेन्सियो बतिस्ता के नेतृत्व में तख़्तापलट हुआ और जेरार्डो मचाडो को सत्ता से हटा दिया गया. 1953 में फ़िदेल कास्त्रो ने बतिस्ता शासन के खिलाफ़ विद्रोह का नेतृत्व किया, जो असफल हुआ.

सैन्य वर्दी में फ़िदेल कास्त्रो
इमेज कैप्शन, साल 1959 में फ़िदेल कास्त्रो ने अमेरिका समर्थित सरकार का तख़्तापलट कर दिया था
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काउंसिल ऑफ़ फ़ॉरेन रिलेशंस (सीएफ़आर) की रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका और क्यूबा में दुश्मनी की गहरी नींव साल 1959 में पड़ी. तब फ़िदेल कास्त्रो ने अमेरिका के समर्थन वाली सरकार को क्यूबा से हटाया था.

शुरू में अमेरिका ने नई सरकार को मान लिया, लेकिन जब क्यूबा ने अमेरिका के धुर विरोधी सोवियत संघ से नज़दीकियां बढ़ाईं और व्यापार शुरू किया, तो अमेरिका नाराज़ हो गया. क्यूबा ने अमेरिकी कंपनियों की संपत्ति अपने क़ब्ज़े में ली और अमेरिकी सामान पर ज़्यादा टैक्स लगाया.

प्रोफ़ेसर राजन कुमार कहते हैं, "कास्त्रो के आने के बाद क्यूबा में समाजवाद की लहर थी, जबकि अमेरिका पूंजीवाद की नीति पर चल रहा था. साथ ही संभावना जताई जा रही थी कि क्यूबा चीन से अच्छे संबंध बना सकता है. लिहाज़ा, अमेरिका ने क्यूबा के ख़िलाफ़ सख़्त रवैया अपना लिया था."

अमेरिका ने आर्थिक तौर पर क्यूबा को दंड देना शुरू कर दिया. क्यूबा से चीनी की ख़रीदारी कम करने के बाद अमेरिका ने लगभग सभी सामान क्यूबा को भेजना बंद कर दिया. राष्ट्रपति जॉन एफ़ कैनेडी ने इसे 'पूर्ण आर्थिक प्रतिबंध' बना दिया और यात्रा पर भी सख़्त पाबंदी लगा दी.

जब क्यूबा ने विफल की तख़्तापलट की कोशिश

साल 1961 में अमेरिका ने क्यूबा में फ़िदेल कास्त्रो की सरकार को हटाने के लिए एक सैन्य अभियान चलाया था. लेकिन यह ऑपरेशन असफल हो गया था. इस घटना को 'बे ऑफ़ पिग्स इनवेज़न' के नाम से जाना जाता है, जिसमें अमेरिका ने क्यूबा विद्रोहियों और निर्वासित हो चुके लोगों को सैन्य ट्रेनिंग दी और फंड भी मुहैया करवाए.

क्यूबा की सरकार का तख़्तापलट करने के लिए हमला हुआ, लेकिन स्थानीय लोगों का समर्थन न मिलने से अमेरिका और क्यूबा के विद्रोहियों की कोशिश नाकाम रही. क्यूबा ने महज़ तीन दिन के भीतर विद्रोह को असफल कर दिया, क्योंकि अमेरिका से हवाई सहायता नहीं पहुंच पाई. तब अमेरिका की कमान राष्ट्रपति जॉन एफ़ कैनेडी के हाथ में थी. अमेरिका की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धक्का लगा था.

इसके बाद क्यूबा ने सोवियत संघ को अपने यहां गुप्त रूप से परमाणु मिसाइल लगाने की इजाज़त दी. अक्तूबर 1962 में अमेरिकी विमानों ने ये मिसाइलें देख लीं. इसके बाद 13 दिनों तक अमेरिका और सोवियत संघ के बीच बड़ा तनाव रहा.

एबीसी न्यूज़ के मुताबिक परमाणु युद्ध होने जैसे हालात पैदा हो गए थे. आख़िरकार सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव मिसाइलें हटाने पर राज़ी हो गए. बदले में कैनेडी ने वादा किया कि वह क्यूबा पर हमला नहीं करेंगे और तुर्की से अमेरिकी मिसाइलें भी हटा लेंगे.

हालांकि, दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ. अगले कई दशकों तक अमेरिका ने क्यूबा को आर्थिक और राजनयिक रूप से अलग रखा. 1982 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने क्यूबा को 'आतंकवाद समर्थक' देश क़रार दिया. बाद में जॉर्ज बुश और बिल क्लिंटन ने हेल्म्स-बर्टन एक्ट बनाए.

इसके मुताबिक़, जब तक क्यूबा में लोकतंत्र नहीं आएगा और कास्त्रो परिवार सत्ता से बाहर नहीं होगा, तब तक प्रतिबंध नहीं हटेंगे.

राउल कास्त्रो और बराक ओबामा

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इमेज कैप्शन, क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा

ओबामा के कार्यकाल में क्यूबा से सुधरे अमेरिका के रिश्ते

बराक ओबामा के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका ने क्यूबा पर कुछ नरमी दिखाई. सीएफ़आर की रिपोर्ट के अनुसार, 2008 में ओबामा ने चुनाव के दौरान कहा, "क्यूबा को अलग रखने से कुछ फ़ायदा नहीं हुआ."

ओबामा के सत्ता में आने के बाद क्यूबा जाने और वहां पैसे भेजने के नियमों में ढील दी गई.

2014 की एक घटना ने पूरी दुनिया को चौंका दिया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और क्यूबा के मुखिया राउल कास्त्रो ने अचानक ऐलान किया कि दोनों देश फिर से राजनयिक संबंध बनाएंगे.

यह 18 महीने की गुप्त बातचीत का नतीजा था, जिसमें पोप फ्रांसिस ने भी मदद की. इसके बाद दूतावास फिर से खोले गए. इसके बाद क्यूबा को 'आतंकवाद समर्थक' देशों की सूची से हटाया गया.

2016 में ओबामा खुद क्यूबा गए, यह साल 1928 के बाद पहली बार किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की क्यूबा यात्रा थी.

डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडन

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इमेज कैप्शन, ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में आते ही क्यूबा पर सख़्ती बरती जबकि बाइडन ने थोड़ी ढील दी थी

ट्रंप और बाइ़डन प्रशासन का क्या रुख़ रहा?

इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप शासन में आए और यह उनका पहला कार्यकाल था. इस दौरान उन्होंने ओबामा प्रशासन के ज़्यादातर फ़ैसले पलट दिए. ट्रंप ने क्यूबा की सेना से जुड़ी कंपनियों से व्यापार बंद किया, अकेले यात्रा करने पर रोक लगाई, क्रूज़-जहाज़ और ज़्यादातर उड़ानें रोक दीं.

2019 में उन्होंने क्यूबा को फिर से आतंकवाद समर्थक देश घोषित कर दिया. इसी दौरान क्यूबा में अमेरिकी और कनाडाई दूतावास के कर्मचारियों को अजीब तरह की चोटें आईं, उन्हें जैसे सुनाई देना बंद होने लगा और दिमाग़ी परेशानी शुरू हो गई. इसे बाद में "हवाना सिंड्रोम" नाम दिया गया.

इसके बाद अमेरिका ने क्यूबा की राजधानी हवाना से अपने ज़्यादातर दूतावास कर्मचारियों को वापस बुला लिया. आशंका जताई गई कि इन हमलों में क्यूबा सरकार का हाथ है, लेकिन क्यूबा ने इससे इनकार किया. अमेरिका से राजनयिक रिश्ते न तोड़ने के लिए भी कहा.

फिर जो बाइडन सत्ता में आए और उन्होंने कुछ नियम ढीले किए, जैसे- क्यूबा में परिवारों को ज़्यादा पैसे भेजने की इजाज़त मिली, क्यूबा के लिए ज़्यादा उड़ानें शुरू हुईं. इसके बाद 2021 में क्यूबा में भोजन, दवा, बिजली की किल्लत से परेशान लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किए. सरकार ने प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किया और इंटरनेट बंद कर दिया.

बाइडन प्रशासन ने क्यूबा पर नए प्रतिबंध लागू कर दिए. क्यूबा के हालात दिन-ब-दिन बदतर होने लगे थे. लोग बड़ी संख्या में अमेरिका की ओर भागने लगे. 2021 से अप्रैल 2024 तक लगभग 5 लाख क्यूबाई अमेरिकी बॉर्डर पर आए हैं. बाइडन सरकार ने मानवीय आधार पर कुछ को आने की अनुमति भी दी थी.

ट्रंप और मार्को रुबियो

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इमेज कैप्शन, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के माता-पिता क्यूबा से ही अमेरिका आए थे

वेनेज़ुएला और क्यूबा पर ट्रंप का एक-सा रुख़?

ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान 2018 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने क्यूबा, निकारागुआ और वेनेज़ुएला को "तानाशाही की तिकड़ी" कहा. साथ ही यहां की सरकारों को क्षेत्र में अस्थिरता और इंसानी दुख का ज़िम्मेदार ठहराया.

ट्रंप सरकार ने वेनेज़ुएला से क्यूबा को तेल जाने से रोकने के लिए शिपिंग कंपनियों और क्यूबा की सरकारी तेल कंपनी पर प्रतिबंध लगाए. क्यूबा के अधिकारियों को वेनेज़ुएला में मानवाधिकार उल्लंघन में शामिल होने के आरोप में अमेरिका आने से रोक दिया.

अब ट्रंप के इशारे पर वेनेज़ुएला में कार्रवाई हो चुकी है और क्यूबा पर भी ख़तरा मंडरा रहा है. ट्रंप ने ख़ुद को वेनेज़ुएला का "कार्यवाहक राष्ट्रपति" घोषित कर दिया है.

अब सवाल यह उठता है कि क्या वह क्यूबा पर भी इस तरह की कार्रवाई करेंगे? आशंका इसलिए गहरी है क्योंकि रविवार को ट्रंप ने भी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट को रिपोस्ट किया.

इसमें लिखा था, "मार्को रुबियो क्यूबा के राष्ट्रपति होंगे."

ट्रंप ने इस पोस्ट को साझा करते हुए लिखा, "यह सुनने में अच्छा लगा."

हालांकि, प्रोफ़ेसर राजन कुमार कहते हैं, "मार्को रुबियो को क्यूबा का राष्ट्रपति बनाए जाने की संभावना सोशल मीडिया पर चल रही महज़ एक तरह की अफ़वाह है. लेकिन वेनेज़ुएला की घटना के बाद ट्रंप के किसी भी बयान को हल्के में लेना भूल होगी."

बता दें कि अमेरिकी विदेश विभाग की वेबसाइट के अनुसार, रुबियो का जन्म तो साल 1971 में अमेरिका के फ्लोरिडा में हुआ. लेकिन उनके माता-पिता क्यूबा के अप्रवासी हैं जिन्होंने "अमेरिकी ड्रीम" के लिए अपना देश छोड़ दिया था.

इसके अलावा, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पिछले सप्ताह संकेत दिया था कि क्यूबा के नेताओं को चिंतित होना चाहिए.

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